India is emerging as a front runner in the global fight against climate change, the World Bank has said, noting that the solar power is gradually displacing coal as an energy source in the Asian country.
“With a sweeping commitment to solar power, innovative solutions and energy efficiency initiatives to supply its people with 24×7 electricity by 2030, India is emerging as a front runner in the global fight against climate change,” the World Bank said in a news report published yesterday.
According to the bank, with its conscious choice to use significantly more clean energy to fuel its growth, India is contributing to global efforts to save the planet from the effects of climate change.
Just a few weeks ago, the country also walked away from plans to install nearly 14 GW of coal-fired power plants, largely because it is as affordable now to generate electricity with solar power as it is to use fossil fuels, the report said, praising the Indian move in this regard.
“In India and beyond, solar power is starting to displace coal as an energy source,” the bank said, adding that the cost of electricity from solar photovoltaic (PV) is currently a quarter of what it was in 2009 and is set to fall another 66 per cent by 2040.
With nearly 300 days of sunshine every year, India has among the best conditions in the world to capture and use solar energy, it noted.
“Clearly, the market agrees, as is evident from the significant drop in the cost of solar power. In its latest solar auction, the country achieved a record low tariff of INR 2.44/unit (4 cents/unit) for a project in the desert state of Rajasthan,” the report said.
Noting that the Indian government is setting ambitious targets that include 160 gigawatts (GW) of wind and solar by 2022, the bank said that not only will this help hundreds of million people light their homes it will also enable children to study at night, provide families with refrigerators to preserve their food or TVs to entertain themselves.
“It is also an incentive for international firms to invest in India’s solar market,” the bank added.
Source: http://timesofindia.indiatimes.com/home/environment/india-emerging-as-front-runner-in-fight-against-climate-change-world-bank/articleshow/59500216.cms
ये चुनाव का साथ नहीं है, कोई गलत मत समझे। पर हम दोनों का साथ ऊर्जा विभाग में लगातार निरंतर चलता रहता है। आधा ऊर्जा का खाता धर्मेंद्र जी देखते हैं, आधा मेरे पास है। लेकिन जैसा आप सब जानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार में विभाग और डिपार्टमेंट के बीच में दीवारें नहीं हैं। हम सब मिलकर एक साथ ऊर्जा विभाग को संभालते हैं। ऐसे मेरे मित्र धर्मेंद्र प्रधान जी आपका महाराष्ट्र की धरती पर स्वागत है। और आपने हमारे शहर पुणे में और पिंपरी चिंचवाड़ में इतना बढ़िया आयोजन किया है बायो एनर्जी उर्जा उत्सव का, उसके लिए मैं आपका तहे दिल से धन्यवाद भी करता हूं और शुभकामनाएं भी देता हूं।
और मुझे पूरा विश्वास है कि ये जो आज का कार्यक्रम आयोजित किया गया है, ये भारत के नवीकरणीय ऊर्जा के इतिहास में एक नया अध्ययन, नया चैप्टर खोलने जा रहा है, जिसमें जनभागीदारी से आगे चलकर भारत की ऊर्जी सुरक्षा ही नहीं होगी, पर भारत का प्रदूषण भी कम होगा और एक विश्व में भारत का नेतृत्व अक्षय ऊर्जा के माध्यम से हम और ज्यादा बड़े रूप में पूरे विश्व में लेकर जा पाएंगे, ऐसा इस उत्सव को आयोजन करने के लिए आपका मैं बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं धर्मेंद्र जी। हम सबके वरिष्ठ नेता, अभी-अभी धर्मेंद्र जी और मैं बात कर रहे थे, हम दोनों ने चंद्रकांत दादा पाटिल के नीचे काम किया है। हम दोनों ने इनके नेतृत्व का, इनके मार्गदर्शन का लाभ लिया है।
आज वो महाराष्ट्र में बहुत वरिष्ठ नेता हैं। रेवेन्यू मिनिस्टर हैं। और महाराष्ट्र सरकार को एक नई दिशा, नई ऊर्जा देने का काम भी उन्होंने किया है। अभी-अभी चर्चा हो रही थी, किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए, किसानों को कई वर्षों से जिस प्रकार से सूखे के कारण तकलीफ हुई है उससे निजात पाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बहुत अहम फैसला लिया है, कर्जमाफी का। मैं चंद्रकांत दादा पाटिल, गिरीष बापट जी, हमारे यहां के मंत्री और खोट साहब, तीनों को बधाई देता हूं, तीनों का धन्यवाद करता हूं।
हमारे बीच दोनों मेयर हैं, नवनिर्वाचित मेयर, पुणे के मुक्ताताई तिलक जी, पिंपली चिंचवाड़ के नितिन कालजे जी, दोनों को बधाई देता हूं। आप दोनों ने नया पद संभाला है और मुझे पूरा विश्वास है कि पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ तेज गति से आगे प्रगति करेंगे, विकास करेंगे आप दोनों के नेतृत्व में । हमारे यहाँ के दोनों ही सांसद भाई अनिल शिरोले जी पुणे से, भाई अमर साबले जी जो राज्य सभा में हमारे साथ हैं, बहुत संवेदना से पुणे और इस इलाके की विकास की चिंता करते हैं, लगातार मेरे पास भी रहते हैं, लगातार धर्मेंद्र जी को मिलते हैं, कैसे इस इलाके में और तेज गति से विकास हो। हमारे विधायक और विधायिका पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ से जो सभी यहां मौजूद हैं, तीनों कंपनीज के सीएमडीज – आईओसीएल, बीपीसएल और एचपीसीएल, तीनों महारत्न हैं भारत के। तीनों ने इस देश को पेट्रोलियम विभाग से जिस प्रकार से संभाला है, जिस प्रकार से भारत भर में गली-गली, कोने-कोने तक यह पहुंचाते हैं पेट्रोल, डीजल, नेचुरल गैस को, मैं समझता हूं ये तीनों कंपनी ने भारत को गौरवान्वित किया है।
रामकृष्ण जी हम दोनों के सलाहकार हैं। मैं समझता हूं हम दोनों लाभ लेते हैं रामकृष्ण जी के बहुत ही साइंटिफिक अप्रोच का नई दिशा जो रामकृष्ण जी हम दोनों को देते हैं। और आज के इस कार्यक्रम के आयोजक श्री राजेश पांडेय जी का विशेष धन्यवाद करूंगा इतना विशाल आयोजन करने के लिए। श्री संदीप पॉन्ड्रीक जी, जो इस विभाग को देखते हैं, ज्वाइन्ट सेक्रेट्री हैं पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मिनिस्ट्री में, जिन्होंने लगातार इस विषय में चिंता की है। बाकी सभी सम्माननीय, वरिष्ठ नेतागण, मंच पर, मंच के बाहर, पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ के नागरिकगण और विशेषकर सभी पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ के आए हुए विद्यार्थी। कई एग्रीकल्चर कॉलेज से आए हैं, कई अलग-अलग स्कूलों से आए हैं। और एक प्रकार से हम सबके लिए गौरव की बात है कि पुणे आज देश भर में जाना जाता है एक एजुकेशन सेंटर के रूप में और आगे चलकर एक स्मार्ट सिटी के रूप में। और अगर कोई इस सिटी को स्मार्ट बनाता है तो ये सब हमारे विद्यार्थी इस सिटी को स्मार्ट बनाते हैं।
वास्तव में ये सिर्फ उत्सव ही नहीं लेकिन मंथन करने का भी एक मौका है हम सबके सामने। अभी-अभी पाशा पाटिल जी बता रहे थे कि 1945 में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने जब अपनी डिस्कवरी ऑफ इंडिया लिखी थी, उसमें उन्होंने सबसे पहले पावर एल्कोहल का जिक्र किया था। और जैसे हमारे विद्यार्थी सब हमसे ज्यादा स्मार्ट होते हैं, चतुर होते हैं। इनको कुछ भी विषय बोलो तो तुरंत गूगल करके उसकी जानकारियां निकाल लेते हैं। वैसे हमने भी थोड़ा प्रयोग किया कि ज़रा इसकी जानकारी निकालें कि वास्तव में क्या कहा था पंडित जवाहर लाल नेहरू ने। और बहुत ही इंट्रेस्टिंग डायमेंशन मिला और मैं ये डायमेंशन इसलिए आप सबके समक्ष रखना चाह रहा हूं कि कैसे देश में परिस्थिति 1945 में क्या थी, कैसे एनडीए-1 में जब माननीय प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने ईथेनॉल को प्रोत्साहन देने की कोशिश की, बहुत बड़ी पहल की और उसके बाद 10 वर्ष कैसे फिर इस देश ने, पीछे पड़ गई ईथेनॉल के क्षेत्र में, बायो एनर्जी, बायो फ्यूल्स के क्षेत्र में |
और मैं आपको पढ़कर सुनाना चाहूंगा पंडित जवाहर लाल नेहरू की किताब डिस्कवरी ऑफ इंडिया में उन्होंने क्या लिखा है – ‘The congress and industry: Big industry versus cottage industry’, ये शीर्षक के नीचे पंडित जी लिखते हैं।
‘The Congress, under Gandhiji’s leadership, had long championed the revival of village industries, specially hand-spinning and hand-weaving. At no time, however, had the Congress been opposed to the development of big industries, and whenever it had the chance, in the legislatures or governments, were eager to do so…..’
वगैरह वगैरह करने के बाद वो आते हैं पावर एल्कोहल पर।
‘The Congress provincial governments were anxious to develop a power alcohol industry. This was desirable from many points of view, but there was an additional reason in the United Provinces and Bihar.’
ये दुर्भाग्य की बात है कि गत 70 वर्षों में बिहार के जितने शुगर कारखाने थे लगभग सभी बंद हो गए। यूनाइटेड प्रोविंसेज में, उत्तर प्रदेश वगैरह में, जो कारखाने हैं वो लड़खड़ा रहे थे। महीनों सालों तक शुगरकेन जो किसान गन्ना बनाते हैं उसका पैसा भी नहीं भुगतान करते थे। ये तो माननीय महाराज योगी जी की सरकार ने आने के बाद सुनिश्चित किया कि हर गन्ना किसान की पेमेंट जो पुराना बकाया था वो मात्र 120 दिन के अंदर सबको मिल जाए। और आगे चलकर हर गन्ना किसान को 14 दिन में पूरा अपना बकाया मिले, गन्ना का। ये आज योगी महाराज जी ने किया, लेकिन गत 70 वर्षों में जो बेहाल किया गया गन्ना कारखानों का वो सबके, देश के समक्ष है। लेकिन डिस्कवरी ऑफ इंडिया में क्या कहते हैं।
‘The large numbers of sugar factories there were producing as a by-product a vast quantity of molasses which was being treated as waste material. It was proposed to utilise this for the production of power alcohol.’
ईथेनॉल को उन दिनों में पावर एल्कोहल बोलते थे।
‘The process was simple, there was no difficulty, except one – the interests of the Shell and Burma Oil combine were affected. The government of India championed these interests of Shell and Burma oil.’ और शायद ये एचपीसीएल, आईओसीएल उन्ही का नया वर्जन बनी है आगे चलके।
‘It was only in the third year of the present war, after Burma fell and the supplies of oil and petrol were cut off, that the realization came that power alcohol was necessary and must be produced in India. The American Grady Committee strongly urged this in 1942.’
ये मैं इसलिए आप सबको सुना रहा हूं भाइयों और बहनों, क्योंकि 1945 में तो विचार एक था लेकिन उसके बाद 2002 तक ईथेनॉल के ऊपर किसी ने ध्यान नहीं दिया। ईथेनॉल के बारे में किसी ने चिंता नहीं की। ईथेनॉल को प्रोत्साहन देने की किसी की प्राथमिकता नहीं रही। माननीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने 2002 में नई पॉलिसी गठित की जिसमें कहा 2003 तक कम से कम 5 प्रतिशत पेट्रोल में ईथनॉल को जोड़ा जाए। मिनिमम 5 परसेंट ब्लेंडिंग किया जाए ईथेनॉल का पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स में। दुर्भाग्य से एनडीए-1 2004 में चुनाव नहीं जीती।
एक नई सरकार आई और मुझे बड़े दुख से बताना पड़ता है कि 10 वर्ष में ईथेनॉल को प्रोत्साहन तो देना छोड़ो, लगभग उस इंडस्ट्री को मार दिया गया। पूरी तरीके से ध्यवस्त कर दिया गया। जब प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार 2014 में आई और धर्मेंद्र प्रधान जी ने पेट्रोलियम और नेचुरल गैस का विभाग संभाला तब एक नई तेज गति से ईथेनॉल क्षेत्र को, अगर मैं उसको कहूं, He gave it wings. Ethanol was given wings under the leadership of Prime Minister Modi and Minister Dharmendra Pradhan. और जो मात्र 1 प्रतिशत शायद ब्लेंडिग होता था 2014 में, 2 प्रतिशत ब्लेंडिग होता था वो मात्र दो वर्ष में 5 प्रतिशत तक ले के जाने का साहस धर्मेंद्र जी ने किया और मैं आपको बधाई देता हूं कि जो बात 1945 में लोगों को समझ में आई थी, जो बात 1900 में रुडोल्फ डीजल ने समझी थी, जो अभी-अभी धर्मेंद्र जी ने बताया। वो बात को कार्यान्वित करने का काम आपके नेतृत्व में इस सरकार द्वारा किया गया।
और जैसा आपने कहा, ये सही बात है, इसी से भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित हो पाएगी। ब्राजील जैसे देशों में तो कई गाड़िया शत-प्रतिशत ईथेनॉल पर भी चलती हैं। हेनरी फोर्ड ने भी एक गाड़ी बनाई थी, I think It was called the Ford T जिसमें उन्होंने बायो ईथेनॉल से गाडी चले इस प्रकार की व्यवस्था सुनिश्चित की थी। आज देश के सामने अगर सबसे बड़ी चुनौती है तो वो इस देश को आत्मनिर्भर बनाने की चुनौती है। और मुझे पूरा विश्वास है ये सभी विद्यार्थी जो यहां बैठे हैं, वो सब भारत को एक बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था और एक आत्मनिर्भर देश के रूप में देखना चाहते हैं।
ठीक कह रहा हूं कि नहीं भाइयों और बहनों? और ये पूरी अगली पीढ़ी चिंता करती है प्रदूषण की भी, चिंता करती है कि आगे आने वाले दिनों में क्या विश्व सुरक्षित रहेगा, या क्लाइमेट चेंज का प्रभाव इतना ज्यादा विश्व को खतरा है कि शायद 50-70 वर्ष बाद भरोसा नहीं है कि विश्व का क्या होगा।
पेरिस में जो समझौता हुआ, कॉप-21 में पेरिस क्लाइमेट एग्रीमेंट, उसमें पूरे विश्व में इस चिंता को कैसे एड्रेस किया जाए, कैसे इसका सामना किया जाए, इसपर एक करार किया गया। जिसमें सस्टेनेबल लाइफस्टाइल और क्लीन एनर्जी, इन दोनों के ऊपर बल दिया गया। और क्लीन एनर्जी अगर हम देखें तो क्लीन एनर्जी सिर्फ सौर ऊर्जा या पवन ऊर्जा नहीं है। सिर्फ हाइड्रो पावर, विंड पावर, सोलर पावर से क्लीन एनर्जी नहीं होती है। बायो ईथेनॉल, बायो फ्यूल्स उसमें से बायो गैस वेस्ट टू एनर्जी, जो अलग-अलग प्रकार का वेस्ट देश में पैदा होता है उसको कैसे ऊर्जा का स्त्रोत बनाया जाए। गोबर से कैसे ऊर्जा बने, चाहे गैस बने, चाहे इलेक्ट्रिसिटी पावर बने, जब तक हम इन सबको पूरी तरीके से प्रॉसेस करके Waste to wealth नहीं बनाएंगे तब तक सही मायने में हम विश्व के सामने एक मॉडल स्टेट के रूप में नहीं पैदा हो सकेंगे, मॉडल स्टेट नहीं बन पाएंगे।
