आज अहमदाबाद में ‘विमुद्रीकरण’ के विषय पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर सरकार की उपलब्धियों के बारे में बताया और पत्रकार बंधुओं के प्रश्नो के उत्तर दिये

Ahmd-Vimudrikaran

Demonetisation has moved the nation towards greater formalisation of the economy.

Anti-black money day, gives us an opportunity to reflect on the work done in the last three-and-a-half years to move towards a new India—an India where every citizen has a better quality of life, an India free of corruption, and an India which is recognised as a nation of honest government, honest business and honest politics.

Ever since Prime Minister Narendra Modi came into government at the Centre, he has consistently worked towards these objectives, particularly through efforts to fight corruption and black money, and transform the way the country works: From the setting up of the special investigation team (SIT) against black money in the first Cabinet meeting of this government to various steps like renegotiation of international treaties with Singapore, Mauritius, Switzerland and Cyprus, strengthening the Benami Transaction Act and notifying its rules to start taking action under this act, laws to tackle the menace of money stashed away abroad, strict action against the loan defaulters of the system and zero tolerance against corruption at high places.

Demonetisation of high-denomination currency was among the boldest initiatives ever taken for an economy of the size of India, with no parallel in history. Because of the high proportion of Rs 500 and Rs 1,000 notes, which were growing every year by leaps and bounds since 2004, nearly 86% of currency in circulation comprised high-value notes. Of these, nearly one-third amounting to Rs 6 lakh crore was held in currency which was never in the banking system for long periods of time,leading one to believe that it was illegitimate money hoarded or used for illicit transactions, possibly also for terror funding.

This bold transformational initiative showed the sense of urgency and commitment of a decisive leadership to take bold action against corruption, black money, terror financing and counterfeit currency. Clearly, the move has been highly successful and has moved the nation towards greater formalisation of the economy.

Nearly 5 million bank accounts of workers were opened post November 8, 2016, ensuring that they get minimum wages, which were increased by an unprecedented 42% by the government last year. Over 10 million additional employees are enrolled under the provident fund, giving social sector benefits to their families. Over 13 million workers have been registered under Employees’ State Insurance (ESIC), and the employees as well as their families are enjoying the health benefits as a direct outcome of the formalisation of their engagement, which was hitherto never reported.

More and more taxpayers are being added to the system and digital payments have risen sharply since demonetisation, registering unprecedented in the post demonetisation period. The Bharat Interface for Money (BHIM) mobile app has the potential to transform the way payments are made, enabling the common man to be connected with the digital world, with his mobile phone becoming his bank.

Because of larger availability of low-cost deposits in banks, lending rates are on the decline with housing loans available at as low an interest rate as 8.3% per annum. The revenues of urban local bodies have also shot up post-demonetisation and financial savings of households have also started increasing after many years. It is a matter of great satisfaction that most of the money has now been deposited in the banking system. This money now has an identity, a name and address which brings accountability to all the depositors.

Some opponents of demonetisation are unable to fathom the basic principle that with this accountability not only will the money deposited in the bank have to be explained but also other transactions in such accounts, which will then become taxable, generating greater revenues for the government to serve the welfare initiatives for the poor of India. Deposits worth nearly Rs 3.68 lakh crore in around 2.2 million bank accounts are currently under scrutiny. Nearly 224,000 shell companies have been struck off from the registrar of companies, plugging avenues for escaping the tax net and opening up transactions for scrutiny.

The people of India recognise the initiatives taken by Prime Minister Modi and have consistently supported these measures against corruption and black money. Election after election have shown the people’s trust in the leadership of the Bharatiya Janata Party (BJP) and the confidence in the prime minister’s ability to transform India.

Coupled with the goods and services tax (GST) and other measures taken to bring all business and trade within the ambit of taxation, one can clearly see India moving into a new growth trajectory. Honest payment of taxes on a wider tax base will enable tax rates to moderate, bring down inflation further and make India an attractive destination for investment, leading to more and more working opportunities for the youth of our country, encouraging entrepreneurship, and making India stand tall in the comity of nations for its ease of doing business in a corruption-free environment.

Source: https://economictimes.indiatimes.com/news/economy/policy/view-demonetisation-has-moved-the-nation-towards-greater-formalisation-of-the-economy/articleshow/61553120.cms

Met traders in Surat to discuss matters relating to GST

Surat GST Meet

Speaking with ABP News on demonetisation

प्रश्न: नोटबंदी ने क्या देश की अर्थव्यवस्था को पैसेंजर ट्रेन बना दिया, या फिर बुलेट ट्रेन की रफ़्तार आनी अभी बाकी है| नोटबंदी के एक साल पर नोटबंदी की छुक-छुक ने लोगों की धक-धक को कितना कम करने का काम किया है| आज तमाम सवालों का जवाब देंगे रेल मंत्री जी हमारे साथ पहुँच चुके हैं, बहुत स्वागत है सर आपका|

उत्तर: धन्यवाद|

प्रश्न: और इसके पहले कि सवालों के सिलसिले की मैं शुरुआत करूं मैं चाहूंगी कि एक साल में इस देश में क्या बदलाव नोटबंदी के बाद, आप दो मिनट में सर प्लीज अगर वहां पर अपनी बात रख पाएं|

पीयूष: धन्यवाद! अच्छी बात है कि एबीपी नेटवर्क ने एंटी-ब्लैक मनी डे जो 8 नवम्बर को देश भर में मनाया जाने वाला है उसके पूर्वसंध्या पर ही यह कार्यक्रम रखकर इस देश में जागरूकता फ़ैलाने के लिए हमें मदद की, देश को फिर एक बार इस बात को याद दिलाया कि वास्तव में अब भारत भ्रष्टाचार-मुक्त और काले धन के खिलाफ लड़ाई में पूरा देश एकजुट होकर एक प्रकार से परमानेंटली इस समस्या से निजात चाहता है, इस समस्या से अपने आपको, इस देश की छवि को सुधारना चाहता है|

जब यह सरकार 2014 में आई तब एक के बाद एक लगातार कई कदम उठाये गए जिससे काले धन या भ्रष्टाचार पर बड़ी तीव्र लड़ाई लड़ी जाये, एसआईटी बनी पहली कैबिनेट मीटिंग में, विदेश में जो अकाउंट हैं उसके ऊपर प्रहार किया गया, एक आईडिया स्कीम के माध्यम से आखिरी मौका दिया लोगों को कि वह अपने धन के बारे में जानकारी खुली कर लें| सायप्रस, सिंगापुर, स्विट्ज़रलैंड मॉरिशस, इन सबके साथ treaties renegotiate करके जो काला धन round tripping करने का एक माध्यम कई वर्षों से था उसको plug किया| बेनामी संपत्ति का जो कानून है, 28 साल पहले जो बना था लेकिन जिसको लागू नहीं किया गया, उसको लागू भी किया, उसमें संशोधन करके और उसमें कड़े प्रावधान डाले| और ऐसे लगातार एक के बाद एक कदम उठाते हुए जीएसटी को को इस देश के समक्ष लाकर जो इनफॉर्मल इकॉनमी है, उस इनफॉर्मल इकॉनमी को फॉर्मल इकॉनमी की तरफ लेकर जाने का एक फाइनल प्रयास जुलाई से होने जा रहा था|

ऐसे में देश में लाखों करोड़ रुपये जो हाई वैल्यू करेंसी नोट्स के माध्यम से मार्किट में थे उसकी जानकारी भी निकालना और किसके पास यह पैसा है, कौन कैश में व्यापार करता है, आखिर इनफॉर्मल जो transactions हैं, जो व्यापार बिना टैक्स पे करे किया जाता है, स्वाभाविक है वह कैश में किया जाता है| तो एक बार यह पूरे सिस्टम में बड़े नोट किसके पास हैं यह जानकारी सरकार के पास आये, जनता को यह ध्यान आये कि यह डिजिटल इकॉनमी और फॉर्मल इकॉनमी के साथ जुड़ने में लाभ है|

और एक प्रकार से पूरे देश में यह चेतावना हो जाये कि यह काले धन के साथ व्यापार किया हुआ नुकसान पहुंचाएगा, उसकी जानकारियां सरकार के पास पहुंचकर आपको नुकसान होगा, यह दिशा आगे की दिशा तय करने वाला यह कदम विमुद्रीकरण का 8 नवम्बर 2016 को लेकर माननीय प्रधानमंत्री ने इस देश को एक स्पष्ट सन्देश दिया कि काला धन और भ्रष्टाचार, आतंकवाद जिसमें एक प्रकार से फेक करेंसी भी यूज़ होती थी, नोटों का इस्तेमाल करके left-wing extremism छत्तीसगढ़, झारखंड, आंध्र प्रदेश, जम्मू कश्मीर में terrorist activities, इन सबके ऊपर भी प्रहार करने का जो एक महत्वपूर्ण निर्णय 8 नवम्बर को लिया मैं समझता हूँ उसके बाद आज एक वर्ष के बाद when we look back कि क्या हुआ एक वर्ष में तो समाधान होता है, समाधान यह होता है कि जो workers को minimum wages नहीं मिलते थे, पूरी तनख्वाह नहीं मिलती थी आज अधिकांश जगह पर लोगों ने खाते खुलवा लिए workers के, official payment दी जाती है तो स्वाभाविक है कि minimum wages जिसमें 42% की वृद्धि हमारी सरकार ने की कामगारों को वह मिलना शुरू हो गयी, लगभग 1 करोड़ 3 लाख नए provident fund के खाते खुले क्योंकि स्वाभाविक है जब official payment होगी तो provident fund भी पे होगा, insurance का benefit, health insurance, ESIC, इसमें लगभग 1 करोड़ 30 लाख additional खाते खुले तो उतने परिवारों को, लगभग 5-6 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य की सेवाएं मुफ्त में मिलना शुरू हो गयी, लगभग 2,10,000 शैल कम्पनीज को कैंसिल किया गया उनका रजिस्ट्रेशन, उसपर कार्रवाई चल रही है|

और कई बार लोग कहते हैं कि अगर पैसा बैंक में वापिस आ गया तो फायदा क्या हुआ, मैं समझता हूँ यह बड़ी नासमझी है क्योंकि पैसा जो बैंक में वापिस आ गया अब पैसे का ट्रेल भी साथ में मिल गया, अब पता है पैसा किसने जमा किया, किसके खाते में आया| और अब उसकी ट्रेल लेकर तो जो पैसा जमा हुआ है वह और उसके साथ और कितनी transactions उस खाते से हुई हैं वह पूरी जानकारी data mining के माध्यम से अब सरकार के पास है, लगभग 3 लाख से अधिक खातों के ऊपर छानबीन चल रही है, 3-3.5 लाख करोड़ रुपये की जानकारियां निकाली जा रही है कि यह जेन्युइन है या जेन्युइन नहीं है|

अभी तक बता रहे थे 5000 कम्पनीज की सिर्फ data mining हुई है इस 3-3.5 लाख की कंपनियों में से उसी में से 4,000 करोड़ रुपये की transactions गलत पाई गयीं| और जैसे-जैसे यह data mining होकर और records निकलेंगे, अब एक permanent name and address बन गया हर रुपये के साथ जितना कैश था सिस्टम में उसका एक name और address identify हो गया| उसकी वजह से लगभग 800 companies delist करने को मिली जिनकी जानकारी मिली कि यह सिर्फ money laundering में काम करती थी या जिनकी transactions genuine नहीं पाई गयी, अब वह companies की भी छानबीन हो सकेगी, जैसे ही इन companies की छानबीन होगी तो पुराने भी सब चित्ता-पट्टा खुलेगा क्या हुआ कैसे यह companies का इस्तेमाल किया गया|

तो वास्तव में कितने हज़ार कितने लाख करोड़ विमुद्रीकरण के कारण तो पकडे ही जायेंगे, टैक्स नेट में आयेंगे लेकिन उसके इलावा और कितनी transactions खुलेंगे जिसका लाभ देश को मिलेगा और सबसे बड़ा जो message गया कि पहली ऐसी सरकार है जो कड़े कदम उठाने को तैयार है| काला धन और भ्रष्टाचार-मुक्त भारत जिससे भारत की छवि भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुधरी है, जिससे भारत में ईमानदार व्यापारी, ईमानदार उद्योग करने वाला एक जो उपभोक्ता है उन सबको भी एक विश्वास जागृत हुआ है कि वास्तव में कोई सरकार, कोई नेतृत्व है जो काला धन और भ्रष्टाचार ख़त्म करने के लिए कड़े कदम उठा सकती है, मुझे लगता है देश भर में उसके बाद जितने चुनाव हुए, जितनी जगह पर जनता को मौका मिला वह हमें …… मिला, उसका रिवॉर्ड मिला, एक प्रकार से जनता ने भारतीय जनता पार्टी को अपना समर्थन, अपना आशीर्वाद देकर एक स्पष्ट मेसेज देश और दुनिया को दिया है कि भारत ईमानदार देश, भारत ईमानदारी के रास्ते पर आगे चलना चाहता है, हर भारतीय नागरिक चाहता है कि देश ईमानदार हो, देश भ्रष्टाचार-मुक्त हो, देश में काला व्यापार, काला धंधा बंद हो, हर एक transaction formal होने से ब्याज के दर कम होते हैं, टैक्स के दर कम हो सकते हैं|

और ऐसे गिनने जायें तो इतने ज्यादा व्यापक रूप में देश में सुधार आने की संभावना खुली है कि मैं समझता हूँ एक वर्ष के बाद संतुष्टि से मैं कह सकता हूँ कि यह कदम, देश हित और जनहित का कदम देश ने भी स्वीकार किया है, अर्थव्यवस्था समझने वालों ने भी स्वीकार किया है कि छोटे-मोटे समय के लिए अगर कठिनाई उठानी पड़ी लेकिन उसके जो लम्बे अरसे के लाभ हैं वह इस देश को बहुत तेज़ गति से विकास के मार्ग पर ले जा पाएंगे|

बहुत-बहुत धन्यवाद|

प्रश्न: बहुत अच्छी बातें भी आपने कहीं और देश को अच्छे दिन दिखाने की भी कोशिश आपकी ओर से की गयी पीयूष जी, लेकिन राहुल गाँधी के शब्दों में मैं अगर कहूँ – ‘आप कहते हैं आप किसी से कम नहीं, मगर आपकी बातों में दम नहीं, पहले नोटबंदी और उसके बाद ‘गब्बर सिंह टैक्स’ और अब उसके फायदे गिनाने में जुटी हुई है भारतीय जनता पार्टी?’

