देश को GST के रूप में एक सरल, सुगम और प्रभावी टैक्स सिस्टम मिला है, आज GST काउंसिल की 28वीं मीटिंग में नागरिकों के हित में अनेकों निर्णय लिये गये, उन सभी निर्णयों की जानकारी देते हुए आज संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया

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Briefing Media Post GST Council Meet at a Press Conference, in New Delhi

जिन्होंने बहुत ही सार्थक चर्चा की दिनभर और जो जीएसटी काउंसिल की परंपरा रही है उसमें खुले दिल से अपनी-अपनी बात रखते हुए एक सर्वसम्मति से सभी निर्णय लिए उसके लिए मैं भारत के सभी प्रदेश, सरकार, सभी प्रदेशों के वित्त मंत्री और अधिकारी, और साथ ही साथ केंद्र सरकार में मेरे सहयोगी अधिकारियों का धन्यवाद करना चाहूँगा जिन्होंने बहुत मेहनत करके आज की मीटिंग की तैयारियाँ की, यह पूरा एजेंडा आज लगभग 9 घंटे मीटिंग चली है उसमें यह डिस्कस हुआ है| और बड़े विस्तार से सभी वित्त मंत्री, सभी अधिकारियों ने अपनी-अपनी बात रखते हुए एक अच्छा माहौल जिसमें देशहित और जनहित को सर्वप्रिय रखते हुए कई बार राज्य के भी विषय को एक बार थोड़ा सा कम सोचकर देश के हित में क्या है, कैसे छोटे उद्योग, छोटे व्यापारी को सहूलियत मिल सके, कैसे उपभोक्ता की चिंता करें – इन सबको सामने रखते हुए कुछ बहुत महत्वपूर्ण निर्णय आज किये जिसकी जानकारी मैं आपके समक्ष रखना चाहूँगा|

क्योंकि मीडिया के मित्रों को और शायद उपभोक्ताओं को रुची रहती है कि रेट्स के बारे में क्या हुआ, कई महत्वपूर्ण निर्णय आज रेट्स के संबंध में हुए| मोटा-मोटा कुछ विषयों की जानकारी आपसे शेयर करना चाहूँगा| सबसे पहले तो मैं समझता हूँ मेरी सभी बहनें-माताओं को ख़ुशी होगी जानकर कि सेनेटरी पैड्स के ऊपर 100% एक्सेम्प्शन करते हुए शून्य रेट पर सेनेटरी पैड्स को लाया गया है और अब सेनेटरी पैड्स के ऊपर कोई भी प्रकार का जीएसटी नहीं लगेगा|

इसी के साथ-साथ कई ऐसी आइटम्स थी जो छोटे शिल्पकार, हेंडीक्राफ्ट, छोटे उद्योग के साथ जुडी हुई थी जिसमें किधर 18% था, किधर 12% था, अलग-अलग रेट थे उन सबको भी शून्य कर दिया गया है जिसमें स्टोन, मार्बल या वूड से बनी मूर्तियाँ, deities made of stone, marble or woods, राखी – अभी-अभी आने वाला बहनों का त्यौहार है जिसमें सोना या चांदी या कुछ प्रेशियस स्टोंस न हो वैसी राखी| मैंने सेनेटरी नैपकिन्स का ज़िक्र किया, coir pith compost, saal leaves and their products and sabai rope, फूल भरी झाड़ू, जो झाड़ू इस्तेमाल होती है घरों में, उसका जो रॉ मटेरियल है, खाली दोना, जो दोने होते हैं और circulation and commemorative coins जो बनते हैं सरकार द्वारा, इन सबको शून्य किया गया है|

साथ ही साथ कुछ विषय 12% पर थे उनको 5% पर लाया गया है, जैसे कि chenille fabrics and other fabrics under heading 5801, handloom की जो बनी हुई दरी होती है, phosphoric acid, fertilizer grade का phosphoric acid| और एक टोपी के बारे में कई प्रकार की अलग-अलग रेट्स की क्लासिफिकेशन की चिंता थी, खासतौर पर knitted टोपी के बारे में उस सबको जो 1000 रुपये से कम है उसको 5% पर लाया गया है whether knitted or otherwise.

कुछ आइटम 18% से 12% पर लाये गए जिसमें बाम्बू की फ्लोरिंग क्योंकि सभी सरकारें चाहती हैं कि बाम्बू को प्रोत्साहन दिया जाये, brass kerosene का pressure stove, hand operated rubber roller, खासतौर पर केरल में इसका काफी इस्तेमाल होता है, zip and slide fasteners जो मांग विशेष रूप से उत्तर प्रदेश वगैरा लगभग कई राज्यों ने रखी|

इसी प्रकार से कुछ वस्तुओं में 18% से 5% किया गया, 18 से 5, और उसमें विशेषकर इथेनॉल जो पेट्रोल में डीजल में ब्लेंडिंग में यूज़ होता है, ऑइल मार्केटिंग कम्पनीज को जो बेचा जाता है इथेनॉल जिससे शुगर इंडस्ट्री, और शुगर इंडस्ट्री का राहत मिलने से गन्ना किसान को बहुत लाभ पहुंचेगा, उसको 5% किया गया, और सॉलिड बायो-फ्यूल के पेल्लेट्स|

इसी के साथ-साथ जो फुटवियर आइटम्स हैं जिसमें पहले 5% लगता था 500 रुपये के जूते-चप्पल पर वह बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया गया है| तो जो पहले 18% होता था 1000 रुपये तक, 500 और 1000 के बीच उसको भी 5% में लाया गया है|

इसके अलावा मध्यम वर्गीय परिवार और वास्तव में आजके दिन तो हम गावों में भी बहुत देखते हैं refrigerator, छोटे television  25 inch  तक, जो special purpose vehicles  है, firefighting, crane lories, concrete mixer lorries, spraying lorries, works trucks जो किसानों के लिए भी इस्तेमाल होते हैं और एयरपोर्ट वगैरा में, docks में, shipping companies में इस्तेमाल होते हैं, फैक्ट्रीज में इस्तेमाल होते हैं|

Lithium ion batteries जिससे भारत में electric vehicles को भी प्रोत्साहन मिलेगा और mobile phone manufacturing को भी प्रोत्साहन मिलेगा; vacuum cleaners, domestic electrical appliances, food grinders, mixers, food vegetable juice extractor, shaver, hair clippers, storage water heaters, immersion heaters, hair dryers, hand dryers, electric smoothing irons, paints and varnishes – एक आज मध्यम वर्गीय परिवार अपने घर में रंग लगाता है, पेंट करता है, including enamel and lacquer, glazier putty, grafting putty, resin cements – मैंने refrigerators और other refrigerating equipment, water cooler, milk cooler, leather industry का refrigerating equipment, ice cream freezer, यह जो एक मध्यम वर्ग को बहुत बड़े रूप में impact करता है|

