सिमी जैन जी, गीता गुप्ता जी, मंच पर और नीचे बैठे सभी महानुभाव भाईयों और बहनों, और दोनों बेटियां जिन्होंने एक ने सुन्दर कविता सुनाई, एक ने डॉक्टरी में अपनी पूरी कमाई समाज को और देश को समर्पित की, दोनों को नमन करता हूँ, बधाई देता हूँ। और आज आप सभी को तहे दिल से बधाई देता हूँ कि इतना सुन्दर प्लॉट हमारे समाज को मिला है। मैं अभी-अभी देख रहा था कनॉट प्लेस इतना नज़दीक है कि चलकर जा सकते हैं, आपको गाड़ी भी न लगे ऐसे कनॉट प्लेस, और मुझे लगता है कनॉट प्लेस के इतना निकट ज़मीन, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन भी पांच मिनट, कनॉट प्लेस भी पांच मिनट।
मैं समझता हूँ हम सौभाग्यशाली हैं कि प्रधानमंत्री मोदी जी को जब यह विषय रखा गया कि यहां पर एन्क्रोचमेंट है, प्लॉट की तकलीफ हो रही है उन्होंने क्षण भी नहीं लगाया, तुरंत आदेश दिए कि इसको खाली किया जाये। और शायद इस प्लॉट पर बहुत लोगों की नज़र रही होगी आसान नहीं रहा होगा इस प्लॉट को मिलना। लेकिन नरेश जी को दात दूंगा कि यह लगातार लगभग 20 वर्षों से इस काम के पीछे लगे रहे हैं और हम सबके लिए बहुत ख़ुशी की बात है।
वैसे आज पुण्यतिथि है भारतेन्दु हरिश्चंद्र जी की, पता नहीं हम में से किस को कितना ख्याल है उनका। वह शायद हिंदी साहित्य के शिल्पकार माने जाते हैं, भारतेन्दु हरिश्चंद्र जी। 6 जनवरी 1885 को उनका जन्म हुआ और स्वदेशी भावना को उन्होंने बहुत आगे बढ़ाया था और शायद हमारे अग्रवाल समाज का भी जो इतिहास है उसको पूरा संचालित करने में, लिखने में उनका बहुत बड़ा योगदान था। अब दुर्भाग्य की बात है कि समय बीतता जाता है, हम भी भूल जाते हैं, लोग भी भूल जाते हैं और कुछ मात्रा में हम सबको और मैं भी अपने को आप सबसे जोड़ना चाहूंगा, हम सबके ऊपर ज़िम्मेदारी है कि हम यह सब जानकारियां अपने समाज का जो इतिहास है यह अगली पीढ़ी तक भी पहुंचाएं, नहीं तो हमारी अगली पीढ़ी कटते जा रही है।
अगली पीढ़ी की अपनी प्राथमिकताएं हैं और जब तक हम सब माता-पिता इसको ज़िम्मेदारी से नहीं समझेंगे तब तक मैं समझता हूँ बड़ा मुश्किल होगा इस समाज के इतने सुन्दर इतिहास को, इस समाज की जो नीव रही है, मैं स्वाभाविक रूप से मेरे पहले जो प्रमुख वक्ता आये थे, प्रमुख अतिथि आये थे उन्होंने ज़रूर याद दिलाया होगा महाराजा अग्रसेन की कल्पना को जो एक ईंट और एक रुपये से कैसे समाज को पूरे विश्वभर में एक उद्यमी समाज, एक उद्योजक समाज बनाने में कैसे कल्पना की महाराजा अग्रसेन ने।
अब वह कल्पना ज़रूर अगली पीढ़ी में जाएगी लेकिन अगर इतिहास से वंचित रही अगली पीढ़ी तो मैं समझता हूँ इस समाज की जो विशेषताएं हैं और कुछ विशेषताएं अभी बहन श्रूति ने भी सुनाई, यह आगे बढ़ेगी नहीं, यह आगे पलपेगी नहीं, यह और ज़्यादा फलेंगी फूलेंगी नहीं। और मेरा तो अनुरोध यही रहेगा कि कैसे महानुभाओं ने इस समाज को गौरवशाली बनाया, कैसे हमारे पूर्वजों ने इस समाज को देश और विदेश तक पहुँचाया, कैसे इस समाज में सबसे ज़्यादा दानवीरता दिखाई।
आखिर लाला लाजपत राय क्या एक इतिहास के पन्नों में एक छोटे पैराग्राफ में रह जायेंगे? या हम अपने बच्चों को बताएँगे उनकी क्या-क्या सैक्रिफाइस रही। क्या कभी न कभी जिस प्रकार से दानवीरता हमारे समाज ने इतने वर्षों में दिखाई – स्कूल हो, कॉलेज हो, अस्पताल हो, हर क्षेत्र में। वैसे तो मदन मोहन मालवीय जी ने जो काशी विद्यापीठ बनाई, काशी विश्वविद्यालय उसमें भी हमारे समाज का बहुत बड़ा योगदान था। और हम गिनते रहें तो मैं समझता हूँ कितने भी संस्थाएं देश भर में देखें उसमें आर्थिक रूप से और मैं समझता हूँ अपने खुदके प्रयत्नों में भी हमारा समाज कभी पीछे नहीं रहा है, सबसे अग्रसर रहा है, सबसे आगे रहा है।
मुझे ख़ुशी है कि जो कल्पना नंदकिशोर जी ने अभी रखी कि यहाँ पर जो प्रकल्प बनेगा वह भी इस इतिहास को संचालित करेगा, सबको इकट्ठा करेगा, वह देश और दुनिया में अपने समाज तक पहुँचने की चेष्टा करेगा। अपने समाज के जो रत्न रहे हैं उनकी जानकारियां निकालेगा। मुझे पता नहीं आपमें से किसी ने पढ़ी है कि नहीं एक अंग्रेजी किताब एलेक्स हेली ने लिखी थी – रूट्स – और उस व्यक्ति ने, एलेक्स हेली ने अपने पूर्वजों को ढूँढ़ते-ढूँढ़ते शायद वह तो अमेरिका में रहता था लेकिन ढूँढ़ते-ढूँढ़ते लगभग 700-800 साल पीछे जाकर अपने पूर्वजों की पहचान निकाली, इतिहास निकाला और उसके ऊपर वह किताब, रूट्स, लिखी थी।
मैं समझता हूँ यह इतिहास सिर्फ पन्ने भरने के लिए या सिर्फ इतिहास इकट्ठा करने के हिसाब से नहीं लेकिन उनकी सोच पुराने ज़माने में क्या कठिनाइयों से समाज गुज़रा है, किस प्रकार से इवॉल्व हुआ है, किस प्रकार से ग्रो किया है, बढ़ा है, पल्पा है वह जब बाहर आएगा तो आगे आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देगा।
यह जो यहाँ भवन बनेगा मैं समझता हूँ एक मौका है हमारे पास समाज को एकत्र करने का। मैंने मज़ाक़ में, और मैं माफ़ी चाहूंगा अगर किसी की भावना को ठेस पहुंचे पर कुछ असलियत हमें स्वीकार करनी पड़ेगी। और बहन श्रूति जी को भी मैं थोड़ा बताऊंगा बाद में, आपने कुछ दो-तीन विषय उठाये थे उसके बारे में भी बताऊंगा। लेकिन मैं समझता हूँ जो हमारे समाज की सबसे बड़ी कमज़ोरी रही है वह यह रही है कि हम बंटते गए हैं, हमने समाज में संस्था बनाई, संस्था में स्वाभाविक है आज नरेश जी ने कोई संस्था बनाई, आहिस्ते-आहिस्ते नए लोग जुड़ेंगे, नए लोग आएंगे, नए पदाधिकारी बनेंगे, नए लोग प्राथमिक स्थान लेंगे तो व्यक्ति नाराज़ होकर अपनी दूसरी संस्था बना लेगा। और पद और प्राथमिकता के लालच में, कोई मेहरबानी करके बुरा न माने इस बात को, लेकिन हमने इतना बाँट दिया है अपना समाज कि हमारा वर्चस्व किधर हम बना नहीं पाए। जिस व्यक्ति को पद नहीं मिला उसने अपनी नयी संस्था बना ली और ऐसे करते-करते शायद आज देश और दुनिया में देखें तो पता नहीं हज़ारों होंगी, लाखों होंगी या कितनी संस्थाएं होंगी।
आज कोई पूछे कि कितने लोग जुड़े हुए हैं हमारे साथ हम कोई आंकड़ा नहीं बना सकते क्योंकि हम इतना बट गए हैं, हमने कभी अपने आपको … नहीं किया, कभी एकजुट होकर नहीं सोचा। और शायद यही कारण रहा कि समाज में एक होड़ सी लग गयी है कि कौन आगे है कौन पीछे है। और जो कल्पना से महाराजा अग्रसेन ने एक प्रकार से सबको जोड़ा था, आखिर जब गांव का हर व्यक्ति एक ईंट और एक रुपया देता था तब समाज को भी जोड़ने का एक साधन था और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह रही है कि हम बटते-बटते ऐसे बट गए हैं कि कोई हमारे समाज की पहचान हम देश और दुनिया में बना नहीं पाए।
और मुझे लगता है, मैंने तो कहा था इसी वास्तु से शुरू करें यह कोशिश कि क्या हम पूरे समाज को जोड़ने वाला वास्तु बना सकते हैं, क्या हम पूरे समाज को जोड़ने का एक मौका ढूंढ सकते हैं? क्या हम, खासतौर पर हम सब नेता यह तय कर सकते हैं कि हम पद नहीं लेंगे? चलो युवाओं को जोड़ते हैं, युवा-युवतियों को जोड़ते हैं, उनको पद पर रखकर उनको कहते हैं कि वह समाज को आगे जोड़ें, हम पीछे से सहायता करें, हम पीछे से प्रोत्साहन दें।
और मुझे लगता है जितना सामाजिक काम हमारे समाज ने किया है, जितना शिक्षा के क्षेत्र में, स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमारा एक पूरे देश भर में फैलाव है उसको अब एक और ज़ोर लगाने का समय आ गया है। हम सब अगर याद करें तो ज़रूर हम पाएंगे कि यह संस्था 50 साल पुरानी है, यह संस्था 80 साल पुरानी है, यह संस्था मेरे दादा ने शुरू की थी, यह संस्था मेरे पिता ने शुरू की थी। क्या हम यह देखें कि 20 और 30 वर्ष की आयु के हमारे जितने समाज के नवरत्न हैं, आगे भविष्य हैं उन्होंने कितनी संस्थाएं शुरू की, क्या हम वह ढूंढने की कोशिश कर सकते हैं?
