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Considering that a full-fledged US-China trade war has been one of the key concerns for Indian firms, the rise in new export orders is welcome

Business activity in India’s manufacturing sector increased in November, courtesy a surge in new orders. As a result, the Nikkei India Manufacturing Purchasing Managers’ Index (PMI) rose to an 11-month high of 54 in November from 53.1 in October. A reading above 50 indicates expansion, while one below that threshold points towards a contraction.
As per the survey, new orders expanded at the second-fastest rate in over two years, only slower than that seen in December 2017. Further, the expansion in total new orders was supported by greater sales to international markets. Growth of new export work quickened to the fastest in just under four years, as producers reportedly received bulk orders from clients in key export destinations, said the survey report.
Considering that a full-fledged trade war has been one of the key concerns for Indian companies, the rise in new export orders is welcome. However, the key question is whether this will sustain, given that the US and China have agreed to defer additional tariffs only temporarily.
As for input prices, they moderated in November and increased sales helped companies raise output prices. This is likely to provide some respite to the operating margins of manufacturers, who have been reeling under cost pressures.
Meanwhile, business sentiment among Indian manufacturers improved from October’s 20-month low, with companies forecasting better market conditions in the coming 12 months.
“The relatively weak demand environment seen earlier in the year showed signs of abating, with clients unfazed by another round of increases in output prices and placing more orders regardless. Correspondingly, goods producers rebuilt raw material stocks in order to guard against possible delivery delays and fulfil contracts. Manufacturers further drew down their finished goods stocks to meet demand. This, coupled with improved business sentiment, should ensure that production continues to rise at a robust clip as we head towards 2019,” said Pollyanna De Lima, principal economist at IHS Markit and author of the report.
Source:https://www.livemint.com/Money/Sn499fGtoU5q61xXTgyIyO/India-PMI-Rise-in-new-export-orders-is-welcome-but-sustena.html?utm_source=scroll&utm_medium=referral&utm_campaign=scroll

पहाड़ों की रानी शिमला की सैर अब और भी दिलकश होने जा रही है. कालका से शिमला तक टॉय ट्रेन के जरिए देश-विदेश के सैलानियों को पहले से ही हिमाचल की कुदरती खूबसूरती का दीदार करने का मौका मिलता रहा है.

लेकिन अब टूरिज्म को बढ़ावा देन के लिए रेलवे ने इस रूट पर शीशे की छत वाली कोच उतारने का फैसला किया है. रेलवे की इस नई कोशिश के बाद अब सैलानी कालका-शिमला रूट पर विस्टाडोम कोच में सवार होकर प्राकृतिक सुंदरता को करीब से निहार सकेंगे.

दरअसल अब सैलानी कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर विस्टाडोम यानी पारदर्शी ग्लास टॉप कोच वाली ट्रेन में सफर कर सकेंगे और सिर्फ आजू-बाजू से ही नहीं, बल्कि ऊपर से भी वादी की प्राकृतिक सुंदरता को निहार सकेंगे.

सैलानी कालका-शिमला के बीच शीशे की छत वाली विस्टाडोम कोच में 15 दिसंबर से सफर कर पाएंगे. कालका-शिमला रूट की बड़ी पहचान है कि ये यूनेस्को की चुनिंदा वल्ड हैरिटेज साइट में से एक है.

रेलवे का कहना है कि विस्टाडोम कोच के जुड़ने से इस वादी को नई पहचान मिलने जा रही है. सैलानी इस रूट पर 15 दिसंबर से 15 फरवरी तक विस्टाडोम कोच की सवारी कर पाएंगे.

96 किलोमीटर लंबे इस ट्रैक पर सफर के दौरान सैलानी वादियों के प्राकृतिक सौंदर्य को और नजदीक से देख सकेंगे. विस्टाडोम कोच में पारदर्शी छत और खिड़कियां है.

विस्टाडोम कोच को लोकप्रिय बनाने और सैलानियों को आकर्षित करने के लिए रेलवे ने इस रूट पर हॉप ऑन-हॉप ऑफ सर्विस शुरू करने का भी फैसला लिया है.

इस सुविधा के तहत यात्री कालका से शिमला के बीच किसी भी स्टेशन पर उतरकर कुछ वक्त बिता सकते हैं और फिर दूसरी रेलगाड़ी में चढ़ सकते हैं.

बता दें, कालका-शिमला रूट हमेशा से विदेशी सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है, रेलवे को उम्मीद है कि इस रूट पर विस्टाडोम कोच के चलने से सैलानियों को और आनंद आएगा.

रेलवे की मानें तो विस्टाडोम कोच में कांच के छत होंगे और इनकी दृश्यता (visibility) को नियंत्रित किया जा सकेगा. इस खास ट्रेन से सैलानी बारिश और बर्फबारी का आनंद बेहतरीन तरीके से ले पाएंगे.

विस्टाडोम कोच की डिजाइनिंग बेहतरीन तरीके से की गई है. ट्रेन के अंदर भी शानदार फिनिशिंग है. सीटें गद्देदार है जिससे यात्री आराम महसूस कर सकेंगे.

विस्टाडोम कोच का आनंद लेने के लिए सैलानी देश के किसी भी हिस्से से टिकट की ऑनलाइन बुकिंग कर पाएंगे. हालांकि अभी किराये को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. रेलवे सूत्रों की मानें तो विस्टाडोम कोच में सफर के लिए किराया डीलक्स कोच से कुछ ज्यादा होने की संभावना है.

कालका से शिमला के बीच सफर में 162 सुरंग और 889 पुल आएंगे, जिसमें काफी सुरंगे हेरिटेज सुरंग में शामिल है.

वहीं रेलवे ने कालका-शिमला हैरिटेज ट्रैक पर टॅाय ट्रेन की स्पीड बढ़ाने का भी फैसला किया है. रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इसकी स्पीड 25 किमी से बढ़ाकर 35 किमी प्रति घंटा की जाएगी. पीयूष गोयल की मानें तो टॉय ट्रेन की रफ्तार भविष्य में 50 किमी प्रतिघंटा तक ले जाने की कोशिश रहेगी.

बता दें, पिछले दिनों विस्टाडोम कोच को ट्रेन में जोड़कर शिमला ट्रायल के लिए भेज गया था, ट्रायल सफल होने के बाद अब 15 दिसंबर से सैलानी इसका आनंद ले पाएंगे.

कालका शिमला रूट पर विस्टाडोम के अच्छे रिस्पांस के बाद इसे श्रीनगर समेत दूसरे पर्यटन स्थलों पर चलाया जाएगा. कालका शिमला रूट पर विस्टाडोम कोच चलाने से रेलवे को करीब 350 करोड़ सलाना कमाई की उम्मीद है.

गौरतलब है कि विश्व धरोहर में शामिल ऐतिहासिक कालका-शिमला रेलवे मार्ग पिछले महीने 115 साल का हो गया. 9 नवंबर, 1903 को कालका से शिमला रेलमार्ग की शुरुआत हुई थी. देश-विदेश के सैलानी शिमला आने के लिए इसी रेलमार्ग से टॉय ट्रेन में सफर का आनंद लेते हैं.