उत्तर: मैं समझता हूँ जो लोगों ने कभी ज़िन्दगी में भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ लड़ाई लड़ी ही नहीं है, rather जिनकी पार्टी ने तो चाहे वह कोयले का घोटाला हो, टेलिकॉम का घोटाला हो, कॉमनवेल्थ का घोटाला हो, आदर्श का घोटाला हो – आपकी समय-सीमा कितनी है इस शो की, सब घोटाले गिना पाउँगा कि नहीं? नहीं गिना पाउँगा|

इन व्यक्तियों को तो वास्तव में कोई अधिकार ही नहीं है हमारे अच्छे कामों का सवाल पूछने का और जनता ने उसका जवाब बहुत अच्छा दे दिया है, जनता ने बार-बार जवाब दिया है और अब कुछ ही दिनों में 4-5 दिन बाद, 3 दिन बाद तो हिमाचल में मुझे तो कल मैं अभी हिमाचल से ही आ रहा हूँ, कल की जो परिस्थिति और जो उत्साह देखा है हिमाचल में मुझे लगता है उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से भी बड़ी जीत भाजपा की हिमाचल में और उसके बाद गुजरात में होने जा रही है|

प्रश्न: नोटबंदी को इसका श्रेय दे रहे हैं आप?

उत्तर: नहीं, देखिए यह सरकार कोई एक काम के ऊपर टिकती नहीं है, हमारी सरकार कोई एक काम कर लिया और उसपर उठाकर हम कहें कि हमने सब कुछ कर लिया| हमारी सरकार लगातार चौबीस घंटे दिन और रात अलग-अलग विकास के काम, अलग-अलग काम जिसमें जनहित हो, जनता की सेवा हो, किसानों को, गरीबों को एक अच्छा भविष्य मिले, विद्यार्थियों के लिए अच्छी शिक्षा मिले, मुझे लगता है हमारे अन्य कामों में जो काला धन और भ्रष्टाचार पर हमने लड़ाई लड़ी है वह एक बहुत महत्वपूर्ण कड़ी है क्योंकि वास्तव में यह विकास को रुकवाती थी, विकास के बीच में रोड़े डालती थी|

प्रश्न: यह बता दीजिये कि चूँकि एक साल होने जा रहा है नोटबंदी को, लेकिन आज भी देश के मन में यह सवाल है कि नोटबंदी का मकसद क्या था?

उत्तर: जितने सब लाभ गिनाये वह मकसद था| यह सवाल शायद देश की जनता में कम है और उन लोगों में ज्यादा है जिनको शायद चोट पहुंची है इस पूरी कार्रवाई से|

प्रश्न: सर यह सवाल मैंने आपसे इसलिए पूछा क्योंकि 8 नवम्बर, 2016 को जिस दिन नोटबंदी की घोषणा की गयी थी प्रधानमंत्री की ओर से, उन्होंने एक बार भी डिजिटल इंडिया, कैशलेस इंडिया की बात नहीं कही थी| उन्होंने 18 बार काले धन का ज़िक्र किया था, 5 बार उनकी ओर से जाली नोट का ज़िक्र किया गया था, 27 तारीख को पीएम एक बार फिर से सामने आते हैं और फिर उस दिन वह कैशलेस इंडिया| तो यह बार-बार लोग सवाल पूछ रहे हैं कहीं ऐसा तो नहीं कि जो लक्ष्य था उससे भटक गयी सरकार? और फिर अलग-अलग कारण गिनाये जाने लग गयी कि नोटबंदी हमने इसलिए किया?

उत्तर: I think कोई भी अर्थव्यवस्था समझने वाला व्यक्ति आपको बड़े आसानी से बताएगा कि जब less-cash economy होगी, जब amount of high-value currencies कम होंगी तो स्वाभाविक है कि banking transactions और digitalization और formalization की तरफ लोग जायेंगे, तो वह तो एक logical outcome of demonetization सभी को ध्यान में था| काले धन की बात तो करी और सबसे बड़ा लक्ष्य तो काल धन locate करके उसपर कड़ी….|

प्रश्न: कितना आया? काला धन कितना आ गया देश में?

उत्तर: वह तो अभी पता नहीं, वह अनगिनत उसके तो यह सिलसिला चलता रहेगा, यह जो पैसा बैंक में जमा हुआ है अब इस सबका जैसा मैंने कहा एक एड्रेस है, एक व्यक्ति का नाम है, कोई कंपनी का नाम है, लोगों को जवाब देना पड़ेगा कि यह पैसा मेरे पास टैक्स पेड है या नहीं है| आपको एक उदाहरण देता हूँ, दक्षिण भारत में एक व्यक्ति ने 94 करोड़ रुपये बैंक में डाले, अब जो विपक्ष के नेता हैं उनको यह बात समझ नहीं आ रही है वह कहते हैं कि बैंक में डाल दिया तो काला धन सफ़ेद हो गया, मैंने उनका ऐसा भी एक वक्तव्य सुना था| उनको यह नहीं समझ में आ रहा है कि यह 94 करोड़ जो बैंक में डाले अब उसका जवाब देने के लिए उसके पास कुछ है नहीं, वह समझाने की कोशिश कर रहा है व्यापारी कि 5000 लोग आये, 2-2 लाख रुपये दिए और फ्यूचर में मैं उनको गोल्ड ज्वेलरी कुछ सप्लाई करने वाला हूँ| 2 लाख है इसलिए पैन नंबर नहीं है, 2 लाख है इसलिए मैंने डिटेल्स नहीं रखीं कोई नाम नहीं, पता नहीं, कोई सिक्यूरिटी गार्ड नहीं है जो बैठा था जब 5000 लोग आये| किन व्यक्तियों ने वह पैसा गिना जब पूछा गया सरकार द्वारा तो बोलता है वह लोग भाग गए मेरे पास अब उनका नाम पता नहीं है|

तो स्वाभाविक है अब इसपर कार्रवाई होगी, साथ ही साथ और कितने उसके और काले चिट्टे खुलेंगे पहले के, तो मैं समझता हूँ कि इसका लाभ एक पूरे देश को चेतावनी, पूरे देश में चेतना भी जगाना कि काला धन करने का लाभ नहीं है भाई, फॉर्मल और ईमानदार व्यवस्था से जुडो और साथ ही साथ लाखों करोड़ रुपये सामने आयेंगे जो शायद टैक्स पेड न हो|

प्रश्न: सर आपने काले धन की बात कही, यह सवाल मैंने आपसे इसलिए पूछा क्योंकि 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काले धन को लेकर जो बातें कहीं थी शब्दशः मैं उसको पढ़ रही हूँ| उन्होंने कहा कि बैंकों में जमा की गयी राशि में 2 लाख करोड़ रुपये काला धन बैंक तक पहुंचाना पड़ा, व्यवस्था के साथ जवाब देने को मजबूर हुए लोग, काले धन के खिलाफ लड़ाई का यह परिणाम है| लेकिन रिज़र्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहीं भी इन बातों का ज़िक्र नहीं किया है और मंत्री भी अलग-अलग बयान देते हैं काले धन को लेकर| इसलिए देश यह जानना चाहता है कि काला धन अगर आया तो उसका एक आंकड़ा तो कोई होगा सरकार के पास?

उत्तर: नहीं, नहीं, आपको मैंने अभी इतने विस्तार से समझाया, पहली बात तो रिज़र्व बैंक काला और सफ़ेद नहीं देखती है, रिज़र्व बैंक का काम तो currency in circulation को मॉनिटर करना है| In fact, रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट आई थी कि 6 लाख करोड़ रुपये बड़े नोट, 500 और 1000 के बड़े नोट ऐसे थे जो कभी banking system में circulation में आते ही नहीं थे तो उस समय के 16-17 लाख करोड़ रुपये में से, बड़े नोटों में से, 6 लाख ऐसे थे जो कभी banking system में वापिस पहुँचते ही नहीं थे| इसलिए यह ध्यान आया कि यह 6 लाख करोड़ किधर न किधर ऐसे दबे पड़े हैं जो न टैक्स पे हुआ है, न वह इकॉनमी को हेल्प कर रहे हैं, न बैंक में आ रहे हैं|

जब यह विमुद्रीकरण हुआ तो यह सब नोटों को एक बार जबरन बैंक में आना पड़ा, जैसे ही यह नोट्स बैंक में आये तो जो लोगों के transaction शायद 5 लाख या 10 लाख से अधिक डिपाजिट हुए उन सबको एक ईमेल पर नोटिस भेजा गया, वह नोटिस के रिप्लाई जिन-जिन के आ गए और उनके इनकम प्रोफाइल से टैली हो गए वह लोग तो क्लियर हो गए| उसके बावजूद 2 लाख करोड़ उस समय का आंकड़ा अनुमानित था, आजके दिन वह डेटा माइनिंग से बढ़कर 3,38,000 करोड़ के करीब हो गया है और यह बढ़ते जाता है आंकड़ा| It is a dynamic figure, it is not a static figure.

अगर एकदम latest आंकड़ा भी आपको interest हो तो वह भी मैं लेकर आया था आपके शो के लिए कि लगभग 17,73,000 (17.73 lakh) PAN numbers scrutiny में चल रहे हैं अभी| Cash deposit of 3.68 lakh crores (3 करोड़, 68 लाख करोड़) के cash deposits investigation में हैं, 23 lakh accounts के ऊपर investigation चल रही है| तो यह सब figures जब हम देखें तो स्वाभाविक है कि इस सब में कितना बड़ा भंडार खुलेगा वह तो अभी समय बताएगा और यह बढ़ते भी रहेगा, आगे चलकर इसपर कार्रवाई होती रहेगी|

प्रश्न: ठीक है सर, वह कब खुलेगा इसका देश को इन्तिज़ार है लेकिन जो लोग हमारे साथ यहाँ पर मौजूद है उनके सवाल मैं ले लेती हूँ|

उत्तर: कब नहीं, यह लगातार खुलता रहता है, डेटा माइनिंग करके डेटा इनकम टैक्स में जाता है, जो जो अलग-अलग investigative agencies हैं वह उसपर कार्रवाई करती हैं, तो यह तो एक, it’s a continuous process और trail मिलता है| जैसे अभी-अभी माननीय प्रधानमंत्री बता रहे थे कंपनी मिली, शैल कंपनी इसी सब में जिसके शायद हज़ार से ऊपर बैंक खाते हैं, शायद 1100 या 2100 याद नहीं है मुझे, बैंक खाते एक कंपनी के| तो स्वाभाविक है जिसके इतने बैंक खाते हैं तो कोई न कोई गड़बड़ होगी नहीं तो इतने बैंक खाते तो किसी को रखने की आवश्यकता पड़नी नहीं चाहिए|

प्रश्न: एक सवाल ट्विटर से मुझे बताया जा रहा है, ‘पहले आपने 50,000 रुपये पर पैन कार्ड अनिवार्य किया था, बाद में फिर इसको बढ़ाकर 2 लाख रुपये सीमा कर दी, ऐसा क्यों किया गया? सोना खरीदने के लिए अगर काले धन को लेकर सरकार इतनी ज्यादा गंभीर है और वह चाहती है कि सारी चीज़ें नियम के अनुसार चलें?