और महिलाओं के लिए articles such as scents, perfumes, toilet sprays, powder puffs and cosmetics या toilet preparations, सभी राज्यों की इच्छा थी कि इन आइटम्स के रेट कम किये जायें जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत मिले| तो इन सबके रेट 28% से 18% किये गए हैं|

मैं समझता हूँ यह जो आजके रेट रिडक्शन हुए हैं यह किसी न किसी तरीके से देश के 125 करोड़ जनता को छूने वाले निर्णय हैं और सभी राज्य सरकारों की इच्छा थी कि देश के हर नागरिक को, खासतौर पर गरीबों को, मध्यम वर्गीय परिवारों को लगे कि जो अच्छे रूप में जीएसटी कलेक्शन में सबकी उपभोक्ताओं की, व्यापारियों का समर्थन मिला है उसका एक प्रकार से एक GST Council recognition के रूप में हर एक वर्ग को कुछ न कुछ राहत दे|

एक ऐसा भी निर्णय हुआ कि GST Council revenue consideration से उठकर job creation, growth, इन विषयों पर भी थोड़ी बहुत चिंता करना अधिक करे, चिंता तो पहले भी करते थे लेकिन उसपर भी अधिक बल दिया जाये कि कैसे देश की अर्थव्यवस्था को और बढ़ाया जाये, कैसे नए रोज़गार और entrepreneurship, उद्यमियों को प्रोत्साहन दिया जाये उस दिशा में एक textile industry की पूरे वर्षभर यह मांग रही कि जो input tax credit पूरे रूप से वह इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं उसको भी refund के रूप में textile business में दिया जाये खासतौर पर जब fabric बनता है fiber से उसमें कुछ छोटी anomaly रह जाती है क्योंकि 12% रेट है fiber पर और 5% है fabric पर उसकी वजह से लगभग देश के हर राज्य की यह मांग थी कि इसका ITC refund दिया जाये उससे रोज़गार भी बढ़ेगा, textile industry को एक बूस्ट मिलेगा, neighbouring countries से competition में खड़े रह पाएंगे और साथ ही साथ compliance भी सुधरेगा|

तो ऐसा तय किया गया है कि 27 जुलाई जिस तारीख से यह सब निर्णय आजके जो लिए हैं, यह सब निर्णय 27 जुलाई से एप्लीकेबल होंगे, उस तारीख तक जो इनपुट टैक्स क्रेडिट या जो परचेस सेल हुए हैं उसका टैक्स क्रेडिट को एम्बार्गो किया जायेगा, उसको ब्लॉक कर दिया जायेगा लेकिन 27 जुलाई के आगे टेक्सटाइल इंडस्ट्री को इस चीज़ का ITC refund दिया जायेगा|

कुछ और वस्तु हैं जिसके रेट्स कम किये गए खासतौर पर हेंडीक्राफ्ट आइटम्स 18 से 12%, इसमें handbags, including pouches and purses, jewellery box, wooden frames for painting, photographs, mirrors, artwork, artware of cork, stone artware or stone inlay work, ornamental framed mirrors, glass statues other than those of crystal, glass artware उसमें vases, pots, jars; artware of iron, artware of brass, copper, copper alloys electroplated with nickel or silver, aluminum artware, handcrafted lamps, ganjifa card और कुछ worked vegetable or mineral के carving के products जिसमें wax, natural gum वगैरा सब आते हैं, इन सबको भी घटाकर 12% किया गया है|

कुछ और आइटम जिसको 12 से 5 किया गया – handmade carpets, handmade textile floor coverings, handmade lace, handwoven tapestry, handmade braid and ornamental trimming और तोरण, इस सबको 12 से 5% किया गया है|

एक टूरिज्म को बढ़ावा देने की दृष्टि से जो अभी तक 28% लगता था अगर declared tariff होटल का 7,500 रुपये से अधिक हो आप declared tariff के बदले जो actual bill है अगर उसमें room rate 7,500 से ज्यादा हो तो 28% लगेगा बाकी पर जो पहले slabs थे 18% वगैरा उसपर रहेगा|

जो urea import होती है सरकार के द्वारा उसका जो IGST है उसको अभी 5% Pool Issue Price के ऊपर लगाया जायेगा जो किसानों को लगती है assessable value के बदले, इससे किसानों को राहत मिलेगी और fertilizer sector को राहत मिलेगी|

कुछ clarifications दिए गए हैं खासतौर पर जैसे Kota stone और अलग-अलग प्रकार के stone, छत्तीसगढ़ में कुछ stone लगता है, आंध्र प्रदेश में कुछ stone लगता है, पश्चिम बंगाल में कुछ stone लगता है, इस सबको जब तक उसकी polish न हो, if it is unpolished, but cutting वगैरा करने के बावजूद उसको 5% ही टैक्स लगेगा बाकी जो polish हो जाता है और finished product बन जाता है उसपर आज का रेट है वह चालू रहेगा|

कुछ और clarifications हैं जो विभाग करेगा उसमें एक प्रमुखतः जो milk है, दूध जिसको vitamin या mineral salt से fortified milk कहते हैं वह भी exempt होगा GST से, दूध की तरह fortified milk will also be exempted from GST.

तो यह तो रही रेट्स की बात, शायद मैं कहने में भूल गया हूँ washing machine पर भी 28% से 18% कर दिया गया है|

अब एक बहुत महत्वपूर्ण निर्णय जिसके लिए मैं धन्यवाद दूंगा सभी राज्यों का और जिसमें लगभग सभी राज्यों में इच्छा थी कि छोटे व्यापारी, छोटे उद्योग को सहूलियत दी जाये उसके लिए जो रिटर्न्स की प्रक्रिया है उसमें बहुत बड़ा बदलाव लाने का निर्णय किया गया है| Of course, उसको implement करने के लिए कुछ समय लगेगा वह GSTN Network वाले जब उसकी पूरी study करके समय बताएँगे तो समय सूचित किया जायेगा सभी को, लेकिन निर्णय लिया गया है कि 5 करोड़ रुपये तक जिसका turnover है, up to 5 crores, उनका tax payment तो monthly होगा, लेकिन return quarterly होगा| 5 करोड़ रुपये तक turnover पर हर महीने वह अपना टैक्स जमा करेंगे उसके process को GST के अधिकारी तय कर लेंगे कि हर महीने किस हिसाब से उन्हें भरना होगा, सिर्फ एक चालान के ऊपर भरेंगे लेकिन return 3 महीने में एक बार देना पड़ेगा इससे लगभग 93% taxpayers को अब quarterly return भरने की सहूलियत मिलेगी|

