नवी मुंबई की सन्माननीय महापौर जैन सुतार जी और पनवेल के माननीय महापौर श्रीमती कविता चौथमल जी; हम सब जिनके गढ़ में आज इकट्ठे हुए हैं ऐसे पूर्व सांसद और हम सबके वरिष्ठ नेता माननीय रामशेठ ठाकुर जी, स्थानीय सांसद माननीय श्री श्रीरंग बारने जी, वरिष्ठ सांसद श्री अरविन्द सावंत जी, श्री राजन विचारे जी, विधायक श्री मनोहर भोईर जी, बालाराम पाटिल जी, रमेश पाटिल जी, श्रीमती मंदाताई म्हात्रे जी, श्री संदीप नायक जी, श्री प्रशांत ठाकुर जी जो सिडको के भी अध्यक्ष के नाते वास्तव में आजके इस कार्यक्रम के प्रमुख भी हैं | अभी-अभी विनोद तावड़े जी काम से काम चार बार बोल चुके हैं कि दो-तिहाई पैसा सिडको ने दिया इस प्रोजेक्ट के लिए |
सभी महानुभाव जो आज इस कार्यक्रम में उपस्थित हैं, थोड़ा एक विशेष उल्लेख महेश बाल्दी का इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि सबसे ज़्यादा परेशान मुझे महेश ही आकर करता है यहाँ के सब कार्यक्रमों को लेकर, एक तरफ सांसद आते हैं, एक तरफ महेश आते हैं, एक तरफ प्रशांत आते हैं तो थोड़ा बहुत तो मैं परेशान हूँ आपके सबसे, देवेंद्र जी आपके सब यहाँ के स्थानीय नेताओं से | यह बहुत ज़्यादा प्रोजेक्ट्स लेकर आते हैं लेकिन मुझे आनंद होता है यह देखते हुए कि इतने जागरूक हैं यहाँ के आपके नेता | दोनों भाजपा और सेना के नेता मिलकर जिस प्रकार से मेरे ऊपर प्रहार करते हैं कि यहाँ पर यह कार्यक्रम भी करो, यहाँ पर यह भी प्रोजेक्ट अप्रूव करो, यह भी होना चाहिए | वास्तव में ख़ुशी होती है कि एक जागरूक आपके लोकप्रतिनिधि लगातार इस क्षेत्र में विकास हो, प्रगति हो और मैं समझता हूँ यही सही निशानी है कि जब डबल इंजन काम करती है, केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर दोनों जब लग जाते हैं विकास के लिए तब क्षेत्र का विकास, तब प्रदेश का विकास तेज़ गति से होता है उसका आज का यह कार्यक्रम एक जीता जागता प्रतीक है |
और मैं समझता हूँ यहाँ सभी महानुभाव जो उपस्थित हुए हैं सबके ध्यान में है कि आज का कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यह दर्शाता है कि काम करने की गति कैसे तेज़ करी जा सकती है, कैसे समय के पहले भी काम किया जा सकता है |
मैं अभी-अभी देख रहा था जो विद्युतीकरण का काम आज यहाँ पर समाप्त हुआ है जिसका लोकार्पण हम कर रहे हैं वह विद्युतीकरण का काम पनवेल से पेन का वास्तव में जुलाई 2019 को ख़त्म होना था, जुलाई 2019 को ख़त्म होने वाला काम अक्टूबर 2018 में ख़त्म करना, यानी 9 महीने पहले अपने आपमें भारतीय रेलवे हो या सरकारी कामों के लिए एक नयी दिशा दिखाता है, एक नयी काम करने की सोच आप सबके समक्ष रखता है |
इसी प्रकार से कैसे मुंबई के सभी यात्री और नवी मुंबई हो महा मुंबई हो,जैसे अभी-अभी माननीय अनन्त गीते जी ने एक कल्पना रखी इन सब यात्रियों की दिन रोज़ की कठिनाइयों को समझते हुए कैसे यात्रा सुरक्षित हो, सुगम हो, कैसे सुविधाएं अच्छी हो, किस प्रकार से कैपेसिटी बढ़े, क्षमता बढ़े भारतीय रेल की जिससे पूरा जो सबअर्बन नेटवर्क है इसमें लोगों को सुविधाजनक अपनी यात्रा करने की उपलब्धि हो सब प्रकार से सुनिश्चित कर सकें, यह काम माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आशीर्वाद से और देवेंद्र फडणवीस जी के लगातार सहयोग से अब भारतीय रेल ने लगभग 60 से 65,000 करोड़ रुपये मुंबई के सबअर्बन रेलवे में निवेश करके सुनिश्चित करने का फैसला पिछले बजट में मंज़ूरी दे दी है | और मुझे पूरा विश्वास है इसी गति के साथ काम करते हुए अगले चार-साढ़े चार वर्षों में जैसे हम भारत में एक नए भारत की कल्पना करते हैं वैसे ही सबअर्बन रेलवे मुंबई का और नवी मुंबई और महा मुंबई का सबअर्बन रेलवे कैसे एक नया रेलवे बन सके, कैसे यह रेलवे हर यात्री की सुविधाजनक यात्रा कर सके यह संकल्प के साथ हमने काम शुरू किया है |
मैं देवेंद्र फडणवीस जी का तहे दिल से धन्यवाद करना चाहूंगा जिस प्रकार का सहयोग, जिस प्रकार का कोऑपरेशन, जिस प्रकार से उत्साह राज्य सरकार और राज्य सरकार के अधिकारियों का, उनके अलग-अलग उपक्रम का मुझे देखने को मिलता है कभी-कभी मीटिंग रात को दो-दो, तीन-तीन बजे तक चलती हैं, सब लोग उत्साह के साथ बैठते हैं | चाहे शुक्रवार हो, शनिवार, रविवार, कोई दिन हो कभी आज तक मुझे ऐसा महसूस नहीं हुआ की कुछ सुस्ती है या काम करने में दिलचस्पी नहीं है |
और वास्तव में इस प्रकार का काम जब सब मिलकर करते हैं, सामूहिक दृष्टिकोण से काम आगे बढ़ाते हैं और एक ऐसा विज़न जो हर एक यात्री की समस्याओं को समझते हुए आगे का कार्यक्रम, योजनाएं बनाएं यह वास्तव में मुंबई में और महाराष्ट्र में आज देखने को मिलता है |
एक प्रकार से आगे चलकर यह एयर-कंडीशन ट्रेंस जिसका हमने शुरुआत कुछ महीने पहले की थी, ट्रायल रन्स किये, काफी सफल यह प्रयोग रहा | उसकी आलरेडी हमने लगभग 40 से अधिक नयी ट्रेनों का ऑर्डर दे दिया है, और अब जो नया प्रोजेक्ट जो बजट में अन्नौंस हुआ 54,000 करोड़ का सबअर्बन रेलवे का जो महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार मिलकर इम्प्लीमेंट करने वाली है, उसमें लगभग 200 और ट्रेन एयर-कंडीशन का हमने प्रावधान रखा है जिससे आगे चलकर लगभग यार यात्री को एक अच्छी सुगम यात्रा करने का मुंबई में सहूलियत मिलेगी |
