Spoke at CII Workshop on Jobs & Livelihoods in Mumbai and spoke about employment opportunities by focusing on vocational training, taking the industry to the villages, generating energy from renewable sources

Speaking at Press Conference on BJP National Executive Meeting’s Agenda, in Mumbai

भारतीय जनता पार्टी ने पिछले हफ्ते 11 और 12 तारीख को राष्ट्रीय अधिवेशन नई दिल्ली में आयोजित किया था जिसमें देश भर से चुने हुए प्रतिनिधि एमपीज़, एमएलएज़, भारतीय जनता पार्टी के सभी जिला स्तर के आये हुए प्रतिनिधि अध्यक्ष महामंत्री राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य, ऐसे बड़ी मात्रा में देश भर से, देश के कोने-कोने से आये हुए लगभग 12,000 से अधिक भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता, नेता दिल्ली में एकत्र हुए थे। और आगे आने वाले चुनाव की दृष्टि से किस प्रकार से तैयारियां हैं किस प्रकार के विषय लेकर हम जनता के बीच जायेंगे, राजनीतिक स्थिति क्या है उसके ऊपर हमने अपना रेसोलुशन पारित किया, गरीब कल्याण की यह सरकार तेज़ गति से कैसे गरीबों तक विकास के काम पहुंचाने का काम कर रही है इसके बारे में चर्चा हुई।

और एक प्रकार से बहुत ही उत्साह के वातावरण में देश के कोने-कोने से आये हुए हमारे सभी कार्यकर्ता दिल्ली से विजय संकल्प करके अपने-अपने प्रदेश में गए हैं, काम शुरू हो गया है, हर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार किस प्रकार से अधिक से अधिक जीतकर जाएं अगली लोक सभा में और पूर्ण बहुमत से फिर एक बार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एक एनडीए की सरकार की स्थापना करें इस विजय संकल्प के साथ हमारे सभी कार्यकर्ता नेतागण दिल्ली से 12 तारीख को सन्देश लेकर अपने-अपने स्थान गए हैं।

यह स्पष्ट है कि विकास की जो नई ऊंचाइयों पर भारतीय जनता पार्टी और एनडीए की सरकार ने देश को लेकर गयी है जिसमें चाहे वह आर्थिक दृष्टि से भारत के आर्थिक ढांचे को मज़बूत बनाने का काम हो, चाहे अलग-अलग प्रकार के मापदंड जिससे देश की अर्थव्यवस्था को आँका जाता है। आज कहाँ पांच साल पहले एक Fragile-5, एक कमज़ोर अर्थव्यवस्था भारत को माना जाता था, एक ऐसी अर्थव्यवस्था जो कभी भी डगमगा सकती है। 2013-14 की उस स्थिति को बदलाव करते हुए आज भारत विश्व में सबसे तेज़ गति से आगे बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बन गयी है।

भारत में महंगाई लगभग इतिहास में सबसे कम अगर कोई पांच वर्ष के समय में देखी गयी है तो वह 2014 से ’19 का समय है। ऐसा कोई भारत के इतिहास में पांच वर्ष नहीं गए हैं जब महंगाई चाहे वह होलसेल प्राइस हो चाहे कंज्यूमर प्राइस हो, दोनों के आंकड़ों में इतनी कम कन्सिस्टेंटली, रेगुलरली इतनी कम महंगाई शायद ही कभी देश ने देखी है। फिस्कल डेफिसिट जो आर्थिक घाटा है, जो करंट अकाउंट डेफिसिट है, विदेश से जो संपत्ति आती है, जाती है, उन सभी मापदंडों में भी भारत की अर्थव्यवस्था मज़बूत हुई है, सक्षम हुई है। और उसी मज़बूत अर्थव्यवस्था के आधार पर हम में अलग-अलग प्रकार से गरीब कल्याण के कार्यक्रमों में सफल हुए हैं, गरीबों के जीवन में किस प्रकार से बदलाव ला सकें उसपर हमने बल दिया है।