और प्रधानमंत्री मोदी जी का सपना है कि भारत अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में, नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में विश्व का नेता बने, विश्व को नेतृत्व दे। और पूरा विश्व भारत के नेतृत्व में वेस्ट टु वेल्थ की ओर जाए, वेस्ट को प्रोसेस करे, अक्षय ऊर्जा आगे चलकर अधिकांश हम सबकी ऊर्जा की रिक्वायरमेंट मीट करे और उस काम के लिए एक और पहल धर्मेंद्र जी के विभाग ने की है कि अधिकांश पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स में कैसे ईथेनॉल को यूज किया जाए। कैसे वेस्ट से बायोगैस बना के गरीबों को सस्ती गैस दी जाए। जैसे इन्होंने 5 करोड़ गरीब महिलाओं के जीवन में उज्ज्वला लाने का निर्णय लिया, मुफ्त में एलपीजी कनेक्शन दे के, वैसे ही सस्ती गैस दे के गरीबों के घर में चूल्हा साफ ईंधन से बने और लकड़ी और कोयले से वो निजात पाएं, उससे वो छुटकारा पाएं।
और आगे आने वाले दिनों में हम दोनों विभाग मिलकर बायो गैस, गौशाला से हमारे देश में एक छोटा आंकड़ा निकाला तो हजारों की संख्या में देश में गौशाला हैं। और इन गौशाला में अगर हम गोबर गैस बनाते हैं तो ये मार्केटिंग कंपनीज़, जैसा अभी-अभी माननीय धर्मेंद्र जी ने कहा, कि वो इस गोबर गैस को लेकर छोटे पांच किलो को सिलेंडर में बॉटल करके गरीबों को सस्ता गैस उपलब्ध कराने का काम कर सकते हैं। तो मिलकर कैसे गरीबों की सेवा करना, ये इस सरकार की प्राथमिकता रही है। इस सरकार ने लगातार गांव, गरीब, किसान और जो वर्षों से शोषित और वंचित रहे हैं उनकी चिंता करने का जो बीड़ा प्रधानमंत्री मोदी जी ने उठाया है, उन दोनों को पूरा करने का वचन आज धर्मेंद्र जी ने दिया, मैं अपने आप को उससे जोड़ता हूं और हम दोनों मिलकर सुनिश्चित करेंगे, कैसे हर घर में बिजली भी मिले, साफ ईंधन भी मिले और कैसे हमारे आने वाले पीढ़ी के लिए हम एक ऐसा विश्व छोड़कर जाएं, जो साफ भी हो, सुंदर भी हो, प्रदूषण मुक्त भी हो।
महात्मा गांधी जी ने कहा था – We are only the trustees of this planet, we have inherited this earth as trustees and it is our duty to leave behind a better planet for the next generation and that is what we are committed to do. मुझे लगता है, बायो एनर्जी सेक्टर में जो काम आप सभी ने किया है और जिस प्रकार से आप अगले दो दिन में इसके ऊपर नए-नए विचार लाएंगे, नए-नए दिशा देंगे इस प्रोजेक्ट को, इससे आगे चल के देश का बहुत बड़ा लाभ होगा। विदेशी मुद्रा जो इम्पोर्ट ऑफ पेट्रोलियम और गैस के प्रोडक्ट्स में लगती है उसमें हम बचत कर पाएंगे। साफ-सुथरे ईंधन से जब पेट्रोल को ईथेनॉल से ब्लेंड करते हैं तो पॉल्यूशन लेवेल भी कम होता है और अलग-अलग प्रकार का वेस्ट जिससे इस देश में स्वच्छता भी बिगड़ती है, उसको जब हम सब मिलकर, नई-नई साइंटिफिक टेक्नोलॉजीज़ लाकर इसको प्रॉसेस करेंगे तो स्वच्छता को भी एक नई दिशा मिलेगी, स्वच्छता को भी एक नई तेज़ गति मिलेगी।
एक और प्रदूषण का साधन है, राइस, पैडी जब बनती है उसमें जो हस्क क्रिएट होता है। और खासतौर पर उत्तर प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब वहां पर मैकेनाइज्ड हार्वेस्टिंग होने के कारण बहुत बड़ी संख्या में राइस हस्क या व्हीट हस्क वेस्ट क्रिएट होता है। उसके लिए भी हम दोनों विभाग मिलकर काम कर रहे हैं, कैसे उसको प्रॉसेस किया जा सके, कैसे उसमें से पावर प्लांट के लिए briquettes बन सके, कैसे उसमें से गैस बन सके। जिस गैस के माध्यम से हम वेस्ट को भी प्रॉसेस करें, प्रदूषण कम करें और उस गैस को गांव में महिलाओं को दिया जाए, जिससे उनको कुकिंग के लिए, अपने दिनचर्या के काम के लिए पॉल्यूशन-फ्री फ्यूल मिल सके।
इस प्रकार से मुझे पूरा विश्वास है ये आपका दो दिन का मंथन, दो दिन की जो चर्चाएं होंगी, इसमें से और नए आइडियाज आएंगे जो रामकृष्ण जी और बाकी सभी यहाँ पर अधिकारीगण इसको किस प्रकार से ऑप्रेशनलाइज और कॉमर्शियलाइज करना, उसपर चिंता करेंगे जिससे जो सपना 1945 से ये देश देख रहा है, जो काम वाजपेयी जी ने शुरू किया था उसको मोदी जी की सरकार, मोदी जी के नेतृत्व में धर्मेंद्र जी तेज गति दे सकें। इस काम में हम सब मिलकर उनका सहयोग करें, उनको और प्रोत्साहित करें। उन्होंने गत तीन वर्षों में जिस प्रकार से इस विभाग को कुशल नेतृत्व दिया है उसकी मैं जितनी तारीफ करूं उतना कम है।
और मुझे पूरा विश्वास है, आगे आने वाले दिनों में भी इस देश को आत्मनिर्भर बनाना, इस देश को प्रदूषण मुक्त बनाना और इस देश को हर एक व्यक्ति को, हर एक गरीब को, हर एक किसान को, देशभर में सभी को एक अच्छा ईंधन मिले जो उनकी रोजमर्रा की ज़रूरतों को पूरा कर सके। इसमें वो शत-प्रतिशत सफल होंगे, इसके लिए मेरी उनको पूरी शुभकामनाएं, शुभेच्छाएं। आप सबको इस दो दिन के उत्सव के लिए मेरी शुभेच्छा, चर्चाएं अच्छी हों, विस्तार से हों, खुले मन से हों, खुले दिल से हों जिससे आगे चलकर इस क्षेत्र में और ज्यादा गति हम सब मिलकर दे सकें।
बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

अनिल शिरोले जी, हमारे यहाँ के लोकप्रिय सांसद, माधुरितई मिसाल, सब हमारे मंत्री कामले साहब, बाकी सभी वरिष्ठ नेता यहाँ उपस्थित हैं, जीतो के सभी वरिष्ठ नेता उपस्थित हैं – विजय भाई भंडारी, अजीतजी सेठिया, कृष्ण कुमार जी, राजेंद्रजी, सूर्यकांत जी, बृजमोहन जी, बालचंद जी, सबके विचार भी हमने सुने, सही बात है सोहनलाल जी और हितेश के कारण ही मैं यहाँ पर आया हूँ आज | लेकिन यह भी आप ध्यान दें कि मैंने स्वयं को self-invite किया है, आपने मुझे कोई न्योता नहीं दिया था आने के लिए |
मुझे लगा कि मैं पूना आ रहा हूँ तो अच्छा रहेगा कि आप सबसे भी मिलना हो जाये, थोड़ी वार्तालाप हो, कुछ मन में संदेह है तो मुझे भी सुनने का मौका मिले | और स्वाभाविक है जब इतना बड़ा परिवर्तन होता है, हम तो अपना अपना व्यापार करते हैं, आप एक दुकान को ही बदल लो, एक दुकान से दूसरी दुकान में बदल के नयी दुकान खोलो, तो सौ प्रकार की परेशानी आती है | साधारण नहीं होता है बदलाव करना | और अपने जीवन के आप कोई भी पहलू में देख लीजिये |
कल मेरा टेलर आया था कपड़े का नाप लेने के लिए, वह भी तीन बार आ चुका है लेकिन वह नाप ठीक से नहीं हो रहा है उसे | जिसने भी यहाँ पर arrangement किये उसने भी अपनी तरफ से बहुत परफेक्ट, अच्छी तरीके से सब व्यवस्था की होगी, लेकिन व्यवस्था करने में बहुत मेहनत लगी होगी | आप सबको invite करने के लिए किसी ने फ़ोन किये होंगे, चिट्ठी लिखी होगी, सबने मेहनत की होगी | हो सकता है दो-चार लोगों को शायद न्योता नहीं भी पहुंचा होगा, बाद में नाराज़ भी हो सकते हैं हमको नहीं बुलाया, और अपने समाज में तो नाराज़ होने में बहुत देर नहीं लगती है, बहुत फटाफट नाराज़ हो जाते हैं |
तो यह बदलाव और परिवर्तन के साथ जब एडजस्ट करो, जब चेंज होता है उसमें थोड़ा बहुत तो समय लगता ही है | और बदलाव शुरू में थोड़ा बहुत, यह तो इतना बड़ा बदलाव है जो मेरे ख़याल से विश्व में आजतक इतने बड़े मुल्क ने कभी नहीं की, कोई देश ने नहीं, इतने बड़े देश ने की | जितना बड़ा बदलाव, जितना बड़ा परिवर्तन, स्वाभाविक है उतनी थोड़ी बहुत कठिनाइयाँ भी आएँगी, थोड़ा सोचने-समझने में समय भी लगेगा | और यह उस प्रकार से एक ट्रांजीशन पीरियड है, लेकिन इस ट्रांजीशन पीरियड में हम सब जनप्रतिनिधि, चाहे किसी भी पार्टी के हों, हम सब आपके साथ जुड़े हुए हैं, हम सब आपके साथ लगातार संपर्क में रहेंगे, अधिकारी संपर्क में रहेंगे | क्योंकि यह कोई मोदी जी ने नहीं किया, कुछ वक्ताओं ने, पूर्व वक्ताओं ने यह कहने की कोशिश की कि मोदी जी का निर्णय है और आपने तारीफ भी करी उसकी |
मैं समझता हूँ अगर आप 30 तारीख की रात के भाषण देखें तो यह सांझी विरासत है, यह कोई एक पार्टी या मोदी जी ने कर लिया, ऐसा बदलाव या परिवर्तन नहीं है, चाहते हुए भी मोदी जी यह नहीं कर सकते थे जब तक सबकी आम सहमति नहीं बनती | आखिर आप सोचिये इस देश को आज़ाद हुए 70 वर्ष हो गए हैं, आप याद करिए, constitutional amendment भी बहुत हुए हैं इस देश में, कई चीज़ों में हमने परिवर्तन किया है अलग-अलग क्षेत्रों में | शायद भारत के इतिहास में यह इसलिए सबसे बड़ा परिवर्तन है क्योंकि इस परिवर्तन में सभी पार्टियों ने सर्वसम्मति से इसको पारित किया लोक सभा में, राज्य सभा में, देश भर की हर असेंबली में और अब आखिरी जो जम्मू कश्मीर थी वह भी कल पारित होने से यह वास्तव में One nation, One tax, One market और एक federal structure, संघीय ढांचा कैसे collaborative होना चाहिए, कैसे cooperation से centre और state चलने चाहिए, कैसे जब सब मिलजुल कर सभी सरकारें देशहित और जनहित में काम करेंगी उसकी यह एक जीता-जागता मिसाल है |
और मैं समझता हूँ इसके लिए वास्तव में सभी पार्टियों ने मिलकर इसको पारित करने से एक बहुत बड़ा संकेत देश को और पूरे विश्व को दिया है कि जब देशहित और जनहित की बात होती है तो हम अपने पोलिटिकल, राजनीतिक मतभेद दबा के भी, ऊपर उठके, मतभेद से ऊपर उठ के देशहित की बात कर सकते हैं | तो एक प्रकार से इसकी अगर तारीफ की जाये, इस बदलाव के लिए अगर धन्यवाद किया जाये तो सभी दलों का धन्यवाद होगा, सभी पार्टियों का धन्यवाद होगा | आखिर इस बदलाव को शुरू हुए करीब-करीब 14 वर्ष हो गए हैं, 14 वर्ष पहले का वनवास इस वर्ष पूरा हुआ है, 2003 में जब प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार थी तब जसवंत सिंह जी ने इसकी कल्पना सबसे पहले देश के समक्ष रखी थी |
एक विजय केलकर जी जो आपके पुणेकर ही हैं, उनकी अध्यक्षता में जो committee बनी उसने यह Goods and Services Tax की पहले कल्पना बनाई, 2003-2004 में यह रिपोर्ट दी गयी| 2006-07 के बजट में उस समय के वित्त मंत्री चिदंबरम साहब ने इसको बजट में announce किया कि कांग्रेस की सरकार और UPA की सरकार Goods and Services Tax लाना चाहती है | जब महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी जी वित्त मंत्री थे तब 2011 के बजट में उन्होंने GST का कानून देश के समक्ष रखा था | फिर स्टैंडिंग कमिटी के सामने गया जिसमें सभी पार्टी के सदस्य थे, सबने मिलकर कुछ recommendations दीं, जब तक वह recommendations कांग्रेस की सरकार लागू कर सकती थी, समझ सकती थी वह चुनाव हार गए | फिर बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार आई और तीन साल से लगातार दिन और रात के प्रयत्नों और विचार-विमर्श करने के बाद और सभी पार्टियों में कांग्रेस भी हैं, सभी पार्टियों में कम्युनिस्ट भी हैं, सभी पार्टियों में तृणमूल कांग्रेस भी है, तृणमूल कांग्रेस के सदस्य तो पार्लियामेंट में अनिल जी बताएँगे सबसे अग्रसर रहते थे कि जीएसटी का पालन करो, जीएसटी को पारित करो | बाकी सब छोड़ो आम आदमी पार्टी भी इसके पक्ष में है |
अब जब इतनी सर्वसम्मति से कोई चीज़ हुई है जिसमें हर पार्टी ने सहयोग दिया है, कोई पार्टी जिसकी राज्य सरकार न भी हो एक मिनट के लिए ऐसी भी कई पार्टीज़ हैं जिनका राज्य सरकार में योगदान नहीं है, केंद्र में भी नहीं है, उन्होंने भी अपनी अपनी असेंबली में या अगर लोक सभा, राज्य सभा में उनके कोई सदस्य हों उनके माध्यम से उन्होंने भी इसका समर्थन किया | यह अलग बात है कि कभी कभी जब दिखता है कि कोई बदलाव अच्छा हो रहा है, जनता खुश है, देश में इसकी ख़ुशी मनाई जा रही है तो कई बार राजनीतिक दल दुविधा में हो जाते हैं और फिर छोटा-मोटा राजनीतिक मतभेद फिर शुरू हो जाता है | तो अब कुछ नेताओं ने कहा कि इसका जश्न रात को बारह बजे क्यों मनाया जा रहा है, अगर दोपहर को बारह बजे मनाओगे तो हम शामिल होंगे, रात को मनाया इसलिए हम शामिल नहीं हो रहे हैं, यह छोटे-मोटे मतभेद आते रहते हैं राजनीति में |
हम समझ नहीं पा रहे थे कि वह जीएसटी के समर्थन में अभी भी हैं या नहीं हैं, फिर मालूम पड़ा नहीं, हम समर्थन में जीएसटी के हैं पर रात के बारह बजे के कार्यक्रम के समर्थन में नहीं है | चलिए ठीक है | आज के पेपर में मैं पढ़ रहा था, एक पूर्व वित्त मंत्री जिन्होंने जैसा मैंने पहले अभी बताया इसकी कल्पना हम लागू करेंगे ऐसा घोषित किया था 2006-07 में | उन्होंने कहा है यह जीएसटी अच्छा नहीं है, यह 18% से ज्यादा कोई भी चीज़ का रेट नहीं होना चाहिए था | मैं तो हैरान हो गया यह देखके, मैंने कहा जो लोग पूरे समय गरीब की बात एक ज़माने में करते थे उन्होंने गरीबों का दामन छोड़ दिया, किसानों का दामन छोड़ दिया, शोषित, वंचित, पीड़ितों का दामन छोड़ दिया, अब उनको चिंता हो रही है कि बीएमडब्ल्यू कार पर 28% टैक्स है, उसके ऊपर सेस भी लगेगा, अब उनकी बैटिंग करनी शुरू कर दी है | अभी लगा कि गरीब तो हमारे हाथ से गए, हमें आजकल वोट देते नहीं है, बहुत कम एमपी रह गए हैं कि हम लीडर ऑफ़ ओपोसिशन भी नहीं बन सकते, पता नहीं अगली बार सिंगल लार्जेस्ट ओपोसिशन पार्टी भी रह पाएंगे कि नहीं अगर इस प्रकार से कन्फ्यूज्ड स्टेट में रहेंगे, कन्फ्यूज्ड पार्टी रहने से कभी जनता का समर्थन नहीं मिलता है, अपना स्पष्ट विचारधारा होनी चाहिए |
लेकिन आप सोचिये, क्या इस देश में, विदेशों में ज़रूर कई देशों में ऐसा है कि एक रेट है टैक्स का, यहाँ पर तो आप 0 और 5% के विषय में मेरे साथ इतने सवाल-जवाब कर रहे हो, वह पार्टी कहती है कि रेट ही एक या दो होने चाहिए पूरे देश में | यानी सब चीज़ों के ऊपर 15% या 18% टैक्स लगना चाहिए, क्या ऐसे देश में स्वीकृति हो सकती है क्या जिस देश में आज भी 30-35% लोग ऐसे हैं जिनको दो वक़्त की रोटी नहीं मिलती है, क्या संभव है ऐसे देश में कि रबर की चप्पल के ऊपर भी जीएसटी और बीएमडब्ल्यू कार या मेर्सडीस कार पर भी जीएसटी एक हो सकता है इस देश में? क्या यह न्याय होगा गरीबों के साथ? क्या किसानों के साथ यह न्याय होगा?