और मुझे पूरा विश्वास है कि जो प्रधानमंत्री मोदी जी की संकल्पना है कि महाराष्ट्र जैसा विकसित प्रदेश भारत का सबसे तेज़ गति से आगे बढ़ने वाला प्रदेश है जो आर्थिक राजधानी है, भारत की कमर्शियल, फाइनेंशियल राजधानी है इसमें किस प्रकार से और ज़्यादा विकास हो, तेज़ गति से विकास हो और जो देवेंद्र फडणवीस जी ने लक्ष्य रखा है कि देश की सबसे पहली ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी, यानी लगभग 1000 बिलियन डॉलर की इकॉनमी महाराष्ट्र बने, जो 72 से 75,000 करोड़ की इकॉनमी शायद किसी ने आज तक इतनी बड़ी छलांग की कल्पना कभी नहीं की होगी जो देवेंद्र फडणवीस जी ने लक्ष्य रखा है और मुझे पूरा विश्वास है इस लक्ष्य की प्राप्ति में भारतीय रेल जो-जो उनकी कल्पना है, जो-जो उनकी रिक्वायरमेन्ट्स हैं, कुछ बातें अनन्त गीते जी ने रखी, कुछ बातें रामदास जी ने पहले बताई, अलग-अलग माननीय सांसद अरविन्द जी ने, शिवाले जी ने मेरे समक्ष रखी है अलग-अलग मीटिंगों में इन सबको पूरा करना यह हमारी संकल्पना है |
और मुझे पूरा विश्वास है जिस उत्साह के साथ आज श्रीरंग बारने जी ने आजका कार्यक्रम बनाने के लिए इसके लिए सबको प्रोजेक्ट्स को तेज़ गति से पुश दिया, मुझे बार-बार मिलते रहे हैं दिल्ली में ऐसे ही हम सब जब मिलकर इन सब कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएंगे तो सचमुच में भारतीय रेल दुनिया की सभी रेलों से और अच्छी रेल बनाने का जो हमारा प्रतिबद्धता है, संकल्प है इसमें हम पूरी तरीके से सफल हो पाएंगे |
आज वैसे विनोद तावड़े जी शिक्षा मंत्री हैं और आज का दिन नेशनल एजुकेशन डे के रूप में मनाया जाता है, मैं उनको बधाई दूंगा | और वास्तव में हम यह सब काम जो कर रहे हैं यह अगली पीढ़ी के लिए सुविधाएं उपलब्ध हों यह हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है | मेरा भी मुंबई रेल से संपर्क जब मैं शिक्षा, पढ़ाई करता था तभी आया, 1979 से 1987 – 8 वर्ष तक मैं सायन से दादर सेंट्रल रेलवे में जाता था, दादर से चर्च गेट वेस्टर्न रेलवे में और वह जो अनुभव है उस समय का उसको ध्यान में रखते हुए यह इतनी सारी योजनाएं जो मुंबई में हमने अप्रूव की हैं जो देवेंद्र फडणवीस जी और मोदी जी के आशीर्वाद से अब मुंबई में लगने जा रही हैं इन सब योजनाओं के बाद मुझे पूरा विश्वास है जो हमारे सभी विद्यार्थी हैं मुंबई के और नवी मुंबई के इन सब विद्यार्थियों को अच्छी सुविधाएं दे पाएंगे, वह याद रखेंगे कि नेशनल एजुकेशन डे 2018 पर नवी मुंबई को कनेक्ट किया गया |
यह पहला फेज आज शुरू हुआ है, नेरुल सीवूड से बेलापुर और खारकोपर को जॉइन करने का अगला फेज भी मुझे लगता है एक साल में हम ख़त्म करेंगे ऐसा हमने सुनिश्चित किया है, तेज़ गति से विद्युतीकरण सेंट्रल रेलवे में चल रहा है और एक साल के अंदर पूरा सेंट्रल रेलवे शत-प्रतिशत विद्युतीकरण से सौभाग्यवत हो जायेगा, पूरा सेंट्रल रेलवे में हम विद्युतीकरण एक वर्ष में पूरा करेंगे जिससे पर्यावरण को भी बहुत लाभ मिलेगा |
तो मैं समझता हूँ… अभी-अभी अनन्त गीते जी ने पनवेल की भी अपग्रडेशन की बात रखी वहां भी एक नया कोचिंग टर्मिनल बनाने की संकल्पना है, उसके भी स्टेशन को अपग्रेड करेंगे जब हारबर लाइन की नयी तीसरी-चौथी लाइन वहां तक, पनवेल तक आएगी, आगे चलकर नवी मुंबई एयरपोर्ट को भी जॉइन करने की योजना है |
तो इन सब योजनाओं को तेज़ गति से आगे बढ़ाने का काम हम सबने यह बीड़ा उठाया है | और मैं आज आप सबको बधाई देता हूँ इतने सारे प्रोजेक्ट्स, यह वास्तव में लिस्ट इतनी लम्बी है आजके प्रोजेक्ट्स की, अलग-अलग प्रकार से फुट-ओवर ब्रिज, एस्केलेटर, नए टॉयलेट, एलईडी लाइटेड इंडीकेटर्स, मेमो सर्विस और ईएमयू सर्विस फ्लैग ऑफ होंगी, इतनी सारी योजनाएं एक साथ शुरू करना यह रेलवेज में अपने आपमें एक नया प्रयोग है | पहले तो छोटे-छोटे योजना के ऊपर बड़ा कार्यक्रम होता था, अब बड़ी-बड़ी योजनाओं को लेकर मिलकर एक कार्यक्रम में ही हम इतनी सारी योजनाओं को शुरू करते हैं | मुझे विश्वास है कि मुंबई और नवी मुंबई की जनता को इन सबका लाभ महसूस होगा, इन सबका लाभ आप सब लेंगे |
आप सबको दीपावली, भाई दूज, अभी-अभी हमने सबने उत्साह से सब त्यौहार मनाये हैं आपको और आपके परिवारों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं दीपावली और नव वर्ष भी |
धन्यवाद |
चेयरमैन रेलवे बोर्ड श्री अश्विनी लोहानी जी, मैनेजिंग डायरेक्टर, DFCCIL, श्री सचान, सभी रेलवे बोर्ड के मेंबर्स, पदाधिकारी, रेलवे के अलग-अलग इकाइयों के डायरेक्टर्स और सभी सन्मान्य भाइयों और बहनों| वास्तव में मुझे थोड़ी embarrassment हो गयी जब मैं वह targets देख रहा था दोनों तरफ| मुझे लगा कि कहीं ऐसा न लगे कि मैं जिधर भी जाता हूँ तो सिर्फ काम की बात करता हूँ और all work and no play is a very lousy idea.