क्यों हमारा 20 साल का नौजवान उसके दिल में क्यों नहीं भावना आ रही है कि मैं एक स्कूल शुरू करूँगा। जैसे बहन ने अपनी पूरी कमाई, डॉक्टर बहन ने, पूरी कमाई कहा कि मैं समाज में दूंगी, ऐसे हमारे कितने युवा-युवती हम निकाल सकते हैं चलो उसको ढूंढें। ढूंढें हम नयी संस्थाएं कितनी खड़ी करेंगे कि लोगों को शिक्षा अच्छी प्राप्त हो, लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं अच्छी प्राप्त हो।
आखिर एक प्रकार से आप देखिये इस सरकार ने क्या कोशिश की, मैं इसमें राजनीतिकरण नहीं लाना चाह रहा हूँ लेकिन आप देखिये सरकार की मेहनत। जब हर एक परिवार में खाता खुले और उसमें भी प्राथमिकता हो कि बहनों का खाता खुले जन धन योजना के तहत, तब 33 करोड़ अगर खाते खुले तो उसके पीछे हेतु क्या था कि फाइनेंशियल इन्क्लूजन हो, बैंकिंग व्यवस्था से सभी परिवार जुड़ें। जब प्रधानमंत्री आवास योजना में यह निश्चय किया और संकल्प लिया कि देश में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं होगा जिसके सर पर छत नहीं हो, जिसके खुदका मकान नहीं हो, उस मकान में स्वाभाविक है चौबीस घंटे बिजली मिले, बिजली सबको मिले कोई वंचित न रहे, पेयजल मिले अच्छा, शौचालय हो।
आखिर हमारी माता-बहनों की आत्मसम्मान भी हमारी ज़िम्मेदारी है, कब तक खेतों में जाकर अपनी दिनचर्या शुरू करेंगी बहनें। और आपको जानकर आश्चर्य होगा जब यह सरकार आयी 2014 में तब तीन में से दो बहनें बिना शौच के अपना जीवन बिताती थी, आज 95% घरों में शौचालय है। स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा अच्छी मिले नज़दीक में, 2022 तक अगर यह कल्पना की गयी है मुद्रा योजना की पहल की। मुझे पता नहीं है आप में से किस को जानकारी है, मुद्रा योजना जो छोटे लोन से 10 लाख रुपये तक के लोन बिना सिक्योरिटी, श्योरिटी के, कोई जामिनदार नहीं लगेगा उसको। उसमें 12 करोड़ से अधिक लोगों को उसका लाभ मिला है, लाभार्थी 12 करोड़ से अधिक मुद्रा लोन के लाभार्थी हैं। और उसमें 70% महिलाएं हैं।
आखिर यह कल्पना, मुद्रा योजना हो, जन धन खाता हो, या हर एक के सर पर छत हो, इसमें और महाराजा अग्रसेन जी की सोच में भाईयों बहनों बताइये क्या फर्क है? एक ईंट, एक रुपया फिर चाहे जन धन योजना हो, मुद्रा योजना हो, आयुष्मान भारत हो या प्रधानमंत्री आवास योजना हो। यह सब महाराजा अग्रसेन जी ने जो बात हम सबके लिए छोड़कर गए थे उसका प्रतीक है, और शायद प्रधानमंत्री मोदी जी को भी प्रेरणा महाराजा अग्रसेन से आयी हो। अब वह आप लोग सोचो।
पर हमने कभी उनको बांटा नहीं है किसी एक समाज में या दूसरे समाज में, मैं समझता हूँ मोदी जी पूरे देश और विश्व के आज नेता बन गए हैं। और वास्तव में उनकी जो सोच है कि इस देश में हर गरीब का जीवन स्तर उठे, विकास सबका हो, विकास यह नहीं चुने कि इस समाज का होगा, इस धर्म का होगा, इस व्यक्ति विशेष का होगा, सबको मौका मिले।
और बहन श्रूति को बताना चाहूंगा चाहे वह नोटबंदी हो, चाहे वह जीएसटी हो, चाहे वह जैसे मैंने बताया मुद्रा योजना हो, चाहे वह जन धन योजना हो, चाहे बीमा की सुरक्षा योजनाएं हो, चाहे किसानों के लिए फसल बीमा योजना हो या मिनिमम सपोर्ट प्राइस डेढ़ गुना देकर उनकी भी आमदनी को दोगुना करने की कोशिश हो। चाहे प्रधानमंत्री आवास योजना में हर एक को घर मिले और या चाहे शौचालय की योजना हो जो बहनों को आत्मसम्मान दें।
यह सब अगर होता है तो हम सब जब अपना टैक्स भरते हैं उस टैक्स के पैसे से होता है कोई बाहर से पैसा नहीं आता। और यह हम सबके लिए गर्व की बात है कि हम सब, आपने बनिया शब्द यूज़ किया मैं व्यापारी शब्द यूज़ करना चाहूंगा, हम सब व्यापारी हम सब अपने-अपने क्षेत्र में जब काम करते हैं, जब हम टैक्स देते हैं उसी से सरकारी व्यवस्थाएं बनती हैं, उसी से देश की सुरक्षा बनती है। आखिर पुलिस की तनख्वाह कहाँ से जाती है? आखिर सैनिकों की तनख्वाह कहाँ से जाती है?
आखिर जब 9 करोड़ 45 लाख – ध्यान दीजिये, 9 करोड़ 45 लाख शौचालय बनते हैं तो वह सवा लाख करोड़ रुपये कहाँ से आते हैं? जब 50 करोड़ गरीबों को आयुष्मान भारत के तहत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, पीएमजे के तहत मुफ्त में अगर स्वास्थ्य सेवाएं देनी हैं तो वह जो हज़ारों करोड़ रुपये लगेंगे वह कहाँ से आएंगे वह ईमानदार टैक्स देने से ही आ सकता है। और मैं तो कई हमारे व्यापारी संघठनों के कार्यक्रमों में यह बात रखता हूँ हो सकता है थोड़े समय के लिए हमें कष्ट उठाना पड़ा हो, स्वाभाविक है, आप कोई अच्छा काम करने चले जाओ, बड़ा सरल होता है क्या? अच्छा काम छोड़ी।
आपके घर में बहन कभी पेंटिंग हुई है क्या? पेंटिंग हुई है कभी आपके घर में? पेंटिंग के दो तरीके होते हैं, जब घर में हम रंग लगाते हैं एक होता है कि जो पुराना पेंट लगा हुआ है उसके ऊपर ही एक हाथ लगा दो। एक तो वह तरीका होता है, शायद इस दीवार पर जो रंग लगा है वह उस तरीके से लगा हुआ है, मुझे नहीं लगता इसमें कोई हमने स्क्रैप-डाउन पेंटिंग की है, पुराना निकाला है, डिस्टेंपर डाला है, तीन कोट रंग लगा है, वह तो अभी ज़रूरत नहीं है वह तो अब वास्तु बनेगा अच्छी तरीके से।
आजके कार्यक्रम के लिए हमने इसपर, मुंबई की भाषा अगर इस्तेमाल करने की आपकी अनुमति हो और कोई अन्यथा न ले मैं मुंबई से आता हूँ तो हमने चूना लगाया है। सब समझते हैना चूना लगाना लगेगा उसको। उसमें 12 करोड़ से अधिक लोगों को उसका लाभ मिला है, लाभार्थी 12 करोड़ से अधिक मुद्रा लोन के लाभार्थी हैं। और उसमें 70% महिलाएं हैं।
आखिर यह कल्पना, मुद्रा योजना हो, जन धन खाता हो, या हर एक के सर पर छत हो, इसमें और महाराजा अग्रसेन जी की सोच में भाईयों बहनों बताइये क्या फर्क है? एक ईंट, एक रुपया फिर चाहे जन धन योजना हो, मुद्रा योजना हो, आयुष्मान भारत हो या प्रधानमंत्री आवास योजना हो। यह सब महाराजा अग्रसेन जी ने जो बात हम सबके लिए छोड़कर गए थे उसका प्रतीक है, और शायद प्रधानमंत्री मोदी जी को भी प्रेरणा महाराजा अग्रसेन जी से आयी है। अब वह आप लोग सोचो।
पर हमने कभी उनको बांटा नहीं है किसी एक समाज में या दूसरे समाज में, मैं समझता हूँ मोदी जी पूरे देश और विश्व के आज नेता बन गए हैं। और वास्तव में उनकी जो सोच है कि इस देश में हर गरीब का जीवन स्तर उठे, विकास सबका हो, विकास यह नहीं चुने कि इस समाज का होगा, इस धर्म का होगा, इस व्यक्ति विशेष का होगा, सबको मौका मिले। और बहन श्रूति को बताना चाहूंगा चाहे वह नोटबंदी हो, चाहे वह जीएसटी हो, चाहे वह जैसे मैंने बताया मुद्रा योजना हो, चाहे वह जन धन योजना हो, चाहे बीमा की सुरक्षा योजनाएं हो, चाहे किसानों के लिए फसल बीमा योजना हो या मिनिमम सपोर्ट प्राइस डेढ़ गुना देकर उनकी भी आमदनी को दोगुना करने की कोशिश हो। चाहे प्रधानमंत्री आवास योजना में हर एक को घर मिले और या चाहे शौचालय की योजना हो जो बहनों को आत्मसम्मान दें।
यह सब अगर होता है तो हम सब जब अपना टैक्स भरते हैं उस टैक्स के पैसे से होता है कोई बाहर से पैसा नहीं आता। और यह हम सबके लिए गर्व की बात है कि हम सब, आपने बनिया शब्द यूज़ किया मैं व्यापारी शब्द यूज़ करना चाहूंगा, हम सब व्यापारी हम सब अपने-अपने क्षेत्र में जब काम करते हैं, जब हम टैक्स देते हैं उसी से सरकारी व्यवस्थाएं बनती हैं, उसी से देश की सुरक्षा बनती है। आखिर पुलिस की तनख्वाह कहाँ से जाती है? आखिर सैनिकों की तनख्वाह कहाँ से जाती है?