और लगभग देश भर की जब रिपोर्ट कार्ड लिया गया तब जो आकलन बना उससे हमारा भी मनोबल भारतीय जनता पार्टी के हर कार्यकर्ता का मनोबल बढ़ा कि कैसे आज देश में हर व्यक्ति जो बिजली का कनेक्शन चाहता है, उसको आज बिजली का कनेक्शन उपलब्ध है, गरीबों को तो मुफ्त में उपलब्ध है। कैसे महिलाओं को, हमारी माता बहनों को आज शौच के लिए शर्मिंदा नहीं होना पड़ता है, उनके स्वाभिमान को ठेस न पहुंचे उसके लिए करीब-करीब 9.5 करोड़ शौचालय मात्र सवा चार-साढ़े चार साल में बने जिसके कारण सैनिटेशन कवरेज कहाँ 34-35% होती थी, आज 95-98% तक शौचालय देश में लोगों के घरों में बने हैं, कैसे अपनी माता बहनों को कुकिंग गैस की सुविधा न होने के कारण कोयला या लकड़ी के ऊपर खाना बनाना पड़ता था जिससे अनुमानित 400 सिगरेट जितना धुआँ लोगों के शरीर में जाता था, परिवार के शरीर में जाता था उसको बंद करते हुए लगभग 6 करोड़ गरीबों को मुफ्त में कुकिंग गैस का कनेक्शन देना और साढ़े चार वर्षों में लगभग 12 करोड़ से अधिक नए कुकिंग गैस कनेक्शन देकर आज लगभग देश भर में दो-ढ़ाई करोड़ परिवार रह गए हैं जिनको आज कुकिंग गैस की सुविधा नहीं है उसको भी अगले एक साल में कैसे ख़त्म करना उसकी भी योजना बन गयी है।

तो पूरे देश में शौचालय सबके पास हो, बिजली सबके पास हो, कुकिंग गैस की सुविधा सबके पास हो, एक मात्र साढ़े चार वर्ष की छोटी आयु में सरकार ने सफलतापूर्व यह तीनों कार्यक्रमों को देश के कोने-कोने तक पहुंचाया। इसी प्रकार से स्वास्थ्य की सेवाएं बहुत महत्वपूर्ण रहती हैं। एक ज़माना था जब साधारण मध्यम वर्ग का भी परिवार कभी स्वास्थ्य की कोई आपत्ति आ जाये तो तकलीफ में पड़ता था, क़र्ज़ लेना पड़ता था।

इस सबको मद्देनज़र रखते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने आयुष्मान भारत के तहत 50 करोड़ हमारे भारत के भाइयों बहनों को मुफ्त में चिकित्सा की सेवा उपलब्ध हो, पांच लाख रुपये तक हर परिवार को चिकित्सा मुफ्त में हो जिसके लिए आज देश भर में सभी सरकारी अस्पताल साथ में 15,000 निजी क्षेत्र के भी अस्पताल जुड़ चुके हैं। रेलवेज ने भी हाल में एमओयू किया है और रेलवे के कई अस्पताल इसमें जुड़ेंगे, इसी प्रकार से अलग-अलग गैर सरकारी लेकिन PSU क्षेत्र के अस्पताल को भी इसमें जोड़ने की योजना बन गयी है और अनुमान है कि आगे चलकर लगभग एक लाख नए अस्पताल इस देश में लग सकते हैं इस बड़े पैमाने पर लोगों को चिकित्सा देने के लिए अस्पताल को प्रोत्साहन मिलेगा, हॉस्पिटलाइज़ेशन के खर्चे कम होंगे और देश का कोई भी व्यक्ति अच्छी चिकित्सा से वंचित न रहे यह प्रधानमंत्री मोदी जी का दृढ़ संकल्प है और इस सरकार का पूरी तरीके से प्रतिबद्धता है।

मैं समझता हूँ कि एक भ्रष्टाचार-मुक्त सरकार पांच वर्ष तक जिसके ऊपर एक भी किसी प्रकार का दाग नहीं हुआ हो, झूट के पुलिंदे कोई कुछ भी बांधना चाहे लेकिन किसी प्रकार का एक भी दाग न लगना और भ्रष्टाचार-मुक्त सरकार बनाम 50-60 साल तक एक परिवार ने किस प्रकार से भ्रष्टाचार में लिप्त रहते हुए अलग-अलग कांड किये, और इसके बारे में तो जितना आप सब जानते हैं शायद ही और कोई जानता होगा। और उन्होंने जैसा हमने देखा कोई क्षेत्र ऐसा नहीं छोड़ा जिसमें भ्रष्टाचार न किया हो।