तो मुझे अच्छा लगता है कि आप लोग socialize करते हैं, आप लोग मिलना जुलना regularly करते हैं क्यूंकि मैं समझता हूँ यह भी बहुत ज़रूरी है इसके बगैर काम में भी चुसती नहीं आती है| And therefore, I must say I am really delighted that the dedicated freight corridor organization has decided to celebrate its 13th anniversary. Thirteen is a lucky number, by the way. My birthday is on the 13th. I always like the number, 13.
And from whatever progressI have seen in the last three or four years happen in the setting up of the dedicated freight corridors, I must say we all feel confident, we all feel reassured that this long awaited and delayed project has finally come on stream and will be completed by March, 2020.
उस दिन पता चला कि लोहानी जी तो शायद हर महीने इसका review लेते हैं और उससे काफी प्रगति भी आयी है| ज़मीन लगभग पूरी अपने हाथ में है| छोटे मोटे हिस्से बाकी हैं वह भी अभी तेज़ गति से ख़त्म किये जाएं| और 777 किलोमीटर अगर हम मार्च या फरबरी 2019 तक कर लेते हैं तो उससे बाकी भी काम में और प्रगति आएगी, और उत्साह आएगा| और आप अगर इस उत्साह के साथ करते हैं तो हमें भी उत्साह आएगा कि और नये projects को लिया जाए इसके अंतर्गत|
After all, you cannot set up such a large organization in just two dedicated freight corridors तो अपनी कल्पना है कि इसको और बढ़ाया जाए| और रूट्स निकाले जाएँ जहाँ फ्रेट की संभावना अच्छे मात्रा में है| मुझे बताया गया दिल्ली से चेन्नई का भी एक रूट पॉसिबल हो सकता है आगे चलके| शायद अलग-अलग पोर्ट्स से क्या-क्या रूटस viable बनते हैं उसको स्टडी करके अगर हम उसपे भी preliminary काम शुरू कर देते हैं तो this organization will have a very glorious future, will have something to look forward to. And my own sense is at least, 70-80% of the freight carrying routes – major freight carrying routes – if they have dedicated freight lines, simultaneously we are looking at more and more semi-high speed and high speed railway tracks. With both of these developing in a big way, the routes that we have available, the 65-70,000 kilometers, that are currently available will be able to serve the common man, will be able to be dedicated to the common passengers who today are often asking me कि कब वेटिंग लिस्ट ख़त्म होगी| कब हमें on-demand टिकट मिल पाएगी| मैं समझता हूँ जितनी तेज़ गति से आप dedicated freight corridors बनाएँ, जितनी जल्द से जल्द हम पैसेंजर्स के लिए dedicated lines बना सकते हैं, at least on the main routes, उतना ज़्यादा हम सुनिश्चित कर पाएँगे कि इस देश की जनता को सुगम तरीके से, अच्छे तरीके से टिकट भी मिले, जब चाहे वह यात्रा कर सके, सुविधाजनक यात्रा हो| अच्छे तरीके से, ख़ुशी राज़ी ख़ुशी लोग अपने स्थान पर पहुँच पाएँ, समय पर पहुँच पाएँ और तेज़ गति से freight भी अपने अपने स्थान पर पहुंच पाए | क्यूंकि आखिर भारत जितना ज़्यादा आर्थिक प्रगति कर रहा है उसमें logistics cost और efficiency of logistics, availability of enough capacity to reach our products in time will become a very important element.
तो मैं समझता हूँ आप सबके पास बड़ी चुनौतियां हैं, आप सबके पास मौका है एक अच्छी लिगेसी छोड़ने का, देश के लिए अच्छा काम करने का| और मुझे पूरा विश्वास है कि जो गति हमने, जो प्रगति गत दो-तीन वर्षों में देखी है dedicated freight corridors में| लगभग 40,000 करोड़ के contracts या काम हो चुका है| मेरे ख्याल से पिछले चार साल में 40,000 करोड़ का काम हुआ है|
लगभग 90-95 प्रतिशत तक सब contracts इशू हो चुके हैं, 98 प्रतिशत तक ज़मीन आपके हाथ में है| You are quite well on track to achieve these targets. Bridges लगभग बड़े-छोटे सब बन गए हैं, automatic track laying से आप तेज़ गति से ट्रैक्स भी lay कर पा रहे हैं और मेरे ख्याल से इन मशीनों के द्धारा आपकी track laying भी बहुत साइंटिफिक तरीके से और अच्छी होगी,प्लस इसमें मल नहीं जाएगा, कोई यूरिक एसिड नहीं जाएगा तो शायद ट्रैक की भी लाइफ…. we can hope for longer life on the tracks.