तो मैं समझता हूँ कि मौजूदा देश की परिस्थिति को समझते हुए जो आज के दिन जीएसटी का कानून बना है और मैं पुनः आपको बताता हूँ, यह सर्वसम्मति से बना है, 17 मीटिंग हुई जीएसटी कौंसिल की | अच्छा आप सबने मुझे रिप्रजेंटेशन दिया पूरा फोल्डर मेरे पास है, मैं ज़रूर दिल्ली लेकर जाऊंगा, लेकिन इसमें मोदी जी या जेटली जी या कोई भी कुछ नहीं कर सकता है | हम एक सदस्य हैं जीएसटी कौंसिल में, कुल 30 सदस्य हैं, हर राज्य के वित्त मंत्री उसमें प्रतिनिधि के रूप में और केंद्र के वित्त मंत्री एक हैं |
वास्तव में आप ज़रा विचार करिए, ऐसा कौन सा पहले राजनीतिक नेता आया है या राजनीतिक पार्टी आई है या सरकार आई है इस देश में जो अपना टैक्स करने का पॉवर भी स्वयं होकर छोड़ने को तैयार है | आप विचार करिए, सर्विस टैक्स का पॉवर हमारे हाथ में था, एक्साइज का पॉवर हमारे हाथ में था और उस मात्रा में वैट के रेट्स भी पावर्स अलग-अलग स्टेट के हाथ में थे | सभी ने देशहित में यह निर्णय किया कि हम सब अपने पावर्स को छोड़ते हैं और एक जीएसटी कौंसिल जिसमें सभी राज्यों के प्रतिनिधि मिलकर देशहित, जनहित में फैसले लेगी, हम सब अपने पावर्स उनके समक्ष रखते हैं | आप सोचिये कितना बड़ा त्याग भी है, बलिदान भी है लेकिन जनता के हित में कितना बड़ा फैसला है |
क्योंकि इससे क्या होगा? पूरे देश में जब एक सामान्य टैक्स एक वस्तु के ऊपर लगेगा तो कम्पटीशन इस बात पर नहीं होगी कि मेरे यहाँ पर कुछ मुझे विशेष अधिकार मिलते हैं तो मेरा माल सस्ता है, दूसरे राज्य में वह विशेष अधिकार नहीं मिलते हैं तो उसका माल महंगा है इसलिए वहां का व्यापार बिज़नेस से बाहर हो गाया | दूर क्यों जाना, कितनी चीज़ें हैं जो महाराष्ट्र में बनती थी जो आज हमारे आजू-बाजू इर्द-गिर्द के स्टेट्स में चली गयीं हैं क्योंकि यहाँ का टैक्स ज्यादा था, बाजू में टैक्स कम था |
आप दवाइयाँ देख लो, जब उत्तराखंड, कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पूर्वांचल, सिक्किम, अरुणाचल वगैरा, असम में कन्सेशन्ज़ दिए गए, तो कितने लोगों ने वहां पर अपना ऑपरेशन शिफ्ट कर दिया? उससे यहाँ पर नुकसान हुआ कि नहीं हुआ? व्यापार को भी नुकसान हुआ, उद्योग को भी नुकसान हुआ | इस सब को बदलाव करने के लिए जब देश में एक रेट, एक वस्तु के ऊपर पूरे देश में होगा उससे व्यापार करना कितना सरल होगा, व्यापार में गलत काम रोकना कितना सरल हो जायेगा इसका अहसास आप अगर विचार करें तो गेम-चेंजिंग डिफरेंस होगा हमारे व्यापार करने के ढंग में | और शुरुआत में थोड़ी चीज़ें समझने में हमें समय लग सकता है, इसके लिए पहला रिटर्न भी दो महीने तक नहीं फाइल करना पड़े, एक सिंपल रिटर्न अगस्त में फाइल करने से काम चल जाये उसकी व्यवस्था की गयी है | लेकिन यह स्पष्ट हो कि यह सब चीज़ों के ऊपर निर्णय करने का अधिकार अब किसी एक व्यक्ति या एक सरकार और चाहे वो प्रधानमंत्री क्यों न हो किसी का नहीं रहा | अब निर्णय तो सामूहिक ही होंगे, और सामूहिक निर्णय भी आज तक का ट्रैक रिकॉर्ड है सर्वसम्मति से हुआ है |
मुझे याद है कुछ विषयों पर अरुण जी और मेरी चर्चा हो रही थी, उनको और मुझे दोनों को जायज़ लगा कि हाँ यह इस प्रकार से होना चाहिए लेकिन जब राज्यों के समक्ष रखा जीएसटी कौंसिल में, राज्य नहीं माने और हम बदलाव नहीं कर पाए, हमें लग रहा था कि जेन्युइन है पर बदलाव नहीं कर पाए | और यह जीएसटी रेट्स कोई arbitrarily नहीं बने हैं, इसके पीछे पूरा साइंटिफिक सिस्टम गया है | एक फिटमेंट कमिटी बैठती थी, वह फिटमेंट कमिटी देश में अलग-अलग राज्यों में क्या टैक्स रेट्स हैं उसका पूरा स्टडी करती थी, स्टडी करके weighted average निकालती थी कि समझो महाराष्ट्र में 100 रुपये का व्यापार है और यहाँ 10% टैक्स है | और दूसरे प्रदेश में 900 रुपये का व्यापार है और वहां 20% टैक्स है तो दोनों का weighted average, 10 और 20 का average 15 नहीं, दोनों का weighted average कि 20% का 90% व्यापार अगर 20% टैक्स पर है तो वह 18 हो गया और 10% व्यापार 10% पर है तो एक, दोनों कुल मिलाकर weighted average 19 हो जाता है | और उसके सबसे नजदीक जो रेट है – 0, 5, 12, 18, 28 – इन सबके बीच जो सबसे नजदीक रेट है उसमें कुछ वस्तुओं में 1-2% बढ़ा, अधिकांश वस्तुओं में कुछ न कुछ घटा ही है, और जो कैस्केडिंग इफ़ेक्ट था टैक्स का, टैक्स के ऊपर टैक्स के ऊपर टैक्स जो रखता था, जो व्यापार में वापिस नहीं मिलता था, जो सिस्टम में लूज़ हो जाता था, उसका इफ़ेक्ट उपभोक्ताओं पर ना पड़े और उसका क्रेडिट भी मिले, उसकी वजह से यह जीएसटी की कल्पना सबसे पहले की गयी थी |
मुझे याद है मैं स्वयं फैक्ट्री चलाता था जब बहुत छोटा था, चार-चार प्रकार के हमें रजिस्टर रखने पड़ते थे, एक्साइज अलग pay करना पड़ता था, सर्विस टैक्स अलग pay करना पड़ता था, वैट अलग pay करना पड़ता था | बाकी तो दुनिया भर के टैक्सेज अलग थे, 17 टैक्सेज और 23 सेस्सेज़, सब मिलाकर यह जीएसटी बना है – 17 टैक्स और 23 सेस | स्वाभाविक है हर एक को पूरे 40 के 40 नहीं लगते होंगे पर हम सबको अपने अपने व्यापार में कई टैक्सेज लगते थे, अलग-अलग सेस लगते थे | हम अलग-अलग राज्य में काम करते थे तो राज्यों में अलग टैक्स लगते थे, पूरे टाइम फॉर्म भरते रहना पड़ता था, ऍन-फॉर्म, फलाना-ढिमका | ज़रूरत पड़े और अगर आपको बाहर व्यापार करना है तो आपको डीपो खोलना पड़ता था, डीपो खोलना पड़े तो उसके लिए अलग खर्चा करना पड़ता था |
हम जितना टैक्सेज़ अलग-अलग वस्तुओं पर pay करते थे, उस सबका क्रेडिट नहीं ले पाते थे | उस सबको जब सम्मिलित करके जीएसटी की व्यवस्था बनाई जाती है तो जो जो टैक्स हर स्टेज पर लगता है वह टैक्स आपको पास-ऑन इनपुट क्रेडिट के माध्यम से मिले और सिर्फ जो वैल्यू ऐड है उसके ऊपर आपको एडिशनल टैक्स लगे, इस प्रकार की व्यवस्था साधारणतः जीएसटी को समझाती है |
अब ऐसी परिस्थिति को बनाने के लिए हजारों घंटे देश भर के सभी अधिकारियों ने मिलजुलकर यह व्यवस्था बनाई | आखिर सब राज्यों को अपनी-अपनी भी revenue का, अपनी-अपनी भी जो ज़रूरतें हैं उनको पूरा करने की आवश्यकता थी | लगभग 52,000 ऑफिसर इसकी स्टडी में लगे इस विषय में ट्रेन हुए देश भर में और उसके बाद जीएसटी का कानून 1 जुलाई को लागू किया गया – 52,000 ऑफिसर | लगभग 4,500 वर्कशॉप और मुझे पक्का विश्वास है पुणे में भी बहुत वर्कशॉपस हुई होंगी, इसकी पूरी जानकारी वेबसाइट पर available है | 4,500 से अधिक वर्कशॉप देश भर में की गयी जिसमें जीएसटी की जानकारियां लोगों तक पहुंचाई गयीं | अब यह सब जब करने से एक व्यवस्था जिसमें सब राज्य सरकारें, केंद्र सरकार ने मिलकर लागू किया, उसमें जो ट्रांजीशनल पीरियड है, उसमें स्वाभाविक है थोड़ा एक संदेह रहता है लगता है कि 37 रिटर्न है हमें समय लगेगा समझने में |
वास्तव में जब मैंने इसको स्टडी किया तो मैं तो हैरान हो गया कि यह 37 रिटर्न कौन आप लोगों को गाइड कर रहा है | वस्तुस्थिति तो यह है कि इसमें एक भी रिटर्न नहीं है, एक भी रिटर्न नहीं है और यह मैं बड़े दावे के साथ कह रहा हूँ | मुझे याद है हम बनाते थे एक सेल्स रजिस्टर वैट के लिए, एक सेल्स रजिस्टर एक्साइज के लिए, एक सेल्स रजिस्टर एंट्री टैक्स के लिए, सामने हम बनाते थे परचेस रजिस्टर हर अलग-अलग व्यवस्था के लिए | उसके बदले अब जो यह सिस्टम इन्होंने बनाया है, जीएसटी कौंसिल ने, और मैं दात दूंगा कि इन्होंने इतना सोच-समझकर यह जो ऑटोमेटेड सिस्टम बनाया है, इसमें हमें एक बार – एक ही बार हमारी सेल्स इनवॉइसिज़ डालके एक सेल्स रजिस्टर बनानी है, जैसे ही हम अपने ईमानदारी से सब सेल्स को डाल दें उसके बाद वास्तव में हमें कुछ नहीं करना है | जो परचेस रजिस्टर पहले बनती थी वह अब ऑटो-पॉप्युलेट होकर आएगी, मतलब सिस्टम से अपने आप जेनरेट होगी क्योंकि जिससे आप माल खरीदते हो जब वह सेल करेगा आपको और सेल रजिस्टर में उसके डालेगा तो आपके यहाँ पर अपने आप से वह परचेस के रूप में बनेगी |
कुछ purchases होंगी आप unregistered dealer से लेंगे या कोई bye chance गलती से किसी ने सेल रजिस्टर अपनी नहीं बनाई और डाला नहीं या गलत जीएसटी नंबर डाल दिया आपके वहां पर परचेस रजिस्टर नहीं आया, थोड़े समय तक यह समस्याएं आएँगी, आप फ़ोन करके उसको बोल सकते हैं कि भाई आपके सेल्स रजिस्टर में मेरा परचेस दिख नहीं रहा है, आप ज़रा उसको दुरुस्त कर दीजिये | अगर कोई व्यक्ति नहीं डालना चाहे सेल्स रजिस्टर, नंबर दो का धंदा करना चाहे और नहीं डाले तो आप अपने परचेस रजिस्टर में वह परचेस दिखा सकते हैं, वह अपने आप उनके सेल्स रजिस्टर में दिखेगा | और कंप्यूटर को ध्यान आएगा कि उन्होंने अपना सेल्स रजिस्टर ठीक से नहीं बनाया है, कुछ सेल छुपाने की कोशिश की है |
और यह थोड़े दिनों की बात है, आहिस्ते-आहिस्ते जब सरलता आ जाएगी तो सबको समझ में आ जायेगा कि अभी चोरी करने की कोई संभावना नहीं रही | पहले क्या था एक्साइज ऑफिस अलग था, वैट ऑफिस अलग था, एंट्री टैक्स अलग था, आगे चलकर क्या पता इनकम टैक्स भी इसमें जुड़ जाये तो उनको भी डेटा इसमें से सीधा मिल जायेगा | तो एक ऑफिसर आपको पकड़ ले और उससे आप सांठगांठ कर लो तो पहले तो छूट सकते थे, अब छूटने की संभावना ख़त्म सी हो गयी है क्योंकि पूरा डेटा एक ही सिस्टम में आ जायेगा, पूरी वैल्यू चेन में 10 जगह अगर माल move होता है – समझो कोई यार्न बेचता है, सिंस टेक्सटाइल की बड़ी तीव्र बात करना कोई चाह रहे थे सज्जन, कोई यार्न बेचता है और कपडा व्यापारी उसको अपने रिकॉर्ड के बगैर बना के बेचने की कोशिश करे तो कंप्यूटर में दिखेगा कि यार्न तो इतना सारा बेचा जा रहा है सोहनलाल जी को लेकिन उसके बाद क्या हो रहा है कुछ दिख ही नहीं रहा है कंप्यूटर में |
कुछ लोगों को तकलीफ इसमें अधिक इसलिए आ रही है क्योंकि इस नयी व्यवस्था का पहले ध्यान नहीं आया कि इस व्यवस्था में अब चोरी करने की संभावना लगभग ना के बराबर हो गयी है | यह पूरा ट्रैक करता है वैल्यू चेन में कहाँ-कहाँ माल जाता है जिससे हर एक व्यक्ति को ज़िम्मेदारी बढ़ जाएगी कि मुझे पूरा अपना व्यापार ईमानदार बनाना पड़ेगा, ईमानदार रखना पड़ेगा | मैं पूरी तरीके से सहमत हूँ जिस भाई ने कहा कि प्लीज आप सबको चोर मत समझिये, हम कैसे चोर समझ सकते हैं? मैं खुद व्यापारी रहा हूँ, हम कैसे आपको चोर समझ सकते हैं | और यह बात भी सच है हर व्यवस्था में कोई न कोई गलत काम करते हैं, तो क्या गलत काम को रोकना है कि कभी रोकना नहीं है? रोकना तो पड़ेगा ना कभी न कभी?
आखिर यह टैक्स जो pay होता है, यह टैक्स कहाँ जाता है? अगर कोई कटिया मारकर बिजली लेता है और किसी को रिश्वत देता है और असली बिजली का बिल नहीं भरता है तो वह ऐसा नहीं है कि वह बिजली का बिल किसी से रिकवर नहीं होगा, वह ईमानदार आदमी के ऊपर उस बिजली का भर जाता है जो चोरी की बिजली होती है | एक बाज़ार में अगर दस व्यापारी हैं अगर यह सभी लोग इस स्टेज पर बैठे ईमानदार व्यापार करना चाहें और मैं टैक्स की चोरी करूँ | तो आप सब उपभोक्ता तो मेरे यहाँ पर आओगे, मेरा माल सस्ता होगा, मेरा तो व्यापार फ्लरिश करेगा, बहुत अच्छा चलेगा | फिर यह सब भाई-बहन क्या करेंगे? या तो इनको अपना व्यापार बंद करना पड़ेगा और या इनको भी चोरी करनी शुरू करनी पड़ेगी | और आप्शन क्या है? कम्पटीशन फेयर कैसे होगा? या तो यह भी टैक्स की चोरी करें और या धंधा बंद करके कुछ और धंधा ढूँढें |
और मैंने जितनी जगह यह प्रश्न पूछा मेरे व्यापारी और उद्योग के भाई-बहनों से उसमें सबसे ज्यादा अगर इस बात का समर्थन मिला है तो वह युवा पीढ़ी से मिला है, युवा पीढ़ी सबसे खुश होती है हमको रात को चैन की नींद चाहिए, बाप-दादा की तरह टेंशन नहीं चाहिए | हमको दो-दो बहीखाते नहीं रखने हैं – क्या भाई बिल बनाओ, बिल नहीं बनाओ | बिल बनाना है तो इधर लिखेंगे, बिल नहीं बनाना है तो इधर लिखेंगे | क्या हम यह करना चाहते हैं क्या? चैन की नींद सोयेंगे, रात को अपना नाटक-वाटक देखने जायेंगे – अभी कौन सी पिक्चर आ रही है? जग्गा जासूस | रात को वह पिक्चर देखने जायेंगे, अगले दिन सुबह फैक्ट्री पहुंचे या दुकान पहुंचे, अगर bye chance और मुझे याद है मेरे फैक्ट्री के दिन जब मैं फैक्ट्री चलाता था | सुबह अगर आप फैक्ट्री पहुँचो और गेट के बाहर एक सफ़ेद एम्बेसडर खड़ी हो |
अच्छा और अगर सफ़ेद एम्बेसडर पर – माफ़ करिएगा भाई साहब आप, मुझे मालूम नहीं आप कौनसे डिपार्टमेंट से आते हैं – लेकिन अगर उसपर लिखा हो – सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ कस्टम्स एंड एक्साइज – फिर तो चलो आज रात को घर जायेंगे कि नहीं वो ही नहीं मालूम | था कि नहीं यह बात? अच्छा क्यों करना पड़ता था कोई ऐसा नहीं कि हर एक आदमी को चोरी करने में कुछ मज़ा आता था | चोरी के ना तीन कारण मेरे ध्यान में आते हैं | या तो अधिकारी और राजनीतिक नेताओं को आपको पैसा रिश्वत देना पड़ता था, या जैसे मैंने बताया कम्पटीशन में खड़े रहने के लिए चोरी करनी पड़ती थी, हाँ एक तीसरा कारण यह है कि किसी के खून में ही चोरी रहती है वह अलग बात है, उसको तो कोई कुछ कर नहीं सकता है | कुछ लोगों को तो चोरी नहीं करी तो तकलीफ होती है|
मुझे याद है एकाद जगह तो मुझे किसी ने खड़े होकर बोला कि हमें यह बताओ मैं टैक्स क्यों भरूं? मैं बड़ा हैरान हुआ | और भाईयो बहनों मैं आपको बताऊंगा टैक्स क्यों भरना चाहिए | आप ज़रा सोचिये जब आप टैक्स की चोरी करते हैं, हो सकता है कि यह जो टैक्स आप भर रहे हो, इससे किसी गरीब के घर में दूसरे वक्त की रोटी पहुंचेगी, हो सकता है जो आप टैक्स भर रहे हो उससे किसी विद्यार्थी को गाँव में शायद शिक्षा मिलेगी जिससे आपके और मेरे बच्चों की तरह वह भी समाज में अपना स्थान ले सकेगा, एक आत्मनिर्भर जीवन जी सकेगा, हो सकता है जो आपने टीवी में देखा कि ओडिशा में एक किसान को अपनी बूढी माँ को घंटों अपने कंधे पर उठा के अस्पताल ले के जाना पड़ा, क्योंकि गाँव में अस्पताल नहीं था, गाँव में सुविधा नहीं थी, हो सकता है उसको ही ना करना पड़े | हो सकता है कि आपने जो टैक्स की चोरी नहीं की उससे किसी गरीब महिला के घर में सस्ती एलपीजी पहुँच जाये जिससे उसको 400 सिगरेट जितना धुआं नहीं लेना पड़ेगा अपने बच्चों को खाना बना के देने के लिए | क्या यह enough reason नहीं है टैक्स pay करने का?