कालका-शिमला से पहले विस्टाडोम कोच विशाखापट्टनम-अरकू वैली और महाराष्ट्र में दादर-करमाली के बीच पर्यटक के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. यहां यह ट्रेनें ब्रॉडगेज पर चल रही हैं.
Source:https://aajtak.intoday.in/gallery/indian-railway-to-run-glass-enclosed-vistadome-coach-on-kalka-shimla-route-atam-18-29270.html
आज राजस्थान में बहुत ही महत्वपूर्ण चुनाव के आखिरी दो दिन के प्रचार का समय आ गया है, मेरा सौभाग्य है कि अजमेर में आने का मुझे मौका मिला। शायद राजस्थान का भी ह्रदय है अजमेर और ह्रदय योजना में भी चुना गया है इसके विकास के लिए, विस्तार के लिए। एक प्रकार से धर्म नगरी भी मानी जाती है, ब्रह्मा जी का भी बहुत सुन्दर मंदिर और अजमेर शरीफ का दरगाह, इन दोनों ने अजमेर को शायद पूरे देश और विश्व में प्रसिद्ध किया है।
आज राजस्थान की जनता को तय करना कि एक धीमे-धीमे रेंगती हुई सरकार जो कांग्रेस के समय राजस्थान में चलती थी या एक तेज़ रफ़्तार से चलने वाली भाजपा की सरकार इन दोनों के बीच में चुनाव में जनता को फैसला सुनाना है। मैं देख रहा था किस प्रकार से 2008 से 2013 के बीच राजस्थान में विकास की गति बड़ी धीमी हुई थी, अलग-अलग विभागों के जो आंकड़े देखें तो ध्यान में आता है कि राजस्थान विकास से वंचित हो गया था अशोक गहलोत जी के नेतृत्व में।
मैंने खुद ऊर्जा विभाग संभाला और ऊर्जा विभाग में तो मैं हैरान हो गया कि मात्र पांच वर्ष की अवधि में कांग्रेस की गहलोत सरकार ने सालाना 12 से 15,000 करोड़ रुपये का घाटा करके 70-75,000 करोड़ का ऋण राजस्थान के डिस्कॉम के ऊपर थोप दिया था। वैसे साधारणतः मेरे लिए तो मुश्किल है कल्पना भी करना कि एक प्रदेश और राजस्थान में तो देश की कोई 5% जनसंख्या रहती है, एक प्रदेश कैसे 12-15-16,000 करोड़ रुपये का सालाना घाटा सिर्फ बिजली विभाग में, और यह दर्शाता है किस प्रकार से बड़ी जर्जर सी व्यवस्था कांग्रेस के शासन में चल रही थी।
कई सारी योजनाएं जो वसुंधरा जी ने पहले उनके पहले कार्यकाल में शुरू की थी उन सबके ऊपर भी गति धीमी हो गयी थी और जनता ने सही मायने में उनको नकारकर भाजपा की सरकार को पुनः स्थापित किया। मैं समझता हूँ गत पांच वर्षों में जो तेज़ गति से राजस्थान में विकास हुआ है, खासतौर पर एक रेल मंत्री के नाते मैं कई बार यह ज़िक्र करता हूँ कि जब ट्रेन को हमें लम्बे सफर के लिए तैयार करना होता है और तेज़ गति से चलानी होती है तो हम डबल इंजन लगाते हैं। और मुझे लगता है राजस्थान में केंद्र सरकार प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व वाली और राज्य सरकार वसुंधरा जी के नेतृत्व वाली, इन दोनों ने जो मिलकर गति दी विकास को उससे आज राजस्थान के कोने-कोने में लाभार्थी संतुष्ट हैं और भारतीय जनता पार्टी को पुनः एक बार जिताकर राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाएंगे।
मैं कुछ आंकड़े देख रहा था कि कैसे कांग्रेस के समय 13वीं वित्त आयोग ने 1,09,000 करोड़ रुपये दिए थे। भारतीय जनता पार्टी की सरकार 2014 में आयी और जो 14वीं वित्त आयोग का आवंटन हुआ राजस्थान के लिए वह लगभग ढाई गुना कर दिया – 2,63,000 करोड़ रुपये। पिछले पांच साल में जो विकास के ऊपर निवेश हुआ है राजस्थान में वह भी डेढ़ लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग सवा चार लाख करोड़ गत पांच वर्षों में ढाई गुना हो गया है – अलग-अलग क्षेत्र में चाहे सड़क हो, पेयजल हो, सिंचाई हो, आवास योजना हो, स्वास्थ्य सेवाएं हो, हर एक में राजस्थान ने ऐतिहासिक प्रगति की है, भामाशाह योजना अकेले में 6 करोड़ लाभार्थी हैं आज राजस्थान में।
विद्युतीकरण के क्षेत्र में तो लाजवाब काम हुआ है राजस्थान में, जो घाटा 15,000 करोड़ रुपये का विरासत में मिला था सालाना वह आज एक चौथाई रह गया है। और मैं वसुंधरा जी का उनको बधाई भी दूंगा और धन्यवाद भी करूँगा एक प्रकार से एक नागरिक के नाते कि उन्होंने राजस्थान को बिजली के क्षेत्र में जो काम किया जिस प्रकार से हर गांव, हर घर तक बिजली पहुंचाई, जिस प्रकार से चौबीस घंटे सभी को बिजली मिले, किसानों को पर्याप्त बिजली मिले उसको सुनिश्चित किया, जिस प्रकार से नवीकरणीय ऊर्जा, रिन्यूएबल एनर्जी को बल दिया यह अपने आपमें एक देश के लिए मिसाल बना।
509 गावों में जहाँ बिजली नहीं थी और 10,515 मजले, ढाणी, टोले जहाँ बिजली पहुंची नहीं थी उन सभी तक बिजली पहुंचाई और सौभाग्य योजना के तहत लगभग सवा चौदह लाख घरों तक मुफ्त में बिजली का कनेक्शन पहुंचाकर मैं समझता हूँ प्रदेश के हर घर तक बिजली पहुंचाने का जो लक्ष्य वसुंधरा जी ने लिया है इसमें वह बड़ी मात्रा में सफल हुई हैं।
लगभग 1600 गावों और 4142 ढाणी और मजले तक पहली बार सड़कों से जोड़ा गया, पेयजल से वंचित 9900 गावों को पहली बार पेयजल पहुंचाया गया। उज्ज्वला योजना में हमारी माता-बहनों को जिस प्रकार से परेशानी होती थी घर में चूल्हा जलाने में, लकड़ी, कोयला इस्तेमाल करके जो उनके स्वास्थ्य, उनके परिवार के स्वास्थ्य के ऊपर ख़राब परिणाम होता था उससे बचाने के लिए केंद्र की उज्ज्वला योजना के तहत 37 लाख से अधिक माता बहनों को, गरीबों के घर को मुफ्त में एलपीजी सिलिंडर कनेक्शन दिया गया, मुद्रा योजना के तहत 47 लाख लाभार्थियों को अलग-अलग प्रकार के लोन दिए गए जिससे वह स्वावलंबी बन सकें, अपने पाँव पर खड़े हो सकें, स्वयं रोज़गार के साधन बनें, रोज़गार ढूंढने के बदले रोज़गार के अपने आपमें मौके नए बनाएं।
इसी प्रकार से लगभग ढाई करोड़ जन धन बैंक अकाउंट राजस्थान में खोले गए और 1 करोड़ 70 लाख रुपे कार्ड जिससे डिजिटल कनेक्टिविटी से भी राजस्थान के लोगों को लाभ मिला है। फसल बीमा योजना में जो हमारे किसान भाई बहन हैं ऐसे 43 लाख किसानों को फसल बीमा योजना से जोड़ा गया और लगभग 1 करोड़ 20 लाख किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड देकर आगे के लिए सुनिश्चित किया कि वह अच्छी तरीके से अपना उत्पादन बढ़ाएं, किस प्रकार से उनके खेत से आमदनी बढ़ सकती है।
बीमा योजना इंश्योरेंस और पेंशन स्कीम्स में लगभग 63 लाख लोगों को जोड़ा गया है और सबसे मैं समझता हूँ खासतौर पर महिलाओं बहनों के लिए और सभी नागरिकों के स्वाभिमान के लिए अगर किसी योजना ने बड़ा योगदान दिया है तो वह स्वच्छता अभियान के तहत जो बड़े रूप में शौचालय बनाये गए जिससे सैनिटेशन कवरेज 40% से बढ़कर 95% आज घरों में शौचालय बनाने का काम केंद्र और राज्य सरकार ने इस डबल इंजन के तहत बड़ी तेज़ गति से किया।
राजस्थान गौरव संकल्प में बहुत सारी नयी योजनाओं का ज़िक्र है, बहुत सारे नए कार्यक्रम प्रदेश के समक्ष रखे गए हैं, मैं समझता हूँ कि भारतीय जनता पार्टी ने जो विकास की राजनीति की है और जिस प्रकार से तेज़ गति से राजस्थान के हर घर को, हर नागरिक भाई बहन को विकास से लाभान्वित किया है इसका परिणाम इस चुनाव में ज़रूर देखने को मिलेगा। जिस प्रकार से तेज़ गति से रेलवे में, एयरपोर्ट और हवाई सेवाओं में, रोड की नेटवर्क में, जिस प्रकार से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का तेज़ गति से काम हो रहा है, अलग-अलग इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट से राजस्थान में विकास की गति बढ़ी है, आर्थिक क्षेत्र में काले धन के ऊपर लड़ाई और आगे चलकर एक ईमानदार देश की छवि विश्वभर में भारत की बने जिससे निवेश आये, जिससे बड़े रूप में युवा पीढ़ी को नयी ईमानदार व्यवस्था से काम करने में लाभ हो, कैसे स्वास्थ्य की सेवाएं घर-घर तक पहुंचे।
राजस्थान की वास्तव में भामाशाह योजना अपने आपमें एक मिसाल है जिसे अब हम पूरे देश में आयुष्मान भारत के नाम से प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत देश में 50 करोड़ लोगों तक मुफ्त में स्वास्थ्य की सेवाएं मिलें यह सुनिश्चित किया है माननीय प्रधानमंत्री जी ने।