उस दिन बात हो रही थी आगे चलकर हम स्टेनलेस स्टील के वैगन्स की भी अब एक चर्चा कर रहे हैं, RDSOउसपर जल्द से जल्द कुछ designs finalize करें, हो सकता है हम कोशिश करें कि DFCs में शुरू कर दें स्टेनलेस स्टील की वैगन्स| So that at least यहाँ पर एकदम अच्छी तरीके से organized way में हमारे सब dedicated freight corridors चलें| तो please keep your eyes and ears open, come up with new ideas. I would appeal to all of you also to participate in the ideation. ऐसा नहीं है कि ideas सिर्फ इस मंच से आने चाहिए, ideas आप सबसे आने चाहिए, आप सब सोचिए और क्या कर सकते हैं जिससे यह पूरा प्रोजेक्ट भी जल्दी लगे, प्रोजेक्ट अच्छी तरीके से लगे, प्रोजेक्ट जल्द से जल्द profitable हो, long-term में इसकी viability अच्छी बने, सुरक्षित तरीके से सामान लेकर जा सकें DFC sub-corridors के माध्यम से, समय पर सामान जाए|
अभी-अभी मैं पढ़ रहा था 10 मिनट का हेड-वे होगा दो ट्रेनस के बीच| मुझे लगता है 10 मिनट की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए| आप देखिए इसको कैसे कम कर सकते हैं, क्या वह automatic signaling वगैरा करकर इसको कैसे कम किया जाए| आपने शायद अभी throughput 120 ट्रेनस का बताया, each way, तो 250 कैसे हो सकती है मुझे वह बताइये| तो हम सबको मिलकर we will have to apply our mind for better and newer ideas. We cannot be satisfied with what is already planned और 120 तो किसी हालत में मतलब you are really under-utilizing a almost a lakh of crores that we are investing on these DFCs. तो हो सकता है 2,000-5,000 करोड़ और खर्च करकर आप इसकी कैपेसिटी डबल कर सको. Whatever you call that, signaling system तो ठीक है वह जिससे दो स्टेशनस के बीच के फासले में भी…. हाँ, तो वह है इसमें, तो फिर आप क्यों 10 मिनट प्लान कर रहे हो?
That means, हमारी जो अभी-अभी जो लोहानी जी ने भी कहा, हमारी सोच बदलने की ज़रूरत है| हम क्या बहुत conservative तो नहीं चल रहे हैं, क्या हम आधुनिक technology को वास्तव में ग्रहण कर रहे हैं, उसको इस्तेमाल कर रहे हैं| इस सब पर मैं चाहूँगा जो youngsters हैं हमारे रेलवेज के, खासतौर पर उनको थोड़ा research करना चाहिए, थोड़ा अपना दिल लगाना चाहिए कि कैसे हम इस काम को और अच्छे तरीके से कर सकें|
आज ख़ुशी का दिन है तो शायद इस विषय को यहाँ ही रोकता हूँ लेकिन celebrate जब 13th एनिवर्सरी करते हैं तो साथ ही साथ 14th एनिवर्सरी का भी कुछ न कुछ लक्ष्य तय होते हैं जो आज लोहानी जी ने, और मैं स्पष्ट कर रहा हूँ मेरा आईडिया नहीं था वह targets लगाने का| वह targets meet करने का भी संकल्प लेकर यहाँ से हम सब जाएं जिससे जब 14th एनिवर्सरी सेलिब्रेशन के लिए हम सब इकट्ठे होंगे तब और बड़ा जश्न बन सके, और बड़े रूप से सफलता के साथ आगे का रोडमैप भी निर्धारित कर सकें|
तब तक हो सकता है इतना प्रोग्रेस हो जाए कि आगे के भी जो सब dedicated freight corridors का भी अप्रूवलस वगैरा का प्रोसेस हम ख़त्म कर पाएँगे| और मुझे पूरा विश्वास है जो आज फीडबैक मुझे मिल रहा है वर्ल्ड बैंक से, जो फीडबैक मिल रहा है JAICA से, जिस संतुष्टि से वह बताते हैं कि we are really satisfied with the work that’s happening on the dedicated freight corridor. आगे के प्रोजेक्ट्स में हमें better terms मिलेंगे, आगे के प्रोजेक्ट्स में यहाँ की learnings के कारण शायद हम और सस्ते और अच्छी तरीके से अपने काम को प्लान कर पाएंगे, कम समय में ज़्यादा आउटपुट दे पाएंगे और जिस dedicated freight corridors के पहले दो अंक को 2007-08 में शुरू करकर लगभग 2020यानी 12-13 साल लग गए, मैं समझता हूँ आगे आने वाले प्रोजेक्ट्स में तीन-तीन साल में कैसे एकदम फ़ास्टट्रैक में यह प्रोजेक्ट्स लगें, इस प्रकार की कल्पना करकर, इस प्रकार की planning करके हमने पूरे देश और दुनिया को दिखाना चाहिए कि भारतीय रेल अब नया भारतीय रेल बन गया है, भारतीय रेल नयी सोच के साथ काम कर रहा है|
और अब भारतीय रेल में प्रोजेक्ट्स डिले नहीं होते हैं, प्रोजेक्ट्स एडवांस होते हैं, before time implement होते हैं| यह मैसेज अगर लेकर हम सब आज यहाँ से उठेंगे और प्ले भी बड़ा मज़ेदार है, शायद बड़ा humour है उस प्ले में, तो आज का दिन तो humour को पूरा समर्पित किया जाए और कल से लगें काम पर जिसमें हम इसको रियली एक new railway, new dedicated freight corridors स्पीड के साथ इम्प्लीमेंट करने का काम करें और आगे चलकर चार-पाँच-छह हज़ार किलोमीटर और dedicated freight corridors आपकी संस्था बनाए इस उम्मीद के साथ, इस विश्वास के साथ मैं आज आपसे विदा लूंगा, आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएँ| दीपावली और भाईदूज अभी-अभी हमने सेलिब्रेट किये, आपको और आपके परिवारों को दीपावली की बधाई, भाईदूज की बहुत-बहुत सुभेच्छा|
धन्यवाद|

With Railway Minister Piyush Goyal emphasising on safety and improving infrastructure of the national transporter through mega investments and recruitments, deaths from train collisions or derailment in India have fallen by more than 84 per cent, a senior railway ministry official said on Tuesday.