और मैं समझता हूँ कि इस देश ने इस बात की सराहना की है कि एक सरकार जिसने पारदर्शिता, ट्रांसपेरेंसी को अपना प्रमुख मुद्दा बनाते हुए हर क्षेत्र में ट्रांसपेरेंसी को अधिक प्रोत्साहन दिया है। फिर चाहे कोई भी प्रकार के नेचुरल रिसोर्सेज हों उसका आवंटन पारदर्शी तरीके से, ट्रांसपेरेंट तरीके से करना, चाहे कोई लाभ लोगों को पहुंचाना हो उसको डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से देना। लाचारी नहीं दिखाना जो पहले के प्रधानमंत्री दिखाते थे कि भाई मैं 100 रुपये भेजता हूँ और गरीब तक तो सिर्फ 15 रुपये पहुँचते हैं, हमने कभी लाचारी नहीं दिखाई, हमने रास्ते ढूंढे कैसे चीज़ों को अच्छा किया जाये, कैसे चीज़ों को ईमानदार व्यवस्था में बदला जाये।

और जन धन, आधार और मोबाइल की यह जैम की ट्रिनिटी के माध्यम से और पारदर्शी तरीके से लोगों को सब्सिडीस पहुंचे, लोगों को लाभ पहुंचे जिससे शत प्रतिशत सरकारी पैसा जो हमारे देश के लोग टैक्स पे करते हैं चाहे इनकम टैक्स हो, चाहे जीएसटी हो उस ईमानदार टैक्स को जो सरकार के पास आता है ईमानदार व्यवस्था से गरीब तक पहुंचाने का काम इस सरकार ने किया है।

मैं समझता हूँ आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी माओवादी, नक्सलवादी ताकतों के सामने जिस परिश्रम से हमारे जवान, हमारे पैरामिलिटरी फोर्सेज ने, हमारी पुलिस ने लड़ाई लड़ी है, आज देश में नक्सलवादी, माओवादी तंत्र भी घटे हैं, उनकी गतिविधियां भी घटी हैं और एक आंतरिक सुरक्षा का वातावरण बढ़ा है।

अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार, प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार ने जो भारत का वर्चस्व बनाया है, आज पूरा विश्व भारत के नेतृत्व की तरफ देख रहा है कि विश्व का नेतृत्व करने में भी आज भारत का एक प्रथम और अहम भूमिका है।

फिर चाहे वह जलवायु परिवर्तन का क्षेत्र क्यों न हो जो क्लाइमेट चेंज की नेगोशिएशंस पेरिस में 2015 में हुई, चाहे वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद और काले धन के ऊपर लड़ाई का क्षेत्र क्यों न हो, हर विषय में भारत की भूमिका एकदम प्रथम रही है, बहुत अग्रसर रही है और प्रधानमंत्री मोदी जी को मैं समझता हूँ विश्व के आज टॉप चार-पांच नेताओं में गिना जाना अपने आपमें हर भारतीय नागरिक के लिए बहुत गर्व की बात है।

हमारे भारतवासी आज विश्व में किधर भी रहते हों उनको यह विश्वास है कि हमारा देश सुरक्षित हाथों में है और कभी हमारे ऊपर किसी प्रकार की आपत्ति आई तो भारत खड़ा है हमारे पीछे, भारत हमारी रक्षा करेगा, भारत हमें सुरक्षित संभालेगा। और इसके कई उदाहरण गत चार-पांच वर्षों में चाहे वह यमन से लोगों को लाने का हो या अन्य-अन्य स्थानों पर जहाँ भी किसी प्रकार की भारतियों के ऊपर आपत्ति आई उसमें भारत सरकार ने और भारत के लोगों ने जिस प्रकार से एक ढाल की तरह भारत के लोगों को बचाया है, ढाल की तरह भारतवासियों के ऊपर किसी प्रकार की आपत्ति नहीं आने दी यह अपने आपमें भारत के बढ़ते हुए वर्चस्व का एक प्रतीक है।