उत्तर: मैंने कई बार पत्रकारों को भी बताया है, जनता के बीच में भी बात रखी है कि यह बड़ी संवेदनशील सरकार है, पहले 2 लाख रुपये पर पैन कार्ड लगता था व्यवस्था चल रही थी| बीच में डिपार्टमेंट को लगा इसको घटाकर 50,000 कर दिया जाये, कई जगह से representations आये कि इतने छोटे वैल्यू के transactions के ऊपर PAN card demand करना कई बार day to day व्यापार में मुश्किल हो जाता है, कोई महिला गयी, कुछ छोटा सा गहना खरीदने की कोशिश की और उसमें, आजकल तो शायद 10 ग्राम सोना भी 30,000 रुपये का है कितना है मेरे खयाल से, तो एक छोटी सी चेन या कुछ लेने जायें तो भी उसमें पूरा नहीं पड़ेगा, इसलिए वह अब फिर से एक बार, पुनः एक बार 2 लाख की लिमिट स्थापित कर दी गयी| यह दर्शाता है कि यह सरकार कोई निर्णय लेकर अड़ियलपना नहीं करती है, open रहती है to people’s feedback और feedback के हिसाब से सुधार के लिए हम always प्रयत्न करते हैं|

उत्तर: आपने इस सरकार की संवेदनशीलता की बात करी है तो उसी से जुड़ा हुआ सवाल ले लेती हूँ दिल्ली यूनिवर्सिटी से हैं विपुल शुक्ला, वह सवाल पूछ रहे हैं सरकार नोटबंदी के तहत डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने की बात करती रही है और जब आम जनता डिजिटल पेमेंट करने जाती है तो 2000 से ऊपर की पेमेंट कटने पर एक्स्ट्रा चार्ज पे करने पड़ते हैं, तो यहाँ भी आपको अपनी संवेदनशीलता दिखानी चाहिए?

प्रश्न: मेरे खयाल से साधारणतः क्रेडिट कार्ड के ऊपर charges लगते हैं क्योंकि उसमें क्रेडिट जुड़ा हुआ होता है| अगर आप कोई क्रेडिट कार्ड transaction करें तो क्योंकि आपको उसमें क्रेडिट भी मिल रहा है, आपके बैंक खाते में उस दिन पैसा है नहीं है उसके irrespective of that आप क्रेडिट कार्ड से transaction कर सकते हैं, that is your choice कि आप क्रेडिट कार्ड यूज़ कर रहे हैं you pay for those charges. उसमें सरकार के पास कोई नियंत्रण लगाने का कोई प्रावधान नहीं है, जहाँ तक भीम है या Aadhar-based transactions हैं या डेबिट कार्ड के transactions हैं उसमें उपभोक्ता के ऊपर कोई चार्ज नहीं लगता है, चार्ज एक merchant discount rate की तरह जो दुकानदार है जो आपको service provide कर रहा है या जो आपको कुछ सामान बेच रहा है उसके ऊपर MDR लगता है| He is not supposed to pass it on.

एक समस्या जैसे रेलवेज में ऑनलाइन बुकिंग होती है वह मेरे समक्ष अभी-अभी आई है, रेलवेज में जो सर्विस चार्ज लगते थे वह तो विमुद्रीकरण के समय उड़ा दिए गए थे| जो merchants चार्ज करते हैं, Merchant Discount Rate, वह एक small fee लगती है जब आप online transaction करो, अब मैं उसपर ध्यान दे रहा हूँ कि वह भी अभी आगे से ख़त्म हो जाये|

प्रश्न: चलिए, इसके पहले मैं कुछ और सवाल लूं, यहाँ पर आपके साथ ही मैं अपने दर्शकों को भी बताना चाहूंगी कि एबीपी न्यूज़ का यह खास कार्यक्रम जो इस वक्त लाइव चल रहा है – जन मन धन – यह ट्विटर पर इस वक्त ट्रेंड कर रहा है| तो लगातार आप भी अगर कुछ बात रखना चाहते हैं, आप अपनी राय व्यक्त करना चाहते हैं या पीयूष जी से कुछ सवाल पूछना चाहते हैं तो वह हमें ज़रूर आप hashtag – #ABPNewsJanManDhan लिखकर आप हमें भेज सकते हैं|

फिलहाल आगे बढ़ते हुए अब एक और सवाल है, लेकिन उसके पहले मैं आपसे जानना चाहूंगी, कैशलेस तात्कालिक रूप से तो कामयाब रहा था लेकिन धीरे-धीरे अब ऐसा लग रहा है कि फिर उसी पुराने ….. पर यह देश जा रहा है, लगता है आपको ऐसा?

उत्तर: स्वाभाविक है कि cashless means less cash, कोई विश्व में कोई भी देश ऐसा नहीं है जहाँ cash पूरी तरीके से ख़त्म हो जाता है, कभी छोटी payments वगैरा में लगता भी है| मैं अपने खुद का अनुभव बता सकता हूँ कि मैंने पिछले एक साल में मंदिर में जो चढ़ावा चढ़ाते हैं उसके इलावा कभी कैश नहीं यूज़ किया है| और मुझे लगता है जैसा चल रहा है, जैसे विदेश में तो मंदिर में वह लोग क्रेडिट कार्ड भी लेते हैं यहाँ भी शुरू होने की संभावना मुझे तो दिख रही है|

प्रश्न: पीयूष जी बड़े लोगों के लिए तो चीज़ें आसन है लेकिन जो छोटे लोग हैं जो गरीब जनता है, जो आम लोग हैं उनके लिए तो दिक्कत होगी?

उत्तर: लेकिन इसलिए बता रहा हूँ जितने छोटे नोट पहले थे उससे अधिक छोटे नोट आज अवेलेबल हैं, जो बड़े denomination के notes हैं उसमें लगभग 5-6 लाख करोड़ में कमी आई है, तो यह स्वाभाविक तरीके से दिखाता है कि जो पहले बड़े-बड़े transactions होते थे लाखों करोड़ों में cash में, जो बड़े नोटों के इस्तेमाल से suitcase में डालकर चाहे वह real estate हो, या कोई व्यापार बिना टैक्स पे किये हो उसमें लगता था वह कम होते जा रहा है, बड़े नोट्स की संख्या in circulation बहुत तेज़ गति से घटते जा रही है और एक जागरूकता पैदा हो रही है| Latest statistics अगर निकालें विमुद्रीकरण के पहले और उसके बाद में, 56% transactions बढ़ी हैं digital form से, अब इतना 56% तो it’s not a normal growth, it’s an extraordinary growth in digital transactions.

प्रश्न: अभय जी हैं उनका यह सवाल है, कितना कैशलेस होने के लिए तैयार है इंडिया?

उत्तर: बहुत अच्छी तरीके से तैयार है, सामान्य व्यक्ति और मैं तो आप सबसे अपील करूँगा की आप भी देखिए कि जब आप बिल इंसिस्ट करते हैं, जब आप बिल लेकर चेक से या डिजिटल फॉर्म से पे करते हैं तो आप एक तरीके से देश सेवा कर रहे हैं क्योंकि आप मजबूर कर रहे हो व्यापारी को भी कि वह उस transaction को books में दिखाए, उसपर पूरा tax pay करे| जब सब लोग tax pay करना शुरू कर देंगे तो tax के rates भी घट सकते हैं, अधिक पैसा होगा तो जनता की गरीब, गरीब जनता की सेवा हो सकती है, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं सुधर सकती हैं| तो इसको जो अगर होलिस्टिक अंदाज़ा लगायें तो मैं समझता हूँ अगर देश का हर एक उपभोक्ता और आप भी, अगर यह इंसिस्ट करें कि हमने बिल लेना है चाहे आप पॉपकॉर्न खरीदो पिक्चर देखते हुए, आप जो भी चीज़ खरीदो अगर आप बिल इंसिस्ट करोगे तो यह देश सेवा होगी और इससे देश में formalization of the economy तेज़ गति से बढ़ सकती है|

प्रश्न: वरिष्ठ पत्रकार हैं अशोक वानखेड़े जी, उनका यह सवाल है ‘मोदी जी ने कहा कि इंदिरा जी नोटबंदी करती तो हमें नहीं करना पड़ता, क्या अटल जी ने भी वही गलती की जो इंदिरा गाँधी ने की थी?

उत्तर: यह प्रपोजल इंदिरा के सामने उनके सलाहकार ने रखा था जिसको नकारते हुए और यह रिकार्डेड है, यह कोई मैं नहीं बता रहा हूँ, यह रिकार्डेड है कि उन्होंने शायद ऐसा जवाब दिया कि भाई तुम क्या बात कर रहे हो, नोटबंदी करूँ? मुझे आगे इलेक्शन लड़ने नहीं है क्या? यह आपने शायद पढ़ा भी होगा, अटल जी के सामने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं था इसलिए शायद उन्होंने नहीं किया होगा|

प्रश्न: नहीं यह सवाल उन्होंने इसलिए पूछा होगा क्योंकि तमाम इसकी खूबियाँ गिनाते हैं प्रधानमंत्री, तो फिर कहीं न कहीं इंदिरा जी ने अगर ऐसा नहीं किया तो फिर बाकी की और बीजेपी की सरकार तो करना चाहिए था?

उत्तर: मैंने वही तो बताया कि उनके समक्ष ऐसा प्रस्ताव नहीं आया होगा, इंदिरा जी के समक्ष प्रस्ताव आया उन्होंने नकार दिया, मोदी जी के समक्ष प्रस्ताव आया उन्होंने उसके लाभ और देश हित का फायदा कितना होगा वह देखा, उन्होंने हिम्मत और साहस दिखाकर यह काम किया|

प्रश्न: रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन, लगातार ख़बरों में भी रहे वह जब उन्होंने टिप्पणी की थी सरकार के इस फैसले को लेकर| उन्होंने कहा है कि आर्थिक रूप से इसे सफल फैसला नहीं कहा जा सकता है?

उत्तर: वैसे यह बात उन्होंने नवम्बर, दिसम्बर, जनवरी, फरवरी, नोटबंदी के बाद नहीं कही थी, वह अभी-अभी कही| तो वह तो बहुत बोलते थे, बहुत सारे shows वगैरा करते थे, बहुत इंटरव्यू करते थे, तो अगर उनको इतना तीव्र विरोध था तो मुझे लगता है नवम्बर 8 को जब यह फैसला हुआ उस समय करना चाहिए था|

प्रश्न: भंग हो चुके योजना आयोग के पूर्व सदस्य अरुण मायरा जी की ओर से नोटबंदी पर अपनी टिप्पणी की गयी है, उन्होंने कहा है कि चूँकि नोटबंदी ने गरीबों के ऊपर एक अच्छा प्रभाव डाला, उनके मन में आया कि अमीरों और गरीबों के बीच जो बड़ी खायी थी उसको मोदी ने पाटने का काम किया है, तो क्या यह अमीरों के खिलाफ लिया गया फैसला था?

उत्तर: देखिए अमीर होना कोई गलत नहीं है, कोई गुनाह नहीं है| अगर आदमी ईमानदारी से अपना व्यापार करे, अपना काम करे, टैक्सेज और पूरी तरीके से legitimate business से कमाए तो बहुत अच्छी बात है, उनके खिलाफ तो कोई हमने कार्रवाई नहीं की है| यह कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ है जो भ्रष्टाचार करते हैं, उन लोगों के खिलाफ है जो काल बाजारी करते हैं, काले धन का व्यापार करते हैं और उसमें अमीर-गरीब का सवाल नहीं है जो भी काला बाजारी करेगा उसके ऊपर यह एक तरीके से प्रहार है| और मुझे लगता है कि इसने एक बहुत बड़ा मेसेज दिया है पूरे देश को कि वास्तव में ईमानदार होने में ही लाभ है और इसके जो लॉन्ग-टर्म परिणाम होंगे, अगर यह देश जितना ज्यादा फॉर्मल इकॉनमी पर चले जायेगा उतना ज्यादा यहाँ पर निवेश आएगा, उतना ज्यादा यहाँ टैक्स कलेक्शन सुधरेगी, उतना ज्यादा यहाँ सामाजिक न्याय होगा उस समाज के साथ जो बरसों से वंचित रहा है|

प्रश्न: मतलब आपकी बातों से मुझे समझ में आया कि काले धन के खिलाफ लड़ाई तो चल ही रही है, भ्रष्टाचार को लेकर भी, लेकिन इसके इलावा देश को ईमानदारी भी सिखा रही है सरकार?

उत्तर: बहुत ज़रूरी है, और उसके बगैर यह देश उस प्रकार का विकास नहीं कर पायेगा जो रियली इस देश को चाहिए, इस देश की जनता को चाहिए|

प्रश्न: ठीक है, आगे बढ़ते हुए अब मैं जीएसटी से कुछ सवाल आपसे पूछ लेती हूँ, जीएसटी को लेकर शुरू से ही भ्रम रहे हैं और उसके बाद हमने देखा सरकार ने भी बहुत सारे फैसले अपने बदले जो पहले की ओर से लिए गए थे| और खासतौर से अब तो मैंने देखा है चुनावों को देखकर भी सरकार अपने फैसले बदल रही है, गुजरात चुनावों के मद्देनज़र आपने खाखरे पर जो जीएसटी 12% थी और उसको 5% कर दिया| तो पहले बोझ डालो उसके बाद कम करो और फिर मेसेज दो कि सरकार आपके साथ है?

उत्तर: वैसे आप खाखरा खाती हैं कि नहीं?

प्रश्न: जी|

उत्तर: बड़ा टेस्टी होता है, खाइये उसको| पहली बात तो अगर चुनाव को देखकर फैसले लेने होते इस सरकार को तो आप सोचिये, by and large, तब तो शुरू में तो लोगों को लग रहा था कि नोटबंदी से नुकसान होगा, आपको याद है कितना कठिनाई इस देश की जनता ने झेली उस समय| तो हम उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, पंजाब चुनाव के पहले इतना बड़ा अहम फैसला लेते क्या? अगर जीएसटी से हमको लगता कि चुनाव की हार-जीत तय होने वाली है तो हमें जीएसटी को जुलाई में लेने का कोई पाबंदी या कोई बोझ या कोई compulsion तो नहीं था|

प्रश्न: तो फिर गुजरात के व्यापारी इतने परेशान क्यों है, उनको राहत..?