मैं समझता हूँ यह बहुत बड़ा बदलाव आज GST Council के सभी प्रदेशों के वित्त मंत्रियों ने साहस करके यह निर्णय लिया है इस उम्मीद में कि इससे और लोग प्रोत्साहित होंगे GST के साथ जुड़ने में और प्रोत्साहित होंगे कि compliance की तरफ ध्यान दें| और इससे बड़ी सुविधा हो जाएगी सबको day to day operations में|

इसी के साथ-साथ जो रिटर्न्स हैं, रिटर्न्स भी दो प्रकार के बड़े simplified format में बनाये गए हैं, composite dealers के लिए अलग और बाकी जो B2C करते हैं या B2B करते हैं – Business to Consumer, Business to Business, उसके लिए दो simplified forms – सुगम और सहज, उस format पर मंज़ूरी दी गयी है GST Council द्वारा जिसकी जानकारी आप सबको प्रेस रिलीज़ द्वारा दी जाएगी|

इसके अलावा जो जीएसटी कानून में परिवर्तन करने की आवश्यकता थी विशेषकर क्योंकि  composite dealers को डेढ़ करोड़ रुपये तक का लाभ देने की इच्छा है और यह निर्णय तो पहले ही GST Council में शायद चार महीने, तीन महीने पहले ले लिया था कि अब एक के बदले डेढ़ करोड़ तक composite dealers माने जायेंगे अगर उनकी इच्छा हो तो, ऑप्शनल है| तो उसके लिए जो कानूनी बदलाव लाना है और उसके अलावा कुछ और changes जिससे और simplification और clarity आएगी GST में उन changes को भी आज मंज़ूरी मिली है, उसको अब law committee और legal department कानून में बदलाव को fine tune करके पार्लियामेंट के समक्ष जल्द ही पेश करेंगे| एक बार पार्लियामेंट उस कानून को पास कर दे फिर सभी राज्य अपनी-अपनी असेंबली में उन कानूनों को पास करके फिर हम देश भर में यह डेढ़ करोड़ की लिमिट, composite dealers का option हम शुरू कर पाएंगे|

इसी के साथ-साथ एक बड़ी मांग composite dealers की थी कि अगर composite dealer कुछ services भी दे, छोटी-मोटी कुछ service भी दे तो उसकी वजह से वह composition का फायदा नहीं ले पा रहे थे| तो अभी ऐसा तय किया है कि composite dealers जितना उनका turnover है उसके 10% तक अगर services दें या 5 लाख रुपये तक service दे – whichever is higher, 10% of their turnover or 5 lakh rupees – whichever is higher उस सीमा तक अगर services दें तो वह भी composition scheme में आने के लिए opt कर सकते हैं|

एक और महत्वपूर्ण निर्णय आज लिया गया कि reverse charge mechanism को एक वर्ष के लिए अब स्थगित रखा जाये और जो अभी 30 सितम्बर, 2018 तक RCM को स्थगित रखा है वह अब 30 सितम्बर, 2019 तक Council ने निर्णय लिया है कि RCM स्थगित रहेगा| और तब तक जो committee है RCM की वह उस सिस्टम को स्टडी करके कैसे इसका लाभ भी मिले पर किसी प्रकार की कठिनाई उद्यमी को, उद्योग को न हो उसकी चिंता करके इसको अच्छी तरीके से अधिकारी और committee इसपर आगे recommendation लाएगी|

कई राज्यों की request थी कि उनके राज्य में जो exemption limit 10 लाख रुपये रखी गयी है उसको 20 लाख कर दिया जाये तो मुझे विश्वास है हमारे सभी व्यापारी, उद्योग लोग जो असम, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम और उत्तराखंड, इन 6 राज्यों में व्यापार करते हैं उन सबकी भी लिमिट अब 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख  exemption limit कर दी गयी है| और कानून में एक enabling provision ले आयेंगे जिससे अगर और कोई राज्य की लिमिट अभी 10 लाख रहती है वह जब भी चाहे उनको भी उनके रिक्वेस्ट पर काउंसिल लिमिट बढ़ाकर 20 लाख कर सकती है|

इसी के साथ-साथ अगर कोई टैक्सपेयर चाहे तो वह ऑप्शन है उसको कि वह मल्टीप्ल रजिस्ट्रेशन एक ही स्टेट के अन्दर भी ले सकता है| अभी जो है कि एक ही रजिस्ट्रेशन एक स्टेट में, कुछ उद्योग की रिक्वेस्ट थी कि ऑपरेशनल रीज़न के लिए वह एक ही स्टेट में मल्टीप्ल रजिस्ट्रेशन लेना चाहते हैं तो वह भी मल्टीप्ल रजिस्ट्रेशन ले सकेंगे अगर अलग-अलग प्लेस ऑफ़ बिज़नेस है| लेकिन उसका turnover asses होगा as one वह combine होकर turnover और बाकी सब प्रावधान उनके ऊपर लगेंगे|

इसी प्रकार से जो e-commerce operators हैं उनको भी mandatory registration लेनी पड़ेगी सिर्फ उन्ही वस्तुओं के लिए जो वस्तु पर GST लगता है| जहाँ पर, the e-commerce platforms are liable for collecting tax उन्ही को registration लेना पड़ेगा बाकी जो suppliers हैं वह tax pay करके produce लेते हैं तो उससे e-commerce को भी प्रोत्साहन मिलेगा|

और मुझे लगता है जो छोटे व्यापारी e-commerce को सामान देना चाहते हैं – सर्विसेज जो e-commerce platform से दी जाती हैं वह exempt already हैं, जो goods e-commerce platform पर बेची जाती है उसका अगर threshold के नीचे हो तो भी उनको अभी compulsory registration लेना पड़ता है उसके ऊपर काउंसिल आगे विचार करेगी कि उसमें क्या सहूलियत दी जा सकती है|

एक बड़ी प्रॉब्लम जो सब जगह से बताई गयी कि अगर कोई अपना रजिस्ट्रेशन कैंसिल करना चाहे, किसी कारण से दुकान बंद हो या बिज़नेस बंद करे तो उनको कैंसिलेशन की प्रक्रिया बड़ी कॉम्प्लिकेटिड लगती थी और रिटर्न भरते रहना पड़ता था जब तक ऑडिट होकर कैंसिलेशन पूरी तरीके से न हो| तो अब जिस दिन वह कैंसिलेशन अप्लाई करेंगे तो नंबर ससपेंड हो जायेगा और रिटर्न नहीं भरना पड़ेगा और ऑडिट करके जब विभाग सैटिस्फाई हो जाये कि पूरी टैक्स पेड है तो फिर लायबिलिटी से भी मुक्त हो जायेंगे लेकिन रिटर्न की प्रक्रिया जिस दिन कैंसिलेशन फाइल करें उस दिन से बंद हो जाएगी|