एक मज़बूत सरकार जो देश को भी मज़बूत बनाये, देशवासियों को भी मज़बूत बनाये, देश की प्रतिष्ठा को भी मज़बूत बनाये यह भारतीय जनता पार्टी और हमारे नेतृत्व ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने विश्व को दी है। और अब देश को चुनना है एक मज़बूत सरकार बनाम एक मजबूर सरकार जो हर अपनी गलती को मजबूरी के ढाल में पिरोती थी, चाहे फिर वह कोई 2G का घोटाला हो, चाहे वह कोयले का स्कैम हो, हर चीज़ के पीछे एक प्रधानमंत्री अपनी मजबूरियां गिनाया करता था पहले उसके बनाम आज एक प्रधानमंत्री है जो एक मज़बूत नेतृत्व, मज़बूत सरकार दे रहा है देश को, इस प्रकार के नेतृत्व को यह देश स्वीकार करता है।

हमने कई पुराने अनुभव किये हैं कि मजबूर सरकारें चाहे वह देवे गौड़ा जी की हो, गुजराल साहब की हो और चाहे वह उसके पहले चरण सिंह जी या वीपी सिंह जी या चंद्रशेखर जी की हो, उस प्रकार की ढीलमढाली गठबंधन की सरकारों को देश ने अनुभव किया है और उससे त्रस्त होकर एक पूर्ण बहुमत की मज़बूत सरकार मोदी जी ने देश को दी है और हमें पूरा विश्वास है कि यह देश, यह देशवासी फिर एक बार उसी प्रकार से एक पूर्ण बहुमत से फिर एक बार मोदी सरकार चाहती है, फिर एक बार अबकी बार मोदी सरकार का वर्चस्व पूर्ण बहुमत के साथ इस देश को और तेज़ गति से विकास की नयी ऊंचाइयों तक लेकर जायेगा।

ऐसा इस देश का सोचना है, ऐसी इस देश की इच्छाशक्ति पूरे देश के कार्यकर्ताओं से जो फीडबैक मिला इससे हमें मिली है और पूरे जोश से हमारे कार्यकर्ता आज देश भर में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत के साथ एनडीए के गठबंधन में दो तिहाई बहुमत लेकर सरकार बनाएगी इस विश्वास के साथ हम चुनाव के मैदान में प्रोत्साहित होकर 11-12 तारीख के इस राष्ट्रीय अधिवेशन से सभी कार्यकर्ता अपने-अपने स्थान आये हैं।

आप सब इस सन्देश को महाराष्ट्र के हमारे सभी नागरिक भाइयों बहनों तक पहुंचाएंगे इस दृष्टि से आज यह पत्रकार वार्ता में मैं आज आप सबके समक्ष आया हूँ। अभी-अभी हमने मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया है। उसी के साथ-साथ 15 तारीख से कुंभ मेला का आयोजन शुरू हुआ है और हाल ही में 15 तारीख को ही आर्मी डे भी हमने मनाया है।

आर्मी डे के दिन मैं समझता हूँ कि इस देश ने अपने जवानों के प्रति फिर एक बार अपनी श्रद्धा सुमन दी जो इस देश के लिए अपने जीवन को बलिदान करते हैं और इस बार तो एक अच्छा संजोग रहा कि अभी-अभी हाल में जो पिक्चर आयी है ‘Uri-A Surgical Strike’, उसके भी जो कलाकार थे जिन्होंने उसमें एक कल्पनात्मक, it is a story जो उन्होंने पेश की है। लेकिन एक दर्शाती है कि कैसे जब एक देश पूरे होशो हवास के साथ और पूरे मनोबल उनका कमज़ोर नहीं लेकिन बड़ा सशक्त हो, बड़ा मज़बूत मनोबल हो तो कैसे कोई भी प्रकार की चुनौती का सामना कर सकता है।

और हमने देखा कि जब आर्मी डे सेलिब्रेशन हो रही थी तब यह सब जब कलाकार आये तो जो उत्साह था वहां पर, और मैंने तो स्वयं अनुभव किया जब मैं देखने गया ‘Uri-A Surgical Strike’, working day, मंगलवार रात को कामकाज के दिन, रात को 11 बजे के शो में, पूरा चकाचक भरा हुआ 500 लोगों का हॉल। मैंने आज तक 7-8-10 सालों में, मैं तो कई पिक्चरें देखता हूँ, मैंने ऐसा कभी नहीं देखा कि वर्किंग डे रात को 11 बजे के शो में चकाचक भरा हुआ हॉल और उसमें बार-बार तालियों की गड़गड़ाहट, और जब पिक्चर ख़त्म हुई तो पूरा हॉल खड़ा होकर जिस उत्साह के साथ तालियां बजाई मैं समझता हूँ भारत को ऐसा एक मज़बूत, एक मैसेज पूरे देश में देना है कि यह सरकार, यह भारत देश और भारतवासी किसी प्रकार का सामना कभी भी कर सकते हैं।