आखिर जब 9 करोड़ 45 लाख – ध्यान दीजिये, 9 करोड़ 45 लाख शौचालय बनते हैं तो वह सवा लाख करोड़ रुपये कहाँ से आते हैं? जब 50 करोड़ गरीबों को आयुष्मान भारत के तहत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, पीएमजे के तहत मुफ्त में अगर स्वास्थ्य सेवाएं देनी हैं तो वह जो हज़ारों करोड़ रुपये लगेंगे वह कहाँ से आएंगे वह ईमानदार टैक्स देने से ही आ सकता है। और मैं तो कई हमारे व्यापारी संघठनों के कार्यक्रमों में यह बात रखता हूँ हो सकता है थोड़े समय के लिए हमें कष्ट उठाना पड़ा हो, स्वाभाविक है, आप कोई अच्छा काम करने चले जाओ, बड़ा सरल होता है क्या? अच्छा काम छोड़ी।
आपके घर में बहन कभी पेंटिंग हुई है क्या? पेंटिंग हुई है कभी आपके घर में? पेंटिंग के दो तरीके होते हैं, जब घर में हम रंग लगाते हैं एक होता है कि जो पुराना पेंट लगा हुआ है उसके ऊपर ही एक हाथ लगा दो। एक तो वह तरीका होता है, शायद इस दीवार पर जो रंग लगा है वह उस तरीके से लगा हुआ है, मुझे नहीं लगता इसमें कोई हमने स्क्रैप-डाउन पेंटिंग की है, पुराना निकाला है, डिस्टेंपर डाला है, तीन कोट रंग लगा है, वह तो अभी ज़रूरत नहीं है वह तो अब वास्तु बनेगा अच्छी तरीके से।
आजके कार्यक्रम के लिए हमने इसपर, मुंबई की भाषा अगर इस्तेमाल करने की आपकी अनुमति हो और कोई अन्यथा न ले मैं मुंबई से आता हूँ तो हमने चूना लगाया है। सब समझते हैना चूना लगाना क्या होता है? लेकिन जब हम अपने घर पर रंग करते हैं तो हम ऐसे ऊपर एक पेंट नहीं लगाते हैं क्योंकि वह तो हम सबको पता है कि वह तो थोड़ी देर में निकल जायेगा फिर क्रैक कर जायेगा क्योंकि पीछे नीव अच्छी नहीं है। अंदर शायद दीमक भी छुप जायेगा उस पेंट लगाने से लेकिन वह दीमक फिर बाहर आएगा और वह दीमक खाते जायेगा उसके बाद और हमारे नीव को हल्का करेगा, कमज़ोर करेगा।
और ऐसे ही वर्षों-वर्षों तक इस देश की अर्थव्यवस्था शायद वह दीमक खा-खाकर कमज़ोर होते जा रही है। अगर उस अर्थव्यवस्था को ठीक करना है तो उसको जड़ से ठीक करना पड़ेगा ऊपर से चूना लगाने से अर्थव्यवस्था ठीक नहीं हो सकती। आखिर बेटा हम सबने, और यहाँ मेरी उम्र के हैं, मेरे से शायद ज़्यादा ही उम्र के अधिक लोग बैठे हैं, शायद युवाओं को, युवतियों को हम प्रेरणा नहीं दे पाते हैं इस प्रकार के कार्यक्रमों में। और मैंने वहीँ से शुरू किया था कि उसपर हमें बल देना पड़ेगा, हमें मेहनत करनी पड़ेगी कि अगली पीढ़ी को भी यह बात पहुंचे।
हमने सबने दो-दो बहीखाते रखकर अपना पूरा जीवन निकाल लिया, जब जीएसटी आया, जब नोटबंदी आयी शायद हमको वह कष्ट बहुत महसूस हुआ। पर मैं आपको बताना चाहूंगा जहाँ-जहाँ मैं गया और मेरी ज़िम्मेदारी थी मैं देश भर में घूम आऊं इस विषय को रखने के लिए। चाहे वह ज्वेलर्स हों, जब एक्साइज आया था तब ज्वेलर्स ने बहुत प्रतिक्रिया की थी तब भी मुझे भेजा गया था सबसे बात करने, जब कपडे के व्यापार पर आया जीएसटी तो आंदोलन हुए देश भर में, अलग-अलग प्रकार से।
और मैं यह भी बताऊंगा कि मोदी जी हर आपके फीडबैक को, आपकी प्रतिक्रिया को सुनकर उसको सुधारने लगातार लगे रहते हैं और उसमें हिचकिचाते नहीं है। आखिर जीएसटी में 500 से अधिक आइटम्स पर रेट कम हुए, वह कोई छोटी बात नहीं है, पुराने रेट वही थे जो पहले दिए जाते थे और वह इतने अधिक थे कि वह चोरी करने के लिए प्रोत्साहन देते थे। जैसे-जैसे टैक्स ईमानदार व्यवस्था में बढ़ते जा रहे हैं वैसे-वैसे रेट कम करने की भी क्षमता बन रही है।
लेकिन यह दो बहीखाते रखने का शायद हमने तो अपना जीवन निकाल दिया होगा हमारी उम्र के लोगों ने, व्यापारियों ने, मैं समझता हूँ आप लोग यह नहीं करना चाहते हैं। और मैं जहाँ-जहाँ गया, शायद हमारी उम्र के लोग तो सुनते रहे किसने ताली कभी नहीं बजाई इसलिए मेरी कोई अपेक्षा भी नहीं है, लेकिन जितने युवा रहते थे उसमें किसी कार्यक्रम में वह सबसे ज़्यादा उत्साहित रहते थे। क्योंकि वह नहीं चाहते आपकी हमारी तरह पूरा जीवन बिताना, वह चाहते हैं एक ईमानदार व्यवस्था जिसमें सुबह जब फैक्ट्री या अपने दफ्तर या अपनी दुकान जाओ तो नीचे कोई सफ़ेद एम्बेसडर खड़ी हुई न मिले। और मुझे लगता है हम सबने कभी न कभी अनुभव किया है सफ़ेद एम्बेसडर उसमें वह गोल…. याद है कि नहीं?
अब वह कभी न कभी ख़त्म करने की हमारी इच्छा है कि नहीं है? हमारे युवा चाहते हैं अपना शांति से अपना व्यापार करेंगे, ईमानदार व्यवस्था से व्यापार करेंगे, सबको सामान्य अवसर मिले, टैक्स ईमानदारी से भरेंगे, रात को खाना भोजन करने घूमने फिरने निकलेंगे, पार्टी करेंगे और चैन की नींद सोयेंगे। यह टेंशन नहीं चाहिए कि कल को मेरे ऊपर क्या तकलीफ आ सकती है।
और मुझे लगता है जब ईमानदार व्यवस्था में देश आगे बढ़ेगा तब थोड़े समय के लिए कष्ट भी उठाना पड़े तो वह इस देश के उज्जवल भविष्य के लिए हमारा समाज और व्यापारी समाज कष्ट उठाने के लिए तैयार है। आखिर हम नहीं चाहते कि बच्चों को इस प्रकार की व्यवस्था छोड़कर जाएं। और जो जेन्युइन डिफिकल्टी किसी को भी आये उसको लगातार सुधार करने का हमारा प्रयत्न लगा रहता है।
आज भी मुझे बताया गया, आज मैं पेपर में पढ़ रहा था, दो जीएसटी की कमिटी आज भी बैठी हैं। और शायद 10 तारीख को हो सकता है कुछ खुशखबरी जिसका संकेत माननीय प्रधानमंत्री जी ने आलरेडी दिया भी है। आपको याद होगा पिछले, उसमें हमने पांच करोड़ रुपये तक सबको क्वार्टरली रिटर्न का भी निर्णय ले लिया है, और पांच करोड़ मतलब 93% जीएसटी रजिस्ट्रेशन को अब हर क्वार्टर में एक ही रिटर्न पांच करोड़ तक टर्नओवर के लिए देना पड़ेगा। उसका जीएसटी जो नेटवर्क है, जीएसटीएन नेटवर्क उसमें बदलाव का काम चालू है वह बदलकर जब चेंज हो जायेगा, शायद अप्रैल से वह लागू हो जायेगा, अप्रैल-मई से।
तो मुझे लगता है कि अब हमने कोशिश करनी चाहिए एक ईमानदार व्यवस्था की तरफ देश बढ़ रहा है, हमारा समाज और हमारा व्यापारी वर्ग भी उद्योग वर्ग भी उसके साथ जुड़े। और इसका सबसे बड़ा लाभ शायद हमें कठिनाइयां थोड़ी महसूस हो सकती हैं पर उसका लाभ आप लोगों के लिए मिलेगा, आप के लिए हम एक अच्छा ईमानदार देश छोड़कर जाना चाहते हैं।
और मुझे पूरा विश्वास है यह जो यहाँ भवन बनेगा यह भी एक प्रकार से जब पूरे समाज को देश और दुनिया में जोड़ेगा तो आगे चलकर एक अच्छी हमारी भी भागीदारी रहेगी इस देश को बनाने में, इस देश के विकास में और अधिक भागीदारी के साथ, और अधिक सामाजिक सेवाओं के साथ, और अधिक स्कूल, अस्पताल, कॉलेज, अच्छे कामों को देश भर में करके, ईमानदार व्यवस्थाओं से करके हम अपने समाज का भी नाम रोशन करेंगे, हमारे पूर्वजों के काम को सराहना करेंगे उनको और इज़्ज़त देंगे।
और मुझे पूरा विश्वास है कि महाराजा अग्रसेन जब देखेंगे कि यह समाज अब इस देश की रीड की हड्डी बनकर ईमानदार व्यवस्था को और प्रोत्साहन दे रहा है। यह समाज जब देश और दुनिया में एकजुट हो रहा है, यह समाज जो सामाजिक कुछ गलत काम हमारे समाज में चलते हैं उसको रोकने के लिए पहल कर रहा है। और उसके बारे में मैंने नरेश जी आपसे दो-तीन बार बात की है कि हमने कुछ न कुछ अपने शादी ब्याह के तरीके, बच्चों के बारे में अपनी सोच उन चीज़ों में भी हमें और ज़्यादा महनत करनी पड़ेगी, और ज़्यादा आपस में चर्चा-विचार करके समाज को नयी दिशा के रूप में लेकर जाना पड़ेगा। किस प्रकार से हम अगली पीढ़ी में वह संस्कार डाल सकें जो संस्कार से शुरू हुआ था समाज पर कहीं न कहीं बीच में गलत चीज़ें आ गयी। एक शादी हुई, उस शादी को कॉपी करते-करते दूसरी शादी और अधिक इलेबोरेट हो गयी, तीसरी और अधिक हो गयी, फिर मौके आ गए कि लोन लेकर यह शादी करनी पड़ जाये।
और यह दिखावे में मैं समझता हूँ हमने बहुत ज़्यादा नुकसान किया है समाज का। इन सब चीज़ों में हमारे समाज के बड़े नेता चिंता करें, हमें मार्गदर्शन दें कैसे हम इस बदलाव की तरफ हम सब बढ़ सकते हैं। मैं उसमें पहल करने को तैयार हूँ, मैं आपके साथ जुड़ने के लिए तैयार हूँ। और हम सब मिलकर इस समाज को इस देश का गौरव और पूरे विश्व को हम दिशा दे सकें ऐसा हमारे समाज में शक्ति है और ऐसा काम हम करके पूरी दुनिया को आकर्षित करें इस भवन की तरफ कि आइये इस भवन में देखिये कैसे यह समाज पूरे विश्व को नयी दिशा और नयी रोशनी दे रहा है।