हम भी आखिर कभी न कभी मूलतः गाँव से आये हैं, मैं अभी सुन रहा था आप सब मारवाड़ी में बात कर रहे थे, ज़रा जा के राजस्थान के गावों की हालत तो देखिए, गुजरात में जा के कोई गरीब की झोपडी में जा के देखिए | ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, इन सब इलाकों में नक्सलवाद, माओवादी तंत्र क्यों फैलते जा रहे हैं | क्या उनको यह नहीं दिखता है कि ऐसे आलिशान घरों में एक समाज का वर्ग बैठा है और उनके जीवन में क्या हालत है| आखिर demonetization, जब विमुद्रीकरण हुआ, क्यों इस देश का हर एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री मोदी जी का समर्थन किया, क्यों उसके बाद पूरे देश में गरीबों में, किसानों में, जो वंचित, पीड़ित रहे हैं इतने वर्षों में उनमें उत्साह आया क्योंकि उनको दिखा कि कोई एक व्यक्ति है जो गरीबों की चिंता करता है, जो चिंता करता है कि यह जो कई बार नंगा नाच होता है काले धन का उसपर कभी न कभी रोक आनी पड़ेगी |
मेरे को एक दिन एक बड़ा उद्योगपति घर पर समझा रहा था यह विमुद्रीकरण के ही दिन थे, मैंने कहा कि समझ नहीं आ रहा है कि यह इतना ज्यादा कोई आदमी लाइन में खड़ा है, क्यू में खड़ा है, 3 घंटे से परेशान है धूप है, उसको भी वह टेलीविज़न का एंकर, मैं नाम नहीं लूँगा आप सब समझदार लोग हैं, वह जाकर उसके मुंह में माइक घुसा रहा है कि तुम तो बहुत परेशान होगे ना विमुद्रीकरण से? फिर भी बोलता है नहीं नहीं मैं परेशान नहीं हूँ, मोदी जी ने बहुत अच्छा किया | बहुत सारे TV anchors आते थे सब जगह ‘कुछ तो बोलो बोलो ना बहुत मोदी के खिलाफ कुछ तो बोलो’|
क्यों नहीं लोग बोलते थे? उनको विश्वास था कि यह देशहित में किया है, हमारा फ़ायदा होगा उससे | और काला धन ख़त्म करने के यह एक कदम से यह नहीं होता है, यह पूरा एक प्रवाह होता है और पहले दिन से यह सरकार ने आ के एक के बाद एक कदम लिए हैं और साथ-साथ में छूट भी दी है | किसी ने कहा कि भाई कुछ शुरू में अगर गलती रह गयी है तो मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कोई harassment की किसी की कल्पना ही नहीं है | आपको कोई दो-तीन महीने कुछ गलती हो गयी, कुछ गलती सुधार करनी है, पूरी तरीके से सभी अधिकारी इसमें संवेदना के साथ आपकी मदद करेंगे, कोई आपको harass नहीं करेगा | और कोई harassment हुई तो एसोसिएशन के थ्रू सीधा जनप्रतिनिधियों को बताइये, अनिल को बताइये, मधुरितई को बताइये, मेरे तक लाइये | सीधा PMO भी आजतक तो आपके साथ सीधा जुड़ा हुआ है, नरेन्द्र मोदी ऐप्प पर जा के आप complain कर सकते हो, हाईएस्ट लेवल पर, प्रधानमंत्री के साथ आपका संवाद है, कोई harassment नहीं होने देंगे |
मुझे याद है जब jewellers स्ट्राइक पर थे तब मैं पूना भी आया था, और जीतो के ही कार्यक्रम में कुछ नोक-झोक भी हो गयी थी इस विषय में, स्ट्राइक भी की इन्होंने, सब कुछ हुआ, घंटों हमारी चर्चाएं हुईं | और मुझे याद है मैंने एसोसिएशन के लोगों को मेरे पर्सनल मोबाइल नंबर दिया था, किधर भी harassment होगा तो सीधा मुझे बोलना, हाँ अपना दामन साफ़ होना चाहिए, उसका भी उदाहरण बड़ा इंटरेस्टिंग है | वैसे एक साल में सोहनलाल जी एक फ़ोन नहीं आया, एक साल हो गया है एक्साइज ड्यूटी jewellery पर लगे, किसी एक का भी फ़ोन नहीं आया, मेरा पर्सनल नंबर दिया था सबको जितने एसोसिएशन के लोग मेरे साथ निगोशिएट करते थे, बात करते थे उस समय |
एक व्यक्ति ज़रूर हैदराबाद से मेरे पास आया, बोले साहब, हैदराबादी लहजे में बोले, मुझे बोलना आता नहीं है | बोले हमारे समाज के साथ बहुत अन्याय हो रहा है, मैंने कहा अरे विमुद्रीकरण और हमारे समाज का क्या संबंध है? बोले नहीं नहीं साहब हमारे ही समाज के साथ विमुद्रीकरण में बहुत अन्याय हुआ, मैंने कहा बताओ तो सही क्या है, तो उन्होंने मुझे कागज़ दिखाए, मैंने पढ़े | एक jeweller ने हैदराबाद में 8 नवंबर और 18 नवंबर के बीच 95 करोड़ रुपये कैश में डिपाजिट किये हैं, 95 करोड़ | बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने लेने से इंकार किया, बोला इसका रीज़न बताओ, तो दूसरे निजी बैंक में, प्राइवेट बैंक में खाता खोलकर डिपाजिट किया | स्वाभाविक है आजकल तो डेटा मैनिंग सब कंप्यूटर पर होता है, किसी व्यक्ति को कुछ नहीं करना पड़ता है, फट करके ट्रिगर आ जाता है Financial Intelligence Unit के पास, पहुँच गए भैया अधिकारी वहां पर, बताओ ये 95 करोड़ कहाँ से आया?
बोला साहब क्या करें 5,000 लोग मेरी दुकान पर पहुँच गए विमुद्रीकरण के बाद, 8 बजे प्रधानमंत्री जी ने announce किया था, 8.30 बजे अंग्रेजी में, हैदराबाद का किस्सा है पर चलो समझो हिंदी भी समझ में आता है, 8 बजे का ही पकड़ लेते हैं | मुझे ही सवा सात बजे मालूम पड़ा जब कैबिनेट में बोला तो उसको तो positively या उसके 5,000 उपभोक्ताओं को तो नहीं मालूम था और 12 बजे डेडलाइन थी | बोलता है क्या करू 5,000 लोग आ गए, सबने मुझे 2-2 लाख रुपये दे दिए कि बाद में आप मुझे सोना बनाकर दे देना, जवाहरात बनाकर दे देना, क्योंकि स्टॉक तो था नहीं इतना उसके पास | तो 95 करोड़ का फ्यूचर सेल उसने 8 या जब भी उसको समझ में आया, जब भी उपभोक्ताओं को समझ में आया तब से 12 बजे तक 95 करोड़ आ गए, उसने ईमानदारी से बैंक में जमा कर दिया, ईमानदारी से | बोला अरे 5,000 लोग आये, तो इतना पैसा लेकर आये तो किसी ने बैठ के गिना तो होगा, बोला हाँ मेरे 8 लोगों ने गिना यह पैसा, बोला उनका नाम-नंबर ही बता दो, बोला मैं भूल गया हूँ उनका नाम और नंबर | यह सब इनकम टैक्स के पंचनामे में लिखा हुआ मैंने पढ़ा |
बोला इतने लोग आये तो भीड़ हो गयी होगी दुकान के बाहर तो कुछ व्यवस्था, कानून व्यवस्था, कोई पुलिस को बोला, क्या किया? बोला कि नहीं सिक्यूरिटी है मेरी, अच्छा सिक्यूरिटी गार्ड का ही नाम बता दो? बोला वह भाग गया |
एक केस आया है मेरे पास एक साल में jewellers का, इसके इलावा किसी ने मुझे आजतक contact नहीं किया harassment के लिए | अगर यह harassment मानी जाएगी व्यापारी की तो आप और हम सब कहाँ मुंह दिखाने रहेंगे और क्या फिर हमारे व्यापारी समाज का इज्ज़त रह जाएगी | और एक मौका है देखिए भाईयो-बहनों, एक मौका और है, भूल जायें पुराने रास्ते, भूल जायें कैसे व्यवस्था चलती थी, क्यों ना हम सब इस ईमानदार व्यवस्था के साथ जुडें | देखिए, अब रेट तो सबके लिए same है, कम्पटीशन अब फेयर होगी, चाहे यह हो, मैं हूँ, आंध्र प्रदेश में हूँ, हिमाचल में हूँ, या सिक्किम में हूँ | देश भर में एक वस्तु का रेट एक ही रहेगा, कम्पटीशन फेयर होगी, ऐसे में क्यों ना हम सब इस व्यवस्था के साथ जुड़ने की कोशिश करें | अगर सबने अपना सेल्स इनवॉइस ईमानदारी से डाल दिया, आपको कोई रिटर्न बनाने की ज़रूरत नहीं है, परचेस रिटर्न अपने आप बनेगा, दूसरों के सेल्स इनवॉइस से | दोनों का मैचिंग करके आपको तो सिर्फ check करना है कि कोई रह तो नहीं गया सेल्स इनवॉइस – कोई परचेस इनवॉइस रह तो नहीं गया, उसको बोलकर डलवा देना है | वह नहीं डाले, आप डाल सकते हो, आपने किसी का सेल्स इनवॉइस नहीं डाला, तो जिसको भी माल बेचोगे वह आपसे डलवा लेगा |
समझो दोनों ने मिलीभगत में नहीं डाला तो आगे चलकर किधर ना किधर अगर किसी ने भूल चूककर वह माल का डाल दिया तो ट्रेस हो जायेगा कि भाई यह माल तो बिका है पर इसके पीछे इसका कोई परचेस ही नहीं है, ज़रूर कुछ गड़बड़ है | और यह हमें नहीं करना पड़ेगा, अधिकारी तो बहुत चैन की नींद सोयेंगे, वह कंप्यूटर डेटा मैनिंग से हो जायेगा यह सब | तो जो कुछ लोगों को थोड़ी तकलीफ है वह यह ज़रूर समझ लें कि किसी हालत में कोई जीएसटी से निजात पा जायेगा, exemption पा जायेगा, वह उस ग़लतफहमी में ना रहे | स्ट्राइक करे, कितने भी दिन स्ट्राइक हो, कितना भी हल्ला हो और हमें वोट दे या ना दे, वैसे हमें नहीं देगा तो जिसको भी देगा वह भी जीएसटी में शामिल है वैसे | तो आपको none of the above वाला लेना पड़ेगा – NOTA !
तो वास्तव में एक व्यवस्था ऐसी बनाई गयी है कि पूरी वैल्यू चेन एक बार सिस्टम में आ जाये, हर एक व्यक्ति ईमानदार व्यवस्था से जुड़े, पहले जैसे होता था, ट्रक निकलता था पुणे से, जाता था बेंगलुरु, बिल्टी बनती थी, इनवॉइस बनता था | अगर बीच में चेक पोस्ट पर पकड़ा गया तो तो एन्टर हो जाता था सेल, अगर बिना चेक पोस्ट पर पकडे गए या 100, 500, 1000 पता नहीं क्या रेट चल रहा है आजकल, उसपर निपट गया तो वहां पहुँचने के बाद फ़ोन होता था, फाड़ के फ़ेंक दो इनवॉइस नंबर फ्री हो गया | कुछ गलत बोल रहा हूँ भाईयों बहनों? हम सब एक ही..वह सब अब बड़ा मुश्किल हो जायेगा क्योंकि कंप्यूटर बोलेगा यह ट्रक ऊपर नीचे जा रहा है पर कुछ माल नहीं लेकर जा रहा है, गड़बड़ क्या है? आखिर उसको शौक है क्या Diesel भरा के ट्रक ऊपर नीचे खाली कराने का?
तो परेशानी की नस अगर कोई है, तो वह यह बात है | शायद जो लोग पहले बड़े उत्साह से बोलते थे जीएसटी-जीएसटी-जीएसटी, उनको बाद में अब ध्यान आ रहा है कि यह जीएसटी तो ईमानदार व्यवस्था है, इस ईमानदार व्यवस्था से जुड़ना पड़ेगा | ज़रूर कुछ न कुछ जाइज़ चीज़ें आएँगी, कपडा बाज़ार की भी कुछ जाइज़ चीज़ें हो सकती हैं, पर अगर कोई समझे कि बन्दूक रखकर कोई व्यवस्था में सुधार होगा, वैसे कभी सुधार नहीं होता है, वार्तालाप और बातचीत से ही सुधार होता है | और सुधार के लिए बात जाइज़ होनी चाहिए, अब मेरे पास कुछ लोगों का फ़ोन आया, महाराष्ट्र के नहीं थे, दूसरे राज्य के थे, बोले हमको बाकी सब कुछ मंज़ूर है, कपडा व्यापार के ही थे भाई साहब, by the way, उन्होंने कहा हमें बाकी सब कुछ मंज़ूर है, हमको सिर्फ प्रॉब्लम यह है कि बहुत सारा माल पड़ा है जो नंबर दो में लिया था उसका कोई रास्ता निकाल दो बाकी हम जीएसटी में जुड़ने को तैयार हैं |
अब मैं समझ नहीं पा रहा हूँ इसका रास्ता क्या निकाल सकते हैं वह नहीं मेरी समझ आ रहा, कुछ बातें जाइज़ भी हैं | अगर किसी विषय में जीएसटी कम रखा गया है और उसमें हमें डर है कि इम्पोर्ट हो सकता है ज्यादा गुड्स का और कपडे व्यापार में भी कुछ लोगों ने मुझे यह बात कही | उसका सलूशन तो आसानी से निकल सकता है, पर वह सलूशन बातचीत से निकलेगा या और व्यवस्था से निकलेगा, और और व्यवस्था को हम तूल दें तो फिर तो जितने व्यापारी भाई बैठे हैं यहाँ सब अपना टर्न बय टर्न यही करते रहेंगे | एक अच्छी व्यवस्था लाने की समूची कोशिश है, सबकी मिलकर कोशिश है, उस अच्छी व्यवस्था में सब लोग जुडें, ईमानदारी से इनपुट क्रेडिट का लाभ उपभोक्ता को दें | आखिर कई लोग कहते हैं यह एंटी-प्रोफीटेरिंग क्यों लाया गया, एंटी-प्रोफीटेरिंग इसलिए लाया गया कि अगर पहले की व्यवस्था और अभी की आप compare करो, पहले एक्साइज, एंट्री टैक्स, यह सब पहले लग जाता था, एंड में सिर्फ वैट लगता था consumer को | अब जो पहले टैक्सेज़ लगते थे वह जोड़ के जीएसटी लगता है, पर इस सबका क्रेडिट तो आपको लेना पड़ेगा ना?