और उससे अच्छा मौका क्या हो सकता है कि जब मकर संक्रांति के दिन हम एक नए वर्ष की शुरुआत कर रहे हैं। जब कुंभ के दिन, और कुंभ तो आप जानते हो कि मंथन हुआ मंथन से अमृत देश में चार स्थानों पर गया और उस मंथन के बाद जो वह अमृत पूरे देश में गया था, उस प्रकार का मैसेज लेकर मैं आप सबको, आप सभी के परिवारों को मकर संक्रांति, नए वर्ष की भी शुभकामनाएं देता हूँ। हम सब चाहते हैं कि यह नया वर्ष और आगे देश के लिए भविष्य के लिए बहुत अच्छे संकेत लेकर आये।

Happy tidings for the country in the New Year, my best wishes to all of you and your family members.

 

प्रश्न-उत्तर

प्रश्न: पीयूष जी, उत्तर प्रदेश में बसपा और …. का गठबंधन हुआ है उसको कैसे मैनेज करेगी बीजेपी?

उत्तर: हमने बहुत स्पष्ट निर्णय लिया है कि यह लड़ाई 51% की लड़ाई है, हम देश के समक्ष जायेंगे 51% की लड़ाई लड़ने के लिए, विपक्ष को पूरी छूट है वह जो गठबंधन बनाना चाहे बना सकती है। मैं समझता हूँ इस प्रकार के अनैतिक गठबंधन देश ने पहले भी देखे हैं, न कोई विचार का आधार है, न कोई नीति है, न कोई नियत है और हमें इस प्रकार के गठबंधन से डर नहीं है, इस देश की जनता पूरी तरीके से समझदार है और समझदार जनता सब जानती है कि देश का हित कौन कर सकता है।

  1. In the last election the objective was अच्छे दिन, the objective of this election is a strong government, मज़बूत government…?

उत्तर: अच्छे दिन भी हैं, अच्छे दिन is a continuing process.

  1. My question is has the objective of अच्छे दिन been achieved?
  2. I think the sad part is that many people don’t realize that this is an ongoing process. This government has brought unprecedented development to this nation. After all, it is not without effort that the country becomes the world’s fastest growing large economy. It is not a mean achievement when one sees electricity reaching every home in this country, which did not happen in 65 years. When everybody gets toilets and women get a dignity, a pride of place in the family which was not available for so many years. I think it is very unfortunate that a limited period is being sought to be projected as an endgame itself. The country is seeing Acche Din and the progress of Acche Din. It is a continuing process. A lot has been done, a lot more has to be done. And अच्छे दिन इस देश में आये हैं और आगे और अच्छे दिन आएं, we should get even better days that is the effort that this government has continued to do over the last four and a half years and will continue to do for many-many years again with the support and the blessings of the people of India, along with the strong government which we have provided for five years and we will continue to provide in the years to come.

प्रश्न:…….

उत्तर: मैंने पहली ही क्षमा मांगी कि मैं देर से आया क्योंकि मुझे और भी मीटिंग्स थी पर आपसे फिर एक बार क्षमा मांग लेता हूँ, उसमें मुझे कोई संकोच नहीं है। जहाँ तक रेलवे का सवाल है मैं आपसे यह रिक्वेस्ट करूँगा कि आप ज़रा सिचुएशन देखिये। भारतीय रेल में जो व्यवस्था 50 साल पहले थी उसकी जो वृद्धि हुई है, कांग्रेस की सरकारें, लगभग अधिकांश वर्ष तो कांग्रेस की सरकारें रही, बहुत कम वर्ष और कोई गैर-कांग्रेसी सरकारें रही। 50 वर्षों में जितनी वृद्धि हुई वह लगभग 30% इंफ्रास्ट्रक्चर में वृद्धि हुई और पैसेंजर ट्रैफिक 1600% बढ़ा और फ्रेट का ट्रैफिक 1700% बढ़ा गत 50 वर्षों में। अब इतने वर्षों तक तो किसी ने यह नहीं पूछा कि भाई यह वृद्धि इतनी हो रही है तो पिछली सरकारों ने मुंबई के लिए कभी क्यों चिंता नहीं की, कभी पिछली सरकारों ने मुंबई में मेट्रो ट्रेन का इतना विस्तार क्यों नहीं किया? कभी पिछली सरकारों ने इतना आवंटन निवेश का भारतीय रेलवे में मुंबई सबअर्बन के लिए क्यों नहीं दिया?