इन सबके सामने कांग्रेस की जो बटवारे की राजनीति है, जो जातिवाद की राजनीति है, जो वंशवाद की राजनीति, जो टूट, फूट और झूट की राजनीति है मैं समझता हूँ वह राजस्थान के लोगों के सामने टिक नहीं पायेगी, राजस्थान की जनता विकास चाहती है, राजस्थान की जनता आपस में अच्छे तालमेल से रहना चाहती है। अजमेर तो अपने आपमें विश्व में प्रसिद्ध है यहाँ दरगाह भी अजमेर शरीफ जी का पूरे देश और दुनिया से लोग आते हैं। और इसी प्रकार से मंदिर भी, चाहे वह जैन मंदिर हो चाहे वह ब्रह्मा जी का मंदिर हो इन सबमें एक मिसाल है आपसी तालमेल, सुख-शांति में जीवन बिताने का।
मैं समझता हूँ जिस प्रकार से कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता चाहे कोई नेता प्रधानमंत्री मोदी जी के ऊपर टिप्पणी करके पूछे कि अरे उनके पिता का नाम भी नहीं मालूम है और चाहे कोई नेता कहे कि किसी भी तरीके से चाहे किसी का सिर फोड़ना पड़े जो हथकंडे अपनाने पड़ें पर चुनाव जीतना है इस प्रकार के कांग्रेस के प्रत्याशियों का बयान या दूसरा प्रत्याशी भारत माँ के घोष को भी रोककर एक परिवार के घोष को आगे बढ़ाये।
यहाँ अभी-अभी खबर आयी है कि तेलंगाना में एक विशेष समुदाय के लिए एक अलग मैनिफेस्टो घोषणा पत्र बन रहा है, इस सब प्रकार की मैं समझता हूँ जो बहुत ही निचली स्तर की राजनीति कांग्रेस कर रही है, जिस प्रकार से जातिवाद एक मुख्यमंत्री का प्रत्याशी फैलाने की कोशिश कर रहा है और यह पूछता है कि क्या अधिकार है, साध्वी उमा भारती या साध्वी ऋतम्भरा देवी जी का कि वह हिंदुत्व के ऊपर बात करें, हिन्दू धर्म की बात करें और एक प्रकार से माननीय प्रधानमंत्री की जाति के ऊपर भी टिप्पणी करते हैं, मैं समझता हूँ ऐसी पार्टी जिसका न नेता तय है, न नियत साफ़ है न कोई नेतृत्व भारत माँ के प्रति संकल्पित है इस पार्टी को हराने की ज़िम्मेदारी आज राजस्थान के हर नागरिक ने अपने कंधे पर उठाई है और फिर एक बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार, प्रधानमंत्री मोदी जी की केंद्र की सरकार को और बल देने के लिए वसुंधरा राजे जी के नेतृत्व में राजस्थान में फिर एक बार राजस्थान की जनता स्थापित करेगी, भारी बहुमत के साथ स्थापित करेगी और प्रदेश के जो तेज़ गति के विकास के काम चल रहे हैं, जिस प्रकार से प्रदेश में सुख-शांति रही है उसको आशीर्वाद देगी यह मेरा पूरा-पूरा विश्वास है।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
प्रश्न-उत्तर
प्रश्न: पीयूष जी, मैं अभिजीत न्यूज़-18 से, प्रदेश में आचार संहिता लगने से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी ने 180 का टारगेट दिया था, क्या आप बता सकते हैं बीजेपी कितनी सीटें जीतेगी प्रदेश में?
उत्तर: देखिये अगर मैं एस्ट्रोलॉजर होता तो ज़रूर बता देता पर मेरा पूरा विश्वास है कि भारतीय जनता पार्टी पूरी 200 की 200 सीटों पर बहुत अच्छी लड़ाई लड़ रही है और दो-तिहाई बहुमत से ज़्यादा से जीतकर फिर एक बार इतिहास रचाएगी राजस्थान में।
प्रश्न: पीयूष जी नमस्कार, मैं दैनिक भास्कर से विनेश, सर आप रेल मंत्री हैं पिछले बजट के अंदर अजमेर रेल मंडल में अजमेर से कोटा, अजमेर से सवाई माधोपुर से चार शहरों को जोड़ने के लिए रेल लाइनों का स्वीकृत किया था आप लोगों ने, उसमें एक-एक करोड़ का बजट दिया है सर, एक करोड़ में तो लाइनें बिछती नहीं, क्या आप लोक सभा चुनाव का इन्तिज़ार कर रहे थे इसके लिए सर?
उत्तर: भाई साहब ऐसा है कि मैं आपको थोड़ा बजट कैसे बनता है उसकी जानकारी दे दूँ। बजट में एक लाइन आइटम क्रिएट किया जाता है जब कोई नए प्रोजेक्ट की स्वीकृति होती है और वह लाइन आइटम क्रिएट करके फिर उसकी सर्वे होती है और आगे चलकर जैसे-जैसे उसका बजट बनता है, टेंडरिंग होती है तो पैसे निर्धारित किये जाते हैं और अलॉट किये जाते हैं। जो एक करोड़ फिगर है वह एक नोशनल या नॉमिनल फितूर होता है जो कोई भी अर्थशास्त्री जो बजट को पढ़ता है वह अच्छी तरीके से समझ सकता है। आपके भी न्यूज़पेपर के जो इकोनॉमिक जर्नलिस्ट हैं वह आपको इस बात की पुष्टि कर देंगे।
प्रश्न: सर आपको इसमें एक जानकारी दे दूँ उसमें सिर्फ दो…… वह तो कम से कम पांच साल पहले से स्वीकृत थे केंद्र सरकार आ गयी थी सर ……?
उत्तर: ऐसा है कि जब हमारी सरकार 2014 में आयी तो ऐसे सैंकड़ों प्रोजेक्ट देश में अन्नौंस किये गए थे जिनके ऊपर कोई भी प्रकार का काम नहीं हुआ था। ऐसे आप सब जानते हैं कि रेलवे का बजट पहले राजनीति से प्रेरित रहता था आर्थिक उसमें सूझबूझ की कोई गुंजाइश नहीं रहती थी। तो हर एक रेल मंत्री कई सारे प्रोजेक्ट अन्नौंस करते थे लेकिन उसपर काम बहुत कम कर पाते थे। प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार आने के बाद जो निवेश रेलवे पर हो रहा है वह लगभग ढाई गुना हो गया है। अगर आंकड़े में आपको इंटरेस्ट है तो जब कांग्रेस की सरकार थी 2009 से ’14 के बीच उस दौरान जो केंद्र में पैसे दिए जाते थे रेलवे के लिए वह लगभग सवा दो से ढाई लाख करोड़ रुपये पांच वर्ष में दिए गए और मोदी जी की सरकार ने लगभग साढ़े पांच लाख करोड़ रुपये रेलवे में निवेश के लिए 2014 से 2019 के बीच में लगाए अथवा अगले तीन-चार महीने में लग जायेंगे।
अगर हम राजस्थान की बात देखें तो 2009 से 2014 के बीच कांग्रेस की सरकार थी केंद्र में और कांग्रेस की सरकार थी अधिकांश समय के लिए राजस्थान में 2013 नवंबर-दिसंबर तक। इतने लम्बे समय दोनों कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद अगर आप पांच वर्षों का निवेश देखें राजस्थान में तो मात्र 3500 करोड़ रुपये था और मोदी जी की सरकार और वसुंधरा जी की सरकार जब आयी तो वह निवेश बढ़कर लगभग 15000 करोड़ रुपये हो गया 2014 से 2019 के बीच, यानी चार गुना हो गया।
यह है तेज़ गति विकास की जो मोदी जी और वसुंधरा जी ने राजस्थान को दी है, मैं समझता हूँ पहले सिर्फ घोषणाएं होती थी अब वास्तव में काम होता है लेकिन रिक्वायरमेंट्स या काम बहुत सारे होने के कारण अलग-अलग जगह पर काम अब शुरू हो रहा है। कई जगह पर जो काम आधा अधूरा था उसको तेज़ गति मिल रही है, मैं एक-दो उदाहरण आपको दे सकता हूँ – अजमेर से बांगड़ ग्राम जो लाइन बननी थी उसका 2015 के पहले कुछ काम नहीं हुआ था। हमारे आने के बाद हमने उसको गति दी और आज लगभग 52% काम ख़त्म हो गया है, 23 किलोमीटर पर काम तेज़ गति से चल रहा है और फरवरी 2019 तक यह दौराई मांगलियावास, यह इलाके का काम पूरा हो जायेगा।
इसी प्रकार से बांगड़ ग्राम-गुड़िया के बीच 2012-13 में स्वीकृति दी थी पर 2015 तक कुछ काम नहीं किया था कुछ निवेश नहीं दिया था। हमारी सरकार ने 2015 के बाद इस काम को हाथ में लिया, 50% काम पूरा हो गया है, फरवरी तक बांगड़ ग्राम से सेंदरा तक का काम पूरा हो जायेगा। इसी प्रकार से जो गुड़िया-मारवाड़ जंक्शन है 2011-12 में शुरू हुआ था उसका 60% काम 45 किलोमीटर का तेज़ गति से चल रहा है और 60% काम ख़त्म हो गया है। मारवाड़ जंक्शन से रानी यह भी 2012-13 में स्वीकृत हुआ था, 2015 तक कुछ काम नहीं हुआ, हमने उसको तेज़ गति दी 95% काम ख़त्म कर दिया है, 24 किलोमीटर पर काम चल रहा है। बिनवलिया-रानी, यह काम फरवरी तक पूरा हो जायेगा। केशव गंज-स्वरूपगंज, यह जो काम है यह 2010-11 में शुरू हुआ था अब वह पूरा हो गया है, शत प्रतिशत पूरा हो गया है।
और मैं यह और सुनाते जा सकता हूँ आपको चाहिए तो, पूरे आंकड़े लेकर आया हूँ। लेकिन यह आपको विश्वास दिलाता हूँ कि राजस्थान में जो चार गुना निवेश हुआ है हमारी सरकार के दौरान गत चार वर्षों में इसी की वजह से इतनी तेज़ गति से काम बढ़ा है। राष्ट्रीय रेल विकास निगम लिमिटेड के भी कई सारे प्रोजेक्ट – रानी-केशव गंज, सरूपगंज-आबू रोड, आबू रोड-सरोत्रा रोड, सरोत्रा रोड-कारजोड़ा, कारजोड़ा-पालमपुर, यह सब 2010 और 2012 के बीच के प्रोजेक्ट्स लगभग 75% से अधिक अब ख़त्म हैं। इसमें रानी से केशव गंज तो शत प्रतिशत ख़त्म हो गए हैं।