ऐसा तो नहीं हो सकता है मैं 1 तारीख को बाल कटाने गया था, अब बाल कटा के निकला तो मैंने लड़के को पूछा पहले और अब में रेट में कोई फरक है क्या, बोला नहीं है! मैंने कहा यह तो गलत है | आखिर अगर जीएसटी का रेट 18% हुआ है, पहले 15 था और कुछ वक्ताओं ने उसका भी ज़िक्र किया तो उसके सामने इनपुट क्रेडिट भी तो मिल रहा है ना? आपके दुकान के भाड़े पर जो जीएसटी लगेगा उसका इनपुट क्रेडिट मिलेगा, आप जो सामान खरीदेंगे उसका इनपुट क्रेडिट मिलेगा, आप हाउस-कीपिंग सर्विस लगायेंगे, सिक्यूरिटी सर्विस लगायेंगे उसका जीएसटी क्रेडिट मिलेगा | तो हम सबको अपनी कॉस्टिंग भी देखनी पड़ेगी, कॉस्टिंग में जो क्रेडिट मिल रहा है उसको कम करना पड़ेगा और जो कम होकर जो सेल प्राइस आती है उसपर जीएसटी लगा के जिससे उपभोक्ताओं के ऊपर महंगाई का बोझ न पड़े और अधिकांश वस्तुओं में तो यह मल्टीप्ल टैक्सेज और कैस्केडिंग इफ़ेक्ट ऑफ़ टैक्सेज नहीं होने के कारण अगर व्यापारी वर्ग, उद्योग वर्ग ने पूरा इनपुट क्रेडिट ईमानदारी से पास-ऑन किया तो अधिकांश वस्तुओं के दाम कम होंगे क्योंकि जो revenue आएगा वह भ्रष्ट्राचार मुक्त भारत से revenue आएगा, टैक्स का बर्डन बढ़ाके revenue नहीं आएगा |
और यह व्यवस्था एक्सपोर्ट में भी हमें लाभ देगी क्योंकि पहले मैं भी एक्सपोर्ट करता था मुझे एंट्री टैक्स का कभी रिफंड मिलता नहीं था, ओक्ट्रोई कोई मुंबई में pay करता था उसका कोई पैसा वापिस नहीं मिलता था | कई चीज़ें जो छोटी-छोटी खरीदते थे या सर्विसेज़ लेते थे उसका बोझ हमारे ऊपर रहता था, इन सब चीज़ों से भी अब एक्सपोर्ट को राहत मिलेगी, जिसको कहते है ना ‘You export goods and services, you don’t export local taxes.’ वास्तव में जीएसटी आने के बाद यह परिस्थिति बनेगी कि हम टैक्स एक्सपोर्ट करना बंद करेंगे, सामान और अपनी सेवाएं एक्सपोर्ट कर पाएंगे | और जैसे ब्रांडेड गुड्स का कई लोगों ने ज़िक्र किया, किसानों के ऊपर जीएसटी का बर्डन नहीं लगे, किसानों को exempt category में रखा गया है |
जब उसको पैकेजिंग करते हैं तो स्वाभाविक है कि कुछ न कुछ प्रोसेस हो रहा है ना, उसमें प्लास्टिक लगता है, प्लास्टिक के ऊपर आपको जीएसटी लग के आता है उसका आपको क्रेडिट मिल जायेगा, कोई वेयरहाउस या गोडाउन में आप रखते हो, ब्रांडिंग करते हो, पैकेजिंग करते हो, उसपर जो जीएसटी लगता है उसका क्रेडिट मिल जायेगा | तो अगर आप कहने की कोशिश करो कि बस 5% सब बढ़ गया तो यह गलत है, विचार करिए, आपके जितने खर्चे हो रहे हैं, उस सबका इनपुट क्रेडिट आप लीजिये फिर उसके बाद कुछ विषयों पर थोड़ा कम होगा, कुछ में थोड़ा ज्यादा होगा | Average जो एक व्यक्ति का बजट है, उपभोक्ता का बजट है, वह लगभग बैलेंस आउट हो जायेगा ऐसी व्यवस्था इस जीएसटी कौंसिल ने की है | और आप आखिर सोचिये यह व्यवस्था कोई 4 या 8 लोगों ने नहीं किया है, देश भर के अधिकारी और देश भर के राजनीतिक नेता, एक प्रकार से जो जीएसटी कौंसिल में जिनको आप लोगों ने ही चुन के भेजा है उन सबने मिलकर, उन सबकी यह सांझी विरासत है, ऐसा नहीं है एक पार्टी ने या दो पार्टी ने तय किया है | और इसमें मेरी तो राय यह रहेगी कि एक बार जुड़िये, खुले मन से जुड़िये, सीखिए समझये, आपकी आधी कठिनाई है तो शायद ग़लतफहमियों के कारण है, अभी अभी उन्होंने clarify किया कि सांगली में अगर किसी ने वह कहा है तो वह गलत है | उसकी कई सारी helplines हैं, कई सारे offices, कई सारे क्या हर एक वैट, एक्साइज, सर्विस टैक्स ऑफिस में, मुफ्त की हेल्प डेस्क है, चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ने सवा सौ हेल्प डेस्क मुफ्त में खोली हैं जहाँ पर उनके लोग आपको गाइड करने के लिए तैयार है | कोई डाउट आये तो आप ई-मेल भेजिए, फ़ोन करिए, आजकल तो फ़ोन भी फ्री हो गया है लगभग, फ़ोन करके पूछ लीजिये आपको क्या समस्या है, लिखित भेजेंगे तो लिखित जवाब आ जायेगा |
तो समस्याओं से हमें डरने की आवश्यकता नहीं है, जिसको कहते हैं ना ‘a problem is a problem only till a solution is found. We have to find solutions. और हम सब जब मिलकर इसको अपनाएंगे confidence से, positivity से, नकारात्मक सोच को निकालना पड़ेगा, सकारात्मक होना पड़ेगा, positivity, that will pay in the long run. और आप सोचिये, यहाँ पर अधिकांश लोग मेरे ख़याल से दूसरी पीढ़ी के हैं, आप ज़रा सोचिये क्या आप अपने बच्चों को भी उसी प्रकार की व्यवस्था में व्यापार करने को छोड़ना चाहते हैं या उनके लिए एक सरल व्यवस्था कितना माल आया उस सबपर इतना क्रेडिट, कितना माल बेचा उसपर इतना टैक्स, दोनों को नेट करके सिस्टम बताएगा कितना टैक्स भरना वह तीसरा रिटर्न | तो सेल्स आप भरोगे, परचेस कोई भरना नहीं आपको, आटोमेटिक सिस्टम से निकलेगा, तीसरा रिटर्न आपको कुछ नहीं बनाना यह एक्चुअली गलती आप लोग, अधिकारियों की है और हमारी भी है एक तरीके से, यह रिटर्न ही नहीं है, यह तो आपने रिटर्न नाम देकर आपने लोगों को डरा दिया, यह स्टेटमेंट बोलते तो कोई प्रॉब्लम नहीं होती| सेल्स स्टेटमेंट बचपन से हम देते आ रहे हैं, परचेस स्टेटमेंट बचपन से हम देते आ रहे हैं | और तीसरा तो इनको कुछ देना ही नहीं है वह तो कंप्यूटर में अपने आप कैलकुलेट होगा कि इतना क्रेडिट मिला, इतना डेबिट हुआ, नेट इतना भरना है या इतना रिफंड आना है, स्वाभाविक है इतना सिंपल चीज़ कर दिया है |
तो मेहरबानी करके ज़रा ग़लतफ़हमियों से हम थोड़ा ऊपर उठें | कुछ चीज़ें जो बताई गयीं एक उसमें प्रमुख विषय यह था कि कोई व्यक्ति ने जीएसटी नहीं भरा तो उसका बोझ मेरे ऊपर क्यों? बहुत अच्छा सवाल है, मैं भी, शुरू में जब मैंने सुना मैं भी थोड़ा उत्तेजित हुआ था | मुझे भी लगा था कि भाई वह सामने नहीं भरा मैं क्यों उसका कष्ट उठाऊँ | इसपर बहुत विचार-मंथन हुआ पूरे जीएसटी कौंसिल में ऐसा मुझे बाद में बताया गया, मैं तो उस कौंसिल में नहीं हूँ| आज, और यह भी हम सब अपने अंतर्गह में देख के सोचें, आज एक बहुत बड़ी बीमारी है, यह जो ब्रीफकेस पर चलने वाले, फर्जी बिल काटने वाले लोग हैं, सच बोल रहा हूँ कि झूठ बोल रहा हूँ? आप लोग याद करिए कितने लोग आते हैं ब्रीफकेस पर बिल बुक ले के जिससे हम दो टक्का, चार टक्का में बिल लेते हैं, एंट्री करते हैं, क्रेडिट ले लेते हैं| यह व्यापार भी कभी बंद करना है कि नहीं करना है और व्यक्ति किधर भाग के जा नहीं सकेगा, हाँ जिसने जीएसटी नंबर लिया, आजकल तो आधार कार्ड, पैन कार्ड, एड्रेस, दुनिया भर की डेटा सब एक साथ हो जाएगी, अब हम इनकम टैक्स में, कस्टम्स में, सब जगह वही एड्रेस वही नंबर commonalise कर देंगे |
तो जो व्यापारी आपसे टैक्स चार्ज करके आपको कुछ माल बेचता है वह एक महीने तक भाग सकता है, एक महीने से ज्यादा नहीं भाग सकता | एक बार आपको नुकसान पहुंचा सकता है, एक बार, उसके बाद उसको धंधा करना इम्पॉसिबल हो जायेगा पूरे देश में, ब्लैकलिस्ट में आ जायेगा, सीधा वह किधर भी माल बेचेगा तो पॉप-अप हो जायेगा उसका नाम कि यह ब्लैकलिस्टेड है इसने वहां पर टैक्स नहीं भरा | तो आपतो चिंता कर रहे हो कि आपने किसी एक व्यापारी से माल ख़रीदा और उसने टैक्स नहीं भरा तो आपको थोड़ा नुकसान होगा, आप दूसरी तरफ देखो, कितने फर्जी व्यापारी आपको कुछ गलत बेच के चले जायेंगे ऐसे कितने लोगों से आपको बचने का राहत मिलेगी इससे| एक बार आप फंस सकते हो, लेकिन 50 बार फंसने से बचोगे आगे, जबकि कोई और आपको. अच्छा टैक्स डिपार्टमेंट कोई आज की व्यवस्था में जब हम यह फर्जी बिल और यह वह आते हैं जिसमें टैक्स एक्चुअली pay नहीं होता है तो हम लोगों को छोड़ते हैं क्या वह लोग? आजकल शैल कम्पनीज कलकत्ता की सब पकड़ी जा रहीं हैं एक के बाद एक, आपके पास भी कोई व्यापार है तो ज़रा ध्यान रखना | वह शैल कम्पनीज जैसे जैसे पकड़ी जा रहीं हैं तो क्या शैल कंपनी को पूछते हैं या हमारे घर पर आते हैं? आप बताइये?
तो हम आपको बचाने के लिए यह प्रावधान लाये हैं कि आप ऐसे लोगों से बचोगे आगे चलकर जब लिस्ट बन जाएगी, ब्लैकलिस्ट हो जायेंगे यह लोग जो इस प्रकार का व्यापार करते थे | इसी प्रकार से किसी ने कहा ग्राहक को बंधन होना चाहिए व्यापारी को कि एक प्राइस डाले, कई विषयों पर एमआरपी रहता है, दवाइयों पर रहता है, कई विषयों पर रहता है, हो सकता है आगे चल के कुछ और विषयों पर भी एमआरपी लगाने की व्यवस्था बन सकती है | लेकिन कोई पूरे देश में प्राइस कंट्रोल लाने की हमारी कल्पना नहीं है, यह कल्पना नहीं है कि पूरे देश में हर एक व्यापार, हर एक उद्योग के ऊपर एक अधिकारी बैठ के उसका कॉस्ट ऑफ़ प्रोडक्शन निकालेगा और उसके ऊपर व्यापार होगा, व्यापार कम्पटीशन में होगा |
जितना कोई भी चीज़ में अगर मुनाफाखोरी ज्यादा होती है, तो चार नए व्यापारी खड़े हो जाते हैं | Competition will take care of excess profiteering. आखिर एक ज़माने में बिजली के दाम बहुत ज्यादा थे, अब इतने बिजली के फैक्ट्रीज आ गयीं हैं कि आज बिजली बिकती नहीं है| Competition takes care of the balance. और किसी ने यह भी पूछा कि एमआरपी से ज्यादा हम क्यों नहीं बेच सकते, एमआरपी का मतलब ही यह होता है कि inclusive of tax, आप इससे ज्यादा नहीं बेच सकते |
तो यह ज़रा आप सब ध्यान रखिए कोई एमआरपी से महंगा बेचता हो और जैसा किसी ने सही कहा आप व्यापारी या उद्योगपति भी हैं, आप उपभोक्ता भी हैं, तो ना तो आप किसी को एमआरपी से ज्यादा बेचिए और अगर आप उपभोक्ता के रूप में कुछ खरीद रहे हैं, कोई एमआरपी से ज्यादा बेचता है तो तुरंत complain करिए | और देखिए वही मिसाल मैं लूँगा 10 लोगों में 8 लोग अगर ईमानदार हैं और एक आदमी चोरी करता है तो इसका रास्ता एक ही है कि वह 8 लोगों को मिलकर उस चोर के बारे में सरकार को, अधिकारियों को बताना पड़ेगा, जिसको whistleblower बोलते हैं |
और फिर ईमानदारी से सबका धंधा चलेगा, अब समय आ गया है इस देश में – व्यापार सेवा की गुणवत्ता पर, या हमारे सामान के गुणवत्ता पर, quality of service or quality of goods पर व्यापार होना चाहिए बजाये कि ability to evade taxes, ability to cheat, मैं कितने टैक्स की चोरी कर सकता हूँ उससे मेरे व्यापार की सफलता नहीं होनी चाहिए, मेरी सेवा अच्छी होनी चाहिए, मेरा सामान अच्छा होना चाहिए, तब मैं व्यापार में ईमानदारी से प्रॉफिट करूँ | यह कल की, भविष्य की, व्यापार और उद्योग की कल्पना इस देश की बनते जा रही है | मैंने जैसे पहले कहा कुछ लोगों को अधिकारियों से, राजनीतिक नेताओं से तकलीफ होती थी, उसके लिए हमने पोलिटिकल फंडिंग को भी अटैक किया है, इलेक्टोरल बांड्स introduce कर रहे हैं | आप ईमानदार पैसा, टैक्स-पेड ईमानदार पैसे से आप पोलिटिकल fund दोगे तो आपको पूरा 100% जितना आप डोनेशन दोगे उसपर इनकम टैक्स में exemption मिलेगा, 100% exemption. मतलब आपने एक लाख रुपये दिए, वैसे पुणे के लोग थोड़े कम ही देते हैं, कंजूसी ज्यादा दिखाते हैं |
मुझे example लेना लेना चाहिए अगर आप 10 करोड़ दोगे तो 3 करोड़ 33 लाख रुपये आपके इनकम टैक्स में छूट मिलेगी आपको, 33% टैक्स | और अगर आपको डर लगता है कि मैं कांग्रेस को दूं, मैं एनसीपी को दूं, मैं बीजेपी को दूं, तो कहीं मेरे ऊपर कोई और पार्टी तकलीफ नहीं दे तो इलेक्टोरल बांड्स में आपकी इनफार्मेशन भी गुप्त रहेगी कि आपने किसको दिया लेकिन ईमानदार पैसा राजनीति में आएगा, आपको काला धन बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी अगर आप किसी राजनीतिक दल को समर्थन करना चाहें, और वह तो आपकी इच्छा है कोई करना चाहता है कोई नहीं करना चाहता |
इसी तरीके से अब पूरा सिस्टम ड्रिवेन व्यवस्था होने से अधिकारियों को यह अधिकार नहीं रहेगा कि आपको आ के तंग कर सकें, अब जबतक कंप्यूटर में कोई ट्रिगर नहीं आता है कि कुछ गलत काम हुआ है तबतक आपके ऊपर कोई harassment नहीं हो सकेगा | और ताली तो दो हाथ से बजती है, अगर हम सब फैसला कर रहे हैं कि हम गलत काम नहीं करेंगे और फिर कोई हमें harass करेगा तो हम भ्रष्ट्राचार नहीं करेंगे | एक बार दो बार कोई तंग कर सकता है तीसरी बार बोलेगा यार इस दुकान में मत जाओ इधर कुछ आना जाना नहीं है, छोड़ दो इसको | और अगर हम सब सामूहिक रूप से यह तय कर लें कि हम भ्रष्ट्राचार ना करेंगे ना होने देंगे तभी इस देश में एक ईमानदार व्यवस्था पनप सकती है, तभी वह नए भारत की कल्पना जो हम सब चाहते हैं जुड़ना, जिसमें हर व्यापारी का, हर उद्योगपति का, हर गरीब का, हर किसान का, सबका सम्मान हो, सबके जीवन में उसकी अपेक्षाओं की पूर्ति हो | अगर इस प्रकार का भारत हमें बनाना है तो हम सबको उसमें योगदान देना पड़ेगा, यह जनभागीदारी से होगा, यह एक व्यक्ति नहीं कर सकता है |
ऐसे नए भारत की व्यवस्था के लिए मैं आप सबसे दरख्वास्त करूँगा, आप सब जुडें किसी ने कहा कि AC, non-AC restaurant, मैं खुद जाता हूँ हनुमान restaurant है, साइंस सर्किल अगर आप मुंबई जाते हो आप देखते हो, वहां ऊपर AC है, नीचे non-AC है, नीचे 12% लगता है, ऊपर 18% लगेगा, पार्सल ले के जाओगे तो 12% लगेगा | अगर कोई ज्यादा चार्ज कर रहा है तो आप complain करिए उसको कहिये, पार्सल पर 12%, AC सेक्शन में बैठो 18%, non-AC में बैठो 12% | पर आखिर जब आप AC सेक्शन में बैठते हो तो वही इडली का दाम 3 गुना होता है कि नहीं होता है?