बहुत-बहुत शुभकामनाएं आप सबको।
सिमी जैन जी, गीता गुप्ता जी, मंच पर और नीचे बैठे सभी महानुभाव भाईयों और बहनों, और दोनों बेटियां जिन्होंने एक ने सुन्दर कविता सुनाई, एक ने डॉक्टरी में अपनी पूरी कमाई समाज को और देश को समर्पित की, दोनों को नमन करता हूँ, बधाई देता हूँ। और आज आप सभी को तहे दिल से बधाई देता हूँ कि इतना सुन्दर प्लॉट हमारे समाज को मिला है। मैं अभी-अभी देख रहा था कनॉट प्लेस इतना नज़दीक है कि चलकर जा सकते हैं, आपको गाड़ी भी न लगे ऐसे कनॉट प्लेस, और मुझे लगता है कनॉट प्लेस के इतना निकट ज़मीन, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन भी पांच मिनट, कनॉट प्लेस भी पांच मिनट।
मैं समझता हूँ हम सौभाग्यशाली हैं कि प्रधानमंत्री मोदी जी को जब यह विषय रखा गया कि यहां पर एन्क्रोचमेंट है, प्लॉट की तकलीफ हो रही है उन्होंने क्षण भी नहीं लगाया, तुरंत आदेश दिए कि इसको खाली किया जाये। और शायद इस प्लॉट पर बहुत लोगों की नज़र रही होगी आसान नहीं रहा होगा इस प्लॉट को मिलना। लेकिन नरेश जी को दात दूंगा कि यह लगातार लगभग 20 वर्षों से इस काम के पीछे लगे रहे हैं और हम सबके लिए बहुत ख़ुशी की बात है।
वैसे आज पुण्यतिथि है भारतेन्दु हरिश्चंद्र जी की, पता नहीं हम में से किस को कितना ख्याल है उनका। वह शायद हिंदी साहित्य के शिल्पकार माने जाते हैं, भारतेन्दु हरिश्चंद्र जी। 6 जनवरी 1885 को उनका जन्म हुआ और स्वदेशी भावना को उन्होंने बहुत आगे बढ़ाया था और शायद हमारे अग्रवाल समाज का भी जो इतिहास है उसको पूरा संचालित करने में, लिखने में उनका बहुत बड़ा योगदान था। अब दुर्भाग्य की बात है कि समय बीतता जाता है, हम भी भूल जाते हैं, लोग भी भूल जाते हैं और कुछ मात्रा में हम सबको और मैं भी अपने को आप सबसे जोड़ना चाहूंगा, हम सबके ऊपर ज़िम्मेदारी है कि हम यह सब जानकारियां अपने समाज का जो इतिहास है यह अगली पीढ़ी तक भी पहुंचाएं, नहीं तो हमारी अगली पीढ़ी कटते जा रही है।
अगली पीढ़ी की अपनी प्राथमिकताएं हैं और जब तक हम सब माता-पिता इसको ज़िम्मेदारी से नहीं समझेंगे तब तक मैं समझता हूँ बड़ा मुश्किल होगा इस समाज के इतने सुन्दर इतिहास को, इस समाज की जो नीव रही है, मैं स्वाभाविक रूप से मेरे पहले जो प्रमुख वक्ता आये थे, प्रमुख अतिथि आये थे उन्होंने ज़रूर याद दिलाया होगा महाराजा अग्रसेन की कल्पना को जो एक ईंट और एक रुपये से कैसे समाज को पूरे विश्वभर में एक उद्यमी समाज, एक उद्योजक समाज बनाने में कैसे कल्पना की महाराजा अग्रसेन ने।
अब वह कल्पना ज़रूर अगली पीढ़ी में जाएगी लेकिन अगर इतिहास से वंचित रही अगली पीढ़ी तो मैं समझता हूँ इस समाज की जो विशेषताएं हैं और कुछ विशेषताएं अभी बहन श्रूति ने भी सुनाई, यह आगे बढ़ेगी नहीं, यह आगे पलपेगी नहीं, यह और ज़्यादा फलेंगी फूलेंगी नहीं। और मेरा तो अनुरोध यही रहेगा कि कैसे महानुभाओं ने इस समाज को गौरवशाली बनाया, कैसे हमारे पूर्वजों ने इस समाज को देश और विदेश तक पहुँचाया, कैसे इस समाज में सबसे ज़्यादा दानवीरता दिखाई।
आखिर लाला लाजपत राय क्या एक इतिहास के पन्नों में एक छोटे पैराग्राफ में रह जायेंगे? या हम अपने बच्चों को बताएँगे उनकी क्या-क्या सैक्रिफाइस रही। क्या कभी न कभी जिस प्रकार से दानवीरता हमारे समाज ने इतने वर्षों में दिखाई – स्कूल हो, कॉलेज हो, अस्पताल हो, हर क्षेत्र में। वैसे तो मदन मोहन मालवीय जी ने जो काशी विद्यापीठ बनाई, काशी विश्वविद्यालय उसमें भी हमारे समाज का बहुत बड़ा योगदान था। और हम गिनते रहें तो मैं समझता हूँ कितने भी संस्थाएं देश भर में देखें उसमें आर्थिक रूप से और मैं समझता हूँ अपने खुदके प्रयत्नों में भी हमारा समाज कभी पीछे नहीं रहा है, सबसे अग्रसर रहा है, सबसे आगे रहा है।
मुझे ख़ुशी है कि जो कल्पना नंदकिशोर जी ने अभी रखी कि यहाँ पर जो प्रकल्प बनेगा वह भी इस इतिहास को संचालित करेगा, सबको इकट्ठा करेगा, वह देश और दुनिया में अपने समाज तक पहुँचने की चेष्टा करेगा। अपने समाज के जो रत्न रहे हैं उनकी जानकारियां निकालेगा। मुझे पता नहीं आपमें से किसी ने पढ़ी है कि नहीं एक अंग्रेजी किताब एलेक्स हेली ने लिखी थी – रूट्स – और उस व्यक्ति ने, एलेक्स हेली ने अपने पूर्वजों को ढूँढ़ते-ढूँढ़ते शायद वह तो अमेरिका में रहता था लेकिन ढूँढ़ते-ढूँढ़ते लगभग 700-800 साल पीछे जाकर अपने पूर्वजों की पहचान निकाली, इतिहास निकाला और उसके ऊपर वह किताब, रूट्स, लिखी थी।
मैं समझता हूँ यह इतिहास सिर्फ पन्ने भरने के लिए या सिर्फ इतिहास इकट्ठा करने के हिसाब से नहीं लेकिन उनकी सोच पुराने ज़माने में क्या कठिनाइयों से समाज गुज़रा है, किस प्रकार से इवॉल्व हुआ है, किस प्रकार से ग्रो किया है, बढ़ा है, पल्पा है वह जब बाहर आएगा तो आगे आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देगा।
यह जो यहाँ भवन बनेगा मैं समझता हूँ एक मौका है हमारे पास समाज को एकत्र करने का। मैंने मज़ाक़ में, और मैं माफ़ी चाहूंगा अगर किसी की भावना को ठेस पहुंचे पर कुछ असलियत हमें स्वीकार करनी पड़ेगी। और बहन श्रूति जी को भी मैं थोड़ा बताऊंगा बाद में, आपने कुछ दो-तीन विषय उठाये थे उसके बारे में भी बताऊंगा। लेकिन मैं समझता हूँ जो हमारे समाज की सबसे बड़ी कमज़ोरी रही है वह यह रही है कि हम बंटते गए हैं, हमने समाज में संस्था बनाई, संस्था में स्वाभाविक है आज नरेश जी ने कोई संस्था बनाई, आहिस्ते-आहिस्ते नए लोग जुड़ेंगे, नए लोग आएंगे, नए पदाधिकारी बनेंगे, नए लोग प्राथमिक स्थान लेंगे तो व्यक्ति नाराज़ होकर अपनी दूसरी संस्था बना लेगा। और पद और प्राथमिकता के लालच में, कोई मेहरबानी करके बुरा न माने इस बात को, लेकिन हमने इतना बाँट दिया है अपना समाज कि हमारा वर्चस्व किधर हम बना नहीं पाए। जिस व्यक्ति को पद नहीं मिला उसने अपनी नयी संस्था बना ली और ऐसे करते-करते शायद आज देश और दुनिया में देखें तो पता नहीं हज़ारों होंगी, लाखों होंगी या कितनी संस्थाएं होंगी।
आज कोई पूछे कि कितने लोग जुड़े हुए हैं हमारे साथ हम कोई आंकड़ा नहीं बना सकते क्योंकि हम इतना बट गए हैं, हमने कभी अपने आपको … नहीं किया, कभी एकजुट होकर नहीं सोचा। और शायद यही कारण रहा कि समाज में एक होड़ सी लग गयी है कि कौन आगे है कौन पीछे है। और जो कल्पना से महाराजा अग्रसेन ने एक प्रकार से सबको जोड़ा था, आखिर जब गांव का हर व्यक्ति एक ईंट और एक रुपया देता था तब समाज को भी जोड़ने का एक साधन था और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह रही है कि हम बटते-बटते ऐसे बट गए हैं कि कोई हमारे समाज की पहचान हम देश और दुनिया में बना नहीं पाए।
और मुझे लगता है, मैंने तो कहा था इसी वास्तु से शुरू करें यह कोशिश कि क्या हम पूरे समाज को जोड़ने वाला वास्तु बना सकते हैं, क्या हम पूरे समाज को जोड़ने का एक मौका ढूंढ सकते हैं? क्या हम, खासतौर पर हम सब नेता यह तय कर सकते हैं कि हम पद नहीं लेंगे? चलो युवाओं को जोड़ते हैं, युवा-युवतियों को जोड़ते हैं, उनको पद पर रखकर उनको कहते हैं कि वह समाज को आगे जोड़ें, हम पीछे से सहायता करें, हम पीछे से प्रोत्साहन दें।
और मुझे लगता है जितना सामाजिक काम हमारे समाज ने किया है, जितना शिक्षा के क्षेत्र में, स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमारा एक पूरे देश भर में फैलाव है उसको अब एक और ज़ोर लगाने का समय आ गया है। हम सब अगर याद करें तो ज़रूर हम पाएंगे कि यह संस्था 50 साल पुरानी है, यह संस्था 80 साल पुरानी है, यह संस्था मेरे दादा ने शुरू की थी, यह संस्था मेरे पिता ने शुरू की थी। क्या हम यह देखें कि 20 और 30 वर्ष की आयु के हमारे जितने समाज के नवरत्न हैं, आगे भविष्य हैं उन्होंने कितनी संस्थाएं शुरू की, क्या हम वह ढूंढने की कोशिश कर सकते हैं?