“Deaths from accidents, collisions or derailments in last 12 months i.e. October 2017 to September 2018, have come down to 40,” a senior railway ministry official requesting anonymity told IANS.
He said that between October 2016 to September 2017, the death toll due to several reasons was 244.
“It is 84 per cent fall in the number of deaths,” he said.
The official pointed out that there has even been a drastic fall in the number people injured due to accidents or collisions or derailments.
“In last 12 months (October 2017-September 2018), only 56 people were injured as compared to 491 between October 2016-Sptember 2017, which is an 89 per cent decrease,” he said.
Citing the measures the railways has taken to improve its infrastructure, the official said: “In last six months i.e. between April 2018 to September 2018, the railways has laid, renewed and converted over 2,257 km of tracks on its routes.”
He said this was a 55 per cent increase in the rate of renewing, laying and conversion of tracks.
In the 2016-17 financial year, the railways had renewed, converted and laid about 1,459 km of tracks.
He said that due to all these measures even the punctuality of trains has increased drastically.
“The punctuality score has increased from low levels of around 62 per cent in April to 74 per cent in September-end.
The official said that the Konkan Railway has shown maximum improvement as 95 per cent of the trains were running on time in the zone.
The North Western Railway and Northern Frontier railway also posted punctuality figures of around 90 per cent.
“Ten out of the 17 rail zones have improved their on-time performance to 75 per cent,” the official said.
The official said that out of 17 zones, only three — West Central Railway, South Eastern Central Railway and Northern Railway — have trains with maximum delays and punctuality scores of 65 per cent and below.
The Indian Railways has installed automatic data loggers at 98 places across its routes, which became operational from April 1.
Soon after these became operational, a staggering 94 trains were found running late by more than six hours, but this decreased to 87 in May and 67 in June.
In March, 57 trains were found running late by more than six hours.
The official said that besides track renewal, the Indian Railways is also acquiring a Vehicular Ultrasonic Flaw Detection (USFD) system to detect track faults at a faster pace. Currently, it is detected manually which takes longer time to complete a particular route.
The USFD can detect the flaws in the primary stage. All developed countries have the system to avoid the human element in detecting cracks in the rails.
Source: https://www.business-standard.com/article/news-ians/deaths-injuries-from-accidents-fall-by-84-per-cent-in-last-one-year-railways-118110600581_1.html


Indian Railway has taken a mission area to eliminate all Unmanned Level Crossings (UMLCs) on Broad Gauge and accordingly special efforts have been made so that elimination can be completed at the earliest.
As on 01.04.2018, there were 3479 Unmanned Level Crossings on Broad Gauge routes. Total 3402 UMLCs have been eliminated in last seven months. Balance 77 UMLCs have also been planned to be eliminated by December 2018.
Most of the UMLCs have been eliminated either by provision of Subway/RUBs or by manning.

Elimination of UMLC by Subway Elimination of UMLC by manning
Progress of elimination in last 10 years is as under:

*Progress is upto October’2018
From the above, it is clear that in last 7 months progress improved more than 5 times as compared to last years.
All Unmanned level crossings on routes having speed more than 130KMPH and on Sub-urban routes have been eliminated.
12 Zonal Railways – Central Railway, Eastern Railway, East Central Railway, East Coast Railway, North Eastern Railway, North East Frontier Railway, Southern Railway, South Central Railway, South Eastern Railway, South East Central Railway & West Central Railway are now become UMLC free on Broad Gauge route.
By elimination of UMLCs on war footing, accidents at UMLCs have reduced from 65 in 2009-10 to 3 in 2018-19.

*Accident data is upto October’2018
Source: http://www.pib.nic.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1551732

मुझे आने का मौक़ा मिला और एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्यक्रम जो प्रधानमंत्री जी के दिल में बहुत समय से चल रहा था और लगातार वह हम सबके पीछे पड़े थे कि मेरे जो छोटे व्यापारी हैं, मेरे जो लघु और मध्यम वर्गीय उद्योग के साथ जुड़े हुए सभी देशवासी हैं उनके लिए हमने कुछ विशेष कार्यक्रम, योजनाएं बनाकर बल देना है उनके कामकाज को, कारोबार को। तो मैं बहुत ही अपने आप को धन्य मानता हूँ कि आज आप सबके बीच मुझे आने का मौक़ा मिला, आप सबके साथ अपने विचार रखने का मौक़ा मिला ।
हमारे बीच में अहमदाबाद की लोकप्रिय युवा महापौर बीजल बेन हैं,देना बैंक के श्री रमेश सिंह जी एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर,श्रीमती थारा जो वाइस चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर है गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की जिन्होंने आज के कार्यक्रम में डॉ विक्रांत पाण्डेय के साथ मिलकर आपके डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर बहुत ही कम समय में इस कार्यक्रम को आयोजन किया,इस कार्यक्रम को इतना विशाल रूपरेखा दी।
दिल्ली से आए हमारे श्री सुधीर कुमार जी जो प्रभारी के रूप में आए हैं इस कार्यक्रम को एक कड़ी में पिरोने के लिए, पूरी उसकी व्यवस्थाएं देखने के लिए। सभी हमारे बैंकर्स जो हमारे साथ आज उपस्थित हैं श्री दुखबंधु रथ सीजीएम स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, श्री रवीन्द्रन जनरल मैनेजर SIDBI, श्री तुलशीबग्वाले जी जनरल मैनेजर बैंक ऑफ़ बड़ौदा, श्री रोहित पटेल जी जनरल मैनेजर देना बैंक, सभी सन्माननीय महानुभाव जो मेरे साथ आज यहाँ उपस्थित हैं स्टेज पर, स्टेज के नीचे, एमएसएमई सेक्टर से जुड़े हुए अलग-अलग इंडस्ट्रीज़ के साथ कारोबार करने वाले मेरे मित्र, उद्योजक, उद्योगपति, व्यापारी, भाइयों और बहनों।
थोड़ी ही देर में माननीय प्रधानमंत्री जी भी हमारे साथ जुड़ने वाले हैं और वास्तव में उनके मन की आज जब बात आप सुनेंगे और कई सारी अलग-अलग घोषणाएँ माननीय प्रधानमंत्री जी करेंगे तो मुझे पूरा विश्वास है कि एमएसएमई सेक्टर को एक नई तेज़, नया प्रगति का राह आज ज़रूर मिलेगा और आगे के लिए कैसे तेज़ गति से हम सब अपने व्यापार को, अपने उद्योग को बढ़ा सकते हैं उसका मार्ग भी खुलेगा।
अभी-अभी प्रधानमंत्री जी अहमदाबाद में थे 30 तारीख़ को, 31 तारीख़ को उन्होंने सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा का अनावरण किया, देश को समर्पित किया। और मुझे लगता है गुजरात के तो सभी लोग जानते हैं कि माननीय प्रधानमंत्री कुछ काम करते हैं तो साधारण काम नहीं करते हैं वह ऑलवेज़ असाधारण ही होते हैं, it has to be different.