शिरोले जी की है ना दुकानें? Restaurant हैं? तो AC का रेट अलग होता है, non-AC का अलग होता है तो अगर टैक्स जो AC में जा रहा है उसकी क्षमता भी थोड़ा टैक्स ज्यादा देने की है | अगर उसके टैक्स देने से अगर वही मेरी बात किसी के घर में उज्ज्वला आये तो ख़ुशी की बात होनी चाहिए ना| आखिर आप सबने और मुझे पूरा विश्वास है इस रूम में जितने लोग हैं आप सबने Give It Up के तहत अपनी एलपीजी सब्सिडी छोड़ी थी ना प्रधानमंत्री के एक आवाहन पर? अगर किसी ने नहीं छोड़ी है तो सोमवार को मेहरबानी करके छोड़ देना | लेकिन देखिए ख़ुशी आती है है कि नहीं, कि मैंने एलपीजी मेरी सब्सिडी छोड़ी तो एक गरीब के घर में हमारी कोई माँ या बहन को आज 400 सिगरेट का धुआं नहीं फुंकना पड़ेगा, उसको एक साफ़ ईंधन, कुकिंग गैस मिलेगी जिससे वह एक अच्छा स्वस्थ जीवन बिता पायेगी | यह हम सबके लिए समाधान है कि नहीं है? हमें टैक्स को भी उसी रूप से देखना पड़ेगा, रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म का आपने कहा कि कैश में pay करना पड़ता है क्रेडिट नहीं इस्तेमाल कर सकते हैं उसका मुझे भी इमीडियेट समझ नहीं आ रहा है कि उसके पीछे हेतु क्या है, ज़रूर कुछ न कुछ हेतु सोचा होगा,मैं पता करूँगा और बाद में इनको बताऊंगा कि यह आपको बता दें | लेकिन थोड़ा कैश फ्लो की प्रॉब्लम है, उसकी वजह से क्या हम बैठ के रूठके बैठ जायेंगे या व्यवस्था के साथ जुड़ेंगे और चर्चा से आगे का मार्ग सुधारने की कोशिश करेंगे | आखिर मैं तो नहीं चेंज कर सकता हूँ, ना जेटली साहब कर सकते हैं ना मोदी जी कर सकते हैं | जीएसटी कौंसिल जब बैठेगा तो यह सब चीज़ों पर विचार करेगा, निर्णय लेगा और हम इतना तो समझ सकते हैं कि जब सामूहिक निर्णय सभी का होता है, तो जैसे हमारे कहते हैं न ‘पंचों की राय’ तो पंचों की राय के साथ तो समाज जाता ही है ना?
तो मुझे लगता है एक मौका है ईमानदार व्यवस्था के साथ जुड़ने का, हम सब इससे जुडें मैं आप सबको अपील करता हूँ, आवाहन करता हूँ | इसके साथ जुड़ के इसकी कुछ कठिनाइयाँ आएँगी, हमारे तक लायें हम उसको पूरी तरीके से संवेदना के साथ क्या सुधार कर सकते हैं वह जीएसटी कौंसिल के समक्ष रखके सुधार करने की पूरी कोशिश करेंगे | कुछ चीज़ों में असमर्थ रहेंगे तो उसमें आपको थोडा 19-20 मदद करनी पड़ेगी, लेकिन मिलजुलकर सकारात्मक सोच रखते हुए, positive contribution to the transformation of India, इस भाव से अगर हम चलेंगे तो मुझे पूरा विश्वास है यह पूरी तरीके से, सफलता से जीएसटी लागू होगा और हम सबको एक गुड एंड सिंपल टैक्स का लाभ मिलेगा|
बहुत बहुत धन्यवाद|
In a bid to meet the high demand during the summer months, Uttar Pradesh Power Corporation (UPPCL) has signed short-term bilateral agreements with several power producers, including Tata Power, PTC, NTPC Vidyut Vitaran Nigam, JSW and Maharashtra State Electricity Board, for the month of July. Giving details of the agreements, a senior official of the power corporation said approximately 1,500 MW power would be purchased in July through DEEP (discovery of efficient electricity price) e-bidding portal as well as from short-term bilateral purchases through open tenders. “The purchases would be made in two time slots of 19.00-24.00 hours in the evening and from 00 hours till 5.00 am in the morning and the cost of all these power purchases would be below Rs 4 a unit,” the official said.
The DEEP portal, launched last year by Union minister of state for power, coal, new & renewable energy and mines Piyush Goyal in New Delhi, provides a common e-bidding platform with e-reverse auction facility to facilitate nationwide power procurement through a wider network in order to bring uniformity and transparency in the process of power procurement.
As of now, UPPCL has made arrangements to buy additional power for the month of July only, while plans are being firmed up to buy a similar quantum of power for the months of August and September too, in order to tide over the shortfall of approximately 1500 MW-1800 MW power between demand and supply.
Uttar Pradesh’s average demand during peak hours goes up to 20,000 MW, while its available supply is around 1700-1800 MW. In order to fill the gap, the state often turns to bilateral power purchases as well as spot power from the exchange.
Source: http://www.financialexpress.com/industry/uppcl-signs-agreements-to-buy-1500-mw-power-for-summer/752986/

It is truly a pleasure to be amongst all my old friends, Mangesh, our Central Counselling member, CA Mr. Santhe who has authored the Journal Special Edition of a Journal, our young friend Rishabh, who has made all of us very proud today. I have with me the GST Commissioner, Mr. Mahendroo, and all my dear chartered accountant brothers and sisters, ladies and gentlemen. I still remember when I completed my chartered accountancy, I received the membership form of Bombay Chartered Accountant Society, I don’t recall now who was the President at that time.
But I don’t know whether I still continue to be a member, because I haven’t received any payment notices or anything. But truly a privilege, I came to know only today that our Mumbai Chartered Accountants’ Society was incorporated barely 6 days after the Act of Parliament. That’s truly a very-very great thing and something we all can be proud of. When Mumbai was recognized as probably being the nerve centre of the Chartered Accountancy profession even as early as 68 years ago.
We have just had a wonderful celebration in Delhi on the 1st of July, both our Chartered Accountants’ Day , GST Day as some people have thought it prudent to call it, and the fact that both of these have coincided is really a matter of great privilege and pride for all of us. The fact that I don’t know whether deliberately or coincidentally, the fact the GST, which to my mind is the biggest transformation this nation has seen in our 70 years of Independence is being started on CA Day is truly very-very redeeming for all of us, stakeholders who have participated in the economic journey of India. We now have a duty to participate in the economic transformation of India.
I was just glancing through this journal, very beautifully made. I would love to know who the; who has made this cartoon, I could use in my own efforts. You have done it? I particularly want to carry it to give it to Hasmukh Adhia. You have really played a beautiful pun – what an idea Sirji! It has really come out very well.
Of course, Chartered Accountants को नुक्स निकालने की आदत होती है| Arun Jaitley is much taller in height than Narendra Modi. I am just correcting a little, but artists and, particularly, cartoonists have full liberty. We chartered accountants don’t have that liberty. But, very well presented.
As I was seeing this, two thoughts came to my mind. though my subject, I asked Chetan Bhai, who is an old friend that you really want me to talk about a drab subject like energy, which doesn’t excite any of our chartered accountants. But, let’s see, we can do a interplay between the two. But, while we are at it, the one thing that came out of both this cartoon and international experiences, has been that inflation somehow tends to show its ugly head in the first couple of quarters after the GST implementation. And, I remember when the date was being debated, discussed in the GST council, and most all the decisions have to be taken in the GST Council as you are all aware. We had just one out of 30 members in that, in the central government and बड़ा जिगर लगता है to say that we are giving up our powers to tax. The Centre government would have the decision on service tax, on excise, on all of that.
We have actually given it up to a body where we have much less say than the states have, and, of course, I think it’s a great testimony to Finance Minister, Mr. Jaitley’s own personality, own sagacity that every decision in this GST Council has been taken unanimously, everyone of it.
But, as this cartoon very rightly shows also, the consumer, having to climb up and prices on the top, so I think you are trying to reflect on inflation, but that is where I think all of us in this room can play a role. And if we don’t play that role, we would be doing injustice to this great transformation, to this great reform. And why I say this is that, after all, it’s a culmination of some 17 taxes and 23 cesses. But, earlier they were hidden in different pockets, small pockets, but now all of that is being converted into a credit and the final figure will be transparently known to all consumers. But, it is incumbent on all traders, all business persons, manufacturers, every part of the economic value chain, to ensure that the correct pricing is carried forward and input credits are correctly given.
I will share a example, I mean, I took a hair cut coincidentally on 1st of July, I wanted to look good in the CA programme that evening. And, as I walked out, and that’s the first time I saw my bill, because आजतक कभी बिल देखने की इतनी आदत नहीं थी, and I asked my colleague, कि is the basic price the same as I was paying earlier? And it was. So 15 became 18, but if the base price remains the same and this will happen across the country in different products. Some will do it deliberately, many will do it out of ignorance. So, I think it will be important for all of us as a community to ensure that customers are not jilted, and the correct pricing is right size at the input level.
So, if the base price of a hair cut was 100 rupees, let’s say, and there is going to be input credits coming in, whether it’s on shampoo, on whatever are the inputs on the house keeping services, security services, the rent of the premises, all of these are going to be available. Also to all of us Chartered Accountants by the way, and there are some reports that CAs have started jacking up their fees. I thought it should have been the other way around. But, it will be important that we advise our clients, our people whom we have served to give the correct input credit as the materials, goods or services move from one part of the value chain to the other. Otherwise, what we are trying to save the whole system from the harassment, tax terrorism, will once again show its ugly head. Because, after all, we cannot allow runaway inflation in this system, and I think many of you may also be aware while no country of the size of India has ever been able to implement GST. In most cases, no government of the day has the audacity or has the gumption or the willingness, because every government that has introduced GST has lost the next election.
And why I say this to you is that this was also deliberated by us and it was not the first occasion that a decision came up before this government, which was not popular, many decisions we have taken, which have not been popular. And many times in the cabinet, this used to come up, is this the right time to take this decision, there is UP election happening, there is this, there is that, can we defer it and every single time, the honourable Prime Minister had only one question – is this in public interest? Is this in national interest? If it is, then the time is now, right now.
This nation has had decades where we have only been focussed on politics, for decades, we have tried to calibrate everything to elections, and in this country elections are held almost every 3-5 months in different ways in different parts of the country. So, he has steadfastly on the last 3 years kept the view that whatever decision is in national interest, जनहित में जो निर्णय करना है, तैयार हो, करो, चिंता मत करो, चुनाव तो आते रहेंगे|
And, I remember some decision we were taking before the UP election where unanimously the whole cabinet was saying, थोड़ा defer कर देते हैं election के बाद करेंगे| I said, नहीं अभी होगा इसमें डिले करने से देश का नुकसान होगा और आप लोग जाकर सब जनता को समझाओ, जनता समझेगी, जनता हमारे साथ है | जनता को विश्वास है कि जो कर रहे हैं वह अच्छा कर रहे हैं, अगर हमें विश्वास है तो जनता को भी विश्वास होगा | And you saw the results in UP, Uttarakhand – 4 governments out of 5, 325 seats which in its peak, no party has ever been able to get it in UP, and this is a smaller assembly, earlier it used to be Uttarakhand-UP combined. 325 out of only 403 MLAs.
What I’m only trying to reflect on is decisions are not being taken with the fear of worry कि भाई if every government who has taken GST तो हमारा क्या हाल होगा अगले चुनाव में| Gujarat elections round the corner. Decisions are taken on what is good for the country, what will serve this country for years and years to come, and end of the day, what will help to eliminate this problem of black money, this problem of corruption. That has become a prime focus of Prime Minister Modi and his government, how can we use this period in government to leave behind a system, an establishment which can run honestly, the world can see that India is now run honestly, and we can leave behind for all these youngsters at the back of the room a better system to do work in, a better country to live in where they can sleep peacefully at night and don’t have to worry कि कल raid होगी, कल क्या होगा, कल क्या पकड़ा जायेगा, कल कौन से ऑफिस से हमको summon आएगा!
And, that is the kind of country I think we all want to live in, none of us likes to live in this atmosphere of uncertainty, corruption, knowing full well that there will be problems, sometime or the other somebody can get caught. And the appeal that Prime Minister Modi made on 1st of July was with a real heavy heart. He is appealing to all of us to be a part of this change we all want to see in the world. We will all have to be a part of that change, we will all have to make a difference to India’s future.
In some sense, I am tasked also with running the Renewable Energy Ministry, which has a lot of interplay with concerns of climate change. After all, why are we looking at climate change so seriously? We are all concerned, what will happen to the globe, what will happen to the planet as we go along. Can we indiscriminately continue to pollute this world any further, or is it almost time up now. Unless we protect this planet, unless we take serious measures to improve the way energy is produced, to improve the way carbon dioxide and other pollutants are let go into the universe, into the atmosphere, we may not have a world to live in 50-70 years down the road.
And, in some sense, why do we do that, because I believe, as Mahatma Gandhi had said that we are all trustees on this planet. We have inherited the earth so that we make a better place to live in for our next generation. And, in some sense, that is the objective with which this government is making such transformational changes, such impactful measures, so that we don’t come in in a business of as usual situation and leave behind a business as usual country. Can we use this 5-year period, 3 of which are already over now to make a difference to the future of our India, and to have been able to do whatever we have in the last three years while it is quite satisfying.
It gives us a lot of encouragement, but if also shows us that the country expects much more. It’s an aspirational India, a 125 crore Indians aspiring for a better quality of life, and rightly so. After all, 7 decades after independence, can we have nearly 20-25 crore people without electricity? Can we have millions of people without shelter on their head? Can we still afford to have malnourishment in this country? Can we have a father carrying a child for 10 kms because there is no medical facility nearby, there is no transportation available? And, God knows whether he’s in time to save his child or not in time.
Can we afford that our armed forces, our army, our navy, our air force does not get the most modern of weapons to protect us at the borders? Can we afford to have even a single girl child not getting the benefit of quality education? And, in that situation, very often people ask me, when I am interacting with traders, business people and people who are not used to paying their taxes, particularly, are asking this question that why should I pay my tax? And, I have only this to tell them that just go to your village once more, wherever, we have all come from somewhere or the other. I doubt any, I mean, you may have been born in Mumbai, which was itself almost a village sometime or the other in the past. But, wherever our roots are, if we just go back our roots once, and see whether really there has been inclusive progress in the country, are our people, our farmers, any better off than they were maybe 30-50 years ago, are our children any better off than the children of 30-40 years ago? Has the quality of education in India improved or deteriorated, save and except, a few schools where you and I may be paying lakhs of rupees as fees and maybe giving some high quality education for our children.
Does not every child in this country have a right to that same quality of education or are we permanently going to have two Indias of the ‘haves’ and the ‘have nots’. Are we going to relegate a large section of our country to perpetual disparity, disentitle a large section of the country from their aspirations or are we going to collectively work to create an honest society where we know that when we pay our taxes, it is going for some public good or when we recognize and feel ashamed that either when we don’t pay our taxes honestly or we help somebody not to pay his taxes honestly to evade his taxes, we may actually be snatching away a child’s second meal of the day. We may actually be depriving the parents of a poor farmer from healthcare. We may possibly be causing one more child to become malnourished and I think if that recognition comes into our basic thinking. And, I say this with full authority ladies and gentlemen, if this comes into the thinking of only us Chartered Accountants in this country, forget everybody else, forget about 125 crore Indians, we 2.5 lakh chartered accountants, and if we can inculcate that into our students also, our 1 million strong community can transform the future of India alone.
And, we have that power, we have that ability. We can do it. Very often we say, corruption के बगैर काम ही नहीं हो सकता है, भ्रष्ट्राचार के बगैर हम कैसे काम करेंगे, मुझे अभी भी याद है, I don’t know, some of the seniors here may remember, I did my articles in a very small firm, one room firm. SR Rege, if anybody remembers him. It was a very small firm in Parel, Lalbagh area. रेगे जी भी दिव्यांग थे मुझे इसलिए याद आया आज क्योंकि हमने आज एक सम्मानित किया है एक हमारे छोटे भाई को जिसने परिस्थितियों के बावजूद अपना स्थान बनाया इस समाज में, रेगे साहब भी दिव्यांग थे|
He taught me two very serious lessons in my life, two lessons. One, of course, is an easier one, we have all, probably, benefitted by that. He taught me what being meticulous is. I remember if we had drafted a letter, even a single comma or hyphenation or a spelling mistake, and in those days we didn’t have DTP and computers, so you had to sit and retype that letter. And, I don’t know how many times he would make us sit and carefully redraft letters going to the income tax department, of all the things. But, we were preparing it. Our conscience was important, not the reader’s ability to understand or not.
I remember when we were tallying balance sheets, again we didn’t have; I think calculators had barely come in, but in exams, we were not allowed calculators. But, even if it was a 1 paisa difference between the debit and credit side, Rege sahib सोने नहीं देते थे, 3-3, 4-4 दिन लग जायें वह एक पैसा ढूँढने के लिए. But you have to find that, he would never allow us to clear a balance sheet with some entries here and there. And, he had a right logic. He said it could be 1 crore rupees and 1 paisa on one side and 1 crore on the other side, and netting off 2 or 1 paisa difference. He insisted ढूंढो, पूरा every एंट्री ढूंढो शुरू से लेकिन you have to find it. And we didn’t have all the facilities of software matching and this and that in that time. But that lesson is holding us in good stead, now almost 29 years after I completed my Chartered Accountancy. Even today, I am able to whatever little bit of work I have been able to do is on the back of that grooming, which made you meticulous in your work, so you can be equally demanding and ask for exacting standards of performance from your team around you.