उत्तर: यह सरकार ऐसी है और मैं खुद कैबिनेट के अन्दर बैठकर मैंने कई बार ऐसा महसूस किया कि कोई फैसला शायद अब न लें, बाद में लें तो ज्यादा लाभ होगा| लेकिन प्रधानमंत्री जी ने हर फैसले पर सिर्फ एक सवाल पूछा – क्या यह जनहित में है, क्या यह देश हित में है? अगर जनहित और देश हित में है तो आज लेना चाहिए, उसको रुकना नहीं है, चुनाव के नतीजे अपनी जगह है, जाकर जनता को हम समझायेंगे यह आपके कैसे लाभ में है, कैसे देश हित में है और फिर जनता अपना फैसला करेगी और जनता ने उनपर विश्वास रखा है, जनता ने समय-समय पर जब-जब मौका मिला आशीर्वाद दिया इनके एक-एक फैसले को| और जहाँ तक जीएसटी का सवाल है, पहली बात तो यह सांझी विरासत है, इसमें कोई केंद्र सरकार का अकेले का वह नहीं है, 29 स्टेट्स के प्रतिनिधि मिलकर unanimous सर्वसम्मति से हर निर्णय लेते हैं क्या प्रोसीजर होगा, क्या टेक्नोलॉजी इस्तेमाल होगी, क्या टैक्स रेट होंगे, यह केंद्र सरकार नहीं determine करती है, खाखरा में कम करना है यह हमने नहीं determine किया, GST Council का unanimous फैसला है| लेकिन आप एक विषय पकड़ रही हैं, उसी के साथ शायद 60-63 और items पर कम हुआ था| ऐसे करके GST लागू करने का निर्णय अपने आप में बहुत ही साहसी निर्णय था, विश्व में इतना बड़ा कोई देश नहीं है, भारत छोडकर जिसने जीएसटी लागू करने की हिम्मत की है, फ्रांस में है, यूके में पर वह छोटे देश हैं|

दूसरी बात, अगर चुनाव के हार-जीत और लाभ-नुकसान का सोचते तो आपको पता नहीं जानकारी है कि नहीं कोई भी आजतक सरकार चुनकर वापिस नहीं आई है जिसने जीएसटी लागू किया है| हर एक सरकार जिस भी देश में लागू हुआ है वह अगला चुनाव हारी है| भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री मोदी जी ने उसकी भी चिंता नहीं की, क्योंकि हमें विश्वास था कि जनता समझेगी कैसे देश हित होगा और फिर हमें चुनकर लाएगी|

प्रश्न: तो सर अभी तो राज्यों के चुनाव आपने जीतें हैना, 2019 तो अभी बाकी है?

उत्तर: एक के बाद एक चुनाव तो जीतते जा रहे हैना, अभी महाराष्ट्र में हुआ ग्राम पंचायत का चुनाव, हम चौथी पार्टी हुआ करते थे महाराष्ट्र में, मैं खुद महाराष्ट्र से हूँ| चौथी से नंबर 1 पार्टी बन गए और 50% से अधिक सीटें ग्रामीण इलाकों में भाजपा ने जीती हैं, बाकी सबको एकदम पीछे छोड़ दिया, मतलब हमारे पास 50%, दूसरे सब 12-14% सीटें जीते हैं, तीनों बाकी पार्टीज| तो मैं समझता हूँ चुनाव के हिसाब से कभी हम निर्णय नहीं लेते हैं, प्रधानमंत्री ने पहली जुलाई को ही कहा था कि यह एक नयी चीज़ है, ट्रांजीशन पीरियड में कठिनाई होगी, ट्रांजीशन पीरियड में हम सीखें-समझेंगे कैसे इसके रोल-आउट के परिणाम हो रहे हैं, उसके साथ स्वाभाविक है सुधार की एक लगातार परंपरा चलती रहेगी, उसके बाद 4-5 मीटिंगों में बहुत सारे सुधार हुए हैं तब तो कोई चुनाव नहीं था| तो आप लोग हर एक चीज़ को चुनाव से जोड़ने के बदले मैं समझता हूँ देश और जनता के हित की भी चिंता मीडिया ने भी करनी चाहिए जैसे प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार कर रही है|

प्रश्न: सर हम लोग तो बहुत करते हैं, अब राजनेताओं से राजनीति से जुड़े हुए सवाल ही ज्यादा पूछे जायेंगे क्योंकि ज्यादातर फैसले उसी को ध्यान में रखकर आप लोग लेते हैं| आगे बढ़ते हुए अब मैं ज़रा जीडीपी की बात कर लेती हूँ सर|

उत्तर: मैं फिर एक बार दोहराता हूँ यह एक पहली सरकार ऐसी है जो फैसले जनहित और देश हित में करती है, चुनाव को मद्देनज़र रखते सिर्फ फैसला कभी नहीं किया|

प्रश्न: चलिए ठीक है, आपने अपनी बात रखी, बात अब जीडीपी की, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी…………….

उत्तर: नहीं, आप अगर इसको अगर कांटेस्ट करती हैं तो कुछ प्रमाण रखिए मैं आपका उसका भी जवाब दे दूंगा, पर आपकी बात को ठीक करना भी मेरा एक कर्तव्य है|

प्रश्न: नहीं, नहीं, बिलकुल, आखिरी के 5 मिनट जुड़े हुए हैं इसलिए आप अपनी पूरी बात रखिए और बिलकुल बेबाकी से आपने अपनी बात भी रखी है| लेकिन बड़ा सवाल यह है जीडीपी को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की ओर से कहा गया था कि इससे नोटबंदी जो बड़ा फैसला लिया गया 2% जीडीपी नीचे आ जाएगी, प्रभावित हो जाएगी| नोटबंदी के पहले के आंकड़े को अगर हम देखें 7.4 और अभी जो स्थिति है 5.7 की, इसका तो सीधा असर देखा जा रहा है, उन्होंने भी बहुत सारी सलाह दी जो आप लोगों ने मानी नहीं?

उत्तर: पहली बात तो इतने बड़े अर्थव्यवस्था समझने वाले पूर्व प्रधानमंत्री, उन्होंने कब यह बात कही थी, नवम्बर में, आपको याद होगा| आप उसके बाद के आंकड़े देख लो जो क्वार्टर गया, कोई 2% कम नहीं हुई है,..

प्रश्न: धीरे-धीरे कम के, सर मेरे पास पूरा आंकड़ा है, धीरे-धीरे करके वह नीचे की तरफ जुलाई से …..?

उत्तर: अभी आंकड़े आते रहेंगे, इसमें स्पष्ट बात यह है कि जब एक informal economy से formal economy में हम move करने के लिए 2 अहम फैसले इतने short period में, एक November में, एक 1st July को, जब 2 अहम फैसले लेते हैं तो देश को उसमें adjust करके एक नयी व्यवस्था से जुड़ने में थोड़ा समय लगना था, हमें पूरा खयाल था कि लगेगा, और वह सोच-समझकर लिया गया क्योंकि कभी न कभी किसी को तो यह साहस लेना पड़ेगा| आखिर उनकी सरकार तो fail हो गयी थी, उन्होंने कब अन्नौंस किया था शायद, 2007 में अन्नौंस किया, 2007-08 में अन्नौंस करके 2014 तक वह तो जीएसटी नहीं लागू कर पाए और हमने भी कैसे लागू किया, कोई जोर-ज़बरदस्ती नहीं की, पार्लियामेंट में सर्वसम्मति से पास हुआ, उनकी पार्टी ने भी समर्थन किया| जो जीएसटी काउंसिल है अभी तक 6 फाइनेंस मिनिस्टर कांग्रेस के भी हैं, अभी तक हम पूरी तरीके से सफल नहीं हुए हैं भ्रष्टाचार-मुक्त और कांग्रेस-मुक्त भारत बनाने में, थोड़ा समय लगेगा यह 6 फाइनेंस मिनिस्टर्स अभी भी हैं जीएसटी काउंसिल में| उन्होंने तो हर निर्णय पर सर्वसम्मति दी, उन्होंने तो कभी वहां पर तो oppose किया नहीं| तो यह क्या बात कर रहे हैं, मतलब एक तरफ उनके फाइनेंस मिनिस्टर्स जीएसटी काउंसिल के हर निर्णय को तय कर रहे हैं और बाहर आकर कुछ और…. These double standards ने ही उस पार्टी को आज 44 सीटों पर पहुंचा दिया है, अगले चुनाव में पता नहीं भगवन जाने क्या होगा|

प्रश्न: देखिए पीयूष जी आप राजनीतिक बातें कर रहे हैं और मुझसे आपने कहा कि राजनीति नहीं करनी चाहिए नोटबंदी और जीएसटी के मुद्दों पर|

उत्तर: नहीं, नहीं, मैंने तो सिर्फ clarify किया कि 6 उनके भी वित्त मंत्री उस जीएसटी काउंसिल में है.. मैं अपनी फेलियर बता रहा था कि हम अभी तक कांग्रेस-मुक्त और भ्रष्टाचार-मुक्त भारत पूरी तरीके से नहीं कर पाए, मैं तो अपनी फेलियर आपके सामने गिना रहा था|

प्रश्न: लेकिन कहा जाता हैना कि निंदक नियरे राखिये|

उत्तर: एकदम| In fact, आप देखिए कल परसों के Indian Express को देखिए, मैं उनके idea exchange में गया था, सब editors सोच रहे थे कि मैं बहुत नाराज़ हूँगा कि उन्होंने 6 series में कोल के ऊपर एक स्टोरी चलाई है आपने भी पढ़ी होगी| सबसे पहली चीज़ तो मैंने उनका धन्यवाद किया, और आप भी अपने पत्रकार बंधु जो मेरे बीट कवर करते हैं या किसी को भी पूछ लीजिये जो भी constructive criticism, जो एक बिना कोई एजेंडा या बिना कोई personal bias से दिया जाता है उसको मैं स्वीकार करता हूँ, उसको मैं स्वागत करता हूँ और उससे सीखकर ठोस कदम उठाता हूँ सुधार कैसे करना है| और transparency जो यह सरकार लायी है, यह पहले 70 वर्ष में नहीं था जिस level की transparency मोदी जी की सरकार ने जनता के समक्ष हर चीज़ open की है क्योंकि हम चाहते हैं कि आप हमारे काम पर निगरानी रखिए, आप समय-समय पर उसकी आलोचना और निंदा भी करें और उस आलोचना-निंदा में जो हम सीखकर अपना काम और अच्छा कर पाएंगे उसके लिए हम प्रतिबद्ध रहेंगे, संकल्पित रहेंगे|

प्रश्न: चलते चलते 2 आखिरी सवाल और पूछ लेती हूँ, यह नोटों की गिनती का काम कितनी जल्दी पूरा कर लिया जायेगा और पूरे आंकड़े देश के सामने कब आने वाले हैं?

उत्तर: यह सवाल आपको RBI को पूछना पड़ेगा क्योंकि नोटों की गिनती सरकार नहीं करती है, लेकिन इतने बड़े पयमाने पर नोटों की गिनती शायद आज तक विश्व के इतिहास में कभी नहीं हुई है| उसकी जो मशीन है गिनने की वह इस रूम से भी बड़ी है, क्योंकि उसमें फेक करेंसी भी डिटेक्ट करती है, काउंटिंग करती है, bundling करती है, उसको डिस्ट्रॉय करने के लिए तैयार करती है| बहुत बड़ा काम है, कभी आज तक किसी कंट्री ने आज तक ऐसा काम किया नहीं है, sudden था decision नोटबंदी का क्योंकि पहले से अन्नौंस कर दें, प्लान कर दें तो विषय ख़त्म हो जाता| इसलिए उनके पास भी व्यवस्था कोई इतनी नहीं थी कि लाखों करोड़ नोट गिन सकें तो अगर टाइम लग रहा है तो स्वाभाविक है, और हम उसके लिए तैयार हैं, उसकी वजह से कोई काला धन के ऊपर जो कारोबार करना है वह हमें कोई देरी नहीं होगी|

प्रश्न: सर अब मेरा एक आखिरी सवाल, कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी ‘मित्रों’ कहते हैं तो डर लगने लगता है देश की जनता को, फिर मित्रों कह कर कुछ यह 2000 और 500 के नोटों की तरह कोई व्यवस्था तो आगे आने वाले वक्त में नहीं होने जा रही?

उत्तर: ऐसा है कि यह ‘मित्रों’ जब प्रधानमंत्री कहते हैं तो वह अपने मित्र जो इस देश की ईमानदार जनता है उनको संबोधित करते हैं| बेईमान लोग, भ्रष्टाचारी लोगों को ज़रूर डर लगता है क्योंकि उनको लगता है पता नहीं हमारे ऊपर और क्या वार आएगा| लेकिन जो प्रधानमंत्री के सही मित्र हैं जो इस देश की गरीब जनता, जो इस देश की जनता एक ईमानदार व्यवस्था चाहती है, जो परेशान है भ्रष्टाचार से वह स्वागत करती है, समय-समय पर उनको मौका मिलता है तो आशीर्वाद देती है, चुनाव भी जिताती है तो मुझे लगता है जिनको डरना चाहिए उनको अवश्य डरना चाहिए उससे, देश की जनता उससे खुश है|

प्रश्न: लेकिन सरकार को ज्यादा डराना नहीं चाहिए आम लोगों को|

उत्तर: आम लोगों को हम कभी नहीं डराते हैं, आम लोग तो हमारे मित्र हैं, डरते भ्रष्टाचारी और बेईमान लोग हैं|

प्रश्न: बहुत शुक्रिया पीयूष जी जन मन धन एबीपी न्यूज़ के इस खास कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए और बेहद बेबाक तरीके से अपनी राय रखने के लिए|

उत्तर: धन्यवाद|

 

 

 

Government, under PM Shri Narendra Modi, is methodically shattering the glass ceilings that trap Indians in poverty.