कुछ और टैक्सेशन में निर्णय लिए हैं जो एक प्रकार से टैक्स लॉज़ को चेंज करने के जिससे और ज्यादा आसन हो जायेगा लोगों को अपना टैक्स कंप्लायंस करना और विभाग को उसके ऊपर निगरानी रखना| पर हर एक चीज़ में सिम्प्लिफिकेशन को सबसे ज्यदा प्राथमिकता दी गयी है|

एक चर्चा काफी बड़े रूप में हुई ट्रांसपोर्टर्स के संबंध में और ऐसा निर्णय लिया गया कि जल्द से जल्द यह जो RFID tax, FATags होते हैं उसके साथ GSTN Network को लिंक किया जाये जिससे देशभर के सभी टोल नाका को भी हम आहिस्ते-आहिस्ते eliminate कर सकें और चेकिंग भी कि गाड़ी में क्या सामान जा रहा है तो क्या रूट ले रहा है यह सब RFID readers और RFID tax का एक जाल हर एक vehicle पर और हर एक प्रमुख रोड पर लगाया जाये जिससे लोगों को और ट्रांसपोर्टर्स को किसी प्रकार की harassment न हो और वह आसानी से अपने सामान को ट्रांसपोर्ट कर सकें| उसकी सिस्टम को जो कमिटी ने इसको स्टडी किया है और फाइन ट्यून करके GSTN Network अगले 6 महीने में इस सिस्टम को लागू करने के लिए काम शुरू करेगी| मिनिस्ट्री ऑफ़ रोड ट्रांसपोर्ट के साथ मिलकर फाइनेंस, रोड ट्रांसपोर्ट और राज्य सरकारें, सब मिलकर इस सिस्टम को तैयार करके इम्प्लीमेंट करेंगे|

ट्रांसपोर्टर्स की सहूलियत के लिए जो कुछ मेरे समक्ष भी आया कई मंत्रियों ने भी उठाया कि ईवे बिल में थोड़ी बहुत भी छोटी-मोटी गलती हो जाती है या कोई छोटा सा भी क्लेरिकल एरर हो जाता है उसपर बहुत हैवी पेनल्टी लगायी जाती है| उसके लिए एक Standard Operating Procedure (SOP) issue किया जायेगा जिससे transporters को किसी प्रकार की harassment न हो और कोई छोटी मोटी यह गलतियों के ऊपर उनको तंग न किया जाये और uniform penalty पूरे देश में सबके ऊपर लग सके इसका प्रावधान करने के लिए SOP विभाग बनाएगा और penalties भी छोटे errors के लिए एकदम मामूली हो जाये और बहुत heavy penalties न हो इसको हम सुनिश्चित करेंगे|

एक कुछ निर्णय लिए गए कि माइग्रेशन विंडो जो लोग अभी भी माइग्रेट करना चाहते हैं उनको एक फाइनल विंडो दी जाये जो 31 अगस्त तक दी जाएगी, 31 अगस्त तक जो भी अभी रह गया है या प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन है उन सबको भी इसमें लिया जायेगा और उसमें लेट फी को वेव कर दिया जायेगा|

कुछ सर्विसेज जो लोग प्रोवाइड करते हैं उसमें भी रिलीफ दी गयी है, अलग-अलग प्रकार से किसानों को, फ़ूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को, एजुकेशनल, ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट में जो सरकारी व्यवस्था के साथ जुड़े हुए तंत्र हैं उसमें पेंशन, सोशल सिक्योरिटी और ओल्ड एज से जुड़े हुए कुछ वस्तुओं में, बैंकिंग और आईटी जो देते हैं उसकी जो सर्विसेज भारत से विदेश दी जाती हैं एक प्रकार से एक्सपोर्ट होता है उसमें भी कुछ clarifications और exemption, e-books जो आज कल बहुत बड़े रूप में देश भर में हो रही है, e-books को 18% से घटाकर 5% लाया जा रहा है|

और एक प्रेस नोट द्वारा इसकी पूरी डिटेल्स आप सबको दी जाएगी, पर आप देखेंगे इस सबमें कोशिश यह की जा रही है कि सामान्य व्यक्ति, गरीब व्यक्ति, किसान, मध्यम वर्गीय, इन सबको, छोटे artisans जो handicrafts, handlooms में काम करते हैं, छोटे उद्योग चलाने वाले, लघु उद्योग चलाने वाले, इन सबको wide-ranging relief देकर आजकी GST Council में सभी राज्यों ने यह दर्शाया है कि उनकी सहानुभूति उपभोक्ता और छोटे industrial and trading units के साथ हैं|

कई और exemptions हैं, मैं सबका ज़िक्र नहीं करूँगा, एक मेरे ध्यान में आ रही है कि जो आयुष्मान भारत के तहत जो प्रीमियम दी जाएगी उसपर जीएसटी को exempt किया गया है, तो जो स्वास्थ्य की सेवाओं के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी राज्य सरकारें लेंगे उसको भी जीएसटी से exempt किया गया है|

और अंत में, और कई सारे विषय हैं, मैं सबमें नहीं जाता हूँ| यह तो आज इतने निर्णय, इतना व्यापक रूप से निर्णय लिए गए हैं वह सब अभी पेश किये जायेंगे| लेकिन जैसा मैंने पहले बताया कि आजकी मीटिंग का उद्देश्य लगभग simplification, rationalization और छोटे लोगों को relief देने का रहा, उसी कड़ी में एक और महत्वपूर्ण निर्णय, rather दो और महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं जिसके लिए तिथि भी तय कर दी है, 4 अगस्त, 2018 को, आज से ठीक 14 दिन बाद हम सब फिर इकट्ठे होंगे प्रमुखतः दो विषय के ऊपर चर्चा करने के लिए| सबसे बड़ी बात तो जो छोटे उद्योग चलाते हैं, MSME sector, उसकी कई सारे और विषय आज कि मीटिंग में अलग-आलग राज्यों ने उठाये और लगभग सभी की इच्छा थी कि एक GST Council meeting सिर्फ लघु उद्योग, MSMEs, छोटे व्यापारी, इनकी चिंता करने के लिए एक special meeting of the GST Council only to deliberate, discuss and look at the way forward to promote MSMEs, to promote employment in MSMEs, to promote entrepreneurship in MSMEs, इन सब विषयों को लेकर एक special meeting GST Council की 4 अगस्त को यहीं पर दिल्ली में होगी इसमें पूरी तरीके से meeting focused रहेगी MSME sector पर और उनके जुड़े हुए विषयों के ऊपर| आज वैसे काफी उनके विषयों को address कर दिया गया है, पर इसके अलावा सभी राज्यों ने कहा है कि अगले एक हफ्ते में अपने-अपने राज्य के छोटे उद्योग के साथ बात करके अगले रविवार तक विषय फ्लैग-ऑफ करेंगे और फिर 4 तारीख को उसपर हम सुझाव के साथ, सलूशन्ज़ के साथ डेलिब्रेट करेंगे|