तो इस प्रकार से काम में गति लाने का जो सिलसिला यह डबल इंजन ने किया है मोदी जी और वसुंधरा जी की जोड़ी ने यह आगे चलकर और तेज़ गति पाए इसलिए हमने राजस्थान की जनता से फिर एक बार राजस्थान में हमारी सरकार चुनने का अनुरोध किया।
प्रश्न: गोयल साहब नमस्कार, मेरा सवाल है सर जो प्रदेश के 460 ex apprentices को बेरहमी से निकाला गया, आज उनके परिवार, मतलब भूखे मरने की नौबत है उन लोगों की, तो क्या रेलवे सुप्रीम कोर्ट में ऐसा कोई …. का तैयार है कि उन 460 परिवारों को कुछ सहूलियत हो?
उत्तर: भाई साहब, आपकी जानकारी पूरी तरीके से गलत है सबसे पहले तो मैं वह स्पष्ट कर दूँ। अपरेंटिस जब किसी व्यक्ति को लिया जाता है, रेलवे में हो या कोई और भी कारखाने में हो, कोई और उद्योग में हो, वह स्पष्ट होता है कि यह ट्रेनिंग का प्रोग्राम है, अपरेंटिस का काम है और ट्रेनिंग के बाद नौकरी सुनिश्चित नहीं की जा सकती है कानून के तहत। सुप्रीम कोर्ट का एक स्पष्ट निर्देश है कि अगर अपरेंटिस को हम सीधा भर्ती देते हैं तो वह गैरकानूनी है और उन सबको नौकरी से बाहर करना यह सुप्रीम कोर्ट का निर्णय है, कोई रेलवे का निर्णय नहीं है।
जब उनको अप्पोइंट किया गया तो वह ab initio, शुरुआत से ही वह illegal था, वह गैरकानूनी था। इसमें सरकार की या रेलवे की कोई भूमिका नहीं है, यह न्यायाधीश का फैसला है और मैं समझता हूँ हम सब पत्रकार बंधु हों या राजनीतिज्ञ हों हम न्यायाधीश को इज़्ज़त करते हैं, उसके कानून के फैसले को हमें पालन करना पड़ता है।
लेकिन जितने अपरेंटिस सीखते हैं रेलवे में उनके प्रति इस सरकार की संवेदना होने के कारण जो नयी भर्ती अभी चालू है, लगभग 1,30,000 लोगों की नयी भर्ती चालू है उसमें अपरेंटिस किये हुए लोगों के लिए एक स्पेशल रिजर्वेशन रखा है, एक कोटा रखा गया है जिसमें उनको लगभग जो भी उनमें से व्यक्ति अच्छा काम किया है, अच्छे काम कर सकते हैं और एग्जाम में अच्छे अंश लेकर आएंगे लगभग साधारणतः तीन में से दो लोगों को और शायद उससे भी अधिक उनको नौकरी मिलने का प्रावधान रखा गया है रिजर्वेशन के द्वारा और जिनको उस रिजर्वेशन में नहीं मिलेगी वह रेगुलर कोटा में उनको फिर शिफ्ट कर दिया जायेगा उसमें भी उनको नौकरी मिलने की पॉसिबिलिटी है। तो इस सरकार ने अपरेंटिस के लिए जितना किया है पहले कभी नहीं किया गया।
प्रश्न: रेलवे में और भी बैक डोर एंट्री है जो आप लोग लगातार दे रहे हैं….. ?
उत्तर: यह व्यवस्था को पूरी तरीके से बंद करने का मैंने आदेश दिया है और जितने यह बैक डोर एंट्रीज हैं रेलवे में इस सबको बंद करने का निर्णय इस सरकार ने लिया है क्योंकि यह गैरकानूनी मानी जाती है और सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि हर नयी भर्ती के लिए सबको सामान्य अवसर मिलना चाहिए।
प्रश्न: सर 2016 के बाद में भी रेलवे में अपरेंटिस रेगुलर हुए हैं और जिनको बाहर निकाला गया है उन्होंने….. सब सेवाएं दी हैं रेलवे ने?
उत्तर: वह मेरे हाथ में नहीं है, कानूनी फैसला है।
प्रश्न: हम आपसे सिर्फ इतना कह रहे हैं कि आप इसको वापिस क्यों रिव्यू में जा रहे हैं?
उत्तर: रिव्यू सुप्रीम कोर्ट ने कोई स्कोप ही नहीं रखा है और मेरे ख्याल से जो अभी हमने किया है रिजर्वेशन उस माध्यम से कानून के दायरे के अंदर हमने अपरेंटिस के लिए एक अच्छा भविष्य बनाने को सुनिश्चित किया है।
प्रश्न: गोयल साहब मैं पंजाब केसरी से, मेरा सवाल आपसे है कि पिछले 11 साल के समय में अजमेर में बहुत विकास को गति मिली उसमें सेकंड एंट्री गेट का काम, रेलवे म्यूजियम ……. स्टेशन के काम शुरू होना, कई दूसरे ऐसे काम थे जो एक अच्छी गति से शुरू हुए थे … वह काम सब ऑलमोस्ट बंद से हो गए हैं या धीमे पड़ गए हैं इसके बारे में आप क्या कहेंगे?
उत्तर: अगर कोई रेल म्यूजियम में तो कोई पीछे नहीं पड़े हैं और मेरे हिसाब से रेल म्यूजियम तो शुरू भी हो गया है। अभी शुरू नहीं हुआ है तो मैं अभी आचार संहिता के बाद चेक करवा लूंगा लेकिन जहाँ तक मेरी जानकारी है मेरे हिसाब से रेल म्यूजियम का काम….
प्रश्न: अभी ऐसी हालत ख़राब है पिछले दिनों पंजाब केसरी में एक आर्टिकल छपा था जिसमें उसकी दुर्दशा के बारे में काफी कुछ लिखा गया है। मेरे कहने का मतलब है कि जहाँ सॅटॅलाइट स्टेशन दो मदार और दौराई स्टेशंस आप लोगों ने चालू किये हैं वहां अभी भी पूरे काम ढंग से नहीं हो रहे हैं जो विकास की गति को आपको धीमा कर रहे हैं ?
उत्तर: चेक कर लेंगे उसको पर वैसे मैं देख रहा था कि आज लगभग 3000 करोड़ रुपये के काम अजमेर एरिया में चल रहे हैं। अजमेर से सरोत्रा का सेक्शन, 330 किलोमीटर का लगभग 2171 करोड़ की लागत से डबलिंग हो रहा है, इलेक्ट्रिफिकेशन हो रहा है मदार से पालमपुर का 76 किलोमीटर का, अजमेर से उदयपुर का 68 किलोमीटर का, इन दोनों को मिलाएं तो 700 से अधिक करोड़ रुपये की लागत है, 14 एस्केलेटर लग रहे हैं। साथ ही साथ वाई-फाई दिया गया है यहाँ पर, एस्केलेटर और लिफ्ट दिए गए हैं, सीसीटीवी कैमरा लगाए गए हैं, पांच नयी ट्रेनों को शुरू किया गया है, चार ट्रेनों को एक्सटेंड किया गया है मदार दौराई तक, कई काम ख़त्म हो गए हैं इलेक्ट्रिफिकेशन अजमेर से देर का ख़त्म हो गया है, रोड ओवरब्रिज बन गया है अजमेर चित्तौड़गढ़ सेक्शन में और मदार-पालमपुर सेक्शन में। अलग-अलग काम, 16 रोड ओवरब्रिज बने हैं।
तो रेलवे में जितना काम इस पांच वर्ष में हुआ है, आप सब यहाँ पर पुराने निवासी हैं आप याद करके बता दीजिये कोई और पांच वर्ष क्या कोई दशक में इतना काम हुआ।
प्रश्न: सर सारी बातें जो हुई यह तो आंकड़ों के अंदर था लेकिन हालात जो अजमेर रेलवे की की बात करें तो जनता को देने की सौगात की बात नहीं है, वह पुष्कर मेला तो अभी तक नहीं जोड़ा गया, रेलवे अस्पताल के हालात ख़राब हैं ?
उत्तर: यह चेक करना पड़ेगा, अब इतने सारे काम हुए हैं अब एक काम और जोड़ देंगे उसमें कोई बड़ी बात नहीं है।
प्रश्न: मंत्री जी, छोटी सी चीज़, आपने कहा विकास बहुत हो गया, रेलवे….. ?
उत्तर: कभी भी विकास ख़त्म नहीं होता, विकास बहुत हुआ, आगे इससे भी ज़्यादा करना है।
प्रश्न: रेलवे अस्पताल में हालात ख़राब हैं, यहाँ पर …. नहीं है यहाँ जो……. ?
उत्तर: मैं रेल अस्पताल की जानकारी निकाल लूंगा लेकिन एक समस्या जो हर एक अस्पताल में आती है वह है डॉक्टरों की, और आज कल डॉक्टरों की भर्ती भी चालू है और वास्तव में हम तो अभी वॉक-इन इंटरव्यू करके भर्ती कर रहे हैं क्योंकि डॉक्टरों की कमी देश भर में महसूस हो रही है।
प्रश्न: गोयल साहब आपने आज जानकारी ली होगी, आज एक प्रवक्ता ने आप पर आरोप लगाया क्रोनी कैपिटलिज्म का ?
उत्तर: मुझे मालूम नहीं मैं तो अभी आ रहा हूँ वहां से पर उनके आरोप बेबुनियाद होते हैं, पुराने आरोप को बार-बार उठाते रहते हैं जिसका पूरा खुलासा हो चुका है और मैं समझता हूँ आज वह बिना कोई मुद्दे के चुनाव लड़ रहे हैं इसलिए पुरानी बातों को झूट फरेब को बार-बार सुनाने के अलावा कांग्रेस प्रवक्ता या कांग्रेस नेतृत्व के पास कोई मुद्दा नहीं है।
प्रश्न: पीयूष जी, अजमेर रेल मंडल के चार सेकंड एंट्री गेट करीब 8 महीने एक साथ लेट चल रहे हैं, आप कह रहे हैं विकास की रफ़्तार है इस बारे में आप क्या कहेंगे सर?
उत्तर: मुझे चार एंट्री गेट की तो जानकारी नहीं है, पर मेरे हिसाब से थर्ड एंट्री गेट का काम अभी ख़त्म होने जा रहा है, दो एंट्री गेट आलरेडी तैयार हैं, थर्ड का काम अभी ख़त्म होने जा रहा है।
प्रश्न: सर अजमेर, भीलवाड़ा, आबू रोड और एक स्टेशन और है, न सेकंड एंट्री गेट 8 महीने लेट चल रहा है सर?
उत्तर: रेलवे की मुझे लगता है चुनाव के बाद आकर एक अलग से अधिकारियों के साथ बैठकर आपके साथ रेलवे की चर्चा कर लेंगे।
प्रश्न: सर एक सवाल मेरा है, एक दौराई रेलवे स्टेशन 220 करोड़ रुपये आपने खर्च किये, लेकिन वह फाटक वहां हमेशा बंद रहता है?
उत्तर: चेक कर लेंगे, मुझे अभी रेलवे की जानकारी नहीं है, इसकी प्रेस अलग कर लेंगे।
बहुत-बहुत धन्यवाद।