Reform has become the trope of our times. After nearly a quarter century of hop, side-step and crawl, the Indian economy remained shackled to shibboleths till 2014, when India languished, to offer only one example, at a pathetic 142 in the ease of doing business index. Prime Minister Narendra Modi’s intense effort for change is delivering outcomes: an unprecedented leap has taken India to step 100 on this ladder. The PM’s next destination is the top 50. It will happen.

But reform is only part of Narendra Modi story. He has set himself a far more daunting challenge: to liberate 100 million households, or nearly half a billion Indians, from the whiplash of poverty, into a world of aspiration, empowerment and gender equality. This mission too has a deadline: 2022.

This will not happen by reform alone. It needs a radical transformation in resource mobilisation and a shift in the focus of public investment across class lines to turn the impoverished into masters of their own economic emancipation. The existing broadband of unjust hierarchies is not easy to alter, however; nor will any deep establishment accept change without a fight for preservation of its entitlements.

India’s poor were trapped under at least three glass ceilings. The first was exclusion from banking. This, crucially, denied them credit facilities and made bank loans the preserve of a small demographic pyramid where, as it tapered to the peak, loans became fatter and cosier. This was not crony capitalism; this was crony corruption in capital letters. Exclusion from banking also made the poor vulnerable to middlemen within transfer institutions. Cash attracts sticky fingers.

Prime Minister Modi designed the architecture of change through a series of logical, inter-connected decisions. Many observers and all partisans could not conceive the second or third step when he ventured on the first.

It began with Jan Dhan Yojna, the largest banking inclusion project in history. Within a startling three months, over 300 million new accounts were opened for those who had never crossed the threshold of a bank before. Critics packed the airwaves with jeers, laughing at the fact that these were accounts without money. They missed the point completely. For the first time, banks were opening doors for those without money, rather than for those with cash. The multi-dimensional results are in. Among them is an uncomfortable fact for the old critics: those 30.24 crore “zero” accounts now have Rs 66,466 crore as deposits. The poor, particularly in the villages, have secure savings.

Mudra, a scheme correctly described as “funding the unfunded”, brought down the second glass ceiling: it offered business loans to the poor, without collateral. Mudra could not have happened without Jan Dhan. Mudra is rescuing small-scale vendors from usurious moneylenders, even as it seeds new self-employment options for those who need base capital between Rs 50,000 to Rs 10 lakh. Its categories tell the story: from value addition to small shops or street vendors to domestic productivity through sewing machines, poultry, dairy, bee-keeping, et al.

The revolutionary element within Mudra is gender. Women, with their characteristic resolve and silence, are responding in extraordinary numbers. Since Mudra became operational on 8 April 2015, 9.13 crore loans have been taken. Of these 6.89 crore, or 76%, were taken by women. Impressively, 55% of the loans went to people from Scheduled Castes, Scheduled Tribes and Other Backward Classes, while 13% went to minorities.

The third ceiling was arguably the most difficult, for the glass in this ceiling was mixed with a granite called black money, and the underground economy is protected by the most powerful of vested interests. The policy target was to neutralise black money, expand tax-compliance, and use hidden cash to recapitalise a banking system infected by NPAs.

Aspirin does not cure cancer. Black money needed chemotherapy. Demonetisation led the assault against a pernicious, life-threatening disease rife through the economy. In but 12 months since 8 November 2016, as objective commentators have noted, the banking sector has been rejuvenated by demonetisation. Five months before demonetisation, gross NPAs were around Rs 6 lakh crore; today, banks can afford to lower interest rates. There has also been a massive crackdown on shell companies which are carriers of the black money virus; some 2,00,000 have been deregistered for not filing returns.

The positive impact of transformation on the lives of the poor cannot be fully captured by mere figures, but the number of direct beneficiaries within the last three years has risen astronomically, from 10.71 crore  to 35.7 crore this year. The amount of money they have received has gone up from Rs 7,367.7 crore to Rs 74,607.55 crore – by 10 times. Middlemen are licking their wounds and probably mobilising against the government. The number of DBT schemes has shot up from just 28 in 2013-14 to 314 in this current financial year. Over 40 crore people are getting benefits directly into their bank accounts. It is also estimated that the exchequer has saved Rs 57,029 crore in the process: change, as we know, tends to pay for itself.

What happens when glass ceilings are shattered? There is some debris on the floor, and there is some noise in the air. But those who think that election results are shaped by debris rather than substance, and political argument by noise rather than debate, have no clue about what influences an electorate’s mind.

He has one life, said Prime Minister Modi recently, and one mission: to reform, perform and transform. India, tired of stagnation, is eager for a New India.

Source: https://blogs.timesofindia.indiatimes.com/thesiegewithin/modis-mission-2022-government-is-methodically-shattering-the-glass-ceilings-that-trap-indians-in-poverty/

Speaking at Aaj Tak’s programme ‘Takkar’ in New Delhi

प्रश्न: ब्लैक मनी के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक कहलाने वाले demonetization को एक साल होने को हैं, 365 दिन बाद demonetization पास था या fail| आजतक की और इंडिया टुडे की इस बड़ी बहस, बड़ी टक्कर में आज आमने सामने हैं केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल और उनका मुकाबला करेंगे कांग्रेस के सचिन पायलट| स्वागत है आप दोनों का|

मंत्री जी आपसे शुरू करते हैं, आप उस खेमे में हैं जो मानता है कि नोटबंदी पास थी, आपके हिसाब से एक साल बाद जिस उम्मीद से, जिस सोच से demonetization का सर्जिकल स्ट्राइक किया गया| क्या वह सारी जो सोच थी वह हकीकत में बदली?

उत्तर: मैं समझता हूँ कि इस देश में काला धन ख़त्म हो, भ्रष्टाचार के ऊपर वार हो, यह इस सरकार की प्राथमिकता पहले दिन से रही| 2014 में जब से हम सरकार में आये, एक के बाद एक अहम फैसले लेकर हमने देश और दुनिया के समक्ष रखा कि काला धन और भ्रष्टाचार अब ख़त्म होगा इस देश में, उस प्रकार का व्यापार इनफॉर्मल इकॉनमी को पूरी formalize करनी की यह चेष्टा करेंगे और एक के बाद एक स्टेप लेते हुए जीएसटी आने के पहले कैश इकॉनमी, और जो व्यापार कैश से होता है उसके ऊपर एक बड़ा वार करने का यह निर्णय 8 नवम्बर, एक साल पहले लिया गया|

इसके multifaceted, बहुत सारे लाभ हमारे समक्ष आज के दिन दिखते हैं, लगभग पूरा पैसा किस-किस ने डाला आज एक नाम और पता, आइडेंटिटी आ गयी है और उसपर जिस प्रकार की कार्रवाई डेटा माइनिंग कर के, डेटा analyze कर के ध्यान में आ रहा है उससे लगता है सिर्फ वह पैसा नहीं जो शायद illegitimately बैंक में डाला गया, लेकिन उस ट्रेल को लेकर जैसे शैल कम्पनीज में लगभग 2 लाख कम्पनीज deregister कर दी गयी, साढ़े तीन लाख के करीब transactions शक के घेरे में हैं| उसमें से 5000 ही transaction का डेटा माइनिंग किया तो 4000 करोड़ की transactions सामने आ गयी|

और सिर्फ पैसा जो जमा किया नहीं, उसके पहेल भी अगर किसी ने उस कंपनी या उस व्यवस्था को यूज़ करके जो गलत काम किया तो एक प्रकार से काले धन और भ्रष्टाचार करने वाले लोग जिन्होंने इसमें अपना पैसा किसी न किसी तरीके से डालने की भी कोशिश की उन सबके पुराने चित्ते-पट्टे और आजका यह पैसा, यह मिलाकर एक बहुत बड़ा मेसेज गया है, साथ में बहुत सारे और फायदे, ईपीएफ ले लो तो एक करोड़ नए खाते खुल गए, ईएसआईसी में 1.3 करोड़ नए खाते खुल गए| तो इससे ध्यान में आता है कि लोगों को मिनिमम वेजेस भी मिलनी शुरू हुई होगी जो पहले नहीं मिलती थी, और उसमें भी हमने 42% वृद्धि की|

और बढ़ते जायें तो फायदे… I can, terrorism की activities में थोड़ा कमी आई है, left-wing extremism में जितने लोगों ने surrender किया वह रिकॉर्ड रहा है लास्ट year में| तो एक के बाद एक, cashless economy की तरफ देश जाये और demonetization का एक बहुत बड़ा लाभ यह हुआ कि लोगों में यह जागरूकता आई कि less-cash economy देश हित में है, बिल लो, पूरा टैक्स पे करके लो, informal economy को एक प्रकार से ख़त्म करके GST-ready भी देश को बनाने का काम demonetization से हुआ|

प्रश्न: आपने कई फायदे गिनाये मंत्री जी| पीयूष जी विरोधी कहते हैं कि अगर घर में मच्छर घुस आये तो उस मच्छर को मारते हैं, पूरे घर को नहीं जलाते| पीयूष गोयल आपकी बात पर सचिन पायलट यह कह रहे हैं कि आपने जिस तरीके का इकॉनमी पर प्रहार कर दिया, नोटबंदी के फायदे बाकी तरीके से भी हो सकते थे पूरी इकॉनमी को जलाने की ज़रूरत क्या थी?

उत्तर: वैसे इस देश का दुर्भाग्य यही है कि कांग्रेस पार्टी को भ्रष्टाचार या लाखों करोड़ रुपये के घोटाले करते हुए उनको सिर्फ एक मच्छर दिखता है, उनको ध्यान नहीं आता है कि देश की जनता के ऊपर कितना नुकसान और देश की अर्थव्यवस्था कितनी डैमेज होती है इस प्रकार के भ्रष्टाचार से जो सालों साल कांग्रेस ने इस देश में किया है| जहाँ तक बात रही कि कैशलेस की बात उस दिन नहीं की, कोई हर एक बात हर वक्तव्य में तो नहीं दी जाती है, कैशलेस इकॉनमी की तरफ जाने का निर्णय सरकार का फरवरी 2016 में ही अन्नौंस हो गया था, 23 कड़े कदम उठाये गए थे और कैशलेस इकॉनमी को जाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है, यह continuing process था, 16 फरवरी के आस पास यह decision लेकर, 23 निर्णय लेकर अन्नौंस किया था कि कैशलेस की तरफ जाना है|

जहाँ तक बात रही, यह आंकड़ों की बात कर रहे हैं, यह भूल रहे हैं कि number of taxpayers कैसे बढ़े तो लोगों को undisclosed income detect करने के बदले हम प्रोत्साहित कर रहे हैं कि आप अपनी income disclose honestly करो, number of taxpayers बढ़ गए, Idea scheme निकाली तो 65,000 करोड़ रुपये लोगों ने अपने खाते में जमा करके उसपर टैक्स भर दिया| सचिन जी कह रहे हैं कि आतंकवाद बढ़ा है, मैं समझ नहीं पा रहा हूँ जबकि reality है कि left-wing extremism जितने लोगों ने surrender किया वह भी बढ़ा है और terrorist activities झारखंड, छत्तीसगढ़ में घटी हैं| आप stone pelting देख लें तो लगभग एक-चौथाई रह गयी है जो पिछले वर्ष थी नोटबंदी के पहले, इन सब गतिविधियों पर भी availability of fake currency इसलिए कम हुई, अब जैसे बड़े वैल्यू के नोट्स हैं, 16.5 लाख करोड़ थे और 16.5 लाख करोड़ भी लगभग 2004 से 2014 के बीच हर वर्ष 12-13% बढ़ते-बढ़ते यह हो गए| तो यह 16.5 लाख करोड़ 18 लाख करोड़ होते हैं आजके दिन, उसके बदले आज सिर्फ 12 लाख करोड़ के बड़े वैल्यू के नोट्स हैं, कोई अर्थव्यवस्था में दिक्कत नहीं है, सब कारोबार ठीक चल रहा है|

Digital transactions, गत एक वर्ष में 58% बढ़ी हैं, तो स्वाभाविक है कि देश ईमानदारी की तरफ जा रहा है, देश recognize कर रहा है कि अब यह काला बाजारी करना, tax evade करना इसका कोई लाभ नहीं है, और मैं समझता हूँ देश इससे GST के लिए भी ready हुआ और इससे आगे चलकर एक विश्वसनीयता देश और विदेश सभी जगह भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगी, ब्याज के दर कम हुए, ज्यादा पैसा available रहा for lending to small and medium enterprises. हर प्रकार से, आप जितने इसके अलग-अलग पहलू देखें, cash in the economy कम होने से स्वाभाविक है कि लोग formal transactions ज्यादा करेंगे, formal करेंगे तो GST successful होगा|

प्रश्न: तालाब में छोटी मछलियाँ मर गयीं लेकिन जो मगरमच्छ है वह तो बाहर निकल गया?