आखिर आप कोई स्टेशन पर चले जाइये जो पांच सालों में स्टेशनों में सुधार आया है मुंबई में, आप बताइये पहले 50 साल में क्यों नहीं आया? 100 सर्विसेज एक दिन में हमने शुरू करने का निर्णय लिया और वह शुरू की, करीब मेरे ख्याल से पिछले साल अक्टूबर-नवंबर-दिसंबर, तीन महीने के अंदर 100 नयी सर्विसेज मुंबई के सबअर्बन में शुरू हुई उसके बारे में आप लोगों ने भी रिपोर्टिंग की है, यह पहले क्यों नहीं इतनी तेज़ गति से शुरू होती थी। क्यों नहीं लोकल ट्रेन में, लोकल सबअर्बन नेटवर्क में किसी ने 70-75,000 कोई सरकार ने कभी मंज़ूरी दी हो पिछले 50-60-70 सालों में तो आप मुझे बताइये।

और जिस प्रकार से एस्केलेटर्स, जिस प्रकार से अभी फुटओवर ब्रिजिज़, जिस प्रकार से स्वच्छता बढ़ी है पूरे नेटवर्क में। आज आप ट्रैक्स के ऊपर जाकर देखिये इतनी सफाई आपने कभी देखी है क्या? मेरे ख्याल से यह एक प्रोसेस होता है, ओवरनाइट ट्रैक्स नहीं ले हो सकते हैं। ज़मीन का टुकड़ा लेने के लिए कितनी तकलीफ होती है, आपको याद होगा जब हमने आर्मी को बुलाकर फुटओवर ब्रिजिज़ बनाने की कोशिश की कि और देखिये हमने मैसेज कितना दिया, तीन फुटओवर ब्रिजिज़ आर्मी ने बनाये उसके बाद अब रेलवे उसी गति से फुटओवर ब्रिजिज़ बना रही है।

लेकिन उस समय भी एक निजी कंपनी ने एक ढाई सौ स्क्वायर मीटर की छोटी सी ज़मीन का टुकड़ा जो कोई काम में नहीं आता था उसको देने में कितना विलंभ किया जिसकी वजह से फुटओवर ब्रिज नहीं बन सका। तो मैं समझता हूँ यह हम सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है कि हम भी सपोर्ट करें, आखिर आज जितना इंफ्रास्ट्रक्चर का काम मुंबई में हो रहा है, चाहे लोकल में हो, चाहे मेट्रो में हो, चाहे मोनो रेल में हो, कोस्टल रोड में हो, ट्रांस हार्बर लिंक में हो, अलग-अलग क्षेत्र में जिस तेज़ गति से आज देवेंद्र फडणवीस जी के नेतृत्व में आज मुंबई में बढ़ रहा है काम, जैसे केंद्र और राज्य सरकार मिलकर रेलवे में काम कर रही हैं यह मैं दावे के साथ कह सकता हूँ इस पांच वर्ष के पहले आपने कोई पांच वर्ष इतना काम नहीं देखा होगा।

प्रश्न: सर, आज कल रोज़गार सबसे बड़ी समस्या हो रही है, आपको लोगों को जवाब देना पड़ेगा, अगर सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट की बात छोड़ दें आपके रेल मंत्रालय में हज़ारों की वैकेंसी पड़ी हैं, अगर पिछले पांच सालों का आंकड़ा दिया जाये तो कितने रोज़गार ………?