और दूसरा डिजिटल पेमेंट्स को प्रोत्साहन देने के लिए और गरीब लोग, मध्यम वर्गीय छोटे परिवार को कैसे encourage किया जाये Rupay Debit Card, UPI, BHIM, इन सब माध्यम से कैसे digital payment को प्रमोट किया जाये उसके लिए आज कुछ सुझाव टेबल पर आये, उसको सभी राज्य भी स्टडी करेंगे| और जो माननीय सुशील मोदी जी की कमिटी डिजिटल पेमेंट्स को देखती है, वह कमिटी इसको अच्छी तरीके से सबसे चर्चा करके 4 तारीख को एक मॉडिफाइड फॉर्म में कैसे हम Rupay Debit Card जो आज देश के हर जन धन अकाउंट होल्डर या जिसके पास किसान क्रेडिट कार्ड है उन सबको दिया गया है| तो वास्तव में जो गरीब से गरीब या जो मध्यम वर्गीय परिवार हैं उनके पास Rupay Debit Card या UPI की फैसिलिटी अधिकांश इस्तेमाल होती है उसके ऊपर 4 तारीख को हम व्यापक रूप से चर्चा करके निर्णय लेंगे|

तो बहुत-बहुत धन्यवाद|

प्रश्न-उत्तर

प्रश्न: सर जितने भी आइटम्स पर ड्यूटी घटाए गए हैं उसका राज्य राजस्व की वसूली पर कितना असर पड़ेगा, और एक छोटा सवाल, सेनेटरी नैपकिन का मुद्दा आपने उठाया, इसपर जीरो ड्यूटी कर दिया गया है लेकिन कुछ टैक्स एक्सपर्ट कह रहे हैं कि जीरो ड्यूटी होने से इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा इस वजह से कीमतें बहुत कम होंगी इसकी उम्मीद रखिए?

उत्तर: भाई यह विशेषज्ञों पर ज्यादा मत विश्वास करो, मैं समझता हूँ जब हर एक प्रदेश के मंत्री और सभी के अधिकारी मिलकर एक निर्णय लेते हैं तो पूरी सोच समझकर इसका लाभ हमारी सभी बहनों को, माताओं को पहुंचे उस हिसाब से यह निर्णय लिया गया है| और सेनेटरी पैड्स पर अभी शून्य टैक्स लगेगा यह निर्णय है फाइनल और इसका लाभ सीधा उपभोक्ताओं को मिलेगा|

रही बात रेवेन्यू इम्पैक्ट की, पहली बात तो कई ऐसे विषय हैं इसमें जो आज सरलीकरण किया है जिससे वास्तव में compliance सुधरेगा और revenue buoyancy देखते हुए इस सभी निर्णयों का जो revenue impact है वह बहुत ही marginal हैं और किसी भी प्रकार से किसी भी प्रदेश को या देश की पूरी total GST collection में बहुत ही nominal impact assess किया गया है आज, perfect assessment करना लगभग असंभव है क्योंकि कितना buoyancy से, compliance से कितना इसमें उछाल आएगा, कितना consumption में उछाल आएगा उसको आजकी आज calculate करना मुश्किल है| मैं समझता हूँ एक वर्ष के बाद जब हम इसका assessment करेंगे कि जो revenue छोड़ा foregone और उसके सामने जो व्यापार बढ़ा, जो नौकरियां बढ़ी, जो रोज़गार बढ़ा उसको assess करें तो मैं समझता हूँ सभी राज्य और केंद्र सरकार को लाभ होगा, किसी को कोई नुकसान नहीं होगा|

प्रश्न: Sir, what is the total number of items for which the rate has been cut?

उत्तर: अभी इतने सारे हैं, वह assess करके वह बाद में आपको बता देंगे| Revenue impact will be almost.. more than 50 items on which rates have been reduced. Actually, it will be much more, but we have not done a final assessment, because during the course of meeting many honorable Ministers flagged off their issues. Clarifications have been issued on many items which will give a lot of relief, handicraft, small artisans have been given a lot of relief, services lot of clarifications have been done, lot of relief has been done. So overall impact will be over 100 different items will be impacted by today’s decisions, and you can keep asking me that question, but my answer is the same – we will have to assess the revenue loss or revenue forgone coupled with revenue gain with buoyancy, with compliance.

And I have, and as have all my colleague ministers, full confidence that today’s revenue foregone is for the good of our consumers, is for the good of our small MSME sector participants and with the growing revenues and the market demand picking up, we will actually gain revenue, along with giving benefit to all the consumers of India.

Thank you.

 

Fugitive Economic Offenders Bill 2018

United Nations Convention Against Corruption ने पहली बार इस बात को एक international consensus, आम सहमति बनी विश्व में कि जो लोग ऐसे भाग जाते हैं, भगौड़े बन जाते हैं या एक देश में कानूनी कार्रवाई चल रही है, दूसरे देश में जाकर पनाह ले लेते हैं इसके बारे में कुछ न कुछ मज़बूत कदम उठाएं जायें और जल्द से जल्द यह जो illegal wealth होती है जो गैर कानूनी संपत्ति होती है इसके ऊपर कार्रवाई हो और यह वापिस देश को मिलना चाहिए|

Article 54 इस UNCOC ने इसके बारे में काफी महत्वपूर्ण सुझाव दिए, और 2011 में इस UNCOC को भारत ने स्वीकार किया| तो मैं समझता हूँ सबसे पहला तो प्रश्न यह उठता है कि 2011 से 2014 के बीच जल्द से जल्द ऐसा कानून क्यों नहीं लाया गया है? इसपर कोई कार्रवाई भी शुरू नहीं हुई थी, अगर कोई कार्रवाई शुरू हुई होती तो शायद हमारे भी ध्यान में आता जल्दी कि यह UNCOC के ऊपर कुछ आधी-अधूरी भी कार्रवाई होती तो हम उसको आगे बढ़ाकर जल्द ले आते|