उत्तर: नहीं तो इसकी जानकारी अगर सचिन जी के पास है तो हमें मदद करें कि हम जो मगरमच्छ क्रिएट किये गए थे पहले उनको भी हम जल्द से जल्द कटघरे में खड़ा कर सकें| सचिन जी आप गलती यहाँ कर रहे हैं कि आपको ध्यान में नहीं आ रहा है formalize होने से इकॉनमी कैसे कामगार, मजदूर, गरीब को फायदा होता है| आज 1 करोड़ 3 लाख additional EPFO में subscribers आये, कोई वर्ष में पहले कभी इतनी वृद्धि नहीं हुई, ESI में 1 करोड़, 30 लाख नए ESI के subscribers आये तो सीधा 5-6 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य की सेवाएं मिल जाती हैं|

अब यह सब क्यों हुआ? क्योंकि लोगों ने formal economy में जुडकर आज तन्ख्वाएं official channel से देनी शुरू की उससे साथ में minimum wages देने के लिए भी बाध्य हो गए| हमने 42% minimum wage बढ़ाया था इस सरकार ने सभी sectors के लिए, तो आज एक गरीब आदमी जो कामगार है उसको एक अच्छा जीवन जीने के लिए जो minimum wages भी नहीं मिलता था जिसको स्वास्थ्य सेवाएं या social security नहीं मिलती थी वह हमने सुनिश्चित की| जहाँ तक income tax के payees की बात है हम तो कह ही रहे हैं हमने 2014 से लगातार यह सिलसिला चालू रखा है काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ यह चालू, चलता रहेगा और इसी के कारण है कि the tax base is also increasing, tax base बढ़ेगा तो स्वाभाविक है कि tax rates कम करने में भी सरकार का साहस बढ़ेगा|

और अब यह बार-बार इनके मन में है कि RBI ने किया या government ने किया इसके ऊपर तो मैंने ही स्पष्टीकरण दी थी पार्लियामेंट में, फिर एक बार समझा देता हूँ शायद समझने में कुछ कठिनाई होगी कांग्रेस के मित्रों को| यह निर्णय RBI के board पर दिया गया as a recommendation from the government, उस board ने उसको स्वीकृत करके final जो call लेना होता है वह cabinet ने लेना होता है| तो एक well-established process है जो Reserve Bank Act में stipulated है, स्वाभाविक है उस process के तहत इसका निर्णय RBI और government के दोनों की मिली सहमति से यह निर्णय लिया गया|

प्रश्न: मंत्री जी मैं आपको बताऊँ कि demonetization की पहली anniversary पर भारत में जो लघु उद्योग के तमाम केंद्र हैं वहां से हमने अपने रिपोर्टरों को भेजकर ground report कराई – लुधिआना, मुरादाबाद, वाराणसी, सूरत, मुंबई, दिल्ली के इर्द-गिर्द जो फैक्ट्री के इलाके हैं वहां पर हमारे रिपोर्टरों ने पाया कि जो छोटा उद्योगपति है वह काफी प्रभावित है demonetization के बाद और GST के चलते उसका बिज़नेस अभी पूरा रिकवर नहीं हुआ है| कईयों ने बताया कि कम से कम 40-50% उनका जो turnover था उसपर impact हुआ, उनका कहना है कि कई सारे जो उनके साथ employees थे उनको hire करने की अब उनकी हालत ही नहीं है| तो कहीं न कहीं small and medium enterprises को जो चोट पहुंची है उससे अभी पूरी recovery नहीं हुई है?

उत्तर: अलग-अलग उदाहरण आपकी उस रिपोर्ट में मैं स्पोर्ट्स गुड्स का देख रहा था, स्पोर्ट्स गुड्स वाले कह रहे थे कि हमारे काम में तो बहुत वृद्धि हुई है| तो यह individual case by case जो लोग formal economy से जल्दी जुड़े जो formal economy में tax structure के अन्दर आ गए उनका व्यापार तेज़ गति से ठीक हो गया| अगर कुछ लोग informal economy में अभी तक रहते हैं उनको शायद समय लगेगा समझने में कि अब कर की चोरी करना advisable नहीं है| मैं समझता हूँ यह कोई one-size-fits-all आपकी रिपोर्ट के हिसाब से निर्णय नहीं ले सकते हैं| The fact is कि overall एक देश में लोगों के अन्दर भावना उठी है कि अब आर्थिक व्यवस्था सुधरी है, आर्थिक व्यवस्था ईमानदार हो रही है और ईमानदार व्यवस्था से जब सब लोग जुड़ते हैं तो उसका स्वाभाविक है लाभ होता है, टैक्स रेट्स कम हो सकते हैं, टैक्स बेस बढ़ने से a larger number of people when they are paying taxes, तो सरकार की ज़रूरतों के हिसाब से टैक्स रेट्स भी घट सकते हैं|

तो मुझे लगता है कि it’s too early, GST के अभी-अभी 3 महीने के अनुभव के हिसाब से सुधार की प्रक्रिया निरंतर चालू है जिसमें कांग्रेस के भी Finance Ministers अभी तक GST Council में अभी तक पूरी तरीके से देश कांग्रेस-मुक्त हुआ नहीं है, जब तक कांग्रेस-मुक्त नहीं होता तो वह सम्मिलित हैं यह सर्वसम्मति से जो निर्णय लिए जाते हैं| मुझे तो समझ नहीं आता कि यह double standards कैसे हैं कि GST Council में कुछ और और बाहर कुछ और कहना, यह वास्तव में कांग्रेस की क्या सोच है, आर्थिक सोच, यह क्यों क्लियर नहीं हो रही है उनके अन्दर यह मेरे समझ में नहीं आ रहा है|

सचिन: मैं समझा देता हूँ आपको पीयूष जी, पहली बात तो मुझे बड़ा आश्चर्य होता है कि सरकार में जो लोग बैठते हैं वह वास्तविकता से इतनी दूर हट जाते हैं, एक साल बाद आज हमें बताया जा रहा है कि ईएसआई बढ़ जायेगा, टैक्सेज शायद कम हो जायेंगे लेकिन एक साल में जो मार पड़ी है, जो अर्थव्यवस्था चरमराई है, जीडीपी 2% कम हो गया, ….. वेज बढ़ नहीं रही, नौकरी मिल नहीं रही, मुझे तो कोई दुकानदार या आज तक वैसा वाला नहीं मिला जिसने कहा हो कि नोटबंदी से मेरे इकनोमिक प्रोग्रेस मेरे को मिली है| और हमें लगता है कि आप लोग जो बातें करते हैं जीएसटी की आपने कहा, जीएसटी एक अच्छा इशू है लेकिन जिस प्रकार आपने implement किया है उसका परिणाम भुगतना पड़ेगा बहुत जल्द और तभी प्रधानमंत्री जी ने कल बोला कि हम और कुछ रिहायत देंगे, क्योंकि यह push back आ रहा है छोटे व्यापारियों से जैसे आपने कहा राहुल जी, देश में भावना है अब कोई उसको न माने तो अलग बात है|

लेकिन बात नोटबंदी की हम करें, नोटबंदी के माध्यम से मुझे लगता है कि इस देश के अन्दर ज़रूरत नहीं थी, जो आप भ्रष्टाचार के खिलाफ, काले धन के खिलाफ कदम उठाना चाहते थे, उठा सकते थे लोगों को कॉन्फिडेंस में लेकर| लेकिन आपने नोटबंदी करके जो हमको कहा देश में ऐसा होगा वैसा हुआ नहीं है| आज आप इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट्स की बात कर रहे हैं, RBI बोल रहा है कि जो electronic transactions हैं वह pre-नोटबंदी की लेवल तक पहुँच चुके हैं, तो एक उछाल आया वापिस आ गया, लेकिन e-wallet और digital payment ही नोटबंदी का उद्देश्य था क्या? नोटबंदी के उद्देश्य से आपने काला धन ख़त्म करने की बात की थी, कितना काला धन आपने पकड़ा है और मुझे तो लगा था कि नोटबंदी के बाद जो पैसा जमा होगा तो बीजेपी ने कहा था 15 लाख रुपये हर खाते में आयेंगे, हमने कहा हो सकता है पहली किश्त उसी की मिल जाये वह भी नहीं हुआ| तो ले देकर बहुत बड़ा failure साबित हुआ है कोई इस बात को माने या न मने|            

उत्तर: नहीं, आपकी बात में बहुत सारी चीज़ों में सिर्फ गोल-मोल ही बात है, स्पष्ट बात अगर देखें तो जितनी जनता है वह जनता आज प्रधानमंत्री मोदी जी और इस निर्णय के साथ खड़ी है, चुनाव आफ्टर चुनाव उसके बाद, आखिर चुनाव जनता उसमें निर्णय लेने का जो प्रक्रिया है उसका अगर सर्टिफिकेशन है तो वह जनता देती है| कांग्रेस से तो सर्टिफिकेशन हमें मिलना नहीं है|

सचिन: पंजाब में सर्टिफिकेट नहीं मिला आप लोगों को?

उत्तर: पंजाब के कारण चुनाव के आप भी जानते हैं, मैं भी जानता हूँ, पर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड….. तो ठीक है पंजाब एक स्टेट के सामने जो देश भर के चुनाव हुए| नहीं चुनाव एक सर्टिफिकेशन है| आंकड़ों की जहाँ तक बात है, digital transaction 58% बढे, यह फॉर्मल इकॉनमी और ईमानदार इकॉनमी बढती है कि नहीं, they have not come back to pre-demonetization. I think you are mistaken.

Second, second जो आप बार-बार सोचते हैं कि workers को या छोटे दुकानदार को लाभ नहीं हुआ, reality यह है कि 50 लाख नए खाते खुलकर आज workers को official payment उनके खाते में जाती है| जो suppliers हैं अलग-अलग प्रकार के, चाहे वह vegetable suppliers हो, food grains हो उन सबको भी formal economy से जोडकर आगे उनकी ऋण लेने की capacity….

सचिन: मंत्री जी फॉर्मल इकॉनमी तो जुड़ना चाहिए लेकिन क्या नोटबंदी ज़रूरी थी उसके लिए?

उत्तर: नोटबंदी इसलिए ज़रूरी थी कि जो लाखों करोड़ बड़े नोट लोगों के घर में या किधर छुपे हुए थे वह एक बार बाहर आने से, बैंक में आने से…

सचिन: सारे बाहर आ गए?

उत्तर: बाहर तो आये ना, वह तो फिगर सबके पास है| वह तो बाहर आये और बाहर आने से आज सिर्फ….

सचिन: तो वह काला धन कहाँ चला गया, अगर बैंक में जमा सारे पैसे हो गए तो फिर काला धन कहाँ चला गया?

उत्तर: सचिन जी अगर एक बार बैंक में पैसा जमा हो जाता है तो वह ब्लैक टू वाइट नहीं हो जाता है, अब उसकी छानबीन से लोगों को जवाब देना पड़ता है|

सचिन: अब क्या है राहुल, अब वह tax terrorism, अब लोगों को नोटिस मिल रहे हैं, सच्चे-झूठे केस बन रहे हैं, तो tax terrorism, minimum governance की बात करते थे आज छोटा दुकानदार हो या बड़ा उद्योगपति हो जैसे ही मुंह खोलता है उसको फट नोटिस मिल जाता है| तो नोटिस देकर लोगों के अन्दर आतंकित करना कोई बहुत अर्थव्यवस्था का कॉन्फिडेंस जो है इकॉनमी में वह ख़त्म हो रहा है|

उत्तर: आप ऐसा तो मुझे बताइये कि कौन इसमें परेशान हुआ, जो भ्रष्टाचारी लोग हैं वह परेशान हुए, ईमानदार आदमी को इससे कोई कठिनाई हुई है| ईमानदार आदमी ने तो वेबसाइट पर रिप्लाई लिख दिया कि यह पैसा इधर का है उसको कितने तकलीफ नहीं हुई और जो 2 लाख लोगों ने……

प्रश्न: पर पीयूष जी, हकीकत यह भी तो है कि आप कितने चोरों को पकड़ पाएंगे, फ़र्ज़ कीजिये जैसे इन लोगों ने कहा कि Fair and lovely एक स्कीम है कि आपकी black white हो जाती है अगर आपने कहा कि अब इसका एक trace हो गया financial और हम लोगों को पकड़ सकते हैं तहकीकात के बाद, आपको मालूम है कि हमारा जो tax structure है, जो tax officials हैं, investigation wing है वह कितना बड़ा, कितना छोटा है, सवाल यह है कि अगर बहुतों ने चोरी की और सबने declare कर दिया उनका calculation यह था कि कुछ पकडे जायेंगे ज़्यादातर बच जायेंगे, जो पकडे गए वह tax pay कर देंगे बाकी बच गए उनका black to white हो गया?