आज तो वास्तव में एक टूरिस्ट गाइड की तरह हेलीकॉप्टर से हम आए हैं| पूरी जर्नी एक टूरिस्ट गाइड की तरह शिमला से शुरू करके मुझे पहले कोल डैम दिखाया जो मैं कई वर्षों पहले आया था, दो-तीन वर्ष पहले आया था देखने, जा नहीं पाया था कुछ कारणों सेजब मैं बिजली मंत्री था, आज वह भी उन्होंने दिखाया| और फिर पूरी लाइन शुरू से यहाँ तक, पूरी लाइन के ऊपर हेलीकॉप्टर से मुझे देखने का अवसर मिला| और वास्तव में इतना सुन्दर प्रदेश मैं समझता हूँ विशव में इतना सुन्दर प्रदेश शायद नहीं हो कोई – हिमाचल है|
और यहाँ पर जितनी हम सुविधाएँ बड़ा पाएँगे उतना ज़्यादा पर्यटन को भी बल मिलेगा, तेज़ गति मिलेगी| हिमाचली भाई-बहनों को यातायात करने में सुविधा होगी| उससे प्रदूषण भी कम होगा क्योंकि गाड़ियाँ जितनी ज़्यादा चलती हैं उसके निस्बत रेलवे में सफर करने से शायद 7-8 प्रतिशत ही प्रदूषण रह जाता है| प्रति व्यक्ति किलोमीटर अगर देखें तो गाड़ी से चलने के निस्बत जब व्यक्ति रेलवे से जाता है तो 1/13 सिर्फ प्रदूषण रह जाता है –7 प्रतिशत प्रदूषण रह जाता है|
भारतीय जनता पार्टी की जयराम ठाकुर जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार दोनों डबल इंजन का काम करेंगी और डबल इंजन के रहते प्रदेश में तेज़ विकास होगा तो रेलवे में भी वैसा ही विकास होना चाहिए और दिखना चाहिए|
कई सारी चीज़ें मैंने जून में जब मैं आया था तब शुरू की थी और उसका अब आउटकम जल्द ही आप सबको देखने को मिलेंगे| वहाँ की भी स्पीड को हम बढ़ा रहे हैं| उसके ट्रायल्स 4 दिसंबर को होने वाले हैं| जो oscillation trials जिससे वहां की स्पीड बढ़सके| कम समय में यात्री कालका से शिमला पहुंच सकें और उस पूरे जर्नी के लिए बहुत सारे निर्णय लिए हैं जो मेरे साथ हैं| और उन सब निर्णयों का हम अब मॉनिटरिंग भी कर रहे हैं और बहुत सारी चीज़ों में आपको वहां की जर्नी में, वहाँ की यात्रा में अब बदलाव नज़र आएगा|
उस जून के बाद अब दिसंबर में माननीय जयराम जी के आग्रह पर मुझे पठानकोट से जोगिंदरनगर लाइन के बारे में आज जानकारियां लेने का अवसर मिला| मुझे भी हैरानी हुई कि नौ घंटे लगते हैं इस ट्रेन को पूरे 164 किलोमीटर का सफर करने के लिए| एक प्रकार से यह सफर तो suffering है| तो मैंने आज निर्देश दिया है कि अगले 100 दिन के अंदर हम यहाँ पर नये रूप से oscillation trials करें|
नये रूप से पूरी निरीक्षण करें, drone से हम पूरा survey करेंगे, पूरी 164 किलोमीटर के रूट का| DRM और अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि 100 दिन के अंदर यह देखें कैसे इस सफर को हम 6 घंटे के अंदर कर सकें| तो लगभग 33 प्रतिशत समय कम लगे इस पूरी जर्नी को इसका मैंने आग्रह किया है| और 100 दिन का समय दिया है मेरे अधिकारियों को कि इसको पूरे को स्टडी करें| उसमें क्या सुधार करने की आवश्यकता है| कुछ-कुछ ईलाके हैं जहाँ पर speed restriction लगानी पड़ेगी लेकिन उसकी वजह से पूरे रूट पर ट्रेन को बहुत धीमी जाने की आवश्यकता नहीं है|
इसी के साथ-साथ मैंने अभी-अभी फ़ोन पर आदेश दिया है रेलवे बोर्ड को कि तुरंत नयी रेलगाड़ियां इस रूट के लिए बनाई जाएं| उसका वह डिज़ाइन क्या सुधार कर सकते हैं जिससे यात्रियों को भी सुविधा अच्छी मिले और ट्रेन भी फास्टर चल सके| उसपर आज ही वह लोग बैठने वाले हैं दोपहर को| उनको कहा है आज ही दोपहर से बैठकर चर्चा शुरू करो, video-conferencing पर RDSO फैक्ट्री के साथ कि कितने समय में, कम से कम समय में, नयी रेल गाड़ियां यहाँ बना सकें हम| और उसमें से कुछ Vistadome|
Vistadomeवह गाड़ियां हैं जिसमें साइड में बड़ी-बड़ी खिड़कियां, ऊपर कांच रहेगा| जैसे आप विदेश जाते हैं तो mountain railways में चारों तरफ आप देख सकते हैंऊपर की धौलाधार आपकी माउंटेन रेंज भी देख सकें| तो पर्यटकों के लिए आकर्षित करने वाली कुछ गाड़ियां Vistadometype की भी बनाई जाएँगी| उसको समय ज़्यादा लगता है|
तो यहाँ पर नये coaches और नये Vistadome type coaches भी यहाँ पर आएं, लेटेस्ट डिज़ाइन वाले| बहुत aesthetic सुन्दर उसका लुक होना चाहिए| यात्रियों को उसमें सुविधा रहनी चाहिए सफर करते हुए| साथ ही साथ जो रेल पटरी है, मुझे दुख से कहना पड़ता है कि कई वर्षों से जो narrow gauge की पटरी होती है यह भारतीय रेल ने प्रोक्योर ही नहीं की है, खरीदी ही नहीं है| जहाँ-जहाँ नैरो रेल बंद करते हैं उसकी पटरी आकर रिप्लेसमेंट होती है| पर अब हमने तय किया है कि अब हम खरीदेंगे नयी रेल जिससे सुरक्षा भी बढ़ेगी रेलगाड़ियों की| सुरक्षा बढ़ेगी तो गति भी बढ़पाएगी और यात्रियों के लिए भी सुरक्षा में ट्रेवल करने का सुनिश्चित हो पाएगा| तो हम जहाँ-जहाँ पर रेल पटरी ख़राब हुई है उसको नयी रेल से भी replace करने का प्रोग्राम बनाएंगे|
उसके लिए वह रेल का डिज़ाइन अलग होता है तो procurement में थोड़ा समय लगेगा| Steel Authority वगैरा से बात करके वह डिज़ाइन की रेल बहुत सालों से खरीदी नहीं है, तो बनवानी पड़ेगी| उसका भी निर्णय मैंने लिया है|
साथ ही साथ एक निर्णय जिससे मुझे लगता है आप सबको भी आनंद आएगा कि जो 17 स्टेशन हैं इस रूट में| प्रमुख 17 स्टेशन हैं, 17 हाल्ट स्टेशन हैं| इन 17 प्रमुख स्टेशन में फेज बाई फेज और जितने अधिक से अधिक हो सकते हैं हम अगले 6 महीने के अंदर उसमें वाई-फाई की फैसिलिटी, मुफ्त वाई-फाई की फैसिलिटी शुरू करेंगे|
शुरुआत में पहले 6-8 महीने के लिए पूरी तरीके से मुफ्त होगी, उसके बाद चलकर अगर कुछ रहेगा तो जो नॉमिनल कॉस्ट होगा वह चार्ज होगा| लेकिन अधिकांश मेरी इच्छा है कि वह मुफ्त फैसिलिटी यात्रियों को मिले| और उससे आस-पास के गांव के भी जो लोग हैं उनको भी रेलवे स्टेशन आकर यह वाई-फाई का स्वाद मिले| और मुझे आपको बताते हुए ख़ुशी होती है कि जो रेलवे की वाई-फाई फैसिलिटी है वह देश में सबसे तेज़ वाई-फाई है| उतनी तेज़ वाई-फाई देश में और किसी के पास नहीं है| वाई-फाई फैसिलिटी पूरे देश में दे चुकी है रेलवे| आगे चलकर उसकी गति बढ़ा रहे हैं कि देश भर में और स्टेशनों पर आए| और खासतौर पर यह जो शिमला के स्टेशन हैं और जो जोगिंदरनगर के हैं इसपर दोनों में हम यह वाई-फाई की फैसिलिटी भी देने जा रहे हैं|
मेरा मानना है टूरिज्म, पर्यटन के लिए भी इसका लाभ होगा| उससे नये कारखाने आएं, नया व्यापार आए, नया उद्योग आए इस इलाके में तो नये रोज़गार के अवसर भी मिलेंगे| पर्यटन में रोज़गार के अवसर बहुत होते हैं| एक-एक व्यक्ति जब पर्यटन के लिए यहाँ पर आता है पर्यटक, तो हर व्यक्ति के पीछे रोज़गार के अवसर बढ़ते हैं,ढाबे आते हैं, होटल आते हैं, टैक्सियाँ चलती हैं, टूरिस्ट गाइड होते हैं, ट्रांसलेटर होते हैं|
साथ ही साथ लोकल लोगों को हर बार बस के धक्के या गाड़ी से ना जाना पड़े और ट्रेन से जा सकें| और क्योंकि मैं मुंबई से आता हूँ तो मेरी तो इच्छा है कि दोनों रूट्स पर फिल्म शूटिंग भी बड़े रूप से हो सकती है, इतना सुन्दर हमारे पास पूरा माहौल है| इतने अच्छे लोग हैं हिमाचल के| तो मैं समझता हूँ फिल्म शूटिंग के लिए भी उनको विदेश न जाना पड़े| वह यहीं पर आकर शूटिंग कर सकें उसके लिए भी रेलवे बहुत ही सरल सुविधाजनक – राज्य सरकार और रेलवे मिलकर – एक पूरा प्रोसेस बनाने वाली है जिससे फिल्म शूटिंग को हम हिमाचल में बड़े रूप से encourage कर सकें|
हम कांगड़ा स्टेशन को भी थोड़ा अपग्रेड करने जा रहे हैं जिससे उसको पुराना हेरिटेज लुक जो 100 साल पहले रहा होगा या 90 साल पहले रहा होगा उसको कैसे re-establish कर सकें| एक कांगड़ा स्टेशन को अपग्रेड करने का मैंने आदेश दिया है| उसके bathrooms को सुधारना है, toilets वगैरा की फैसिलिटी| वह तो पूरे जो 17स्टेशन हैं, पूरे 17 स्टेशन की toilet फैसिलिटी को हम सुधार करेंगे और लाइटिंग को सुधार करेंगे, पूरे 17 के 17 स्टेशन में जिसमें आगे चलकर शाम को भी जब गाड़ियां जाएं तो अच्छा well lit-up LED lights के साथ well lit-up station हो|
और एक हमने 16नवंबर को स्टीम इंजन एक ट्रायल के रूप में चार्टर की थी| यह एक प्रकार से 100 साल-80 साल पहले स्टीम इंजन पर रेलगाड़ी शुरू हुई थी तो पर्यटकों के दृष्टिकोण से यह बहुत इंटरेस्टिंग चीज़ रहती है| तो पालमपुर से बैजनाथ आगे चलकर हमारी इच्छा है कि इसको एक रेगुलर फीचर बनाया जाए| और हमारे स्कूलों के बच्चों को भी आमंत्रण करेंगे कि वह इस स्टीम इंजन में आएं, स्टीम इंजन से चलने वाली गाड़ी में आएं और देखें कैसे विकास हुआ है रेलगाड़ियों में| कहाँ स्टीम इंजन से शुरू होकर अब भारत शत-प्रतिशत विद्युतीकरण वाली ट्रेनों में सफर करने जा रहा है|
मुझे पूरा विश्वास है कि आगे चलकर हिमाचल में यह दोनों जो अभी रूट्स हैं,इन दोनों पर हम बड़े रूप में यात्रियों की सुविधा और यात्रियों के पूरी numbers, मतलब ज़्यादा से ज़्यादा यात्री – पर्यटक और हिमाचली – दोनों, ज़्यादा से ज़्यादा इसका इस्तेमाल कर सकें| इसपर हम पूरी तरीके से सफल उतरेंगे|
प्रश्न-उत्तर
प्रशन: सर, ब्रॉड गेज का कोई प्लान नहीं है?