वित्त मंत्री जी ने बजट 2017-18 में इसकी जानकारी दी कि इस विषय में सरकार गहराई से अध्ययन करके उचित कदम उठाएगी, ज़रूरत पड़े तो नया कानून लाएगी| और उसी के तहत पिछले सेशन में यह कानून लाया गया और दुर्भाग्य से कई कारणों से यह सदन चलने नहीं दिया गया, दोनों सदनों को लगभग पूरा सेशन बजट के सेशन के दूसरे पार्ट को लगभग पूरा wash-out  होने के कारण यह बिल पास नहीं हो पाया|

अब आपकी क्या मंशा थी खर्गे जी वह तो आप ही ज्यादा जानते हैं, भारत सरकार और भारतीय जनता पार्टी, एनडीए, चाहती है कि यह सदन चले, सदन organized way में चले और मैं समझता हूँ जो व्यवहार हमने आपकी तरफ से, आपके माननीय सदस्यों की तरफ से माननीय स्पीकर मैडम का जो अपमान देखा वह शायद ही भारत के इतिहास में कभी किसी सदन ने देखा होगा|

सरकार बहुत सीरियस थी कि इसके ऊपर कार्रवाई हो और इसलिए सदन न चलने देने के बावजूद, कानून न पास होने देने के बावजूद हमने इसको एक ऑर्डिनेंस के रूप में लाया गया और ऑर्डिनेंस शुरू करके…….. मैं समझता हूँ यह ऑर्डिनेंस लाना इसलिए ज़रूरी था कि यह कार्रवाई रुके न, यह कार्रवाई थमे न और यह message जाये कि भारत सरकार अब एकदम seriously  नयी सरकार आई है, काले धन के ऊपर प्रहार हो रहा है और एक  series of measures में यह एक measure लिया गया कि ऐसे जो भी केसेस हैं जहाँ offenders भारत की सीमाओं को छोड़कर चले जाते हैं इनकी संपत्ति को ज़ब्त करने का कानून लाया जाये इसलिए इसको ऑर्डिनेंस के रूप में हमने पास किया और आज उसको रिप्लेस करके बिल आज इस सदन के समक्ष है|

कहा गया कि इसके Objects and Reasons और जो बिल है इसमें मेल नहीं खाता, शायद माननीय कल्याण जी ने बड़े humble way में, बहुत वरिष्ठ lawyer हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि बड़े humble submission करता हूँ कि यह bill badly drafted है| मैं चाहूँगा उनको बताना कि यह जो 100 करोड़ की सीमा Objects में लिखी हुई है, Objects and Reasons में, वही सीमा बिल में भी लिखी गयी है Section 21M के द्वारा| तो अगर आप Section 21M को पढ़ें Section 21F के साथ जोड़कर, 21M में बहुत ही स्पष्ट रूप से यह लिखा गया है और आपको आसानी हो कुछ तकलीफ न हो उसके लिए मैं पढ़ भी सकता हूँ|

अगर आप चाहें और सदन में कई माननीय वरिष्ठ सांसदों ने इस विषय का ज़िक्र किया तो मैं कर दूं 21M कहता है, “Scheduled Offence means an Offence specified in the Schedule if the total value involved in such Offence or Offences is 100 crore rupees or more.”

इसके बारे में भी कई माननीय सांसदों ने विषय उठाया मैं समझता हूँ उनको इतनी elementary knowledge समझ नहीं आई कि आज के दिन यह सब केसेस अलग-अलग कानून के तहत कोर्टों में चल रहे हैं, कोर्टों में उसपर एक्शन हो रहा है| और स्वाभाविक है कि एक्शन अपने अंतिम लगाम तक जायेगा लेकिन जो बड़े offenders हैं, जिनकी संपत्ति बड़े रूप में उनके पास है उनको पहले tackle किया जाये और special court, tribunals वगैरा को clog नहीं करें उनको हर एक केस ट्रान्सफर करके फिर वही बात होगी कि delayed justice होगी|

और इसके बारे में कई चर्चा होती है कि delayed justice is justice denied, तो हमने सोचा कि जो बड़े कानूनी अपराध करते हैं जो 100 करोड़ से अधिक करते हैं उनको इस कानून के तहत पहले लिया जाये उसके ऊपर सख्त से सख्त कार्रवाई हो और उनकी संपत्ति ज़ब्त की जाये, एक deterrence होगा, कोई भागेगा नहीं और जो भागा है उसकी संपत्ति ज़ब्त होते देख वह शायद लौटकर आये, वापिस आये और कानून के consequences को face करे|

तो मैं समझता हूँ कि यह 100 करोड़ की सीमा थरूर जी ने, चौटाला जी ने, कई लोगों ने विषय उठाया लेकिन स्पष्ट रूप से सरकार की मंशा है कि बड़े अपराधी पहले पकडे जायें उनके ऊपर एक्शन हो जल्द से जल्द और कोर्टों में इतने केस न ले जायें इस नयी व्यवस्था के तहत कि फिर बड़े और छोटों के बीच फरक न होने के कारण बड़े लोग छूटकर रहे, बाहर रहे और उनकी संपत्ति हम ले न सकें|

तो fast track करने के हिसाब से इन केसेस को इस कानून के तहत लाया गया बाकी केसेस जो अभी existing कानून है उसमें स्वाभाविक है उसकी कार्रवाई चल रही है आगे भी चलेगी, नए केसेस के ऊपर कार्रवाई होगी तो कोई भी भागकर नहीं जा सकेगा, सब पर उचित कार्रवाई की जाएगी|

कुछ माननीय सांसदों ने विषय उठाया कि Search and Seizure में, और शायद माननीय कल्याण जी आपने ही उठाया कि Search and Seizure में कोई protection नहीं है, कोई भी व्यक्ति जाकर Search and Seizure कर सकता है| मैं समझता हूँ कि बहुत दुर्भाग्य की बात है, कि वही बात होती है कि लोग ठीक से पढ़ते नहीं हैं, अगर पढ़कर कानून को सही मायने में समझकर आते, आपने कहा draconian है Search and Seizure के कानून| यह same है जो Money Laundering Act 2002 के हैं वही कानून इस law में भी लिए गए हैं, कोई फरक नहीं है|

और यह जो बात कही गयी कि दूसरे कानून में witness होते हैं तो मैं सदन को अवगत करा दूं कि इसमें भी Search and Seizure में Section 9E में provide किया गया है कि दो या दो से अधिक witness का प्रावधान रखा गया है Section 9E में और कल्याण जी को ऐसा न लगें बड़े draconian हैं, शायद उनको कोई मित्रों की चिंता हो रही होगी कि शायद उनके ऊपर draconian Search and Seizure हो जायेगा|

तो 9E में लिखा है – “Before making the search under Clause A or Clause D, the authorities shall call upon two or more persons to attend the witness, to attend and witness the search and the search shall be made in the presence of such persons.”