उत्तर: ऐसा नहीं है, जब डेटा माइनिंग करते हैं और डेटा निकलता है तो लोगों को उसकी credible reason देनी पड़ती है, साथ ही साथ अकाउंट में और पुरानी transactions भी सामने आती हैं तो आखिर यह 2 लाख companies, shell companies जो deregister हुई हैं यह तो कांग्रेस के ज़माने में भी थी| जिस प्रकार से shell companies use होकर money laundering होता था उसपर आज तक कभी प्रहार नहीं हुआ था जो पहली बार हो रहा है| अब हाँ, अगर कोई गलत काम करे और उसको बचाने की कोशिश कोई करना चाहे या उसको tax terrorism का नाम दे तो मैं समझता हूँ हमारी सरकार उससे कोई डरती नहीं है|

प्रश्न: क्या यह मेसेज नहीं गया पीयूष जी कि यह मार्केटिंग वाली सरकार है, तमाम लोगों के कहा, इवेंट मैनेजमेंट में सरकार बहुत माहिर है, और ठीक है नियत सही है, कोशिश भी की लेकिन जितना कहते हैं उतना हुआ नहीं, होता कम है कहते ज्यादा हैं?

उत्तर: देखिए, 6 सरकार थी हमारी 2014 में, अगर सिर्फ इवेंट मैनेजमेंट वाली सरकार होती तो आज 18 सरकारें देश में नहीं होती, अगर इवेंट मैनेजमेंट वाली सरकार होती तो जहाँ ऑप्टिक फाइबर केबल 358 किलोमीटर लगा हुआ था 2014 तक आज 2,25,000 किलोमीटर नहीं होता, अगर इवेंट मैनेजमेंट वाली सरकार होती तो रेलवे का दोहरीकरण, रेलवे की नयी लाइनें, यह electrification यह सब इतने, almost double नहीं होता पिछली सरकार से| और आप जो आंकड़ा ले लो चाहे वह विद्युतीकरण हो, चाहे वह नवीकरणीय ऊर्जा हो, चाहे वह कोयले के उत्पादन की बात हो, चाहे वह digitalization of the economy की बात हो, चाहे वह fertilizer की बात हो, आखिर fertilizer का क्या होता था, कांग्रेस के समय में fertilizer chemical बनकर फैक्ट्रियों में जाता था और किसान सड़क पर आकर धरने बोलते थे, 3 साल में एक भी जगह खाद की कमी नहीं है, पता नहीं सचिन जी को कहाँ से नया issue आया है, 3 साल में एक भी जगह खाद की कमी नहीं हुई|

सचिन: क्योंकि पीयूष जी मैं उन किसानों के साथ धरने पर बैठा हूँ राजस्थान में जहाँ महीनों तक खाद नहीं मिला, लाठी चार्ज हुआ है, लोगों को पुलिस की निगरानी में जो बोरी होती है खाद की वह बिकी है|

उत्तर: आपने अगर उत्तेजित किया हो किधर किसी छोटे…. तो पता नहीं, आज देश में जबसे नीम कोटिंग हुई है…..

सचिन: आप आरोप लगाने का काम मत करो, आप सच्चाई से मुंह नहीं नहीं जोड़ सके… पीयूष जी किसानों की दुःख सुनने का अगर आप में दिल हो तो मैं लेकर चलता हूँ राजस्थान जाकर देखो आप, वहां किसानों पर गोली चल रही है मध्य प्रदेश में…

उत्तर: मैं नहीं समझता हूँ कि कोई किसानों पर गोली चल रही है, उत्तेजित करके आप अगर कोशिश करो तो वह आपकी…..

सचिन: उत्तेजित करें? गोली चला रहे हो आप, 6 लोगों के छाती पर गोली मार ली मध्य प्रदेश ने, किसान धरना दे रहे थे फसल और खाद के लिए| यह कहना कि 3 साल में आपने चमन लेकर आ गए हिंदुस्तान के अन्दर तो जीडीपी हमारी 5.5% पर कैसे आ गयी?

उत्तर: आपने स्थिति इतनी बिगाड़ कर दी कि 3 साल में तो कोई चमन नहीं आएगा, समय लगेगा चमन आने में लेकिन…… साढ़े तीन ….

सचिन: तो ऐसा है पीयूष जी, 4 साल हो गए आप कब तक कांग्रेस को कोसते रहोगे, आप कब तक कांग्रेस को दोष दोगे आपको 4 साल होने को आये हैं| आप सिर्फ कांग्रेस को दोष देने से …नहीं पड़ेगी, आपको अपना करना पड़ेगा|

उत्तर: मैं तो आंकड़े दे रहा हूँ कि किस प्रकार से तेज़ वृद्धि से चाहे वह roads हो, रेल…..

सचिन: तो किसान आत्महत्या क्यों कर रहे हैं पूरे हिंदुस्तान में, गोलियां क्यों चल रही है, धरने क्यों हो रहे हैं, ऋण माफ़ी क्यों करनी पड़ रही है आपको? किसान इतना परेशान है आज…..

उत्तर: 3 साल तक जो drought states थे उसमें हमने अगर ऋण माफ़ी करी है तो वह मैं समझता हूँ सरकार की संवेदना है, महाराष्ट्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी संवेदना उन इलाकों में….

सचिन: मैं आपको हाथ जोड़कर बोलता हूँ, प्लीज राजस्थान के किसान के लिए भी करा दीजिये, आपने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र में करा दिया है, वसुंधरा जी को बोलकर राजस्थान के किसान का ऋण माफ़ भी करा दीजिये| मेरा आपसे निवेदन है आप बोल सकते हैं तो बोल दीजिये|

उत्तर: चलिए, वहां की स्थिति के हिसाब से तय होगा|

प्रश्न: पीयूष जी मेरे पास कुछ आंकड़े हैं, एक जो बड़ा मकसद demonetization का था वह यह कि fake currency पकड़ी जाएगी, जाली नोट पकडे जायेंगे| हमारे 2015 के National Investigation Agency के आंकड़े हैं जोकि कहते हैं कि उस वक्त 0.028% fake currency थी इकॉनमी में जोकि करीब 400  करोड़ रुपये थे, अभी क्या है RBI ने आंकड़े नहीं दिए उनका कहना है कि अभी भी गिनती चल रही है जाली नोटों की| लेकिन कुछ अर्थशास्त्रियों ने जो डेटा अभी तक RBI के सामने है उसके आधार पर calculate किया है कि 0.0007% 1000 रुपये के नोट और 0.02% 500 रुपये के नोट, जिसकी कुल मिलाकर वैल्यू ज्यादा नहीं होती है?

उत्तर: I don’t know these datas, लॉजिक क्या है? जाली नोट तो जब पकड़ा जायेगा तभी मालूम पड़ेगा, तब तक जो नोट बाहर है उसका तो मालूम ही नहीं पड़ेगा और अब वह जाली नोट्स वैसे भी useless हो गए क्योंकि जाली नोट को तो कोई cash कर नहीं सकता, use नहीं कर सकता| तो 1000 और 500 को SBN बनाकर (Specified Bank Notes) जो उसको रद्द किया, उसकी वजह से जो भी जाली नोट्स होंगे वह तो कागज़ का टुकड़ा ही बन गए ना अब तो use नहीं हो सकता है| That was one of the stated objectives.

प्रश्न: पर एक जो बड़ा मिशन था कि जाली नोट पर लड़ाई होगी, जाली नोट के खिलाफ…..?

उत्तर: हो गयी ना क्योंकि वह अभी वह जाली नोट, 31 मार्च के बाद तो कोई भी 1000 और 500 का नोट कोई काम का ही नहीं रहा|

सचिन: राहुल यह कह रहे हैं कि इतने कम जाली नोट थे तो आपको पूरे 15 लाख करोड़ ही नोटबंदी करनी पड़ी आपको वह जाली नोट पकड़ने की|

उत्तर: जाली नोट की डिटेल्स आपके पास ज्यादा होंगी मुझे तो मालूम नहीं कितना है|

सचिन: मेरे को RBI ने दिया है|

प्रश्न: RBI बहुत धीमे से गिन रही है, उनके पास मशीन नहीं है क्या गिनने की? वह एक-एक करके नोट गिनती है, इतना टाइम लग रहा है?

उत्तर: नहीं, नहीं, आप समझे नहीं, जाली नोट जो 400 करोड़ का फिगर या जो भी है यह वह बेसिस पर होता है जो पकडे जाते हैं, जो नोट पकडे नहीं गए वह तो, after all, किसी को मालूम नहीं कितने हैं क्योंकि नोटबंदी की गयी, अब यह जाली नोट्स तो useless हो गए ना, जिधर भी पड़े होंगे वह जाली नोट का तो कोई वैल्यू ही नहीं रहा|

प्रश्न: वह जो जमा हो गए ना बैंक में?

उत्तर: नहीं जमा तो हुए नहीं क्योंकि जमा हुए होंगे तो वह उनके कैलकुलेशन में आयेंगे|

प्रश्न: वही तो मैं बोल रहा हूँ कब आएगा कैलकुलेशन बाहर, यह बहुत धीमी-धीमी RBI की गिनती चल रही है?

उत्तर: देखिए इतने बड़े पयमाने पर नोट गिनती करने की व्यवस्था पूरे विश्व में किधर नहीं है, अब वह जो मशीन है गिनती है वह इस रूम से भी बड़ी है जो मशीन यह नोट्स गिनती है, वह नोट्स गिनती है, उसमें जाली नोट चेक करती है, bundling करती है, destroy करती है| तो यह एक सिलसिला RBI के हाथ में है, उनके पास जो व्यवस्था है उसके हिसाब से ही वह कर सकते हैं|

सचिन: एक साल तक अभी नोट गिने नहीं गए, हमें पता नहीं है कि कितने नोट जमा हुए हैं और कितने जाली थे और जो stated objective था कि जाली नोट हम पकड़कर ख़त्म कर देंगे वह अभी हमको कोई डेटा RBI ने दिया नहीं है|

उत्तर: भईया जो जाली नोट यूज़ ही नहीं हो पा रहे हैं वह तो ख़त्म हो गए ना|

सचिन: अरे पता तो पड़े ना?

उत्तर: कैसे पता चलेगा वह तो वेस्ट हो गए नोट|

सचिन: ऐसी कौनसी मशीन है जो RBI के पास नहीं है एक साल तक नोट ही नहीं गिन पा रहे है?

उत्तर: सचिन बाबू, वह नोट ही वेस्ट हो गए, वह नोट लग ही नहीं सकते|

प्रश्न: नहीं, वह तो कन्वर्ट हो गए रियल में, जो डिपाजिट हो गए कई सारे, इतने सारे जो नोट…?

उत्तर: The bank managers would return any such notes, there were not, कोई जाली नोट डिपाजिट नहीं हुए हैं|

सचिन: आप अलग-अलग बात बोल रहे हो, पहले तो कह रहे हो अभी गिन ही रहे हैं पता नहीं कितने जाली नोट होंगे, नहीं होंगे, फिर कह रहे हो जो बैंक मेनेजर देख लेगा वापिस कर देगा|

प्रश्न: That checks also, the RBI double checks.

सचिन: But RBI की autonomy को जिस तरह तहस-नहस किया है, आज हम देश वासियों को पहले गर्व होता था RBI की एक…. के ऊपर, एक autonomous body है, आज RBI का कुछ अता पता ही नहीं है कि नोट गिन पाएंगे नहीं गिन पाएंगे, कितने पैसे हैं किसने ऑर्डर किया| पहले इन्होंने कहा कि 2000 के नोट आयेंगे, फिर वह ATMs में उसको fit नहीं कर पाए, फिर अलग-अलग साइज़ के बना दिए और 74 notification 50 दिन में नोटबंदी के बाद| तो क्या preparation नहीं कर सकती थी सरकार अगर आपको करना ही था तो?

उत्तर: देखिए नोटबंदी का कोई decision preparation करके और जनता को अवगत करके तो नहीं किया जा सकता|

सचिन: RBI को तो बता सकते थे, RBI गवर्नर को तो बता देते बेचारे को?

उत्तर: RBI में भी जो व्यक्ति जो involved थे उनको पता था और यह एक-एक जो आप कह रहे हो कि ATM वगैरा की recalibration पहले से करने का तो संभावना ही नहीं थी|

प्रश्न: कुछ आंकड़े मैं आपको देना चाहता हूँ पीयूष जी क्योंकि एक बड़ा मकसद था कि कैशलेस इकॉनमी की तरफ हम बढ़ेंगे और लोग कार्ड का इस्तेमाल करेंगे| ऐसा हुआ भी, demonetization के फ़ौरन बाद, नवंबर में 671 million transactions हुई, पिछले साल के नवंबर में, वह बढ़ गयी 957 million में, दिसम्बर में, जुलाई आते-आते 862 हो गयी| और फिर अगर हम इसकी volume भी देखें कि किस volume की transaction हो रही है वह भी गिर रही है और जिसकी इसकी वैल्यू है दोनों, एक spike हुआ, spike के बाद थोड़ा stabilize हो गया| अब सवाल यह है कि क्या वाकई में behavior हमेशा के लिए चेंज हुआ क्योंकि हो सकता है कि लोग cash की तरफ …. बढ़ते जा रहे हैं?

उत्तर: देखिए, spike होकर stabilize होना तो अच्छा है अब और कदम उठाये जायेंगे|

प्रश्न: Spike होकर फिर गिरा भी है?