क्यों हमारा 20 साल का नौजवान उसके दिल में क्यों नहीं भावना आ रही है कि मैं एक स्कूल शुरू करूँगा। जैसे बहन ने अपनी पूरी कमाई, डॉक्टर बहन ने, पूरी कमाई कहा कि मैं समाज में दूंगी, ऐसे हमारे कितने युवा-युवती हम निकाल सकते हैं चलो उसको ढूंढें। ढूंढें हम नयी संस्थाएं कितनी खड़ी करेंगे कि लोगों को शिक्षा अच्छी प्राप्त हो, लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं अच्छी प्राप्त हो।
आखिर एक प्रकार से आप देखिये इस सरकार ने क्या कोशिश की, मैं इसमें राजनीतिकरण नहीं लाना चाह रहा हूँ लेकिन आप देखिये सरकार की मेहनत। जब हर एक परिवार में खाता खुले और उसमें भी प्राथमिकता हो कि बहनों का खाता खुले जन धन योजना के तहत, तब 33 करोड़ अगर खाते खुले तो उसके पीछे हेतु क्या था कि फाइनेंशियल इन्क्लूजन हो, बैंकिंग व्यवस्था से सभी परिवार जुड़ें। जब प्रधानमंत्री आवास योजना में यह निश्चय किया और संकल्प लिया कि देश में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं होगा जिसके सर पर छत नहीं हो, जिसके खुदका मकान नहीं हो, उस मकान में स्वाभाविक है चौबीस घंटे बिजली मिले, बिजली सबको मिले कोई वंचित न रहे, पेयजल मिले अच्छा, शौचालय हो।
आखिर हमारी माता-बहनों की आत्मसम्मान भी हमारी ज़िम्मेदारी है, कब तक खेतों में जाकर अपनी दिनचर्या शुरू करेंगी बहनें। और आपको जानकर आश्चर्य होगा जब यह सरकार आयी 2014 में तब तीन में से दो बहनें बिना शौच के अपना जीवन बिताती थी, आज 95% घरों में शौचालय है। स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा अच्छी मिले नज़दीक में, 2022 तक अगर यह कल्पना की गयी है मुद्रा योजना की पहल की। मुझे पता नहीं है आप में से किस को जानकारी है, मुद्रा योजना जो छोटे लोन से 10 लाख रुपये तक के लोन बिना सिक्योरिटी, श्योरिटी के, कोई जामिनदार नहीं लगेगा उसको। उसमें 12 करोड़ से अधिक लोगों को उसका लाभ मिला है, लाभार्थी 12 करोड़ से अधिक मुद्रा लोन के लाभार्थी हैं। और उसमें 70% महिलाएं हैं।
आखिर यह कल्पना, मुद्रा योजना हो, जन धन खाता हो, या हर एक के सर पर छत हो, इसमें और महाराजा अग्रसेन जी की सोच में भाईयों बहनों बताइये क्या फर्क है? एक ईंट, एक रुपया फिर चाहे जन धन योजना हो, मुद्रा योजना हो, आयुष्मान भारत हो या प्रधानमंत्री आवास योजना हो। यह सब महाराजा अग्रसेन जी ने जो बात हम सबके लिए छोड़कर गए थे उसका प्रतीक है, और शायद प्रधानमंत्री मोदी जी को भी प्रेरणा महाराजा अग्रसेन से आयी हो। अब वह आप लोग सोचो।
पर हमने कभी उनको बांटा नहीं है किसी एक समाज में या दूसरे समाज में, मैं समझता हूँ मोदी जी पूरे देश और विश्व के आज नेता बन गए हैं। और वास्तव में उनकी जो सोच है कि इस देश में हर गरीब का जीवन स्तर उठे, विकास सबका हो, विकास यह नहीं चुने कि इस समाज का होगा, इस धर्म का होगा, इस व्यक्ति विशेष का होगा, सबको मौका मिले।
और बहन श्रूति को बताना चाहूंगा चाहे वह नोटबंदी हो, चाहे वह जीएसटी हो, चाहे वह जैसे मैंने बताया मुद्रा योजना हो, चाहे वह जन धन योजना हो, चाहे बीमा की सुरक्षा योजनाएं हो, चाहे किसानों के लिए फसल बीमा योजना हो या मिनिमम सपोर्ट प्राइस डेढ़ गुना देकर उनकी भी आमदनी को दोगुना करने की कोशिश हो। चाहे प्रधानमंत्री आवास योजना में हर एक को घर मिले और या चाहे शौचालय की योजना हो जो बहनों को आत्मसम्मान दें।
यह सब अगर होता है तो हम सब जब अपना टैक्स भरते हैं उस टैक्स के पैसे से होता है कोई बाहर से पैसा नहीं आता। और यह हम सबके लिए गर्व की बात है कि हम सब, आपने बनिया शब्द यूज़ किया मैं व्यापारी शब्द यूज़ करना चाहूंगा, हम सब व्यापारी हम सब अपने-अपने क्षेत्र में जब काम करते हैं, जब हम टैक्स देते हैं उसी से सरकारी व्यवस्थाएं बनती हैं, उसी से देश की सुरक्षा बनती है। आखिर पुलिस की तनख्वाह कहाँ से जाती है? आखिर सैनिकों की तनख्वाह कहाँ से जाती है?
आखिर जब 9 करोड़ 45 लाख – ध्यान दीजिये, 9 करोड़ 45 लाख शौचालय बनते हैं तो वह सवा लाख करोड़ रुपये कहाँ से आते हैं? जब 50 करोड़ गरीबों को आयुष्मान भारत के तहत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, पीएमजे के तहत मुफ्त में अगर स्वास्थ्य सेवाएं देनी हैं तो वह जो हज़ारों करोड़ रुपये लगेंगे वह कहाँ से आएंगे वह ईमानदार टैक्स देने से ही आ सकता है। और मैं तो कई हमारे व्यापारी संघठनों के कार्यक्रमों में यह बात रखता हूँ हो सकता है थोड़े समय के लिए हमें कष्ट उठाना पड़ा हो, स्वाभाविक है, आप कोई अच्छा काम करने चले जाओ, बड़ा सरल होता है क्या? अच्छा काम छोड़ी।
आपके घर में बहन कभी पेंटिंग हुई है क्या? पेंटिंग हुई है कभी आपके घर में? पेंटिंग के दो तरीके होते हैं, जब घर में हम रंग लगाते हैं एक होता है कि जो पुराना पेंट लगा हुआ है उसके ऊपर ही एक हाथ लगा दो। एक तो वह तरीका होता है, शायद इस दीवार पर जो रंग लगा है वह उस तरीके से लगा हुआ है, मुझे नहीं लगता इसमें कोई हमने स्क्रैप-डाउन पेंटिंग की है, पुराना निकाला है, डिस्टेंपर डाला है, तीन कोट रंग लगा है, वह तो अभी ज़रूरत नहीं है वह तो अब वास्तु बनेगा अच्छी तरीके से।
आजके कार्यक्रम के लिए हमने इसपर, मुंबई की भाषा अगर इस्तेमाल करने की आपकी अनुमति हो और कोई अन्यथा न ले मैं मुंबई से आता हूँ तो हमने चूना लगाया है। सब समझते हैना चूना लगाना लगेगा उसको। उसमें 12 करोड़ से अधिक लोगों को उसका लाभ मिला है, लाभार्थी 12 करोड़ से अधिक मुद्रा लोन के लाभार्थी हैं। और उसमें 70% महिलाएं हैं।
आखिर यह कल्पना, मुद्रा योजना हो, जन धन खाता हो, या हर एक के सर पर छत हो, इसमें और महाराजा अग्रसेन जी की सोच में भाईयों बहनों बताइये क्या फर्क है? एक ईंट, एक रुपया फिर चाहे जन धन योजना हो, मुद्रा योजना हो, आयुष्मान भारत हो या प्रधानमंत्री आवास योजना हो। यह सब महाराजा अग्रसेन जी ने जो बात हम सबके लिए छोड़कर गए थे उसका प्रतीक है, और शायद प्रधानमंत्री मोदी जी को भी प्रेरणा महाराजा अग्रसेन जी से आयी है। अब वह आप लोग सोचो।
पर हमने कभी उनको बांटा नहीं है किसी एक समाज में या दूसरे समाज में, मैं समझता हूँ मोदी जी पूरे देश और विश्व के आज नेता बन गए हैं। और वास्तव में उनकी जो सोच है कि इस देश में हर गरीब का जीवन स्तर उठे, विकास सबका हो, विकास यह नहीं चुने कि इस समाज का होगा, इस धर्म का होगा, इस व्यक्ति विशेष का होगा, सबको मौका मिले। और बहन श्रूति को बताना चाहूंगा चाहे वह नोटबंदी हो, चाहे वह जीएसटी हो, चाहे वह जैसे मैंने बताया मुद्रा योजना हो, चाहे वह जन धन योजना हो, चाहे बीमा की सुरक्षा योजनाएं हो, चाहे किसानों के लिए फसल बीमा योजना हो या मिनिमम सपोर्ट प्राइस डेढ़ गुना देकर उनकी भी आमदनी को दोगुना करने की कोशिश हो। चाहे प्रधानमंत्री आवास योजना में हर एक को घर मिले और या चाहे शौचालय की योजना हो जो बहनों को आत्मसम्मान दें।
यह सब अगर होता है तो हम सब जब अपना टैक्स भरते हैं उस टैक्स के पैसे से होता है कोई बाहर से पैसा नहीं आता। और यह हम सबके लिए गर्व की बात है कि हम सब, आपने बनिया शब्द यूज़ किया मैं व्यापारी शब्द यूज़ करना चाहूंगा, हम सब व्यापारी हम सब अपने-अपने क्षेत्र में जब काम करते हैं, जब हम टैक्स देते हैं उसी से सरकारी व्यवस्थाएं बनती हैं, उसी से देश की सुरक्षा बनती है। आखिर पुलिस की तनख्वाह कहाँ से जाती है? आखिर सैनिकों की तनख्वाह कहाँ से जाती है?
आखिर जब 9 करोड़ 45 लाख – ध्यान दीजिये, 9 करोड़ 45 लाख शौचालय बनते हैं तो वह सवा लाख करोड़ रुपये कहाँ से आते हैं? जब 50 करोड़ गरीबों को आयुष्मान भारत के तहत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, पीएमजे के तहत मुफ्त में अगर स्वास्थ्य सेवाएं देनी हैं तो वह जो हज़ारों करोड़ रुपये लगेंगे वह कहाँ से आएंगे वह ईमानदार टैक्स देने से ही आ सकता है। और मैं तो कई हमारे व्यापारी संघठनों के कार्यक्रमों में यह बात रखता हूँ हो सकता है थोड़े समय के लिए हमें कष्ट उठाना पड़ा हो, स्वाभाविक है, आप कोई अच्छा काम करने चले जाओ, बड़ा सरल होता है क्या? अच्छा काम छोड़ी।
आपके घर में बहन कभी पेंटिंग हुई है क्या? पेंटिंग हुई है कभी आपके घर में? पेंटिंग के दो तरीके होते हैं, जब घर में हम रंग लगाते हैं एक होता है कि जो पुराना पेंट लगा हुआ है उसके ऊपर ही एक हाथ लगा दो। एक तो वह तरीका होता है, शायद इस दीवार पर जो रंग लगा है वह उस तरीके से लगा हुआ है, मुझे नहीं लगता इसमें कोई हमने स्क्रैप-डाउन पेंटिंग की है, पुराना निकाला है, डिस्टेंपर डाला है, तीन कोट रंग लगा है, वह तो अभी ज़रूरत नहीं है वह तो अब वास्तु बनेगा अच्छी तरीके से।
आजके कार्यक्रम के लिए हमने इसपर, मुंबई की भाषा अगर इस्तेमाल करने की आपकी अनुमति हो और कोई अन्यथा न ले मैं मुंबई से आता हूँ तो हमने चूना लगाया है। सब समझते हैना चूना लगाना क्या होता है? लेकिन जब हम अपने घर पर रंग करते हैं तो हम ऐसे ऊपर एक पेंट नहीं लगाते हैं क्योंकि वह तो हम सबको पता है कि वह तो थोड़ी देर में निकल जायेगा फिर क्रैक कर जायेगा क्योंकि पीछे नीव अच्छी नहीं है। अंदर शायद दीमक भी छुप जायेगा उस पेंट लगाने से लेकिन वह दीमक फिर बाहर आएगा और वह दीमक खाते जायेगा उसके बाद और हमारे नीव को हल्का करेगा, कमज़ोर करेगा।
और ऐसे ही वर्षों-वर्षों तक इस देश की अर्थव्यवस्था शायद वह दीमक खा-खाकर कमज़ोर होते जा रही है। अगर उस अर्थव्यवस्था को ठीक करना है तो उसको जड़ से ठीक करना पड़ेगा ऊपर से चूना लगाने से अर्थव्यवस्था ठीक नहीं हो सकती। आखिर बेटा हम सबने, और यहाँ मेरी उम्र के हैं, मेरे से शायद ज़्यादा ही उम्र के अधिक लोग बैठे हैं, शायद युवाओं को, युवतियों को हम प्रेरणा नहीं दे पाते हैं इस प्रकार के कार्यक्रमों में। और मैंने वहीँ से शुरू किया था कि उसपर हमें बल देना पड़ेगा, हमें मेहनत करनी पड़ेगी कि अगली पीढ़ी को भी यह बात पहुंचे।
हमने सबने दो-दो बहीखाते रखकर अपना पूरा जीवन निकाल लिया, जब जीएसटी आया, जब नोटबंदी आयी शायद हमको वह कष्ट बहुत महसूस हुआ। पर मैं आपको बताना चाहूंगा जहाँ-जहाँ मैं गया और मेरी ज़िम्मेदारी थी मैं देश भर में घूम आऊं इस विषय को रखने के लिए। चाहे वह ज्वेलर्स हों, जब एक्साइज आया था तब ज्वेलर्स ने बहुत प्रतिक्रिया की थी तब भी मुझे भेजा गया था सबसे बात करने, जब कपडे के व्यापार पर आया जीएसटी तो आंदोलन हुए देश भर में, अलग-अलग प्रकार से।
और मैं यह भी बताऊंगा कि मोदी जी हर आपके फीडबैक को, आपकी प्रतिक्रिया को सुनकर उसको सुधारने लगातार लगे रहते हैं और उसमें हिचकिचाते नहीं है। आखिर जीएसटी में 500 से अधिक आइटम्स पर रेट कम हुए, वह कोई छोटी बात नहीं है, पुराने रेट वही थे जो पहले दिए जाते थे और वह इतने अधिक थे कि वह चोरी करने के लिए प्रोत्साहन देते थे। जैसे-जैसे टैक्स ईमानदार व्यवस्था में बढ़ते जा रहे हैं वैसे-वैसे रेट कम करने की भी क्षमता बन रही है।
लेकिन यह दो बहीखाते रखने का शायद हमने तो अपना जीवन निकाल दिया होगा हमारी उम्र के लोगों ने, व्यापारियों ने, मैं समझता हूँ आप लोग यह नहीं करना चाहते हैं। और मैं जहाँ-जहाँ गया, शायद हमारी उम्र के लोग तो सुनते रहे किसने ताली कभी नहीं बजाई इसलिए मेरी कोई अपेक्षा भी नहीं है, लेकिन जितने युवा रहते थे उसमें किसी कार्यक्रम में वह सबसे ज़्यादा उत्साहित रहते थे। क्योंकि वह नहीं चाहते आपकी हमारी तरह पूरा जीवन बिताना, वह चाहते हैं एक ईमानदार व्यवस्था जिसमें सुबह जब फैक्ट्री या अपने दफ्तर या अपनी दुकान जाओ तो नीचे कोई सफ़ेद एम्बेसडर खड़ी हुई न मिले। और मुझे लगता है हम सबने कभी न कभी अनुभव किया है सफ़ेद एम्बेसडर उसमें वह गोल…. याद है कि नहीं?