उत्तर:ब्रॉड गेज का पहले प्लान बना था पर मेरा मानना है कि ब्रॉड गेज लगाने से इतनी सुन्दर रेलवे को हम ख़राब कर देंगे| और इसलिए मैंने रिव्यू करने का निर्णय लिया है कि ब्रॉड गेज नहीं करना चाहिए, नैरो गेज की स्पीड बढ़ानी चाहिए| क्योंकि ब्रॉड गेज ट्रेन आने से जो इसकी सुन्दरता है, जो इसका पर्यटक का वैल्यू हैएक तो वह भी ख़त्म हो जाएगी और साथ ही साथ जो इसकी हैरिटेज लुक है, हैरिटेज जो इसकी properties हैं वह भी ख़त्म हो जाएँगी| तो कई ऐसी लाइनें हैं – अब जैसे एक उत्तर प्रदेश में दुधवा नैशनल पार्क – उसको भी पहले ब्रॉड गेज करने का प्लान था, मैंने उसको कैंसल कर दिया है कि वह भी अभी हैरिटेज रेलवे की तरह चलेगी| तो मैं समझता हूँ यह एक माउंटेन रेलवे और हैरिटेज रेलवे यह हमारे देश की धरोहर है| इसको हमने बिगाड़ना नहीं चाहिए| और इसको तो प्रोत्साहन करकर सुविधाजनक बनाकर इसको और आधुनिक बनाना चाहिए|
प्रशन:और जो एरिया सर रेलवे से जुड़े नहीं हैं क्या उनको भी जोड़ा जाएगा?
उत्तर: अब पहले फेज में इन दोनों को इतना सुधार दें और पर्यटक और लोकल हिमाचलियों की सेवा बढ़ जाए| यह एक low-hanging fruit है| तो मेरा मानना है कि इसपर priority करके करने में ज़्यादा लाभ होगा|
प्रशन: बजट में रेल बजट का प्रावधान नहीं किया गया| तो क्या यह….?
उत्तर: यह वाला बजट भाई साहब इंटरिम वोट ऑन अकाउंट ही होगा तो इसलिए इस बजट में कोई नयी घोषणाएँ तो साधारणतः नहीं होगी|
प्रशन: सर क्योंकि आपकी announcement जो हैं वह इलेक्शन इयर में हो रही हैं तो लोगों को किस तरह से satisfy करेंगे आप?
उत्तर: भाई अभी आपने हमारी सरकार को हिमाचल की….. आपने हिमाचल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार तो शायद एक साल पहले ही चुनी है| उसके बाद से मैं लगातार आ रहा हूँ| आखिर शिमला में इतना improvement…. आप रेलवे की व्यवस्थाएँ तो जानते हैं कैसे चलती हैं| तो यह improvement करने के पीछे लगभग मैं 8-9 महीने से लगा हुआ हूँ| तब जाकर उसके आपको visible effect शिमला सेक्शन पर मिलेगा| अब यहाँ पर करने जा रहा हूँ तो अगले 8-9 महीने में यहाँ पर विज़िबल इफ़ेक्ट मिलेगा|
दुर्भाग्य से हमारे देश ने और ख़ासतौर पर रेलवे विभाग ने हर एक चीज़ को चुनावी दृष्टिकोण से देखा है| पर भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी भी चुनाव और रेल की व्यवस्थाएँ या रोड की व्यवस्था या हवाई व्यवस्थाओं को नहीं जोड़ा| अगर हमें उस प्रकार से करना होता तो पहले की तरह एक चुनाव में हम अनाउंसमेंट करते| जब कांग्रेस थी – तब एक चुनाव में अनाउंसमेंट करती थी, दूसरे चुनाव में सर्वे शुरू करती थी, तीसरे चुनाव में सर्वे की findings निकालती थी, चौथे चुनाव में सैंक्शन करती थी, पाँचवे चुनाव में थोड़ा सा पैसा देती थी, करते-करते 2014 में जब हमारी सरकार आई तो ऐसी सैंकड़ों प्रोजेक्ट देश भर में मिले जो announce हो चुके हैं, किधर सर्वे हो चुका है, किधर 25-50-100 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं| न कोई ठिकाना है प्रोजेक्ट का, न कोई ज़मीन का ठिकाना है| जो प्रोजेक्ट 100 करोड़ का था अब 1000 करोड़ का हो गया है| पैसे हैं नहीं रेलवे के पास|
तो इस प्रकार के बेबुनियादी राजनीतिकरण के कारण रेलवे की यह दुर्दशा देश भर में हुई है| इसलिए प्रधानमंत्री जी ने रेलवे का बजट भी बंद किया, उसको मेन बजट के साथ जोड़ा| जिससे राजनीतिकरण रेलवे का ख़त्म हो और वास्तव में सेवा भाव से और देश की आर्थिक और एक प्रकार से लोगों को जोड़ने वाली जो एक रेलवे बनाने की कल्पना की गयी थी, वैसी कल्पना को लेकर 2014 से लगातार काम कर रहे हैं|
ढाई गुना निवेश इस पाँच वर्षों में हुआ है, पिछले पाँच वर्षों की निसबत – ढाई गुना निवेश| सेफ्टी पर इतना ज़्यादा इन्वेस्ट हुआ है कि जहाँ 118 एक्सीडेंट होते थे 4 साल पहले, पिछले वर्ष सिर्फ 73 एक्सीडेंट हुए हैं रेलवे में| कहाँ fatalities 200-250 होती थी हर वर्ष| अब उस विषय में मैं ज़्यादा बोलता नहीं हूँ, डर भी लगता है क्योंकि यह थोड़ा कुदरती मामला है लेकिन यह वर्ष सबसे कम fatalities वाला वर्ष गया है| तो मैं समझता हूँ कि रेलवे एक ऐसी चीज़ है जिसमें राजनीति के बगैर एक प्रकार से जनता की सुविधा, पर्यटन को गति और आर्थिक विकास में तेज़ प्रगति हो इस रूप में रेलवे को चलाने की और बढ़ाने का काम मोदी जी की सरकार ने किया है|
धन्यवाद|
आपको अपना मेमोरेंडम अरुण जेटली जी के नाम पर भेजना पड़ेगा। मैं माध्यम बन सकता हूँ लेकिन यह जो-जो विषय आपने अभी बताए या अभी आपने जो रेलवे की कंप्लेंट का बिताया इसके कोजेंट रीज़न्स के साथ समस्या और उसके पीछे कैसे इस समस्या को हल किया जाए, सरलीकरण किया जाए ऑडिट के प्रॉसेस को। अगर आप लोग इस पर विचार विमर्श करकर श्री अरुण जेटली जी के नाम पर पत्र देते हैं और चाहे मुझे भिजवा दीजिए तो उस पर पूरी तरीक़े से गौर करके और जीएसटी काउंसिल के समक्ष रखा जा सकता है। फ़ाइनल निर्णय जीएसटी काउंसिल ही लेता है।
जैसे पिछली बार भी जब मीटिंग में कई चीज़ें करी कोटा स्टोन की समस्या हल करी, मूर्तिकारों की समस्या हल करी, 93% जीएसटी टैक्स पेयर्स को जो पाँच करोड़ के टर्नओवर से नीचे हैं और ऐसे 93% उन सबको अब क्वाटर्ली रिटर्न भरना पड़ेगा। उसका सॉफ़्टवेयर में, जीएसटीएन नेटवर्क में चेंजेस किए जा रहे हैं, सरल एक पेज का सिंपल फॉर्मैट में कैसे क्वार्टरली रिटर्न भरें वह वेबसाइट पर डाल रखा है लोगों के सुझाव माँगने के लिए।
मैं समझता हूँ जीएसटी एक इवॉल्विंग व्यवस्था है। देखें एक प्रकार से तो कुल 18 महीने भी पूरे नहीं हुए हैं, यह 18वाँ महीना है। विश्व में भारत जितनी बड़ी कोई देश ने जीएसटी लागू करने की हिम्मत ही नहीं जुटाई है। अभी तक जितने देशों में जीएसटी लगा है वह छोटे-छोटे देश हैं। आज अमेरिका में कोई जीएसटी नहीं है, चाइना में कोई जीएसटी नहीं हैं जो बड़े देश हैं। भारत में एक निर्णायक सरकार, मोदी जी की सरकार ने सब राज्यों को साथ में लिया और वास्तव में कोआपरेटिव और कोलैबोरेटिव फेडेरालिस्म संघीय ढांचे को कैसे सबकी सहमति के साथ चलाया जाए, कैसे सबको साथ लेकर यह नई व्यवस्था बनाई जाए।
अच्छा व्यवस्था बनाने में कोई मोदी जी या अरुण जी या किसी का कोई उद्देश्य और कुछ नहीं था यही था कि आप लोग सबको अफ़सरशाही से मुक्ति मिले, आप सबके लिए सरल टैक्स की व्यवस्था हो। आख़िर हम पूरे समय जीएसटी के बारे में चर्चा करते हैं यह भूल जाते हैं कि जीएसटी रेट्स साधारणत: जो तय हुए वह पहले जो रेट्स थे 40 टैक्स और सेस के उन सबको जोड़कर रेट तय हुए।
और उसके बाद एक साल के भीतर-भीतर 370 वस्तुओं पर रेट्स कम किए गए, 65 से अधिक सेवाओं पर रेट्स कम किए गए और यह सिलसिला लगातार चलता जाएगा। तो जैसे-जैसे जीएसटी रेवेन्यू बढ़ता है और आप सबका तो मैं मानता हूँ कि धन्यवाद करना चाहिए कि इतनी अच्छी तरीक़े से ट्रेड और इंडस्ट्री ने जीएसटी को अपनाया है। वास्तव में जीएसटी लाया ही गया था आप लोगों के अनुरोध पर। पूरे देश भर से आवाज़ उठती थी जीएसटी लाओ जीएसटी लाओ, और तो कोई ला नहीं पाता मोदी जी में हिम्मत थी लाने की और आज इतने कम समय में लगभग सेटल डाउन हो गया, आज किधर कोई बात आती नहीं।
वैसे आज की भी चर्चा देखें तो सरलीकरण होना चाहिए उसपर तो किसी की दो राय हो ही नहीं सकती है। पर सरलीकरण के सुझाव आप को स्पेसिफिक दें तो उसके हिसाब से सरलीकरण किया जा सकता है। कुछ सवाल उठा कि लाइम में इनवर्टेड ड्यूटी का। अब वास्तव में यह अलग-अलग वस्तुओं में अलग-अलग इनपुट्स जाते हैं तो ऐसे एक-एक वस्तु के इनपुट, इनपुट तो कॉमन होते हैंना तो लाइम में जो इनपुट जाते हैं वह 10 और चीज़ों में जाता होगा।
एक-एक एन्डप्रोडक्ट के हिसाब से इनपुट टैक्स या रेट अलग-अलग नहीं हो सकते हैं, रेट तो एक ही होगा एक वस्तु का। तो मैं समझता हूँ वह कुछ इश्यूज़ पर यह विषय आ सकते हैं कुछ प्रोडक्ट्स में लेकिन पहले की जो व्यवस्था थी उससे लाख गुना अच्छी है। पहले तो कभी हम यह इनपुट क्रेडिट की कभी सोच भी नहीं थी। तो मैं समझता हूँ कि इसको ओवरऑल हज़ार वस्तु, हज़ार आइटम्स है लाइन आइटम्स की उसके परिप्रेक्ष्य में भी देखना पड़ेगा।
लेकिन जो-जो आपके सुझाव हैं वह अवश्य भेजिए हर एक पर ग़ौर होगा लेकिन जीएसटी काउंसिल के तहत ही होगा। वह चुनावी दौर के बीचों-बीच आचार संहिता के बीच में तो न कोई आश्वासन दे सकते हैं न कोई उसका निर्णय ले सकते हैं। वह तो 7 तारीख़ के बाद ही अब जो होगा उसपर जीएसटी काउंसिल बैठकर निर्णय ले सकेगी।
और वास्तव में एक मीटिंग तो हाल ही में होने वाली है तो अब इतना लेट हो गया है कि मुझे पता नहीं है अब अच्छे से स्टडी होकर, फिटमेंट कमेटी वग़ैरह स्टडी कर कर काउंसिल के समक्ष इतनी जल्दी रख भी पाएगी कि नहीं। फिर भी सुझाव भेजिए इस मीटिंग में नहीं अगली मीटिंग में होगा। व्यवस्थाएं तो लंबे अरसे के लिए बनती हैं ना। तो मैं समझता हूँ कि साधारणत: एक अच्छी व्यवस्था, सरल व्यवस्था, 40 टैक्स और सेसिज़ को जोड़ने वाली व्यवस्था जो।
आख़िर पहले तो अफ़सर हर टैक्स के अलग-अलग होते थे। एक्साइज़ का अलग कोई अफ़सर होता था, सर्विस टैक्स का कोई अलग था, वैट का कोई और था, अलग-अलग सेस के लोग अलग मैनेज करते थे। अब राकेश जी मुंबई से हैं वह आपको बताएँगे मुंबई के ऑक्ट्राय नाका की क्या हालत थी। पूरे दिन भर गाड़ियां जाती थी तो अलग-अलग प्रकार से उसके ऊपर चैक पोस्ट लगे हुए रहते थे, चैक पोस्ट के ऊपर लोग चेकिंग करते थे।