उत्तर: Slightly, और जो 23 steps लिए थे सरकार ने उस सब steps का continuous process रहेगा, जितना ज्यादा यह देश formalized economy में जायेगा उतना देश के लिए अच्छा रहेगा| और मैंने जो बड़ी बात कही थी आपको कि बड़े नोट्स कम हुए हैं और छोटे नोट्स ज्यादा रहने से मार्किट में जो खर्चा हो रहा है वह छोटे नोट्स का छोटे लेवल का खर्चा हो रहा है, बड़े नोट्स से जो भ्रष्टाचार में इस्तेमाल होता था वह नोट्स..

सचिन: राहुल अगर 1000, 500 के बंद कर दिए और 2000 के चालू कर दिए, तो obviously नोट्स कम हो जायेंगे ना?

उत्तर: नहीं, वैल्यू! Not number of notes, value.

सचिन: नहीं, I am saying value also, आपने 1000 रुपये का नोट बंद कर दिया, जब 2000 रुपये के नोट छापोगे तो आधे छापने पड़ेंगे|

उत्तर: अरे भाई, value of notes in the market has become less.

सचिन: यह कहा गया था कि बड़े वैल्यू के नोट्स बंद करोगे तो काला धन कम हो जायेगा लेकिन बड़ा वैल्यू का बंद करने के बाद उससे बड़ी वैल्यू का नोट निकल दिया|

उत्तर: वह तो इतनी बार discuss हो चुका है कि वह issue भी नहीं है, सचिन, जब आपने 15 लाख के आस पास करोड़ रुपये मार्किट से निकाले तो उसको remonetize करने के लियी… पर अब जिस-जिसके पास गया उसके बैंक से ही गया, stated identified लोगों के पास गया है और the bigger picture is कि जो लोगों ने accumulated पैसा रखा था वह सब बैंक में आने से अब उसकी identity आ गयी| यह नोट अब 12 लाख करोड़ हैं rather than 18 lakh crores, तो value-wise almost 1/3rd कम हो गया, तो this is a continuous purge on large value notes.

प्रश्न: पर सचिन, आखिर में यह बताएं कि क्योंकि हमें देखना है केवल demonetization को एक standalone move के तौर पर नहीं बल्कि जो सारी चीज़ें साथ में हुई, GST आप उसमें जोड़ दीजिये, benami properties के खिलाफ जो मुहिम चल रही है उसको जोड़ दीजिये, data mining चल रही है उसको जोड़ दीजिये, कुल मिलाकर आपको नहीं लगता कि जो हमारा ecosystem है, economic ecosystem, उसमें थोड़ी बेहतरी आ रही है?

सचिन: मैं सारे steps का समर्थन करता हूँ, जो भी कदम काले धन, भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाने की कोई भी सरकार कदम उठाती है मैं उसका सपोर्ट करता हूँ, लेकिन मेरा मानना है कि नोटबंदी का जो एक कदम था वह यह कहकर  कि हम आतंकवाद, अलगाववाद और जाली नोट को बंद करेंगे और अब आप कह रहे हो डिजिटल पेमेंट बढ़ गए वह गले उतरती नहीं है explanation| लेकिन आप बाकी Acts बनाओ, आप लोगों को काला धन को समाप्त करने के लिए जो भी कदम उठाएंगे उसका हर व्यक्ति सपोर्ट करेगा, कौन सपोर्ट नहीं करेगा? लेकिन नोटबंदी को लेकर जो ढिंढोरा पीटा था, प्रोपगंडा एक पोलिटिकल किया था कि हम गरीबों की लड़ाई लड़ रहे हैं और बड़े-बड़े सेठों ने जो पैसा इकट्ठा किया उसको ख़त्म करेंगे, लोगों को विश्वास हो गया गरीबों को कि यह 15 लाख मेरे खाते में आने वाला है, वह प्रोपगंडा fail हुआ है यह मेरा कहना है|

उत्तर: नहीं, वह आपने कहा होगा, हमने वैसा नहीं कहा, हमने तो स्पष्ट यह कहा था कि काला धन और भ्रष्टाचार के कारोबार करने वालों को कैश की ज़रूरत पड़ती है, कैश इस्तेमाल करते हैं| वह जितना कैश उस समय पर था वह सब बैंक में आने से identify हुआ, identify होने के कारण उसकी transaction, data mining से पुरानी सब चीज़ें बाहर आ रही हैं|

सचिन: सब थ्योरी है, आंकड़ा आपके पास कोई नहीं है, भारत सरकार अभी तक नहीं बता पाई की कितना पैसा वापिस बैंक में जमा हो गया, 99% पैसा वापिस जमा हुआ है| आप लोगों ने कहा था कि 3 लाख करोड़ काला धन निकलेगा, 3 लाख करोड़ काला धन कहाँ है?

उत्तर: किसने कहा था?

सचिन: भारत सरकार ने कहा है, कई बार कहा है?

उत्तर: आप बता दीजिये किसने कहा, बता देना मुझे|

प्रश्न: नहीं आपके अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा जब चर्चा हो रही थी demonetization पर तो उन्होंने यह आंकड़ा सुप्रीम कोर्ट जज के सामने दिया कि 3 लाख करोड़ रुपये हमें उम्मीद है कि इतना black money पकड़ा जायेगा?

उत्तर: हाँ तो उससे ज्यादा ही पकड़ा जायेगा…

सचिन: कब तक पकड़ा जायेगा, पैसा तो बैंक में पड़ा है सारा?

उत्तर: हाँ तो बैंक में आने से अभी तो मैंने आपको बताया कि ब्लैक से वाइट नहीं हो जाता है| उलटे वह बैंक पर… बैंक में आने से उसकी आइडेंटिटी आने से जो भी transactions, अभी उदाहरण देता हूँ एक, एक सोने के व्यापारी ने 94 crore rupees बैंक में डाले| जब उसको पूछताछ हुई तो ध्यान में आया कि वह बोलता है 5000 लोग आये, 2-2 लाख रुपये हमें जमा कर दिए 8.50 और 12 के बीच और यह पैसा मैंने बैंक में डाला है| अब स्वाभाविक है कि यह पकड़ में आया पैसा, कारोबार…||

सचिन: बहुत अच्छा है, ऐसे तो 100 लोग पकड़ो आप, लेकिन जो छोटा रिक्शा खींचता है, ठेले लगाता है उन लोगों को आर्थिक तंगी है?

उत्तर: यह जो चोट पहुंची है और पता नहीं कांग्रेस के नेताओं को क्यों इतना ज्यादा तीव्र गुस्सा आता है इसपर क्या चोट पहुंची है जिसकी वजह से आपको…..

सचिन: मैं तो बड़े प्यार से पूछ रहा हूँ आपको, गुस्से का सवाल ही नहीं|

उत्तर: मैं इसलिए कह रहा हूँ आपको कि रिक्शा वाले को तो कोई नोटबंदी से नुकसान नहीं हुआ|

प्रश्न: पीयूष जी आप खुद गुजरात में काफी घूम रहे हैं, मैं भी 2-3 दफा गुजरात होकर आया| वहां पर आप जिससे बात करो सड़क चलते वह बोल रहा है कि धंदा मंदा है, जिससे भी आप बात करो, by and large, कहते हैं कि थोड़ा असर पड़ा और अभी recovery full नहीं हुई है| उनका कहना है कि बेहतर हो रही है लेकिन demo के बाद GST भी आया उसके बाद recovery नहीं हुई, कहीं न कहीं जो सवाल उठा कि गाड़ी अर्थव्यवस्था की तेज़ी से चल रही थी आपने चली दी गोली टायर पर, उससे गाड़ी क्या economy slow नहीं हुई, 5.7 तो GDP की रफ़्तार आ ही गयी?

उत्तर: यह expected था कि economy पर थोड़ा धक्का पड़ेगा और यह भारत नहीं, पूरे विश्व में जहाँ-जहाँ GST लागू की गयी है, there has been a small dip, but वह dip transitional period में रहता है, destocking होती है, लोग नयी व्यवस्था के साथ जुड़ते हैं तो you will see the upswing very rapidly in the days and months to come.

प्रश्न: चलिए, इसी को यहीं पर ख़त्म करते हैं, आप दोनों जुड़े हमारे साथ, आपका बहुत-बहुत शुक्रिया| पीयूष गोयल भी और सचिन पायलट भी आप जुड़े, आपने इस बहस में हिस्सा लिया, आपका बहुत-बहुत शुक्रिया|

Thank you.

Demonetisation has set an honest environment, paving the way for a prosperous India. A piece by Shri Jayant Sinha.

India was transfixed and transformed a year ago on 8 November, when Prime Minister Narendra Modi, in his resolute war against corruption and black money, demonetized Rs500 and Rs1,000 currency notes. The political verdict came swiftly with stunning wins for the Bharatiya Janata Party (BJP) in Uttar Pradesh and Uttarakhand, and rapid government formation in Manipur and Goa. The prime minister’s popularity reached new heights and his approval ratings soared to levels rarely seen in democracies. The people of India recognized that a surgical strike was required to curtail illicit activities and blessed demonetisation. Thus, in political terms, demonetisation has already proven to be a resounding success.

On the other hand, in economic terms, a heated debate is under way whether demonetisation has been a success or not. Several reputed economists have pronounced their judgements on demonetisation.

For instance, Dr Raghuram Rajan has mentioned that he believed that while there might be long-term benefits, the short-term economic costs of demonetisation would outweigh them and that there were alternatives available to achieve the main goals. He has chosen not to elaborate what he thought the long-term benefits might be nor has he quantified the short-term costs.

Dr Manmohan Singh has estimated the cost of demonetisation to be 2% of gross domestic product. These quick assessments appear specious. Zhou Enlai, when asked in 1972 about what he thought the impact of the French Revolution of 1789 was, is said to have commented that it was too early to tell. When revolutionary changes take place, it takes years, decades, or even centuries before the impact of such transformations can be studied and commented upon.

Note that we lack scientific data and thorough analytical studies on the economic impact of demonetisation. For any massively complex system, judging the impact of a large disruption requires careful understanding of influence channels, distilling its impact on multifarious variables and finally, measuring its bearing, if any, on a variety of outputs. An economy as varied as India’s is highly complex with multiple inputs, not-completely-understood dynamics, many agents and actors with different motivations, and finally, outputs which are not measurable with accuracy or certainty. It will take many years to filter out the economic impact attributable to demonetisation and, indeed, this bold move and its implications will, quite probably, be the subject of hundreds of dissertations. Consequently, any snap judgements will be coloured largely by ideology and opinion.

Some data is beginning to emerge on how the economic trajectory actually played out as opposed to estimates of how the various models predicted that they would play out.

Since demonetisation, the government has embarked on another ambitious bipartisan reform of consolidating various levies and taxes in different states into one comprehensive goods and services tax (GST): such a large reform intervention also creates its own changes in the economy.

To appreciate the changes that demonetisation brought about, we need to carefully choose and measure the relevant short-term high-frequency indicators and a few emerging long-term indicators which point to the direction that the economy has since taken.

High-frequency and quantitative indicators like (1) cash-to-GDP ratio, (2) volume of digital payments, (3) number of new registered taxpayers, and (4) estimate of “unaccounted for” money and the number of tax notices sent indicate that demonetisation has generated material changes. The cash-to-GDP ratio is now down to 9.7%, from 11.3% pre-8 November last year. This cash is now in the banking system which has helped swell the current accounts and savings accounts balances of banks: this will allow them to lend and invest more, and at lower rates. Digital payments, at Rs50,000 crore in the month of October 2017, are up 41% year-on-year. The finance minister has stated that 9.1 million taxpayers have been added to the tax net as a result of actions taken by the income tax department during fiscal year 2017. Further, the ministry of finance has indicated that between Rs3 trillion and Rs4.2 trillion is “unexplained” during the cash deposit rush post-demonetisation and hence has sent out 1.8 million notices to assesses: apart from the one-time benefit to revenue of such “declarations”, these moves could bring significant stock and flow of incomes into the tax net. This data shows that demonetisation has had a positive impact on the formalization of the economy, improving the tax base and hastening the use of digital payments. Consequently, it is quite plausible to argue that these effects, which will clearly have an ongoing GDP impact, could easily swamp the impact of a one-time 2% decline in GDP.

Apart from these purely economic factors, there is another more profound behavioural change that has been accomplished. A new normal has been established—Indians are paying their taxes and moving towards a less-cash society. There is a pronounced trend towards tax compliance driven by the belief that the system is working to reward honest taxpayers even as it makes life difficult for those who have been used to evading or underpaying taxes. GST and the implementation of the benami transactions Act make it even more difficult for anyone in the economic chain to opt out of the taxation system.

Massive reforms like demonetisation cannot be measured solely by using economic parameters but need to take into account the structural shift that such reforms induce in society. Societal and long-term economic changes are difficult to measure and require more reasoned, detailed, and patient analyses: this should increase our resolve to do deeper research rather than jumping to hasty, ill-informed conclusions. demonetisation has provided Indian citizens a unique opportunity to re-imagine not only their currency, but also their own social mores, honesty, compliance with law, and their willingness to change and adapt to a more transparent and New India. We should celebrate this New India.

Jayant Sinha is minister of state for civil aviation and a member of Parliament from Hazaribagh, Jharkhand. The views expressed are personal.

Source: http://www.livemint.com/Specials/8bX1IDRQ1FK3qpMRNrFbAO/Demonetisation-A-resounding-success.html

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