आपको याद होगा, आपको क्या याद दिलाऊँ हमें याद करना पड़ता है आपने तो महसूस किया है कि उनका काम में ऑलवेज़ स्पीड, स्किल और स्केल, तीनों चीज़ें रहती हैं। वह तो आपने सुना होगा स्पीड, स्किल और स्केल यह एक मूल मंत्र प्रधानमंत्री जी के काम में हर वक़्त रहता है। यह अलग बात है कि उसका भुगतान हमको करना पड़ रहा है अभी दिल्ली में, आपने तो कई वर्षों तक किया अब हमको दिल्ली में उसी प्रकार से वह पूछते रहते हैं भाई काम की प्रगति कितनी हुई, कितनी तेज़ गति से हो रहा है, छोटा तो नहीं सोच रहे हो, व्यापक सोचो, बड़ा सोचो।
और वास्तव में जो स्टैचू ऑफ़ यूनिटी बनी है, जो स्टैचू ऑफ़ लिबर्टी से दो गुना बढ़ी है, ऊँची है। 182 मीटर ऊँचा होना कोई साधारण बात नहीं है, कोई सरल बात नहीं है। स्टैचू ऑफ़ लिबर्टी 97 मीटर हाइट की है, यह 182 मीटर हाइट की है। और जो सुंदर प्रतिमा बनी है वास्तव में अपना दिल ख़ुश होता है देखकर कि सरदार वल्लभ भाई पटेल को देर हुआ 70 वर्ष लग गए आज़ादी के बाद लेकिन वास्तव में अगर सही मायने में श्रद्धांजली मिली है सरदार वल्लभ भाई पटेल को, उनके बड़े व्यक्तित्व का पह्चान आज देश और दुनिया तक पहुँची है तो 31 अक्तूबर 2018 को यह फिटिंग ट्रिब्यूट।
वैसे तो पता नहीं आप में से कितने लोग जानते हो कि सरदार पटेल अहमदाबाद के म्युनिसिपल प्रेजीडेंट थे, वहाँ से उन्होंने अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया था। और उनकी विरासत हम सबको गौरवान्विय करती है, it is truly a remarkable legacy that he has left behind for all of us. बहुत ही प्रो-बिजनेस, प्रो-ट्रेड व्यक्ति माने जाते थे। व्यापार को प्रोत्साहन देना ज़रूरी है देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए, देश में लोगों को काम करने के नए अवसर देने के लिए।
वैसे मूलतः किसान नेता थे लेकिन समझते थे कि जब तक उद्योग और व्यापार को भी तेज़ गति से वृद्धि नहीं मिलेगी तब तक किसान का जीवन भी अधूरा रहेगा, उसकी आमदनी भी नहीं बढ़ सकेगी। तो किसानों का जीवन सुधरे, साथ ही साथ तेज़ गति से व्यापार और उद्योग जगत में भी उत्साह हो, प्रगति हो। जब दोनों एक साथ चलते हैं तभी देश का विकास और उन्नति हो सकती है। यह सरदार पटेल की सोच थी।
और आज कल आपने परसों ही देखा होगा ease of doing business में भारत ने कैसे ऐतिहासिक छलांग लगाई है, कैसे हमारा रैंक 143 से सुधर कर 77 हो गया है। लगभग टॉप 80 में आ गए हैं अभी और चार साल पूरे हुए हैं जब तक हमारा पाँचवा साल पूरा होगा मुझे पूरा विश्वास है हम विश्व में टॉप 50 में आ जाएंगे ease of doing business में।
पर आपको बताना चाहूँगा कि यह कल्पना भी सबसे पहले सरदार पटेल ने रखी थी आज से 70 साल पहले। सरदार पटेल कहते थे और हर वक़्त लोगों से कहते थे कि हम सबको मेहनत करनी चाहिए, कैसे व्यापार और उद्योग को हम और सरल कर सकें, आसान कर सकते हैं। और मैं पढ़ना चाहूँगा एक उनका वाक्य जो क्योंकि हम आज बैंकिंग सेक्टर से जुड़े हुए कार्यक्रम में यहाँ पर एकत्र हुए हैं बहुत रिलेवेंट है आज के इस कार्यक्रम के लिए भी।