उत्तर: बहुत स्पष्ट जवाब है इसमें, रोज़गार का जो स्वरूप है वह पूरे विश्व में बदला है, और इसकी मैंने जानकारी कई बार, यहाँ मुंबई में पता नहीं मौका मिला है कि नहीं पर कई पत्रकार वार्ताओं में कई कॉन्फरेन्सेस में इसपर बड़े विस्तार से चर्चा की है। पूरे विश्व में आज एक नया ज़माना है जिसमें artificial intelligence, 3D manufacturing, renewable energy against the old traditional form of energy, अलग-अलग चीज़ों में बदलाव आ रहा है और यह बदलाव से भारत अलग नहीं रह सकता है, इस बदलाव में भारत भी जुड़ रहा है।

आज आखिर अगर देश में लगभग 70,000 नए स्टार्ट अप शुरू हुए हैं और विश्व में 3rd largest start up country भारत बना है तो यह कोई साधारण बात नहीं है। पहले इस प्रकार से युवा-युवती नए चीज़ों की नयी इन्वेंशंस, नए काम करने के ढंग के प्रति इतना आकर्षित नहीं होते थे, उनको एक ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर जॉब का ही आकर्षण रहता था। आज वह स्वरूप बदला है।

मैंने उदाहरण दिया था कि कोयले के ऊपर अगर एक थर्मल पॉवर प्लांट लगाओ तो 100 नौकरियां बनती हैं समझो, उसके बनाम जब आप नवीकरणीय ऊर्जा से उतनी बिजली बनाओगे तो उसका लगभग 12-15 गुना डायरेक्ट और इनडायरेक्ट रोज़गार का या काम करने का अवसर बनता है। तो पहले के ज़माने में जो एक ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर की जॉब्स सिर्फ गिनी जाती थी आज वह आकलन और तरीका बढ़ा है।

आखिर जब 12-15 करोड़ लोगों ने मुद्रा लोन लिया और 5-6 लाख करोड़ रुपये मुद्रा लोन जब बंटता है तो सब नए उद्यमी बनते हैं उससे नए अपने स्वयंरोजगार के साधन ढूंढते हैं। मेरे ख्याल से परिस्थितियां बदल रही हैं पूरी दुनिया में, भारत में भी और रोज़गार का अब हमें नए रूप में डेटा कलेक्ट करके उसका आंकलन करना पड़ेगा कि यह नए स्वरूप में… आखिर पीछे किसी ने मुझे बताया पांच लाख उबर और ओला की टैक्सियां चलती हैं अब यह तो कोई रोज़गार के आंकड़ों में किधर भी नहीं आएगा और न आता है। लेकिन यह जो रोज़गार उत्पन्न हुआ नया उत्पन्न हुआ, यह अपने आपमें एक नए रूप से ट्रेवल और ट्रांसपोर्ट को सरल बनाता है अलग-अलग जगाओं पर।

तो अब सोलर एनर्जी, हमने लगभग दस गुना बढ़ा दिया है जो सोलर एनर्जी सौर ऊर्जा की जो कैपेसिटी थी पिछले चार सालों में। अब उसमें इतने हज़ारों लाखों लोगों को काम मिला जो किसी ऑर्गेनाइज्ड एनटीपीसी या पावरग्रिड टाइप कंपनी में नहीं गिना जाता है।

प्रश्न: मैं राकेश त्रिवेदी ज़ी न्यूज़ से, आपसे दो सवाल पूछना चाहूंगा, उम्मीद करता हूँ कि आप दोनों सवालों का जवाब जो है देंगे….

उत्तर: क्यों, आपको संकेत है कि मैं जवाब नहीं देता हूँ?

प्रश्न: पहला सवाल अपनी ओपनिंग स्पीच में आयुष्मान भारत स्कीम की बात की है लेकिन कुछ राज्य ऐसे हैं जिन्होंने आयुष्मान भारत से विथड्रॉ कर लिया है, और इसपर अब राजनीति की जा रही है खासतौर से ममता बनर्जी ने इससे विथड्रॉ कर लिया है। इसपर आप क्या कहेंगे आयुष्मान भारत जैसी स्कीम जो है जो आप बता रहे थे जनता के फायदे के लिए, गरीबों के फायदे के लिए है उससे विथड्रॉ करना? और दूसरा सवाल मेरा यह है कि आप बुलेट ट्रेन की बातें कर रहे हैं लेकिन रेलवे के अंदर जो लूट-पाट की जो घटनाएं अभी तक बढ़ती जा रही है, कल दिल्ली की जो घटना हुई वह सबसे ताज़ा है। ऐसे में जब तक यात्री सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे तब तक हम बुलेट ट्रेन का सपना कैसे दिखाएं?