And, the other big lesson was about corruption, Rege never paid a bribe in his life and I remember going to the income tax offices, I think nowadays at least you must be getting some chair to sit on, in our time there was no chairs also. So, you hang around the passages. If a peon is friendly with you, you will get a stool. Am I right Yogendra Bhai? And, the better option was कि कोई न कोई income tax officer अगर दोस्त है तो you hang around his table till your turn comes. And, there were days when you never got called in also, you would get queries upon queries, because the guy was giving you a message and then the fourth time you get the query, the first one were being repeated. But, when I told Mr. Rege कि साहब यह तो पहले answer कर चुके हैं, वह same है, he would say अरे फिर तो बहुत अच्छा है, तुम answer repeat कर दो| But you know what happened? Gradually, everybody in Aaykar Bhawan and Piramal House in Lal Bagh, everybody realised कि इधर तो दाल नहीं गलने वाली है तो हमारे assessment सबसे fastest होने लग गए, बिना कोई लफड़े. वह रेगे का केस है, करके ख़त्म करो कुछ आना जाना नहीं है इसमें छोड़ दो|
Can we not imagine that type of a situation in this country and there are 3 or 4, actually, only 3 categories of clients, if I may, whom we can briefly assess.
There is one category of people जो चाहते नहीं हैं गलत काम करना, वह हालात की वजह से करना पड़ता है, हालात भी हो सकता कि व्यवस्था, the entire establishment makes you do it. You have to pay bribes here, there, this that, maybe, even to the officials and different departments, politicians, you had to pay politicians also. We are trying to put an end to that. Even for political donations, we have bought in electoral bonds, कि लोग cheque से दें, टैक्स पेड ईमानदार पैसा दें उसपर भी 100 percent tax deduction मिलेगा|
So, you give a 100 crore rupee donation, I am just giving you hints, by the way. You can encourage you clients. It’s a tax saving tool also. 100% tax deduction. But other than that, GST, demonetisation all of these things will help us gradually give a simple tax structure. Everybody is now in the whole system and it’s been beautifully made. Adhia and his team really deserve the highest level of compliments, beautiful structure.
मैंने जितना स्टडी किया GST, it’s remarkable. मैं नहीं बना सकता था इतना अच्छा जो इन लोगों ने बनाया है | अब इस हालात को ही अगर हम बदल दें, सिस्टम सिंपल हो जाये, policy-driven approach हो, which we have tried to do in my own sectors also, in power, in coal, in renewable energy. हर एक चीज़ पारदर्शिता से, transparency से, bid out करो, payments को लाइन में, public domain में डाल दो तो line में ही payment होगी तो payment के लिए भी रिश्वत नहीं देनी पड़े| Every way, yesterday I got an idea, उसके लिए भी I have asked, कोयले की कंपनी से मालूम पड़ा कि कौन सी सीम से कोयला लेना, उसके लिए भी रिश्वत दे के you can select a better grade या मेरा कोयला पहले सप्लाई हो जाये दूसरे से, कल परसों मैं किसी का इंटरव्यू कर रहा था तो मैं हर एक को पूछता हूँ कि क्या हो रहा है काम गलत, तो मालूम पड़ा . immediately ordered एक mobile app बनाओ और मैं थोड़ा बदनाम हूँ क्योंकि मैं थोड़ा बदनाम हूँ क्योंकि apps हो गए हैं कि मेरा phone भर गया था, तो अभी हमने एक icon Govt करके उसके अन्दर सब apps डाल दिए हैं इतने ज्यादा apps हो गए हैं| But i believe transparency can transform things, जितना ज्यादा transparent होगी सरकार और फाइलों से निकलकर public domain में जाएगी उतना ज्यादा रिश्वत लेने की कैपेसिटी ख़त्म हो जाएगी system की| अब coal block auctions करना शुरू किया हमारी सरकार ने, every mineral block is now only auctioned, not given out to friends, relatives, MPs, nobody. अब तो Linkage भी नहीं मिलेगी किसी को without a proper due transparency and process. Payments – I am putting everything into an app so everybody knows जिस दिन माल एक्सेप्ट हो गया वह मेरा payment log in हो गया, उसके बाद वाले को payment हो ही नहीं सकता जबतक मेरा नहीं होगा |
मैंने कल एक app launch किया MERIT, there is a thing called Merit Order Dispatch कि सबसे सस्ती बिजली state DISCOM पहले खरीदेगी variable cost पर और यह भी flout होता था तो जब study किया और मालूम पड़ा flout होने के cases तो I said इसको भी एक app में public domain में डालो, जनता अपने आप नोच के states को force कर देगी कि सबलोग सस्ते से सस्ती बिजली ले|
We are trying to do all that transparency, and we are trying to do the same thing in the tax laws, whether it’s GST. Hopefully, we will continue to make changes in income tax to try and simplify and reduce all these exemptions, ….. have lower rates of taxes, less complications in the system. We can only do that for those people who really were हालात के मारे एक तरह से of course, उसमें एक और category है.
If these 6 gentlemen and I, 7 of us are in one market, समझो हम कपड़ा बाज़ार में हैं. They are all pay their taxes honestly, I do. So, my product will, obviously become cheaper. Now, what do they do? They have to compete with somebody who is willing to give the same product at a cheaper price. So, either they will be driven out of business in the competition or they will use the good old saying, “if you can’t beat them, join them.” यह भी चोरी करना शुरू करेंगे| और हम तो मुंबई वाले हैं हमको सबको मालूम है रियल एस्टेट में यह हुआ था कुछ साल पहले | कोई बालकनी फ्री यूज़ करता था, कोई फ्लावर बेड फ्री यूज़ करता था, कोई AHU room बनाता था.
We have all suffered also. Innocently, many of us as customers have suffered, many of us have helped do the thing. Whatever, we have been both sides of the fence. एक सुबोध कुमार कमिश्नर आया था मुंबई में, if you recall. What had happened was one or two builders started cheating, customer को लगा कि भाई इनका सस्ता है माल, अच्छा है, बिल्डिंग अच्छी है, सब कुछ अच्छा है, एरिया ज्यादा मिलता है, उसकी तरफ जाने लगे | आहिस्ते-आहिस्ते सब बिल्डर्स ने फॉलो करने लगे तो पूरे मुंबई में ही सिस्टम ही वैसा हो गया कि everybody is cheating in the Trade वह भी एक प्रकार के हालात के मारे लोग होते हैं जिनको choice नहीं है करना नहीं चाहते हैं पर कम्पटीशन में करना पड़ता है यह सब, वह भी एक प्रकार से GST में उनको भी तकलीफ कम होगी | क्योंकि GST में हो सकता है मैं अपना सेल ना दिखाऊँ लेकिन भरोसा नहीं है कि उस वैल्यू चैन में किधर से वह डेटा कैप्चर हो जायेगा| It’s like हम लोग पहले बिल्टी बनाते थे ना, transport receipt और एक कच्चा इनवॉइस ट्रक से साथ जाता था, किधर चेक पोस्ट पर रिकॉर्ड हो गया तो कस्टमर को फ़ोन करते थे यह एन्टर कर लो भाई यह बिल | सच है कि नहीं, मैं exagerate तो नहीं कर रहा हूँ ना? और अगर चेक पोस्ट पर रिकॉर्ड नहीं हुआ, रिश्वत दे के हम निकल गए तो वहां पहुँच के फाड़ दो तो बिल नंबर फ्री हो गया |
This is how everything was going on for so many years, अब 70 साल हो गए हैं, और हम सब उसमें शामिल हैं ना कोई| None of us is outside that system. I include myself in that. We are all part of this story, 70 साल से चल रहा है, fine tune होते जा रहा है, it’s getting sharper and sharper. अब GSTN में यह है कि पेट्रोल पंप का भी सेल आ जायेगा उसमें, चाहे वह GSTN में पेट्रोल डीजल नहीं हो लेकिन जो बाकी सर्विसेज दे रहा है वह तो है तो उसको सेल्स तो डालनी पड़ेगी, सेल्स डालेगा साथ में इनपुट क्रेडिट लेने की कोशिश करेगा | तो आहिस्ते-आहिस्ते कोई न कोई कंप्यूटर में ट्रिगर आएगा यार यह ट्रक up एंड down हो रहा है मुंबई to बैंगलोर and back, चार बार हो के आया, without transporting any goods, चक्कर क्या है? He likes to transport his truck without goods in it.
This system has been so well designed that from every source, data is coming into one box. पहले क्या था एक्साइज वाले को पटा लो, वैट वाले को मालूम ही नहीं पड़ेगा, एक्साइज ने पकड़ा सुलटा दो ख़त्म हो गयी बात, वैट ने पकड़ा तो एक्साइज को मालूम नहीं पड़ेगा, दोनों ने पकड़ा दोनों से सेटल करो, इनकम टैक्स को मालूम नहीं पड़ेगा|
That is going to change. तो जिन लोगों को करना नहीं था उनके लिए सुविधा बहुत हो गयी है, जो ज़बरदस्ती करना पड़ता था उनको टेंशन नहीं है उनके लिए तो यह सिस्टम बहुत ही अच्छा है | एक सेकंड केटेगरी थी जिनके खून में ही था कि हमको तो यही धंधा करना है, who are not willing to pay taxes. Who would ask me this kind of question in such public engagements – why should I pay my tax?
Some of them even often go on strike. And, for such people, they are not concerned about competition, they are not concerned about duty, they are not concerned कि शहर भी चलता है, व्यवस्थाएं बनती हैं, बिजली की व्यवस्था बननी है, सडकें बननी हैं, बिल्डिंग बननी हैं. They will always see the glass half full. They will say वह सड़क टूटी हुई है मैं टैक्स क्यों भरूं? मेरे घर के बाहर बिजली का खम्बा, लाइट नहीं चल रही है, मैं टैक्स क्यों भरूं? बहुत आसन है यह सब चीज़ें बोलना, पर फिर वही बात है कि देश में आज व्यापक रूप से देखें तो आज भी कितने करोड़ों लोग हैं जिनके लिए हमें कुछ करना पड़ेगा |
After all, आप सोचिये, और मैं समझता हूँ इस रूम में जितने लोग बैठे हैं लगभग सभी ने प्रधानमंत्री जी के एक ही आवाहन पर गिव इट up के अन्दर अपनी एलपीजी सब्सिडी छोड़ी होगी, अगर किसी ने नहीं छोड़ी है तो कल monday को छोड़ देना |
But truly, don’t you get the satisfaction that I could have any case afford it, आजकल तो शायद 70-80 रुपये जाता है, ज्यादा है भी नहीं but we can all afford it ना, पर जो हमने give up किया, वह हमने कोई fiscal deficit में नहीं डाला, किसी गरीब की झोपड़ी में कोई महिला, कोई बहन को जो 400 सिगरेट का धुआं फूंकना पड़ता था उसके घर में अगर मुफ्त एलपीजी कनेक्शन गया, isn’t it a very satisfying feeling for all of us? आपको ख़ुशी नहीं होती है उस बात की?
This is somewhat like that, When we are evading taxes or helping anybody evade tax, keep in mind, कि किसी के पेट पर लात मार रहे हो, कभी किया नहीं जायेगा, आपका हाथ ही नहीं हिलेगा करने के लिए| और एक प्रकार से अब देश बदल रहा है मैं जितनी जगह जाता हूँ ना और विषय की चर्चा करता हूँ, सबसे ज्यादा उत्साह youngsters में देखता हूँ, youngsters बोलते हैं हमको बाप-दादा की तरह धंधा नहीं करना, हमको ईमानदार व्यवस्था बनानी है | रात को आराम से सुख सागर जायेंगे, जूस पियेंगे, पाव भाजी खायेंगे|
So we want to have good time, enjoy ourselves, sleep peacefully at night. पर आजकल तो जब कोई पकड़ा जाता है तो उसका CA को भी लपेटे में लेते हैं ना शायद? पर हम चाहते ही नहीं हैं वह करना, इसलिए मैंने कहा कि व्यवस्था को एकदम सिंपल करने की कोशिश कर रहे हैं | What honorable PM said, Good and Simple Tax. एंड ईमानदारी से, मेरे को कल कोई सॉफ्टवेर दिखा रहा था, KPMG and …had prepared to run this whole process. It’s so simple. मैं अभी तक तो भाषण में बोलता था पर पहली बार मैंने कल ही देखा वह सॉफ्टवेर| It really is simple. It’s so beautifully designed.
All this misinformation campaign of 37 returns and all, it’s all over. आज कोई चर्चा नहीं करता है, once people realize, 37 छोड़ो इसमें तो एक भी रिटर्न नहीं है, ईमानदारी से एक भी रिटर्न नहीं है| मैं खुद एक्साइज के लिए अलग, सेल्स, परचेस, फलाना-ढिमका बनाता था, जब मैं फैक्ट्री चलाता था| I started when I was in 12th Standard, I started a small scale unit. So, I distinctly remember, एक्साइज के लिए अलग रजिस्टर बन रही है, सेल्स टैक्स के लिए अलग बन रही है, हमारे वहां एंट्री टैक्स होती थी उसके लिए अलग बन रही है| पता नहीं प्रोफेशन टैक्स, फलाना-ढिमका, क्या क्या था यह सब कवर हुआ है, क्या हुआ है पता नहीं| But it was so frustrating.
और अभी आपको क्या करना है? एक सेल्स रजिस्टर बनानी है, पीरियड, स्टोरी ओवर| Everything else, it will take some time to get the system fine tune, नहीं तो शुरू में थोड़ा होगा जीएसटी नंबर गलत डाल दिया, नाम गलत डाल दिया, फ़ोन करो, आजकल तो फ़ोन भी फ्री हो गया है| और बोल दो भाई आपने एन्टर नहीं किया ठीक से नंबर, मेरे को परचेस में दिख नहीं रहा है ऑटो-पॉप्युलेट नहीं हुआ है| सामने वाला ढीट है उसको एन्टर नहीं करना है तो आप खुद डाल दो अपना परचेस उसके यहाँ pop-up जायेगा अपने आप| The ability to cheat in this system is getting more and more difficult. If you ask me, near impossible. And, let’s be a party to this change. Let us all conspire, as they say, वह शाहरुख खान का dialogue – पूरी कायनात भी हमारी मदद करेगी अगर हम सब तय कर लें |
Energising India पूरा ही रह गया, हाँ? But, then he had said changing paradigm for professional so I am at least sticking to the subject. Energy is a boring subject. अभी क्या हुआ कि प्रधानमंत्री उस दिन एक किधर इंडिया टुडे को संबोधित कर रहे थे तो उन्होंने कहा कि यह ख़ुशी की बात है कि कुछ न कुछ परिवर्तन हुआ है, बदलाव हुआ है देश में, लेकिन उसके साथ कभी कभी यह भी लगता है कि लोगों की मेमोरी बड़ी शोर्ट होती है| हम मुंबई में हैं तो we are relatively better off. मुंबई में बिजली की समस्या नहीं थी, पहले भी नहीं थी, पर आप देश में किधर भी जाओ और किसी से भी बात करो| अपने ही कोई गाँव, और गुजरात के यहाँ बहुत लोग है, क्योंकि मोदी जी ने 2002-03 में ही सुधार कर लिया था तो वहां भी परिस्थिति काफी अच्छी थी, पर otherwise throughout the country, power was a ज्वलंत issue, always an issue which would agitate citizens of the country.
कोयले की कमी रहती थी, we are all aware of that. Coal always in short supply, it was a black market commodity in this country. So much so, forget the Coalgate scam of 1 lakh 86 thousand crores that CAG had pointed out, I will tell you what the real scam has happened in this country.
Despite having one of the world’s largest reserves of coal, we were so helpless as a nation, our mindset was so weak that we never thought we can be self-sufficient in coal. We had planned our entire power sector based on imported coal. Today, in India 83,100 MW of thermal capacity power plants has been set up, which is either partially, in many cases fully, dependent on imported coal. So, effectively, because of our inability to think boldly that we can produce enough coal, the country has set up so many power plants that we are leaving a 25-year liability to continue to import coal, because these plants cannot use domestic coal.
तो हर साल लाख, एक लाख करोड़ का कोयला इम्पोर्ट होता है इस देश में और मेरे पास आज सिचुएशन ऐसी है कि मार्च 31 को तो 62 मिलियन टन हमने कम कम करके अभी 48 मिलियन टन कोयला pitheads पर पड़ा है, उसमें से एक कंपनी में तो जल भी रहा है तो उसकी एकदम प्रोडक्शन मैंने रुकवाई है |
I am at minus coal production, can you believe? Country coal black market होता था, दो साल में, within last two years, सिचुएशन ऐसी हो गयी कि I am at minus coal production. Last year I had to regulate production the whole year, but still it was a little bit positive. इस साल तो minus चल रहा है first quarter, until today, because whatever I can sell, I am selling. पर यह जो imported coal के ऊपर प्लांट्स लगे हैं तो एक प्रकार से 25 lakh crore की liability हमारे ऊपर क्योंकि हमारी क्षमता नहीं थी यह सोचने की कि हम आत्मनिर्भर हो सकते हैं कोई|
I think it’s a biggest scam than the 186,000 crores. That is the sad part how we have planned our country’s situation over the years. अब यह लाखों करोड़ के stressed assets is a part of the same bad planning. क्या हम कल्पना नहीं कर सकते थे कि shortage कितनी है और कितनी बिजली और लगेगी| Should we have allowed about 1 lakh MW of power plants to mushroom all over the country, looking at a mirage of shortage which really could be met with just implementing a few projects and getting it going and phasing out the balance. And people’s memory is so short that they forget that only until 3 years ago, headlines जब मैं मंत्री बना, one third of the power plants had coal shortage, one third. They had critical, less than 7 days, half of them less than 2 or 3 days, some were running on the Japanese style – Just in time inventory. I don’t think we can afford to have that at least in the power sector.
People have forgotten the number of outages. आप गाँव में चले जाओ, कोई छोटे शहर में चले जाओ, 5-5, 7-7 घंटे बिजली नहीं रहती थी, शाम के समय तो 100% जाती थी, peak hour load होने के कारण| Of course, I am glad that all those things are behind us today. We have surplus coal, surplus energy, surplus transmission lines. लगभग आप कोई भी समय देख लो country में even in peak hours, power is available throughout the country at…. we have an app which we you can also download, which gives you right now, अभी के समय और यह peak hour है, Thursday is a working day, peak hour and this is peak summer, right?