And I am quoting Sardar Patel, “We must encourage Indian insurance, companies, banks and other enterprises and persuade others to do the same”. मतलब हमने तो प्रोत्साहन देना चाहिए इंश्योरेंस कंपनियों को, बैंकों को, बाक़ी व्यापार उद्योग को लेकिन बाकियों को भी इसमें जोड़ना चाहिए कि वह भी encourage करें। Further he says, “only by using their goods and services and making helpful suggestions we can help in making them better.”मतलब हम सब जुड़ें, अच्छे सुझाव दें, उनकी तकलीफें सुनें, उन तकलीफों को समाधान करें तभी जाकर उनका काम भी सरल होगा और उनका सामान जो है वह बड़े रूप में इस्तेमाल हो पाएगा।
और मैं समझता हूँ कि प्रधानमंत्री जी जो गत चार वर्षों में लगे हैं भारत की अर्थव्यवस्था सुधारी, भारत में एक इमानदार व्यवस्था बने उसका ढांचा बनाने में पूरे तरीक़े से प्रयास किया, बैंकों की स्थिति सुधारना और जो कई वर्षों से बैंकों की स्थिति नाज़ुक होती जा रही थी, लोन ख़राब होते जा रहे थे, एनपीएऔर स्ट्रेस अकाउंट बढ़ रहे थे लेकिन सामने नहीं लाए जा रहे थे, वह सिर्फ़ कार्पेट के नीचे धकेले जा रहे थे, छुपाए जा रहे थे। उस सबका पर्दाफ़ाश कर कर एक बार ख़ुलासा किया जिससे जो असलियत है सामने आए, उसके बारे में अलग कार्रवाई कर कर उसको ठीक किया जाए।
बैंकों को मज़बूत बनाया जाए कि बैंक फिर एक बार लोन देने की क्षमता बना सकें। यह सब काम के पीछे अगर कोई हेतु था तो वह एमएसएमई सेक्टर को ख़ासतौर पर, किसानों को ख़ास तौर पर, छोटे borrowers को ख़ासतौर पर कैसे लोन मिल सके, सरलता से मिल सके और सस्ते ब्याज पर मिल सके।
और मैं सस्ते ब्याज की इसलिए बात कर रहा हूँ कि पहले के समय और उसमें कुछ तो बैंकर्स आपको यहाँ पर बता भी सकते हैं कई ऐसे बैंकस की हालत नाज़ुक इतनी हो गई थी कि लगभग एक-चौथाई, एक-तिहाई जितने लोन थे वह अपना ब्याज कभी भरते ही नहीं थे और उसमें अधिकांश बड़े लोग थे, छोटे लोग नहीं थे। छोटे लोग बेचारे मेहनत कर कर किसी न किसी तरीक़े से बैंक को अपना लोन वापस करना चाहते हैं। छोटे लोग पर प्रेशर रहता है कि भाई मैंने बैंक से लोन लिया है मुझे वापस देना है। बैंक वाले भी हमारे पास आते हैं कि आप वापस दो लोन।
लेकिन पहले एक ज़माना था 2014 के पहले जब अनाप-शनाप लोन दिए गए और जिसको 10,000/20,000/50,000 करोड़ का लोन मिल गया बड़े लोगों को उनको कभी ज़िम्मेदारी महसूस ही नहीं होती थी कि हमको कभी यह लोन वापस देना पड़ेगा। वह तो सोचते थे अब बैंक की ज़िम्मेदारी है हमसे लोन वापस लेने की, हमारी ज़िम्मेदारी नहीं है वापस देने की। और कोई बैंकर हो जो इस बात से अग्री नहीं करें तो मुझे बता दे।
यह असलियत थी कि नहीं भाई साहब कि बड़े लोग तो सोचते थे अब तो मज़ा है हमारे पास 50 हज़ार करोड़ लोन आ गया अब हमारा बैंक क्या बिगाड़ देगा। हम नहीं देंगे लोन तो उसको एवरग्रीन कर देगा, हम नहीं दे पाएँगे लोन तो रीस्ट्रक्चर कर देगा, कोई न कोई तरीक़े से किताबों में हेर फेर कर करअसली तो लोन की स्थिति सामने कभी आती ही नहीं थी पर उसका परिणाम आपके ऊपर कैसे होता था मैं आपसे वह शेयर करना चाहता हूँ।
आप समझिए अगर कोई बैंक है उसमें 20-25% जो लोन दिए हैं वह वास्तव में अपना ब्याज भरने की स्थिति ही नहीं रखते हैं। छुपाया जा रहा है, एवरग्रीन किया जा रहा है पर ब्याज तो आ नहीं रहा है। तो 100 रुपयेमें से अगर 25 रुपये पर ब्याज नहीं आएगा बैंक के पास तो अपने डिपॉजिटर को तो नहीं बोल सकता है न कि भाई मेरा पैसा ब्याज नहीं आ रहा है तो मैं आपके डिपॉज़िट पर भी 25% ब्याज नहीं दूँगा। ऐसा संभव है क्या भाइयों बहनों?