अब वह कभी न कभी ख़त्म करने की हमारी इच्छा है कि नहीं है? हमारे युवा चाहते हैं अपना शांति से अपना व्यापार करेंगे, ईमानदार व्यवस्था से व्यापार करेंगे, सबको सामान्य अवसर मिले, टैक्स ईमानदारी से भरेंगे, रात को खाना भोजन करने घूमने फिरने निकलेंगे, पार्टी करेंगे और चैन की नींद सोयेंगे। यह टेंशन नहीं चाहिए कि कल को मेरे ऊपर क्या तकलीफ आ सकती है।
और मुझे लगता है जब ईमानदार व्यवस्था में देश आगे बढ़ेगा तब थोड़े समय के लिए कष्ट भी उठाना पड़े तो वह इस देश के उज्जवल भविष्य के लिए हमारा समाज और व्यापारी समाज कष्ट उठाने के लिए तैयार है। आखिर हम नहीं चाहते कि बच्चों को इस प्रकार की व्यवस्था छोड़कर जाएं। और जो जेन्युइन डिफिकल्टी किसी को भी आये उसको लगातार सुधार करने का हमारा प्रयत्न लगा रहता है।
आज भी मुझे बताया गया, आज मैं पेपर में पढ़ रहा था, दो जीएसटी की कमिटी आज भी बैठी हैं। और शायद 10 तारीख को हो सकता है कुछ खुशखबरी जिसका संकेत माननीय प्रधानमंत्री जी ने आलरेडी दिया भी है। आपको याद होगा पिछले, उसमें हमने पांच करोड़ रुपये तक सबको क्वार्टरली रिटर्न का भी निर्णय ले लिया है, और पांच करोड़ मतलब 93% जीएसटी रजिस्ट्रेशन को अब हर क्वार्टर में एक ही रिटर्न पांच करोड़ तक टर्नओवर के लिए देना पड़ेगा। उसका जीएसटी जो नेटवर्क है, जीएसटीएन नेटवर्क उसमें बदलाव का काम चालू है वह बदलकर जब चेंज हो जायेगा, शायद अप्रैल से वह लागू हो जायेगा, अप्रैल-मई से।
तो मुझे लगता है कि अब हमने कोशिश करनी चाहिए एक ईमानदार व्यवस्था की तरफ देश बढ़ रहा है, हमारा समाज और हमारा व्यापारी वर्ग भी उद्योग वर्ग भी उसके साथ जुड़े। और इसका सबसे बड़ा लाभ शायद हमें कठिनाइयां थोड़ी महसूस हो सकती हैं पर उसका लाभ आप लोगों के लिए मिलेगा, आप के लिए हम एक अच्छा ईमानदार देश छोड़कर जाना चाहते हैं।
और मुझे पूरा विश्वास है यह जो यहाँ भवन बनेगा यह भी एक प्रकार से जब पूरे समाज को देश और दुनिया में जोड़ेगा तो आगे चलकर एक अच्छी हमारी भी भागीदारी रहेगी इस देश को बनाने में, इस देश के विकास में और अधिक भागीदारी के साथ, और अधिक सामाजिक सेवाओं के साथ, और अधिक स्कूल, अस्पताल, कॉलेज, अच्छे कामों को देश भर में करके, ईमानदार व्यवस्थाओं से करके हम अपने समाज का भी नाम रोशन करेंगे, हमारे पूर्वजों के काम को सराहना करेंगे उनको और इज़्ज़त देंगे।
और मुझे पूरा विश्वास है कि महाराजा अग्रसेन जब देखेंगे कि यह समाज अब इस देश की रीड की हड्डी बनकर ईमानदार व्यवस्था को और प्रोत्साहन दे रहा है। यह समाज जब देश और दुनिया में एकजुट हो रहा है, यह समाज जो सामाजिक कुछ गलत काम हमारे समाज में चलते हैं उसको रोकने के लिए पहल कर रहा है। और उसके बारे में मैंने नरेश जी आपसे दो-तीन बार बात की है कि हमने कुछ न कुछ अपने शादी ब्याह के तरीके, बच्चों के बारे में अपनी सोच उन चीज़ों में भी हमें और ज़्यादा महनत करनी पड़ेगी, और ज़्यादा आपस में चर्चा-विचार करके समाज को नयी दिशा के रूप में लेकर जाना पड़ेगा। किस प्रकार से हम अगली पीढ़ी में वह संस्कार डाल सकें जो संस्कार से शुरू हुआ था समाज पर कहीं न कहीं बीच में गलत चीज़ें आ गयी। एक शादी हुई, उस शादी को कॉपी करते-करते दूसरी शादी और अधिक इलेबोरेट हो गयी, तीसरी और अधिक हो गयी, फिर मौके आ गए कि लोन लेकर यह शादी करनी पड़ जाये।
और यह दिखावे में मैं समझता हूँ हमने बहुत ज़्यादा नुकसान किया है समाज का। इन सब चीज़ों में हमारे समाज के बड़े नेता चिंता करें, हमें मार्गदर्शन दें कैसे हम इस बदलाव की तरफ हम सब बढ़ सकते हैं। मैं उसमें पहल करने को तैयार हूँ, मैं आपके साथ जुड़ने के लिए तैयार हूँ। और हम सब मिलकर इस समाज को इस देश का गौरव और पूरे विश्व को हम दिशा दे सकें ऐसा हमारे समाज में शक्ति है और ऐसा काम हम करके पूरी दुनिया को आकर्षित करें इस भवन की तरफ कि आइये इस भवन में देखिये कैसे यह समाज पूरे विश्व को नयी दिशा और नयी रोशनी दे रहा है।
बहुत-बहुत शुभकामनाएं आप सबको।
हम सबको आशीर्वाद देने के लिए उन्होंने अपना समय दिया, शिवकुमार जी के साथ शायद पैदाइश जबसे हुई है तबसे ही मेरा निकट संबंध रहा है। खुराना जी हम सबके नेता थे, हम सब उनको बहुत इज़्ज़त आदर करते थे लेकिन वह हम सबको बहुत प्यार करते थे। और मैं समझता हूँ एक साथ लगभग स्वर्गीय श्रद्धेय अटल जी का जाना और श्रद्धेय मदन लाल जी का जाना एक प्रकार से पार्टी को ही नहीं, हम सबको ही नहीं पूरे देश को बहुत बड़ी छति पहुंची है। पर अच्छा लगता है जब आंटी हमारे बीच में रहती हैं, हम सबको प्रोत्साहन देती हैं और लगातार उनका भी आशीर्वाद और सहयोग हम सबके कार्यक्रमों में मिलता रहता है।
राज खुराना जी अपने आपमें एक समाज सेविका हैं और बहुत ही हम सबके लिए प्रेरणा देती रहती हैं कैसे किस दिशा में हम सबको काम करना चाहिए, मैं दोनों महानुभाओं को नमन करता हूँ। राजकुमार भाटिया जी ने मैं समझता हूँ हम में से सभी को विद्यार्थी परिषद में नेतृत्व दिया, सबको लगाम पकड़कर सिखाया किस प्रकार से समाज सेवा करना है, राजनीतिक काम करना है और चौपाल के काम को भी जिस प्रकार से राजकुमार जी ने, भोलानाथ विद जी ने, रवि बंसल जी ने, इन सबने दिशा दी है, जिस प्रकार से चौपाल को आगे बढ़ाया है मैं बधाई दूंगा सभी चौपाल के पदाधिकारियों को, सभी चौपाल के साथ जुड़े हुए कार्यकर्ताओं को कि एक बहुत अच्छा काम, और खासतौर पर आज का अगर देखें यह श्री गोपाल फाउंडेशन के द्वारा गरीबों को, मध्यम वर्गीय हमारे समाज के भाई बहनों को आत्मनिर्भर करने के काम को जो गति दी है उसके लिए मैं श्री गोपाल फाउंडेशन, मेयर आदेश गुप्ता जी, उनके परिवार को और चौपाल से जुड़े हुए सभी महानुभाओं को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ।
मेरे मित्र और पार्टी के वरिष्ठ नेता, श्री विजेंद्र गुप्ता जी, श्री सतीश उपाध्याय जी, भारत भूषण, मदन जी, रविंद्र इन्द्रराज सीए जी, छैल बिहारी गोस्वामी जी, और सभी यहाँ पर उपस्थित पार्टी के कार्यकर्ताओं को अच्छे कामों में, समाज सेवा में जुड़ने से जो राजनीतिक कामों में भी गति मिलती है, जो राजनीतिक और समाज सेवा को जोड़ने का काम करने का प्रयास लगातार भारतीय जनता पार्टी करती है उसके लिए बहुत-बहुत बधाई दूंगा।
मंच पर बैठे सभी महानुभाव, यहाँ उपस्थित सभी भाई बहन, युवा-युवती और खासतौर पर यह प्यारे बच्चे जो इस देश का भविष्य हैं, आप सभी को नव वर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ। और मुझे विश्वास है यह वर्ष आप सबके जीवन में बहुत नया उजाला भी लाएगा और बहुत तेज़ी से विकास की गति भी आप सबके जीवन में आएगी यह मेरी आप सबको बहुत-बहुत तहे दिल से शुभकामना है।
जब मुझे बताया गया कि 500 महिलाओं को एक छोटा माइक्रो लोन देकर औरसाथ ही साथ 51 ई-रिक्शा देने से हम गरीब परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के काम को आगे बढ़ा रहे हैं तब वास्तव में बहुत प्रसन्नता हुई क्योंकि माननीय प्रधानमंत्री जी ने जब पहले दिन उनका चुनाव हुआ कि वह देश के प्रधानमंत्री बनेंगे, भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के सभी सांसदों ने उनको यह ज़िम्मेदारी दी तब पहले दिन ही माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने घोषित किया कि यह सरकार गरीबों के लिए समर्पित रहेगी, यह सरकार महिलाओं के लिए समर्पित रहेगी, यह सरकार युवा-युवतियों के लिए समर्पित रहेगी, यह सरकार उन सामाजिक वर्गों के लिए समर्पित होगी जो वर्षों दशकों से वंचित रहे, शोषित रहे। यह सरकार किसानों की सरकार होगी, यह किसान और उद्योग दोनों को प्रोत्साहन देगी और जब तक सबका साथ और सबके विकास में हम सफल नहीं होंगे तब तक हम चैन की नींद नहीं सोयेंगे, दिन और रात एक करके देश और जनता की सेवा में लगे रहेंगे।
और मैं समझता हूँ भारत के लिए सौभाग्य है कि ऐसा प्रधानमंत्री मिला है जिसने पांच वर्ष में एक दिन भी छुट्टी न ली हो, पूरे पांच वर्ष दिन और रात एक करते हुए देश की चिंता, देश के गरीबों की चिंता, देश के किसानों की चिंता, हर वर्ग की चिंता करते हुए आज हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि अगर विश्व में सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाली, विकास करने वाली अर्थव्यवस्था एक तरफ भारत बनी है तो एक दूसरी तरफ समाज के हर वर्ग में कैसे जीवन स्तर सुधरे, कैसे गरीबों का जीवन स्तर सुधरे, कैसे महिलाओं को आत्मसम्मान मिले, कैसे महिलाओं का एक प्रकार से रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीज़ों पर समाज और सरकार चिंता करे ऐसी सरकार शायद पहली बार देश ने देखी है, उसका काम देखा है।
अगर हम देखते जाएं तो एक-एक विषय में जो भारत सरकार ने अलग-अलग योजनाओं के द्वारा गरीब से गरीब व्यक्ति तक सरकारी कामों को पहुंचाने का प्रयत्न किया है मैं समझता हूँ यह ऐतिहासिक काम हुआ है। आप कोई योजना देख लीजिये, पहले दिन से शुरू की गयी जन धन योजना जिससे देश में हर एक व्यक्ति कोफाइनेंशियल इन्क्लूजन, एक बैंकिंग व्यवस्था के साथ जोड़ने का काम शुरू किया गया।