अच्छा maybe ट्रेड और इंडस्ट्री ने भी बहुत प्रकार के काम किए हैं उसका मैं ऑडिट नहीं करना चाहूंगा। कौन सी गाड़ी में क्या सामान जा रहा है, पहुँच रहा है, नहीं पहुँच रहा है, पहुँचने के बाद क्या हो रहा है, ज़्यादा तो नहीं बोलूं ना, हम सब समझदार लोग हैं हम समझते हैं क्या होता था पहले। अब उसके लिए ईवे बिल लाना ज़रूरी हो गया। पर एक मैं आपको ज़रूर बता सकता हूँ जो मेरा ख़ुद का मानना है। व्यापारी वर्ग मूलतः ईमानदार व्यवस्था चाहता है, कोई व्यापारी मुझे आज तक नहीं मिला है उद्योगपति, व्यापारी, उद्यमी जो कोई बेईमानी की व्यवस्था से ख़ुश था।
सबके दिल में एक चाहत थी कि यह सुधरे, व्यवस्थाएं ईमानदार हों, सब को सामान्य अवसर मिले अपने व्यापार और अपने उद्योग को तेज़ गति से बढ़ाने का। और मेरा तो अनुभव है कि साधारणत: एक मार्केट में समझो 8-10 दुकानें हैं, हो सकता है कोई एक व्यक्ति ग़लत काम करता हो पर उस एक व्यक्ति के ग़लत काम करने का परिणाम यह होता था कि बाक़ी 7-8 दुकानों को तय करना पड़ता था कि या तो वह भी ग़लत काम करें तो लेवल प्लेइंग फ़ील्ड हो जाए सब एक ही लेवल पर आ जाएं, भाई सब ही ग़लत करेंगे तो सबके टैक्स की चोरी होगी और या दुकान बंद कर कर गाँव चले जाओ।
परंतु जीएसटी में यह एक किरण दिखती है भविष्य के लिए कि जब सब लोग सामान्य टैक्स और एक रेट टैक्स का देंगे देश भर में तो तब कम्पटीशन ईमानदारी से सबके लिए सामान्य होगा, सबको कम्पटीशन में खरा उतरने के लिए और व्यापार और उद्योग को और तेज़ गति देने के लिए, बढ़ाने के लिए, अच्छा मुनाफ़ा कमाने के लिए लोगों को गुणवत्ता पर ध्यान देना पड़ेगा, अपनी सेवा पर ध्यान देना पड़ेगा, अपना प्रोडक्ट अच्छा हो, क्वालिटी प्रोडक्ट हो, हमारी सर्विस कस्टमर सर्विस अच्छी हो, हम प्रॉसेस के थ्रू टेंडर या ईमानदार पर्चेज़िंग प्रॉसेस के थ्रू हम अपने आपको खरे उतरें और कम्पटीशन के थ्रू अपना सामान बेच पाएं।
कम्पटीशन ईमानदारी की कम्पटीशन हो, equals की कम्पटीशन हो। और मेरा स्वयं का अनुभव है कि जहाँ-जहाँ मैंने यह बात रखी है ख़ासतौर पर युवा पीढ़ी के साथ उनका तो एक दम पक्का मानना है कि भाई हमको अपने बाप-दादा की तरह व्यापार और उद्योग नहीं चाहिए। हमको तो अच्छी शान से काम करना है दिन में, रात को पार्टी करनी है और चैन की नींद रात को सोनी है, अगले दिन जब हम कारख़ाना पहुँचे तो हमें कोई सफ़ेद एंबेसडर न दिखे हमारी फ़ैक्ट्री के बाहर और मैं समझता हूँ हम में से सब यही चाहते हैं।
शायद आपकी और मेरी अधिकांश एक दो-चार यंगस्टर्स को इस रूम में छोड़ दें यहाँ बैठे हैं तो अधिकांश हम सब एक उम्र के हैं और शायद हमें इस नई व्यवस्था से जुड़ने में थोड़ा समय लगेगा। यह एडजस्टमेंट का पीरियड है पर मैं आपको यह आश्वस्त करना चाहता हूँ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली जी और पूरी भारतीय जनता पार्टी इस बात पर विश्वास करती है कि इस देश का जो हर व्यापारी, हर उद्योग का सपना था कि यह देश ईमानदार हो, देश की व्यवस्थाएं सुधरें, देश की व्यवस्थाएं ईमानदार हों हम उस राह पर अब चल चले हैं और कोई इसको रोक नहीं पाएगा।
आज दुनिया देख रही है कि भारत में व्यवस्थाएं सुधरी हैं, बदली हैं। आख़िर कोई इंडेक्स ले लो चाहे कॉम्पिटिटिव इंडेक्स ले लो, ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस ले लो, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की इंडेक्स ले लो जो देखती है अलग-अलग देशों में कितना भ्रष्टाचार है, नहीं है, कैसा है। हर एक में भारत में सुधार हो रहा है, हर एक इंडेक्स में। और मैं समझता हूँ हम भी अगर गहराई से देखें विषय को तो हमें भी ध्यान आएगा कि अफ़सरशाही कम होती जा रही है, आहिस्ता-आहिस्ता हम सबके लिए काम करना सरल होते जा रहा है और जो व्यवस्थाएं इतने सालों से चल रही थी वह कोई ओवरनाइट।
हम ज़मीन धरातल तक बदलाव लाने में अगर सफल न भी हुए हों लेकिन यह सिलसिला ऊपर से शुरू होता है। मैं एक छोटा उदाहरण दूँगा एक बार यह सात-आठ साल पहले की बात है मेरी पत्नी शायद टैक्सी में किधर गयी होगी एक जगह से दूसरी जगह और टैक्सी ड्राइवर ने शायद 80 रुपये मीटर में था उसने 100 रुपये माँग लिए। अब पता नहीं क्या हुआ उस दिन मेरी पत्नी ने उसको बड़े प्यार से पूछा कि मीटर तो 80 रुपये दिखा रहा है आप 100 क्यों माँग रहे हो और वैसे शायद नॉर्मल कोर्स में 100 रुपये का नोट देती तो वापस लेती भी नहीं अगर उसने 80 रुपये बोले होते लेकिन जब उसने 100 बोले और मीटर में 80 दिखा रहा था तो पूछ लिया कि भाई 80 हुआ है मीटर में आप 100 क्यों माँग रहे हो।
मैं आपको बहुत दुख के साथ उसका जवाब बताना चाहूँगा। टैक्सी ड्राइवर ने मेरी पत्नी को कहा कि मेमसाहब मैंने 20 रुपये ही तो ऊपर माँगे कोई कोयले की खदान थोड़ी माँगी ली है। और यह रियल एग्ज़ाम्पल दे रहा हूँ तब तक तो मेरा कोई मंत्री बनने का भी आसार नहीं था और कोयले का मंत्री बनने का तो सपने में नहीं सोचा था।
लेकिन मोदी जी ने व्यवस्थाएं बदली। आज कोई कोयले की खदान पर उंगली उठाकर बता दे कि बिना ऑक्शन के किसी को कोयले की खदान मिल सकती है इस देश में, सरकारी कंपनियों को छोड़कर सरकारी कंपनियों को तो गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट दी जा सकती है। पर जब ऊपर से व्यवस्थाएं साफ़ होती जाती हैं तो वह नीचे तक पहुँचती हैं और पूरे देश में वह लहर गूंजती है कि अब देश बदल रहा है, देश की परंपरागत स्थिति से व्यापार नहीं होगा अब बदलाव होगा पूरे व्यापार करने के ढंग में।
और मैं समझता हूँ कि आप जितना चाहेंगे मैं एग्ज़ाम्पल एक के बाद एक गिना सकता हूँ पर एक एग्ज़ाम्पल जिसमें हम सबको रुचि रहती है वह मैं ज़रूर आपके समक्ष रखना चाहूँगा। वह है इनकम टैक्स की। कुछ तो कई बार मुझे कहते हैं कि बड़े इनकम टैक्स के नोटिस आ रहे हैं वगैरा-वगैरा। मैं समझता हूँ कि जितनी जगह मैं गया हूँ मैंने लोगों को कहा है कि भाई अगर कोई आपको लगता है बहुत ज़्यादा बड़े पैमाने पर आ रहा है तो 10, 20, 25 नोटिस ही कलेक्ट कर कर एक जिरॉक्स कर कर मुझे भिजवा कर तो दो एक बार। मैं देखूँ तो सही कि कोई ग़लत तो नहीं कर रहा है, कोई डिवीज़न में ग़लत तो नहीं कर रहा है, कोई लोकल एरिया की कोई प्रॉब्लम तो नहीं है। मुझे आज तक किसी ने भेजा नहीं है। अफ़वाहों पर हम चलते जाते हैं लेकिन आप देखिए इनकम टैक्स की व्यवस्था कैसी बनाई जा रही है। आप याद करिए इस साल आपका इनकम टैक्स का रिटर्न के लिए आपको किसी को भी दफ़्तर जाना पड़ा इनकम टैक्स के।
पहले ही 3-4 महीने के अंदर जितने लोगों ने रिटर्न फ़ाइल किया था उनको as it is accept कर कर कम्प्यूटर द्वारा या तो RTGS से अगर आपने RTGS डिटेल्स दिए हैं या चेक आपके घर पर पहुँच गया है बिना कोई प्रश्न पूछे। 70-75,000 करोड़ के इनकम टैक्स रिफंड दो करोड़ लोगों तक पहले ही तीन-चार महीने में सीधा पहुँचे आपको किधर जूते नहीं घिसने पड़े, किधर कुछ ग़लत काम नहीं करना पड़ा।
स्क्रूटनी होती थी पहले। आपको याद होगा लोग आते थे कि हम आपका स्क्रूटनी में नाम आ रहा है, याद है कि नहीं और फिर दलाल बिचौलिए आते थे कि आप स्क्रूटनी में नाम बचाने की। अब वह सब चीज़ें कभी हो ही नहीं सकती क्योंकि न मेरे हाथ में है न वित्त मंत्री के हाथ में है न प्रधानमंत्री के हाथ में है कि किसके यहाँ स्क्रूटनी होगी किसके यहाँ नहीं होगी।
पूरा कम्प्यूटर से डेटा माइनिंग कर कर कंप्यूटर जी तय करेंगे कि किसकी स्क्रूटनी होगी, किसकी स्क्रूटनी नहीं होगी। कोई कभी आपके यहाँ आए भी यह धमकी देकर तो उसको पुलिस में अरेस्ट करवा देना क्योंकि कोई इन्फ्लुएंस कर ही नहीं सकता है स्क्रूटनी को। कोई आपको ग़लत फ़हमी में डाले आपकी हो रही है मैं बचा दूँगा, नहीं बचा दूँगा या करवा दूँगा सीधा पुलिस थाने में जाकर उसके ख़िलाफ़ कंप्लेंट लिखवा देना।
हमने व्यवस्थाएं पूरी ईमानदार कैसे बन सकें उस पर बल दिया है, नीव से व्यवस्था बदलने पर बल दिया है। आपको जानकर ख़ुशी होगी कि कहाँ पहले सैकड़ों लोगों की स्क्रूटनी होती थी अब मात्र 0.3 यानी एक हज़ार रिटर्न जो फ़ाइल होते हैं उसमें मात्र तीन लोगों की स्क्रूटनी होती है, हर हज़ार रिटर्न पर मात्र 3 लोगों की स्क्रूटनी, और वह तीन भी कोई ह्यूमन नहीं तय करेगा कंप्यूटर जी तय करेंगे डेटा चेक कर कर। अगर भाई किसी के हिसाब में एक करोड़ रुपये प्रॉफिट से सीधा एक लाख रुपये हो गया और या किसी के अकाउंट में एक लाख से प्रॉफिट सीधा एक करोड हो गया।
मैं अभी-अभी बीकानेर होकर आया हूँ तो उसका उदाहरण तो आज कल बड़ा चर्चित है कि कैसे कम समय में एक रुपये की चीज़ सात रुपये की हो जाती है। अब ऐसी चीज़ें जब कंप्यूटर देखेगा तो स्वाभाविक है कि उसमें तो कुछ प्रश्न उठाने पड़ेंगे। मैं कोई राजनीति नहीं लाना चाह रहा हूँ यहाँ पर लेकिन I am just giving an example कि इस टाइप की चीज़ों को तो चेक करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए।
उसके अलावा आगे की स्क्रूटनी की व्यवस्था सुनिए क्या बन रही है और उसका पूरा प्रोसेस तय हो गया है। मेरे समक्ष उसकी पूरी प्रेजेंटेशन हुई थी जब कुछ दिनों के लिए मैं देखता था और मैं अपने आपको सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे वह फ़ाइल साइन करने का मौक़ा मिला जिसमें यह निर्धारित किया है, और यह प्रॉसेस तय हो गया है अब सॉफ़्टवेयर बन रहा है कि अगर किसका एग्ज़ाम्पल लूँ माहिती जी का इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल हो रहा है तो इनकम टैक्स रिटर्न में माहिती जी अपना नाम, पैन नंबर के साथ पूरी डिटेलस देते हैं और बाय चांस कंप्यूटर में तय हुआ कि इसका स्क्रूटनी होना है इस रिटर्न का माहिती जी के रिटर्न का।