अगर आपने फिक्स्ड डिपॉज़िट या करंट अकाउंट सेविंग बैंक में अपना पैसा रखा है बैंक वाला आपको बोल सकता है क्या कि अच्छा मैं अभी आपको 60% नहीं 5% ही लोन दूँगा ब्याज दूँगा आपके डिपॉज़िट पर क्योंकि मेरा लोन जिसको दिया है वह ब्याज नहीं भर रहा है। ऐसा तो संभव है नहीं। तो अब यह ब्याज… तो लोन के ऊपर ब्याज नहीं मिल रहा है , डिपॉजिटर को पूरा ब्याज देना है तो ऐसी परिस्थिति में जो लोन बाक़ी लोन लेने वाले हैं उनके ब्याज के दर बढ़ जाते हैं।
स्वाभाविक है वह पैसा तो बैंक को किसी न किसी से रिकवर करना है और बड़े लोगों से रिकवर करने की स्थिति नहीं है उनकी। बड़े लोग तो निगोशिएट कर कर टाइट टर्म्स ले लेते हैं तो वह मध्यम वर्गीय और छोटे जो लोनी हैं उनके ऊपर ब्याज के दर बढ़ जाते हैं और इस करकर एमएसएमई सेक्टर को पैसा भी नहीं मिलता था और उनके ऊपर ब्याज भी बढ़ जाता था।
यह परिस्थिति बदलने के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी ने सख़्त कार्रवाई की और यह कार्रवाई करकर जितने लोगों के लोन वापस नहीं आ रहे थे उन सब को मजबूर किया लोन वापस करो नहीं तो इन्सॉल्वेंसी में जाकर आपके कारख़ाने बिकेंगे, आपकी ज़मीन-जायदाद बिकेगी लेकिन बैंक का लोन तो आपको वापस देना होगा और वह लोन आने के कारण आप आज यह कार्यक्रम में पीएसबीलोन इन 59 मिनट्स जैसी सुविधा आप सब को मिल सकती है, कम ब्याज पर लोन मिलेगा।
अभी-अभी हमने भाई साहब का उद्बोधन सुना जिसमें उन्होंने बताया कि विमल मिश्रा जी को कैसे बहुत सरल तरीक़े से लोन मिल पाया और आगे चलकर इसी प्रकार से आप सब भी इससे लाभ ले सकेंगे इस विश्वास के साथ मैं समझता हूँ कि प्रधानमंत्री जी आज इस कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। सिर्फ़ एक घोषणा नहीं होगी यह 59 मिनट्स लोन की, और बहुत सारी घोषणाएँ आज माननीय प्रधानमंत्री जी करने जा रहे हैं।
और मुझे पूरा विश्वास है गुजरात में जो बड़े पैमाने पर छोटे लघु उद्योग, मध्यम वर्गीय उद्योग काम करते हैं इन सबको इसका बड़े रूप में लाभ मिलेगा। गुजरात नए स्टार्ट अप्स को भी प्रोत्साहन देता है, स्टैंड अप इंडिया में भी गुजरात का बड़ा योगदान है और इन सब इंडस्ट्रीज़ को प्रमोट करने के लिए यह क्लस्टर कॉन्सेप्ट जिसमें 100अलग-अलग क्लस्टर्स देश में initially identify किए हैं उनको जैसा पहले कुमार जी भी बता रहे थे केंद्र से सहायता देंगे अगर कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाना है, कुछ और चीज़ें करनी हों जिससे आपको अपनी इंडस्ट्रियल एरिया का डेवलपमेंट करना है, रोड्स सुधारनी हैं, बाउंड्री वॉल बनानी है, कॉमन लैबोरेटरी बनानी है, टेस्टिंग फैसिलिटीज बनानी हैं इन सबके लिए हम सुविधाएँ भी उपलब्ध कराएंगे।
कोई छोटा मध्यम वर्गीय ईमानदार व्यापारी या उद्योजक को कभी लोन की कमी नहीं हो यह संकल्प लेकर हम सब बैंकों ने यह योजना तैयार की है। जो-जो लोग ईमानदार व्यवस्था से जुड़ते हैं, अपना GST मैं पूरा टैक्स भरते हैं, GST रिटर्न्स भरते हैं, इनकम टैक्स भरते हैं उससे एक formalize हो रही है इकॉनोमी, ईमानदार व्यवस्था की तरह पूरा देश जा रहा है।
उससे कम ब्याज पर आज आपको साहूकार के पास नहीं जाना पड़ेगा लोन के लिए। आपको सीधा इस वेबसाइट के द्वारा लोन मिल सकेगा और मुझे विश्वास है यह जो करोड़ों की संख्या में लोगों के पास, छोटे उद्योगों के पास जो तकलीफ़ें होती थी लोन की, जो तक़लीफ़ होती थी पैसे की उसको हम आगे चलकर पूरे तरीक़े से resolve कर पाएंगे।
आज मुझे ज़्यादा बोलना नहीं है, मैं तो आप सबके बीच मिलने के लिए आया हूँ। आज हम सभी माननीय प्रधानमंत्री जी को सुनेंगे, उनके उद्बोधन को, उनकी घोषणाओं को, उनके मन में क्या कल्पना है आगे छोटे उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए उसके बारे में आज सुनेंगे।
आज ही हमने देखा GST का सफलता आज एक लाख करोड़ से ज़्यादा जो सितम्बर की सेल्स अक्टूबर में GST पे हुआ उसका फिगर आया है तो जो लगभग कल्पना थी उस कल्पना पर हम पहुँच रहे हैं। तो मुझे पूरा विश्वास है यह जो एक देश में बदलाव आया है, देश की सोच में बदलाव आया है, आज स्वैच्छिकताके साथ लोग ईमानदार व्यवस्था के साथ जुड़ रहे हैं।
GST में इतने सारे बदलाव किए गए जिससे आज GST सरल हो गया है। आपको याद होगा पिछली बार GST Council में टेक्सटाइल की जितनी समस्याएं थीं वह सब शत प्रतिशत resolveकर दी गई, handicrafts की समस्याएं resolve कर दी गई, अलग-अलग प्रकार से जो-जो चीज़ें सामने आती हैं उनको हम resolve करने में प्रयत्नशील है, संकल्पित हैं।
और मुझे पूरा विश्वास है कि जो समर्थन और आशीर्वाद आपका हमें मिला है उस आशीर्वाद को हम पूरे तरीक़े से आपके व्यापार को सरल बनाना, आसान बनाना, सुगम बनाना और आपके व्यापार में हमारी पूरी ज़िम्मेदारी है आपको सहयोग देने की। इस ज़िम्मेदारी को निभाने का काम हम करेंगे यह विश्वास मैं आपको दिलाने के लिए आपके बीच में आया हूँ।
कुछ और अगर कार्यक्रम के बाद प्रश्न हों या कुछ तो मैं थोड़ा समय आपसे बात भी कर सकूंगा। आज के लिए अब माननीय प्रधानमंत्री जी थोड़ी ही देर में स्टेज पर जाएंगे और वहाँ का कार्यक्रम शुरू करेंगे। तो चलिए हम दिल्ली के साथ जुड़ते हैं और दिल्ली से माननीय प्रधानमंत्री जी के उद्बोधन और उनकी घोषणाओं को सुनकर उसमें से अपने आगे के लिए कारोबार को और सफल बनाने का मार्ग बनाते हैं।
आप सब को दीपावली के लिए, आपको आपके परिवारजनों को सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। आगे विश्वकर्मा की भी पूजा है हम सब व्यापार जगत के लोग तो विश्वकर्मा को भी पूजा करते हैं। गुजरात में नए वर्ष की सेलिब्रेशनस होगीं, भाईदूज की सेलिब्रेशनस होगीं। मैं आप सबको बहुत-बहुत त्योहारों के लिए शुभकामनाएं देता हूँ।
धन्यवाद।
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