तो मैं समझता हूँ यह बहुत स्पष्ट रूप से कानून बहुत सोच समझकर सुलझा हुआ कानून है, हर प्रकार से कानून वैध है, constitutionally  इसकी सब चिंता करते हुए कानून लाया गया है| एक भर्तुहरी महताब जी और कुछ अन्य सांसदों ने कहा कि आप ज़ब्त तो कर लोगे लेकिन उसके बाद आप किस प्रकार से इसको डिस्पोज़ करोगे यह स्पष्ट नहीं किया गया|

दुर्भाग्य से अब वही बात है, कानून को गहराई से शायद अध्ययन नहीं किया| Section 15(3) बहुत स्पष्ट रूप से बताता है कि जब confiscation या attachment होगी तो उसको disposal भी कैसे होगा – administrator नियुक्त किया जायेगा जो manage करेगा property, court के directions के अन्दर… Section 15(3) में बहुत स्पष्ट रूप से लिखा गया है – “The administrator shall also take such measures as the central government may direct to dispose of the property, which is vested in the central government under Section 12.

तो जो प्रॉपर्टी को confiscate किया जायेगा Section 12 द्वारा उसको dispose करने का भी, पहली बात तो यह measures जो central government चाहे वह administrator को बताये वह उसको dispose of करे और उसके लिए भी एक safeguard रखा है, “provided that the central government or the administrator shall not dispose of any property for a period of 90 days from the date of the order under Subsection 2 of Section 12,” जो कहता है कि declaration जब special court order करे, एक special court इसके लिए जो नियुक्त होगा बड़े केसेस को फोकस करने के लिए वह जब ऑर्डर करे कि कोई न कोई property confiscate होकर central government में vest करती है|

इसमें दो टाइप के होंगे, एक तो proceeds of crime, चाहे भारत में हो चाहे विदेश में हो और चाहे वह property fugitive offender के नाम पर हो या उसकी बेनामी संपत्ति हो, any other property, a Benami property in India or abroad owned by the fugitive economic offender.

तो दोनों को ज़ब्त करने का प्रावधान रखा है, बेनामी भी, खुद के नाम के भी, लेकिन 90 दिन इसलिए दिए गए कि अगर वह वापिस आता है and he submits himself to the process of law तो हम समझते हैं कि फिर जैसे सुप्रिया ताई ने कहा तो due process of law होगा| लेकिन मैं यह मानता हूँ कि विपक्ष के किसी भी सदस्य का या रूलिंग पार्टी के किसी भी सदस्य का यह नहीं मानना हो सकता है कि आदमी भाग भी जाये देश छोड़कर, यहाँ क्राइम करे, economic offence करे, भाग जाए, he doesn’t submit himself to the process of law और कानून जो आजके दिन हैं उसमें जब तक व्यक्ति सामने पेश नहीं होता है तो उसपर कानूनी कार्रवाई बढ़ नहीं सकती है, वह स्टॉल हो जाती है, डिले हो जाती है| तो यह डिले को रोकने की मंशा तो मैं समझता हूँ पूरे सदन की होगी इस प्रकार के लोग, और अगर, if he comes with a clean hand, जो सुप्रिया ताई को चिंता है कि कोई गलत आदमी के ऊपर प्रहार न हो जाये| या he is innocent until proven guilty, if he is innocent why did he run away in the first place? He should submit himself to the law.

और भारत की कानून व्यवस्था पर हम सबको अटूट विश्वास है, हम कोई केस का ज़िक्र करें तो मैं समझता हूँ वह court का contempt है, वह कोर्ट के ऊपर एक प्रकार से प्रश्न चिन्ह उठाये जा रहे हैं कि कोर्ट के प्रोसेस के ऊपर हम कैसे प्रश्न चिन्ह उठा सकते हैं? तो मैं समझता हूँ कि यह जो so-called ‘disentitlement is draconian’, थरूर साहब भी बोलकर गए थे, मैं समझता हूँ कोर्ट merits के ऊपर fast track करेगी action और अगर कोई व्यक्ति के hands are clean, he should come and submit himself to the court, तो जब्त करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी|

साथ ही साथ एक विषय थरूर जी ने कहा कि CRPC में प्रावधान है कि उसमें भी attachment हो सकता है, स्वाभाविक है है| वही बात है कि courts are clogged with thousands and lakhs of cases, प्रॉपर्टी अलग-अलग स्टेट में हो अगर तो अलग-अलग स्टेट में अलग-अलग कानून करना पड़ता है, अलग-अलग  prosecution करना पड़ता है, attachment के लिए इतने सारे केसेस देश भर में अलग-अलग चलाने पड़ते हैं| तो इस cumbersome process को fast track करने के लिए यह कानून लाया गया है|

थरूर साहब ने एक और टिप्पणी की, मैं समझता हूँ शायद आजकल बहुत बिजी हैं और मुझे थोडा समझ में नहीं आ रहा था उनका जो एक्सेंट है वह थोडा विदेशी सा एक्सेंट था, अगर इंडियन एक्सेंट होता| हम तो …. लोग हैं हम को हिंदी हैं, हिंदी रहेंगे तो उनको शायद अलग तरीके से बोलने का मुझे समझने में कम आ रहा था| लेकिन उनकी जो समझ है कि सरकार मनमर्जी से जब चाहे Schedule of Offences बदल सकती है, उनको शायद यह ध्यान नहीं है कि Schedule जब सरकार कभी बदलना चाहे तो दोनों सदनों में हमें ले करना पड़ता है| We have to lay the change before both houses of Parliament. और कोई भी माननीय सदस्य उसके ऊपर अगर objection उठाये तो उसपर चर्चा हो सकती है| तो मैं समझता हूँ Clause 20 अगर वह पढ़ लें तो उनको ध्यान में आएगा इस बात का|

कई माननीय सदस्यों ने कहा कि अब तो आप यह कानून ले आये पर पुराने अपराधियों का क्या? Criminal law always prospective होता है, I agree with you. Criminal law prospective होता है लेकिन यह सरकार prospective law लाकर भी कैसे अपराधियों के ऊपर प्रहार कर सके, उनको कानून के दायरे में ला सके यह भलीभांति समझती है|

और मैं समझता हूँ अगर आप Clause 3 पढ़ें, माननीय उपसभापति महोदय अगर माननीय सदन approve करे तो मैं पढ़कर सुना दूं, खासतौर पर क्योंकि कल्याण जी ने भी इसका ज़िक्र किया था और बड़े विख्यात वकील हैं – The provisions of this Act shall apply to any individual who is or becomes a fugitive economic offender.