तो वह जिस इनकम टैक्स अफ़सर के पास जाएगा उस इनकम टैक्स अफ़सर के पास इनका नाम और पैन नंबर नहीं जाएगा एक डमी नंबर लिख कर 12345 समझो एक डमी नंबर लिखकर पूरी डिटेलस एक अफ़सर के पास जाएंगी अलग शहर में, किसी को मालूम ही नहीं किसका रिटर्न है क्या है। वह अफ़सर स्टडी कर कर प्रश्न निकालेगा और कंप्यूटर में फीड इन कर देगा 12345 के नाम पर। कंप्यूटर अपने आप उससे वह प्रश्न आपके पास भेजेगा।
तो अभी आपको भी पता नहीं आपका अफ़सर कौन था, अफ़सर को भी पता नहीं आप कौन हैं। जब आप इसका जवाब लिखोगे, जब माहिती जी जवाब लिखेंगे एक-एक प्रश्न का अब वह उस अफसर के पास नहीं जाएगा एक तीसरे अफ़सर के पास जाएगा again with a dummy number, अगेन उसको मालूम नहीं कि पहला अफ़सर कौन था, उसको मालूम नहीं माहिती जी कौन हैं, उनका पैन नंबर क्या है। कोई एक डमी नंबर के साथ एक तीसरे अफ़सर के पास सवाल भी जाएँगे, प्रश्न भी जाएँगे और रिटर्न भी जाएगा और उसके ऊपर वह अगर कुछ और पूछना है पूछ सकता है या असेसमेंट कर कर अपने सीनियर अधिकारी से अप्रूव कराएगा।
इस लेवल की ट्रांसपेरेंसी और इस लेवल की एकाउंटेबिलिटी मैं समझता हूँ हम में से किसी ने कभी कल्पना नहीं की थी की इस देश में आ सकती है जिसको प्रधानमंत्री मोदी जी कर रहे हैं। और पूरी तरीक़े से हो सकता है हमारे चार्टर्ड अकाउंटेंट मित्र मेरे भाई थोड़े नाराज़ हो सकते हैं इस बात से (नहीं ना अच्छी बात है) क्योंकि मैं समझता हूँ कोई चार्टर्ड अकाउंटेंट भी ग़लत काम नहीं करना चाहता है। वह भी इज़्ज़त की कमाई खाएँगे, अच्छी तरह आपको हेल्प करेंगे, आपके रिटर्न्स बनाएंगे, क्वेश्चन आंसर करेंगे, वैल्यू एडेड सर्विसेज़ देंगे बजाए कि ग़लत काम में शामिल होने के, am I right sir?
और इस प्रकार से एक-एक व्यवस्था को कैसे सुधारना, कैसे पारदर्शी बनाना और सबको अच्छे सामान्य अवसर मिलें अपने उद्योग को प्रगति करने में यह इस सरकार की प्राथमिकता है और मैं समझता हूँ मैं तो आज सिर्फ़ आपका धन्यवाद करने आया हूँ कि आप लोगों ने जो टैक्स भरने में सरकार का सहयोग किया, जिस प्रकार से पूरी अर्थव्यवस्था को फॉर्मलाइज़ करने में आपने सरकार का समर्थन दिया, जिस प्रकार से जीएसटी को सफल बनाने में अपने पूरे ज़ोर-शोर से समर्थन दिया। उसी के फलस्वरूप आज हमारा भी हौसला बढ़ा है, हमें भी लगता है कि और सरलीकरण किया जाए, हमें भी लगता है कि और टैक्स के रेट्स घटाए जाएं और आज एक-एक रुपया जो आप टैक्स का भरते हो वह एक प्रधानमंत्री जिसके पिता का नाम तो शायद हम में से किसी को मालूम नहीं है और कुछ मित्र विपक्षी पार्टियों के उस पर भी टिप्पणी कर रहे हैं कि जिस आदमी के पिता का नाम नहीं मालूम उसको कैसे सहयोग करना।
अब मुझे पता नहीं माहिती जी आपके पिता का नाम क्या है उसके बावजूद मैं तो आपको समर्थन कर रहा हूँ ना। अच्छा और कुछ लोगों के पिता ने तो यहाँ तक बोल दिया था कि जब मैं एक रुपया भेजता हूँ केंद्र से तो मात्र 15 पैसे ग़रीब तक पहुँचते हैं। अब मैं समझता हूँ ऐसे पिता से तो हमारे प्रधानमंत्री अच्छे हैं जिनका पिता का नाम नहीं मालूम लेकिन जिसने ग़रीबी देखी है, जिसने ग़रीबी अनुभव की है।
पता नहीं आप में से किसने वह छोटी सी एक 30 मिनट की छोटी प्रस्तुतीकरण बनी है “चलो जीते हैं” । उसमें एक छोटा सा अंश है प्रधानमंत्री मोदी जी के जीवन का अगर आप यूट्यूब पर देखें तो मैं समझता हूँ आँख में आँसू आ जाएंगे। एक झलक है कि कैसे प्रधानमंत्री मोदी जी का मन शेप हुआ है, कैसे उन्होंने तय किया कि मुझे समाज के लिए जीना है, मुझे गरीबों के लिए जीना है।
क्या वह अनुभव थे। कैसे उनकी माँ ने चूल्हे पर रोटी बनाती थी कोयले के चूल्हे पर और धुआँ झोंकती थी जिसकी वजह से आज उज्जवला के तहत हर माता-बहन को LPG की कनेक्शन मुफ़्त में दी जा रही है। कैसे बिना बिजली के वह पढ़ाई कर कर यहाँ तक पहुँचे हैं लेकिन चाहते हैं कोई और ग़रीब का बच्चा बिना बिजली के न रहे, बिजली से वंचित न रहे, हम सबके साथ सामान्य अवसर मिले हर ग़रीब को।
कैसे वह चाहते हैं कि हमारी कोई माता-बहन का अपमान न हो कि सूर्योदय से सनसेट तक (सनराइज़ टू सनसेट तक) कोई हमारी माँ-बहन शौच के लिए न जा पाए और हम सब देखते रह जाएं लेकिन कुछ करें ना। आज 9 करोड़ से अधिक शौचालय बने हैं इस देश में पिछले 4 सालों में। कहाँ तीन में से एक व्यक्ति के घर में शौचालय था, आज 93 प्रतिशत लोगों के घर में शौचालय है जल्द ही उसको शत प्रतिशत कर देंगे। आख़िर यह सब उनके अनुभव हैं जीवन के।
लेकिन यह तभी हो पाया जब आप सबने अपना टैक्स भरा, आप सबने हौसला दिया प्रधानमंत्री मोदी जी और उनकी सरकार को, आप सबने अपनी इनकम टैक्स, आपनी GST, अन्य-अन्य प्रकार से जो समर्थन, जो आशीर्वाद दिया है और जो मेहनत कर कर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से, जन धन खाते खोलकर, आधार लागू कर कर, पूरा डेटाबेस मैपिंग कर कर वह जो एक रुपया किसी के पिता जी पहुँचा नहीं पाते थे ग़रीब तक और सिर्फ़ 15 पैसे पहुँचता था, सभी बिचौलियों को ख़त्म कर कर आपकी मेहनत की कमाई से पे किया गया टैक्स पूरी तरीक़े से शत प्रतिशत ग़रीब की सेवा में लगे यह जो काम प्रधानमंत्री मोदी जी ने किया है उसके समर्थन में मैं समझता हूँ आज पूरा देश उनके साथ है, उनको आशीर्वाद देता है।
माननीय वसुंधरा राजे सिंधिया जी ने राजस्थान में जिस प्रकार से केंद्र सरकार की और राजस्थान की योजनाओं को गाँव, ग़रीब, किसान तक पहुंचाया। आज भामाशाह योजना आपकी राजस्थान की हम पूरे देश में लागू करने की कोशिश कर रहे हैं आयुष्मान भारत की तरह। जो बिजली के क्षेत्र में जर्जर हालत पिछली सरकार से वसुंधरा जी को मिली थी उसको उन्होंने सुधार कर कर बिजली कंपनियों का घाटा जिसको हम जो राजस्थान की डिस्कॉम्स हैं उसको एक चौथाई कर दिया है।
15-16,000 करोड़ का घाटा हर वर्ष होता था बिजली कंपनियों का 2013 के पहले, 70-75,000 करोड़ का लोन डिस्कॉम के ऊपर था। हम सब व्यापारी भाई उसके सफ़र करते थे, चौबीस घंटे बिजली नहीं आती थी, डीज़ल जनरेटर सेट पर चलानी पड़ती थी फ़ैक्ट्री में। आज उन्होंने उसको समृद्ध किया, मज़बूत बनाया पूरी डिस्कॉम व्यवस्था को।
और मैं समझता हूँ पूरे प्रदेश में, हर घर तक बिजली पहुँचाना, चौबीसों घंटे सब जगह बिजली देना, किसानों को पर्याप्त मात्रा में बिजली देना हर प्रकार से और मैं कई चीज़ें देख रहा था प्रधानमंत्री आवास योजना 14 लाख घरों में, भामाशाह योजना 6 करोड लाभार्थी, उज्ज्वला योजना 37 लाख महिलाओं को मुफ़्त गैस कनेक्शन मिले, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना 509 गाँव जहाँ कभी बिजली नहीं पहुँची थी, 10,500 मजला, टोला, ढाणी जो वंचित थे बिजली से, 14,60,000 घर, परिवार जिन तक बिजली नहीं पहुँची थी।
यह सब काम वसुंधरा जी ने जो आज गाँव, ग़रीब तक पहुँचाया है, यह डबल इंजन केंद्र और राज्य सरकार की जब साथ में मेहनत करती है, काम करती है तब ही प्रदेश में विकास होता है, तब ही प्रदेश में प्रगति की लहर उठती है।
और मुझे पूरा विश्वास है कि व्यापारी समाज, उद्योग जगत अच्छी तरह समझता है कि जब हम अपने दफ़्तर में, फ़ैक्ट्री में पेंट करते हैं तो सीधा एक ऊपर एक हाथ नहीं लगा देते हैं। ऊपर ही एक हाथ लगा देंगे तो नीचे का दीमक, नीचे की गंदगी कभी सामने आएगी नहीं एक-दो साल में वह पेंट फिर निकल कर उतर आएगा। हम पहले स्क्रैप डाउन करते हैं उसको, पुराना सब कचरा निकालते हैं, अगर दीमक लगी है उस दीमक को निकाल कर ठिकाने पहुँचाते हैं, छोड़ भी नहीं सकते हैं नहीं तो सब फर्नीचर पर लग जाएगा।
तो पहले साफ़ करो, पुराने सालों साल की दीमक को निकालो, उसको ठिकाने लगाओ फिर हम 3 राउंड पेंट कर कर एक सुंदर अपना ऑफ़िस बनाते हैं, सुंदर अपना घर बनाते हैं, सुंदर अपनी फ़ैक्ट्री बनाते हैं, विदर्भ इंडस्ट्रियल एसोसिएशन यह सुंदर हॉल बनाता है। इसी प्रकार से जब देश को सुधारना है, जब देश को बदलना है, देश में परिवर्तन करना है तो भाइयों-बहनों यह कोई ओवरनाइट काम नहीं हो सकता है, यह ऊपर लीपापोती नहीं हो सकती अगर मैं मुंबई की भाषा में बोलूँ और कोई उसको मिसकोट न कर देना भैया पर मुंबई की भाषा में बोलते हैं चूना लगाया।
तो जो चूना लगाने का काम लोगों ने वर्षों-वर्षों तक किया है इस देश के साथ प्रधानमंत्री मोदी जी उसको बदल रहे हैं जड़ से दीमक को निकाल कर, जड़ से भ्रष्टाचार को निकाल कर हम सबके लिए और हमारे बच्चे कभी यह न कोसें हम सबको कि कैसी व्यवस्था छोड़ कर हमारे लिए जा रहे हो। हम सबको इस देश के भावी पीढ़ी के लिए एक ज़िम्मेदारी है कि हम एक अच्छी व्यवस्था छोड़े। और आप सबका धन्यवाद करता हूँ कि आपने इस अच्छी इमानदार व्यवस्था को बल दिया, सहयोग दिया, आशीर्वाद दिया और मुझे पूरा विश्वास है कि यह सिलसिला हमारा लगातार चलता रहेगा, साथ-साथ सुधार होता रहेगा हर व्यवस्था में।
सुधार संसार का नियम है, परिवर्तन संसार का नियम है और मैं समझता हूँ जब आप और हम मिलकर देशहित में, जनहित में काम करेंगे तो दुनिया की कोई ताक़त भारत को फिर एक बार वह सुनहरी चिड़िया बनने से रोक नहीं पाएगी। आप सबका समर्थन और आशीर्वाद की अपेक्षा से मैं आज यहाँ आप सब से यहाँ से विदा लेता हूँ।
आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।


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