आज का जो Average price रही power की throughout the day was Rs 2.52 on the exchange, at this time peak hour it is Rs 4.13, which means during the earlier part of the day वह 1-1.5 रुपये में भी मिली होगी| Or 100% of the time, as per state’s data, which comes directly into this app from all the states, 100% of the time there was enough transmission ability कि पॉवर जिधर चाहिए जिस स्टेट को खरीद सकते हैं | और आपकी जानकारी के लिए, और अगर आप कोई आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, उत्तर प्रदेश, इन सबकी स्थिति पता करें तो 8 से 14 रुपये के बीच बिजली खरीदते थे यह सब स्टेट्स, between Rs 8 to Rs 14 per kilowatt hour, per unit.
आज एक भी दिन ऐसा नहीं है जब उनको इस दाम पर बिजली खरीदनी पड़ती है, not one day in the whole year. Of course, many other initiatives on renewable energy, today the world is looking at India. आज पूरे विश्व में चर्चा है भारत के renewable energy programme की कि how India is taking the lead in clean energy and giving an example to the world. Despite the fact that we are not responsible for this problem in the first place. आज जितना Carbon dioxide है ऊपर atmosphere में, भारत का contribution तो 2-2.25% है, supporting 17% of world population. Despite that, as a responsible global citizen we are contributing to mitigate this problem, we are working how to encourage clean energy and reduce problem levels of the world.
I hope all of you have at least changed your bulbs to LED bulbs and tube lights, किसी ने नहीं किया है तो उसकी chartered accountancy degree वापिस ले लीजिये| वैसे तो degree है भी नहीं, I have been telling out institute people that why don’t you talk to Prakash Javadekar, our honourable HRD Minister, we can easily make our… जितना हम मेहनत करते हैं मुझे लगता है medical छोड के और किसी को नहीं करनी पड़ती होगी! मेरे टाइम में तो पास परसेंटेज 1% था, I don’t know आजकल क्या है? 5% है? चलो much better. And I remember in those days, Rank तभी मिलता था if you clear both inter and final in first attempt.
What I am only trying to say is that LEDs, which were sold by one government company called Energy Efficiency Services Limited. तो 2013-14 में this EESL used to procure LED bulbs, 7 Watt bulbs at 310 rupees, base price, उसपर taxes, एक्साइज, सेल्स टैक्स यह सब लगता था, मार्केटिंग कास्ट, इंटरेस्ट कास्ट, डिस्ट्रीब्यूशन कास्ट| फिर सरकार 100 रुपये सब्सिडी देती थी उसपर, और यह EESL साल में 6 लाख बल्ब बेचती थी, 6 lakh bulbs in a year. 2013-14 की बात कर रहा हूँ, बहुत इतिहास की बात नहीं कर रहा हूँ| अभी यही कंपनी, the same government company, सरकारी कंपनी है, is selling 6 lakh bulbs every day.
And which is why I said जो रेगे साहब ने सिखाया जो हमने CA में सीखा उसका लाभ कैसे हुआ, एक्चुअली मुझे पहले 3-4 महीने तो बताना नहीं, बाहर कहीं लोग मेरा मजाक उड़ायेंगे, 3-4 महीने तो मुझे मालूम ही नहीं था कि यह division मेरे अंडर आता है Bureau of Energy Efficiency. एक दिन एक cabinet note आया तो मैंने कहा यह क्या है, what have I got to do with this, सर यह तो पूरा department है Bureau of Energy Efficiency in the Ministry of Power, स्टडी किया तो मालूम पड़ा 310 में खरीदते हैं और 6 लाख बेचते हैं, और फ़ायदा कितना? कि जहाँ 60 W या 100 W का बल्ब लगता है वह 7 या 9 W के बल्ब से उतनी ही रोशनी आ सकती है | We are chartered accountants, इसलिए मैंने कहा अगर किसी ने नहीं बदला है अभी तक he doesn’t deserve to be a CA. इतना drastic saving and I tell you you just whoever has not, change all your lighting to LEDs, tube light भी आ गयी है अभी तो, change your ceiling fan to DC or energy efficient fans and if you can change your air conditioning to 4-star, 5-star air conditioning, see the drastic change in your electricity.
अच्छा गरीब के घर में तो यह सब बाकी चीज़ें कम होती हैं, पंखा, लाइट अधिकांश गरीबों के मध्यम वर्गीय घरों में तो यह होता है, हो सकता है एक AC हो या कुछ| आप सोचिये क्या drastic reduction on electricity bill हो सकता है| I calculated on a broad-brush way, 40,000 करोड़ रुपये सालाना consumer bill में बचेगा| अब 6 लाख बल्ब एक साल में बेचेंगे तो तो मुझे तो छोड़ो मेरी 10 पीढियां आगे तक भी चलेंगी तब तक India में replace नहीं होगा| Because the speed of demand will be more than the speed of sale. So it had to be changed, the dimension had to be changed.
Subsidy doesn’t help any project. आप 100 रुपये सब्सिडी रखो, वित्त मंत्री मुझे 100 करोड़ रुपये भी दे दें तो अगर 100 रुपये मुझे सब्सिडी देनी है एक बल्ब पर तो मैं 1 करोड़ ही बल्ब बेच पाउँगा, 1000 करोड़ दे दे तो 10 करोड़ बल्ब बेच पाउँगा, country में शायद हमने तभी अनुमान लगाया था 77 करोड़ बल्ब, incandescent bulb, पुराने ज़माने के बिकते थे हर साल| तो हमने एक टारगेट रखा 77 crore bulbs बेचने का| i am sure country में तो 100-150, 125-150 बल्ब होंगे यूज़ में, offices, hotels, all other institutions put together. ऐसी परिस्थिति में we decided we should scale it up but then we should make a value proposition. तो मैंने ऐसे ही बैठे-बैठे मीटिंग में कहा यह बल्ब Rs 99 में खरीदना, मेरा बड़ा मजाक उड़ाया सबने, and I am sure room में जाकर officers ने बोला होगा बेवक़ूफ़ बच्चा नया मंत्री बना है हवा में बात कर रहा है| I said 99 में खरीदना है, let’s engage with all the sellers और 120 में बेचना है, 10 रुपये upfront लेंगे और बाकी 11 महीने या 10 महीने 10-10 रुपये ले के जितनी saving है उससे कम पैसा हर महीने देना पड़े customer को जिससे यह व्यापक रूप में बड़ा हो सके|
And I was banking on three things – economies of scale, honesty, एकदम भ्रष्ट्राचार मुक्त खरीदेंगे और technological advancement होगी. Best technology आएँगी जब scale दिखेगा, 6 लाख में कौन यहाँ पर फैक्ट्री लगाएगा, कौन manufacture करेगा| आप को जानकर ख़ुशी होगी, अभी नहीं अब तो लगभग सवा साल से यह बल्ब 38 से 40 रुपये के बीच में हो गया है, 310 से 38 पर पहुँच गया है, 85% reduction. 7W बल्ब के बदले हम 9W देते हैं फिर भी इतना दाम कम हुआ, साथ ही साथ suppliers कोई ऐरे-गैरे नहीं हैं, Rs 38 में 5 करोड़ बल्ब तो सिर्फ Phillips ने सप्लाई किये, Phillips, the world’s largest lighting company. 9W bulb from Phillips at Rs 38, 5 crore. Osram, Crompton Greaves, Surya, top notch companies.
हमारे जो स्टैंडर्ड्स हैं, उसको अब तो चलो अमेरिका में परिस्थिति बदल गयी है जो पहले Energy Secretary थे, Ernie Moniz, वह विश्व में जाते थे तो भारत के specs ऐसे दिखाते थे कि follow the Indian example.
यह होती है 56 इंच की छाती की दुनिया हमारा Example फॉलो करती है. बदलाव इतना हुआ कि वही सरकारी कंपनी ने गत दो वर्ष और दो महीने, 1 मई, 2015 को पहला बल्ब बेचा था, 2 वर्ष और 2 महीने, और आज 6 दिन हो गए| उसमें लगभग, as we speak, 1 minute before we are speaking here, उसके 24,78,54,134 LED bulbs इस देश में 2 वर्ष और 2 महीने में बीके, एक ही कंपनी द्वारा, EESL, उसका public issue आएगा तो insider information देना ….. उसका टर्नओवर 35 करोड़ था जब मैं मंत्री बना, 2019 का टारगेट 10,000 crore, with a reduction of this kind मतलब वह 35 करोड़ था 310 के टाइम धंधा करके, reduction के बाद 10,000 करोड़ का turnover.
Of course, they started operations in Nepal, Bangladesh, in May they started operation in UK also. London is now using bulbs sold by an Indian company to Londoners. और इसके इलावा Private sector ने अपना अलग बेचा है, private sector ने, LED industry has sold 41.44 crore bulbs till June 2017, 41+24 = 65 crore bulbs sold in two years in our country. Of course, इसका pollution पर भी impact होता है, almost 80 million tonnes of carbon dioxide हर साल कम हो जायेगा, our ambition, 80 million tonnes every year. 11000 करोड़ unit electricity के कम लगेंगे, स्वाभाविक है ना, 90 और 100 W के बल्ब के बदले 7 और 9W.
What I am only trying to tell you is प्रधानमंत्री याद है आपको बोलते थे, Speed, Skill और Scale, यह उदाहरण है| और ऐसे मैं मतलब रट्टा नहीं मारकर आया हूँ आज के लिए, पर ऐसे मैं 500 example दे सकता हूँ, कल सुबह तक बैठ सकता हूँ| It is a humble small example I gave, mindset change. Country has to go beyond और अब समय आ गया है country has to lead the world.
While I can go on and on क्योंकि छप्पन इंच की छाती की मैंने बात की थी, मैं एक उदाहरण आपको ज़रूर शेयर करूँगा because I was witness to that and it’s a day I will never forget in my life whatever years I live. We were in Paris, COP21, जब यह पेरिस का समझौता हुआ क्लाइमेट चेंज का, 29 नवम्बर, honorable Prime Minister reached there, यह 30 नवंबर की बात है, 2015, कुल चौबीस घंटे थे प्रधानमंत्री के पास, 24 hours, कोई विश्व का बड़ा देश नहीं है जिसके राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री ने उनसे टाइम नहीं सीक किया हो उस पीरियड में कि हमें आपसे मिलना है | यह Israel visit चल रही है ना, I will share with you Israel का भी.
The PM was sitting on a sofa in the lounge in between at lunch time on a sofa across और हमारी, प्रधानमंत्री और हम लोग यहाँ बैठे थे| He sent a message that he would like to meet the PM for two minutes, मतलब literally सांस लेकर बैठे थे meetings कर करके, अच्छा प्रधानमंत्री is very fluent in English, But अंतर्राष्ट्रीय protocol में ऐसा है कि when you are engaging with a foreign leader तो एक translator always रहना चाहिए, interpreter रहना चाहिए| अब वह interpreter भोजन करने गयी हुई थी, तो कैसे करें अभी वह आना चाहते हैं मिलने हमारे interpreter भोजन करने गयी है| तो so I volunteered to sit in and be as an interpreter. Of course, ज़रूरत नहीं पड़ी, they both conversed in English 2-3 minute के लिए, अभी याद आ गया Israel की visit हो रही है इसलिए, 2 minute की meeting के लिए he was looking forward और हमने तो देखा ही क्या reception Israel में मिला है | पर जो मैं आपको बाताना चाह रहा था वह अमेरिका के संबंध में है |
प्रेसिडेंट ओबामा के साथ bilateral था, उसी बीच जपान के शिंज़ो आबेसान ने रिक्वेस्ट की I want to meet Prime Minister for a few minutes because he was coming to India soon after that. I think January or February he came to India. वह जो उसके तैयारी के बारे में चर्चा करना चाहते थे, तो प्रेसिडेंट ओबामा की मीटिंग थोड़ी से शिफ्ट करके Abe san was given a time. प्रधानमंत्री जी उस मीटिंग के लिए गए थे तो प्रकाश जावडेकर और मैं हम दोनों थे, और हम दोनों आपके महाराष्ट्र के ही मंत्री हैं, you can draw satisfaction or happiness out of the fact that जो यह दृश्य हुआ उसके बाद, और हम दोनों थोड़ा पहले पहुँच गए जहाँ पर bilateral था ओबामा जी के साथ| Normally, इसमें protocol यह रहता है कि एक holding room होता है जिसमें जो भी पहले आ गया, either मोदी जी या ओबामा वह उस holding room में रहेंगे when the other comes then both will come into the bilateral room. That’s a right way. One cannot come and wait in advance. Barack Obama and I was in the holding room, प्रकाश जावडेकर और मैं और Secretary Kerry, हम 3 passage में बात कर रहे थे और बाजू में bilateral room था.
और Obama must have got bored, anybody will get bored sitting in the room, मोदी जी को थोड़ा विलंभ हो गया शायद लम्बी चली शिंज़ो आबे सान के साथ मीटिंग| तो Obama came out and क्योंकि मुझे पहचानते थे पुराना जब आये थे यहाँ पर तो पहले मेरे कंधे पर हाथ रखा – You have to sort out the Paris Agreement. I said Excellency; I am not the negotiator he is. प्रकाश की तरफ point किया, दूसरा हाथ प्रकाश के कंधे पर रखा and you know he is a tall person so he had both of us like this. और लगभग 20-25 मिनट तक वह हम दोनों को समझाते रहा कि भारत को नेतृत्व देना है, Paris को अगर समझौता करना है तो only India can do.
He was also an MoS at that time, I was also MoS. Now he is a Cabinet Minister. But, just imagine, we had two junior Ministers in Modiji’s government. America all said and done is the most powerful nation, superpower, biggest economy, all of that. उनका राष्ट्रपति हम दोनों के साथ engage कर रहा है और यह ताकत भारत के 125 करोड़ लोगों की है, यह कोई मोदी जी या प्रकाश या मेरी नहीं है| यह आपकी ताकत है|
It’s a reflection on your strength. Your ability to change the world, the destiny of the world. That was the day I felt 56-inch यह होती है| It was truly a great feeling at that point of time. पर challenges आते रहेंगे हमारे सबके काम में. We have to achieve it. We are all CAs. Challenges आयेंगे, we will achieve it. We will accomplish. We will do better. We move ahead. And, really chartered accountants have a can-do attitude. We are CAs. We can do it. But, whether we want to do it for public good, for nation’s good. Or we want to do it for a myopic good. That is a choice ladies and gentlemen we all have to make.
And I appeal to you, it’s a great moment in India’s economic history. It’s a moment where we can be the harbingers of change or consign our country to a fate for which our future generations will never forgive us. Let us together work to make India that सोने की चिड़िया once again which it is reported it was once upon a time.
Thank you very much.

मोदी सरकार द्वारा शुरु की गई (उज्जवल डिस्कॉम्स एश्योरेंस योजना), जिसको उदय भी कहा जाता है। ये राज्यों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है… इस योजना की मदद से राज्य में अब बिजली चोरी कम हो गई है इसके साथ ही बिजली के दाम भी घट रहे हैं। डिस्कॉम का कर्ज में भी कमी आई है और बिजली के दाम भी घटे हैं।
उर्जा मंत्रालय द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में अब-तक 16 राज्यों और उनकी डिस्कॉम्स ने केंद्र सरकार के साथ MOU साइन किया है। इनमें से ये राज्य ऑपरेशनल में शामिल हैं-
गुजरात, गोवा, कर्नाटक, पुडुचेरी, सिक्किम, उत्तराखंड, मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और मिजोरम में ऑपरेशन शामिल है।
हालांकि, MOU इन राज्यों ने किया है साइन-
जम्मू-कश्मीर, झारखंड, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, असम, मेघायल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, आंध्र-प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र शामिल है।
उदय योजना में राज्यों में कम हुई बिजली चोरी-
मणिपुर में इस साल बिजली चोरी में 7.3 की कमी आई है।
हरियाणा में 4.8 बिजली चोरी की कमी आई है।
गोवा में 3.8 बिजली चोरी की कमी आई है।
झारखंड में 4.8 की कमी आई है।
राजस्थान में 3.7 की आई है।
उत्तराखंड में 2.7 बिजली चोरी में कमी आई है।
गुजरात में 2.0 की कमी आई है।
बिजली हुई सस्ती-
गोवा में इस साल 2.85 प्रति यूनिट हो गई है, जोकि 2015-16 में 3.34 प्रति यूनिट थी।
जम्मू कश्मीर में 3.44 प्रति यूनिट हो गई है, जोकि पहले 3.72 प्रति यूनिट थी।
गुजरात में 4.20 प्रति यूनिट हो गई, जोकि पहले 4.25 प्रति यूनिट थी।
बिहार में 4.26 प्रति यूनिट हो गई है, जोकि पहले 4.39 प्रति यूनिट थी।
आंध्र प्रदेश में 4.32 प्रति यूनिट हो गई है, जोकि 4.70 प्रति यूनिट थी।
तेलंगाना में 4.66 प्रति यूनिट गो गई है, जोकि पिछले साल 5.07 थी।
हरियाणा में 5.01 प्रति यूनिट हो गई है, जोकि पहले 5.01 प्रति यूनिट थी।
Source: http://medhajnews.in/power_and_infrastructure/news.php/uday-scheme-benefit-for-states–44099–hi
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