एक बार और पढ़ लेता हूँ शायद उनको समझ में आ जायेगा, Section 3 बोलता है – The provisions of this Act shall apply to any individual who is or becomes (अभी है या आगे बन जाये) a fugitive economic offender on or after the date of coming into force of this Act. तो अगर कोई आज भगौड़ा है और बाहर रहता है तो he is already a fugitive. He is running away from Indian Law. और वह भी Section 3 के द्वारा इस कानून में कवर हो जाता है|

तो मैं समझता हूँ कि शायद आज जाकर फिर से कानून पढ़ेंगे तो अच्छा रहेगा| एक माननीय कल्याण जी ने भी कहा था और मेरे मित्र सतपति जी ने भी इस विषय को उठाया कि इंडियन कोर्ट का ऑर्डर आप फॉरेन लैंड में कैसे एक्सीक्यूट करोगे? बड़ा ही इसका तो सिंपल आंसर है सभी जानते हैं, भारत सरकार और विदेशी सरकारें ट्रीटीज़ करती हैं आपस में, जैसे हमने ट्रीटीज़ बदली अलग-अलग देशों के साथ और Automatic Exchange of Information का प्रावधान इस सरकार ने लाया जो वह लोग छुपाया करते थे हमने वह सब डेटा लाने की कोशिश की|

तो मुझे लगता है कि आज भारत का 39 कन्ट्रीज के साथ ट्रीटी है और उसको आगे और करेंगे, उसपर हम एक्शन ले सकेंगे| कल्याण जी ने कहा contradiction है Section 4 और 12 में, मैं समझा हूँ कोई contradiction नहीं है, एक Application for Declaration है और एक Court decide करता है Declaration.

हर प्रकार से कोई denial of human rights नहीं होगा सुप्रिया जी, कोर्ट और ट्रिब्यूनल पर हम सबका अटूट विश्वास है और अगर offender misuse करता है कानून तो उसको सख्त से सख्त सज़ा होनी चाहिए यह इस सदन की और सरकार की मंशा है| And I request the honorable Members of the House to support this bill and pass this bill.

Thank you.

 

 

Held a meeting with Minister of Textiles Smriti Z Irani and Mr Balkrishan Goenka, Senior Vice President, Associated Chambers of Commerce & Industry of India, in New Delhi

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Met Chief Minister of Karnataka Shri H D Kumaraswamy in New Delhi today and discussed aspects relating to development of the State

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Delivering on our commitment of better service to passengers, railways has improved punctuality of its trains from 60% in April-June ’18 to 70% this month

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Indian Railways has improved the on time performance of its trains in July. The punctuality score of the national transporter has increased from low levels of around 60 per cent (between April and June) to 70 per cent in first two weeks of July.

Konkan railway has shown maximum improvement as 94 per cent of the trains are running on time in the zone. North Western Railway and Northern Frontier railway have also posted punctuality figures of around 90 per cent . Out of 17 rail zones across the country, 10 zones have improved their on-time performance to 75 per cent .

Only three rail zones-west central railway, south eastern central railway and northern railway have trains with maximum delay and punctuality scores of 60 per cent and below, the railway ministry said in a statement.

On an average, railways has reported that 70 per cent trains on its network were running on time.

The ministry had earlier said that its punctuality figures were as automatic data loggers were being used for collection of data related to running of trains

 
Source: https://economictimes.indiatimes.com/industry/transportation/railways/railways-improves-on-time-performance-of-trains-in-july/articleshow/65009016.cms

Indian Railways to get its first dedicated freight corridor on August 15, 2018 which will increase its freight handling capacity, while reducing congestion on the main tracks

Freight train

After 165 years of its birth, Indian Railways is set to get its first publicly-owned dedicated corridor for freight trains on August 15, when the country will be celebrating its 72nd Independence Day.

Prime Minister Narendra Modi is likely to dedicate to the nation a 190-km railway line between Dadri in Uttar Pradesh and Phulera in Rajasthan, which fall under the Western Dedicated Freight Corridor(WDFC).

The Red Fort speech of the PM this year is likely to set the pitch for the upcoming Lok Sabha elections, citing the government’s achievements in the four years.

For the railways, that is facing stiff competition from roadways in freight traffic, this can come as a fresh lease of life as the project is finally taking shape even though partially after 12 years of its formation. It was in February 2006 that the Cabinet had given in-principle nod to the project.

“The feeder route at Tundla is already in place and the Ateli-Phulera route will be functional on August 15,” said a government official. The Rs 814-billion-project of Eastern and Western DFCs will cover a total of 3,360 km track, of which around 1,500 km falls in the western region starting from Dadri to Jawaharlal Nehru Port Trust.

Sources said that the government is likely to highlight this as a major achievement for the elections as it was successful in completing land acquisition and awarding the contracts for the projects. After eight years of its conceptualisation, the Congress government was able to award only 18.45 per cent of the contracts as of March 2014.

Graph

While Japan International Cooperation Agency is providing loan of Rs 387.22 billion for the Western India project, the Eastern DFC (Mughalsarai-Allahabad-Kanpur-Khurja-Dadri- & Khurja-Ludhiana) is being funded by the World Bank through a loan of $2.360 billion.

The availability of this loan was also ensured in the last four years. Early this year, the railways had conducted a trial run on the Ateli-Phulera section of the Western DFC at a maximum speed of 100 km per hour. It took less than four hours to complete the journey.

According to its current road map, the railways is planning to commission both the lines by April 2020.

“There will be at least 10 feeder lines in the western corridor only connecting the main line to the supply freight. This is going to reduce the traffic by more than half in these busy routes,” he said.

According to estimates, delay in the projects has led to a cost overrun of 189 per cent from the earlier lined up Rs 281.81 billion in 2008 to Rs 814.59 billion. This includes higher land costs.

This includes Rs 266.74 billion for EDFC and Rs 467.18 billion for WDFC along with a land cost of Rs 80.67 billion.

According to CAG estimates, there was a Rs 44.42 billion increase in land cost by 2014.

 

Source: https://www.business-standard.com/article/economy-policy/railways-to-get-first-dedicated-corridor-for-freight-trains-on-august-15-118071601349_1.html

 

 

Met H.E. Niels Annen, Minister of State, Federal Foreign Office, Germany, and discussed the strengthening of avenues of cooperation between India and Germany

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Met Chief Minister of Arunachal Pradesh Shri Pema Khandu in New Delhi, and discussed the ongoing development work in the state

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Delhi

Vanijya Bhawan, 16, Akbar Rd, New Delhi - 110001

Mumbai

Lok Kalyan Karyalay - 56, Balasinor Society, SV Road, Opp Fire Brigade, Kandivali West, Mumbai, Maharashtra, 400067

022-35415953