आज हम सबके लिए ख़ुशी की बात है शायद ही कोई परिवार होगा देश में जिसमें आज बैंक का खाता न हो और लगभग 33 करोड़ जन धन योजना के तहत खाते खोले गए, और करोड़ों की संख्या में अलग-अलग योजनाओं से बीमा गरीब लोगों तक पहुंचाने का काम जो सरकार ने किया यह अपने आपमें दर्शाता है कि किस प्रकार से प्रधानमंत्री जी ने चिंता की कि जब तक बैंकिंग व्यवस्था और गरीब को न जोड़ा जाये तब तक गरीबों तक जो सरकार की राशि पहुंचनी है, गरीबों तक जो सरकार की सब्सिडी पहुंचनी है यह बिचौलिए खा जाते हैं, यह मिडिलमेन आ जाते हैं। उन सबको काटकर कैसे सरकार एक-एक पैसा गरीब तक पहुंचाए, उन्होंने लाचारी नहीं दिखाई, पहले के प्रधानमंत्रियों की तरह यह नहीं बोला कि 100 रुपये दिल्ली से निकलते हैं, मात्र 15 रुपये गरीब तक पहुँचते हैं, लेकिन मैं क्या करूँ मैं तो लाचार हूँ, इस प्रकार की उन्होंने सोच कभी नहीं करी।
एक परिवार जो दशकों से इस देश में राज कर रहा है और जो कब से कहते रहे हैं कि हम गरीबों के मसीहा हैं, हम गरीबों तक काम करेंगे और गरीबी हटाएंगे, जिसने वास्तव में लाचारी के अलावा गरीबों को वास्तव में उनके जीवन स्तर को सुधारने के लिए काम करने के लिए प्रयत्न नहीं किया, सिर्फ वोट बटोरने का काम किया, उस परिवार की तरह सिर्फ यह नहीं जताया कि हम 100 रुपये भेजेंगे और 15 रुपये ही आपको मिलेंगे।
प्रधानमंत्री जी ने पहला कार्यक्रम जन धन का इसलिए किया कि हर व्यक्ति के घर तक, हर व्यक्ति को सीधा लाभ पहुंचाने के लिए हम सक्षम बनाएं, व्यवस्था बनाएं। और आज ख़ुशी होती है जब हम देखतेहैं कि हज़ारों करोड़ रुपये जो बीच में बिचौलिए खा जाते थे वह आज गरीब के घर तक पहुँचते हैं और उसी के कारण आज इस देश में 9 करोड़ से अधिक शौचालय गरीबों के घर में बनाने में सरकार सफल हुई है।
और मैं समझता हूँ हमारी माँ-बहनों के लिए यह उनके सम्मान के लिए बहुत ज़रूरी था कि हर घर में शौचालय पहुंचे और मैं इस बात से बहुत पीड़ित रहता था कि इस देश में तीन में से दो महिलाओं को सूर्योदय से सूर्य उतर जाने तक सनराइज से सनसेट तक शौचालय तक की व्यवस्था इस देश ने नहीं की थी आज़ादी के 65 साल बाद तक। प्रधानमंत्री मोदी जी ने उसको घर-घर तक पहुंचाने का काम अपने ज़िम्मे लिया, और कहाँ 34 प्रतिशत घरों में शौचालय हुआ करता था आजसे पांच साल पहले, आज 95 प्रतिशत घरों तक शौचालय बनाने का काम इस सरकार ने किया है।
इसी प्रकार से आयुष्मान भारत के तहत आज देश में 50 करोड़ लगभग सभी गरीबों को मुफ्त में उनकी स्वास्थ्य की सेवाएं पहुंचाने का काम आयुष्मान भारत के तहत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, पीएमजे योजना के तहत आज हर व्यक्ति को, हर गरीब को यह सुरक्षा महसूस होती है कि मेरे स्वास्थ्य की चिंता सरकार करेगी, प्रधानमंत्री मोदी जी करेंगे, अब मुझे कभी मेरे स्वास्थ्य की वजह से लोन नहीं लेना पड़ेगा, अब मेरे स्वास्थ्य के लिए मुझे कभी लोन में दबाव में किसी मनीलेंडर के पास, किसी ऐसे व्यक्ति के पास नहीं जाना पड़ेगा जो आगे मुझे गरीबी में वर्षों-वर्षों तक रखेगा।
अब जिसके भी घर में कोई स्वास्थ्य की समस्या आती है तो प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत उनको पांच लाख रुपये तक उस परिवार को हर वर्ष मुफ्त में उनको स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। और अभी-अभी हाल में हमने देखा 7 लाख ऐसे लोगों का इलाज अभी तक आयुष्मान भारत के तहत हो चुका है। मैं अनुरोध करूँगा हमारे सभी कार्यकर्ताओं को कि हर घर तक यह योजना की जानकारी पहुंचे, लोगों को गोल्ड कार्ड बनाने में मदद करें और जल्द से जल्द हर व्यक्ति को यह गोल्ड कार्ड मिल जाये जिससे उनको सुरक्षा का माहौल मिले, उनको स्वास्थ्य की सेवाओं के लिए कभी किधर भटकना न पड़े।
इसी प्रकार से बिजली में ऐतिहासिक काम किया गया, आज देश में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसका अधिकार बिजली का वंचित रहेगा, यह बिजली के अपने घर में सुविधा से देश वंचित रख सकेगा। जब हमारी सरकार आयी थी तब लगभग 18,000 गावों तक बिजली पहुंची नहीं थी और ऐसे करोड़ों घर थे जो अभी भी बिना बिजली के चल रहे थे और करोड़ों बच्चों को बिना बिजली के पढ़ाई करनी पड़ती थी, बिना बिजली के जीवन बिताना पड़ता था।
प्रधानमंत्री मोदी जी ने लाल क़िले से यह घोषणा की कि देश में एक भी गांव ऐसा नहीं छोड़ेंगे जिसमें बिजली न पहुंची हो, और 1000 दिनों की समय सीमा दी और मुझे ख़ुशी है कि 1000 दिन के अंदर हम देश में पूरे हर गांव तक बिजली पहुंचाने में सफल हुए, और 28 अप्रैल 2018 को आखिरी गांव तक बिजली पहुंची और यह गावों सरल गावों नहीं थे। आखिर आप अंदाज़ा लगाइये आज़ादी के 65 साल बाद तक जिस गांव में बिजली न पहुंची हो, कोई पहाड़ों के ऊपर, कोई घने जंगलों में, कोई माओवादी इलाकों में ऐसे इलाकों तक बिजली पहुंचाने का काम प्रधानमंत्री मोदी जी ने किया। लेकिन इसके पीछे उनकी सोच सिर्फ गावों तक बिजली पहुंचाने की नहीं थी वह भली भांति समझते थे कि पहले गावों तक पहुंचेगी, फिर मजला टोला ढाणी हर जगह हर हैमलेट तक पहुंचेगी और फिर हर घर तक पहुंचाने में हम सक्षम होंगे।
और सौभाग्य योजना के तहत केंद्र सरकार ने यह ज़िम्मेदारी ली कि देश में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं रहेगा, एक भी घर ऐसा नहीं रहेगा जो बिजली चाहता होगा और उसके घर में बिजली नहीं पहुंचेगी। और मुझे आप सबसे बताते हुए ख़ुशी होती है कि लगभग ढाई करोड़ घरों में सौभाग्य योजना के तहत बिजली पहुंचाई गयी, हर गरीब को मुफ्त में बिजली दी गयी और आज पूरे देश में मात्र सात-साढ़े सात लाख घर ऐसे रह गए हैं चार राज्यों में जहाँ बिजली पहुंची नहीं है जो लगभग अगले 30-35 दिनों में उन सब घरों तक भी बिजली पहुँच जाएगी। और शत-प्रतिशत इस देश में बिजली का अधिकार और बिजली पहुंचाने का काम प्रधानमंत्री मोदी जी ने सफलतापूर्वक इस देश में किया है।
मुद्रा योजना के तहत इसी चौपाल के माइक्रो लोन की तरह 10 लाख रुपये का लोन बिना कोई श्योरिटी के, बिना कोई जामिनदार के जो जामिनदार जो सिक्योरिटी देता है उसके बगैर 10 लाख रुपये तक का लोन हमारे उद्योजकों को मिले, हमारे एंटरप्रेन्योर्स को मिले जो छोटा कारोबार करना चाहे, कोई मोची अपनी दूकान अच्छी बनाना चाहे, कोई ढाबा वाला अपनी दुकान को बड़ा करना चाहे, कोई महिला सिलाई का काम करना चाहे, कोई ई-रिक्शा चलाना चाहे – अलग-अलग प्रकार से इस देश में रोज़गार की व्यवस्थाएं बनें, आत्मनिर्भर बनें हमारे सभी नौजवान उसके लिए 12 करोड़ मुद्रा योजना के तहत 12 करोड़ लोगों को चार लाख करोड़ से अधिक ऋण दिया गया, लोन दिया गया, सस्ते ब्याज पर दिया गया जिससे वह आत्मनिर्भर बन सकें और उनको भी एक अच्छा जीवन बिताने के लिए हम प्रोत्साहित कर सकें।
और जैसा प्रधानमंत्री जी कहते हैं, आज का युवा सिर्फ नौकरी के पीछे नहीं भागता है, वह नौकरियां निर्माण करना चाहता है, वह अपने आप नए रोज़गार के अवसर बनाना चाहता है। और मैं समझता हूँ लोगों को सिर्फ एक प्रकार से सरकार के ऊपर निर्भर रहने के बदले आत्मनिर्भर बनाने का जो काम प्रधानमंत्री मोदी जी ने किया है उसी का एक प्रतीक आज का यह कार्यक्रम चौपाल का कार्यक्रम है जिसमें 51 लोगों को चौपाल के तहत यह ई-रिक्शा दी जाएगी, 500 महिलाओं को माइक्रो लोन दिया जाएगा, कम ब्याज पर दिया जाएगा।
यह व्यक्ति आत्मनिर्भर होंगे, और लोगों को प्रोत्साहित करेंगे और यह ई-रिक्शा तो पर्यावरण के लिए भी अच्छी है, दिल्ली में हम सब जानते हैं पर्यावरण की कितनी बड़ी समस्या है। और मैं समझता हूँ अगर चौपाल और श्री गोपाल फाउंडेशन और और नए एनजीओ, कोई रोटरी क्लब, कोई लायंस क्लब, भारत विकास परिषद, सेवा भारती, अलग-अलग हमारी जो संस्थाएं समाज में अच्छा काम करने में लगी हैं अगर हम एक मुहिम चलाएं आदेश जी, और हमारे तीनों मेयर और हमारी तीनों म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के सब अधिकारीगण चुने हुए प्रतिनिधि अगर एक हम इसको मुहिम चलाएं कि जिस-जिस के पास अभी भी पुरानी रिक्शा है, जो-जो अभी भी हाथ रिक्शा चला रहे हैं, साइकिल रिक्शा, जो भी अभी भी पुरानी रिक्शा चला रहे हैं हम सबको मदद करें, मुद्रा लोन के तहत उनको लोन दिलाएं।
और पूरी दिल्ली में अगर हम सभी रिक्शा को ई-रिक्शा कर दें, हम सरकार और कॉर्पोरेशन मिलकर चार्जिंग स्टेशन सब जगह लगाएं, मेरे जितने स्टेशन हैं सब स्टेशन पर आप चार्जिंग मशीन कहें तो मैं लगवा सकता हूँ। और पूरी दिल्ली में एक मुहिम के तहत सभी को ई-रिक्शा पहुंचा दें तो मैं समझता हूँ दिल्ली के पर्यावरण को भी बहुत फर्क पड़ेगा, हमारे सब रिक्शा चालकों को भी आमदनी बढ़ेगी और जो डीजल-पेट्रोल का खर्चा होता है उसके बदले सस्ती बिजली से यह अपना चार्ज कर सकेंगे।
इसी प्रकार से जो भी महिलाएं आज लाभान्वित हो रही हैं इस योजना से मैं आप सबको मुबारकबाद देता हूँ, बधाई देता हूँ। आप सब सफल हों अपने-अपने काम में, जिस काम में आप इस लोन को ले रही हैं, जिस काम में आप इस लोन का इस्तेमाल करेंगी और जो बहनों को आज लोन नहीं मिल रहा है उनको भी इसकी जानकारी दीजिये और बैंकों के साथ भी आप पार्टनरशिप करके इस काम को और तेज़ गति से बढ़ाएं ऐसी मेरी आशा रहेगी। और इस उम्मीद के साथ कि इस योजना को सिर्फ हम पटेल नगर और इस क्षेत्र में सीमित नहीं रखते हुए पूरी दिल्ली में फैलाएंगे, पूरी दिल्ली में हर बस्ती में, हर इलाके में इस प्रकार का कार्यक्रम किया जाये और अगले 60 दिनों में एक पूरी यह मुहिम चलाकर आप देखिये कितने ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक मुद्रा अथवा चौपाल और बैंकों के पार्टनरशिप से कैसे हमारे रिक्शा धारकों को और महिलाओं को और अच्छा आत्मनिर्भर बनाने में हम सफल हो सकते हैं, इसमें हम सब काम करें।
इसमें जो भी मदद मेरे से व्यक्तिगत रूप में, रेलवे विभाग से या केंद्र सरकार की हो सकती है उसके लिए हम सब तट पर हैं, हम सब पूरी तरीके से आपके साथ लगे हुए हैं और इस प्रकार के आयोजन कम से कम 100 दिल्ली में हों, जब 100thहोगा उस दिन मैं फिर आपके साथ आपके कार्यक्रम में आऊंगा।
बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत बधाई आप सबको।



Minister of Railways & Coal, Shri Piyush Goyal held a high level review meeting with the entire Railway Board, all General Manager of Zonal Railways & Divisional Railway Managers of all the 68 Railway divisions (DRMs were linked through Video Conferencing) yesterday on 03rd January’ 2019 at Rail Bhawan.
While reviewing the performance during the current year so far, the Minister gave directions for the road map of forthcoming January-March 2019 quarter. The Minister emphasizes on timely delivery and vigorous monitoring of Railway projects and activities.
The deliberations covered subjects pertaining to safety, passenger services, passenger amenities, revenue generation, infrastructure development, staff welfare and transparency at all levels of functioning.
Road Map for upcoming January-March 2019 quarter.
Intergrated Dashboard to monitor ongoing projects by Railway officials- the Dashboard also to be made available for viewing by the public for a more transparent functioning.
Wi-fi to be provided at 2000 Railway stations.
Single helpline number for all complaints.
Reservation chart to be made available in public domain.
Commissioning of about 600-700 Kms of both eastern and western DFC to be ensured in this quarter.
PoS Machines with swipe and bill generating machine should be distributed in all trains to each catering staff and TTEs as soon as possible.
Redevelopment of 68 stations should be done by February 2019
3D Digital Museums at 100 stations to be completed before 15th February’ 2019.
Welfare measures for Coolies.
While reviewing the performance during the current year so far, the Minister gave directions for the road map of forthcoming January-March 2019 quarter, which are as under:-
Time bound work
Railway Minister called upon the top Railway officials to gear up their machinery to complete various projects and activities in a time bound manner adhering to the notified deadlines. The Minister called upon to focus on subjects pertaining to safety, passenger services, passenger amenities, revenue generation infrastructure development, staff welfare and transparency at all levels of functioning.
Online monitoring
Emphasising on the need to complete projects in time, Shri Piyush Goyal mentioned that it is equally necessary to vigorously monitor the progress and suggested that an integrated dash board portal displayable on a screen should be put in place by 15th January 2019. This needs to be done across entire railway network and efforts are to be made for providing viewing access of this Dashboard to general public also at the earliest. The pictures of before and after works are to be uploaded online on regular basis at the Dashboard.
Dedicated Freight Corridor Commissioning
Taking note of substantial progress in the construction of Dedicated Freight Corridor, Shri Goyal said that commissioning of 777 Kms of both eastern and western DFC should be ensured by the end of February 2019.
Catering Improvement
The Minster also advised that PoS Machines with swipe and bill generating machine should be distributed in all trains to each catering staff and TTEs by 31st March 2019. He said that this will take care of the complaints of overcharging by the caterer. All trains with catering facility should have rate list displaying prices of menu inclusive of GST and printed on a tin plate by March 2019. The following lines also to be written on the tin plate – No tips please, if no bill, your meal is free.
Transparent Reservation System
With a view to make ticket booking further transparent, the Minister directed that reservation chart should be made available in public domain as soon as possible. He also said that possibility of booking tickets even after schedule departure of trains or after boarding the train should be explored if seats are available.
Wi-fi
Mentioning that the 723 Railway stations provided with wi-fi have proved very useful to the public and directed that such wi-fi facility should be provided in at least 2000 Railway stations across the country in the near future and all stations ultimately. He said that Division Railway Managers will be suitably awarded for early completion of wi-fi works at stations.
Single help line number
Referring to the Railways helpline numbers, Shri Piyush Goyal said that a single helpline number for all non-security complaints should be developed for the convenience of passengers by the end of January 2019.
Revenue Generation
Talking about revenue generation, the Minister added that efforts should be made to increase incremental freight loading. He also said that efforts for generating more non fare revenue should be undertaken. He said the targets for generating revenue from scrap disposal should be increased and all zones should strive to achieve ‘Zero Scrap Balance’ by the end of this financial year.
Station Development
Referring to station redevelopment the Minister said that redevelopment of 68 stations should be done till February 2019 with provisions to monitor their progress on integrated dashboard along with the current photographs.
Train upgradation
Emphasing on train upgradation, the Minister said that the work of retro-fitment and making Swarn & Utkrisht rakes should be expedited on a priority basis. Referring to the recently developed Vistadome coaches with all glass body for tourist purposes, the Minister said that such coaches could be introduced on more routes and directed all Railway divisions to assess their requirements urgently.
Cleanliness
On toilets the Minister said that photographs of all completed toilets be uploaded from 4th January, 2019 onwards. All toilets should be brightly lit, clean with adequate supply of water and devoid of any broken pots/ urinals. He also suggested that efforts should be made to provide Bio vacuum toilets in all the new coaches to be manufactured in future.
Faster trains
He said that the trials of running Rajdhani trains using two engines (one in front and one in rear) on push-pull mechanism should be completed in time so that journey time of travel by Rajdhani could be reduced.
Station improvement
The Minister said that activities like LED lighting in cost efficient manner, installation of CCTV in kitchens, retiring rooms etc., improving overall ambience and infrastructure in and around railway stations, installation of tall national flags in all A-1 category stations, display hoardings to achievements of railways in recent years should be completed in time. He said that 3D Digital Museums at 100 stations should be completed before 15th February’ 2019.
He said that all ideas from DRMs and GMs should be put on Good Works Portal. Best practices of zones should be shared among all zones.
Staff Welfare
Talking about staff welfare, he said that healthcare should be provided in the most effective manner. He said that RPF barracks should be upgraded in time bound manner. He also directed to make a plan for welfare measures for Coolies.
He said that works on automatic coach washing plants and quick watering facilities should be implemented at the earliest.
The daylong conference of GMs and DRMs deliberated on all issues thread bare and prepared a comprehensive Road Map for the coming quarter January-March 2019. The Chairman Railway Board Shri V. K. Yadav outlined the agenda of the conference.
source: http://pib.nic.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1558674




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