उत्तर: पहली बात तो जहाँ तक आयुष्मान भारत की बात है प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजे) को तो हाल में ही अभी बिल गेट्स जी ने भी बहुत सराहना की है, बहुत तारीफ की है कि कैसे इतने कम समय में देश के कोने-कोने तक गरीबों को यह सुविधा मुफ्त में मिले इसमें हम सफल रहे हैं। और मैं समझता हूँ वह आप सबने उनकी यह बात पढ़ी होगी। और रही बात ममता जी की वह सवाल तो आपको ममता जी को पूछना पड़ेगा कि जब हम कोई गरीबों को सेवा करना चाह रहे हैं, मुफ्त में इलाज देना चाह रहे हैं अगर वह उससे विथड्रॉ कर रही हैं तो जो पश्चिम बंगाल के … करोड़ नागरिक हैं जिसमें से शायद चार-पांच करोड़ नागरिकों को यह लाभ सुविधा मिल सकती थी उनको वह क्यों वंचित रखना चाहती हैं इस विकासीय कार्य से, इस अच्छे सामाजिक कार्य से इसका जवाब तो ममता बनर्जी जी ही दे सकती हैं मेरे पास तो उसका जवाब नहीं है। मैं समझता हूँ इसका जवाब पश्चिम बंगाल की जनता आने वाले चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी को देंगी कि आप हमें विकास से वंचित रखना चाहती हैं, मोदी जी हमें विकास देना चाहते हैं इसलिए शायद देखने में आ रहा है कि वह इतने परेशान हैं कि भारतीय जनता पार्टी की रैली तक नहीं होने दे रहे हैं पश्चिम बंगाल में और बार-बार अड़ंगे लगा रहे हैं कि रैली न हो सके क्योंकि उनको भाजपा और मोदी जी की बढ़ती हुई लोकप्रियता वहां पर नज़र आने लगी हैं और उस डर के कारण आज रैली तक होने नहीं दे रहे हैं।

दूसरी बात जहाँ तक आपकी बात कल का तो बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई उसपर छानबीन चालू है और हम ज़रूर अपराधियों को पकड़ लेंगे। लेकिन यह भी आपको ध्यान में आएगा सच्चाई है कि रोज़ सवा दो करोड़ से अधिक यात्री रेलवे में सफर करते हैं देश में। स्वाभाविक रूप से 12,000 ट्रेन देश में जो चलती हैं हर एक पर चौबीस घंटे निगरानी डायरेक्टली रखना मुश्किल है ह्यूमन इंटरवेंशन से। तो आपको जानकर ख़ुशी होगी कि इसको सलूशन के रूप में हम देखते हैं हर एक चुनौती को, हमने ऑलरेडी निर्णय ले लिया है कि देश के हर स्टेशन को जो मेन लाइन स्टेशंस हैं, हॉल्ट स्टेशन नहीं जहाँ पर लोग कम रहते हैं और रेलवे स्टाफ नहीं रहता है, 6000 स्टेशन पर हम सीसीटीवी कैमरा का जाल बिछाने जा रहे हैं पहले चरण में, अगले चरण में यह 12000 जो यात्रियों की ट्रेन है उसमें हम सीसीटीवी कैमरा लगाएंगे और साथ ही साथ हर स्टेशन को वाई-फाई से जोड़ने का काम तेज़ गति से चल रहा है जिससे जब-जब ट्रेन स्टेशन पर पास होगी तो वाई-फाई का फीड ट्रेन से भी स्टेशन पर अपलोड हो सकेगा और वह फीड लोकल पुलिस स्टेशन के पास जायेगा। तो इससे मैं समझता हूँ एक सुरक्षा का माहौल पूरे रेलवे सिस्टम में बढ़ेगा।

और बहन ने जो पूछा about bullet train, मैं समझता हूँ 350 किलोमीटर 508 में से, 350 किलोमीटर पर फाइनल लोकेशन सर्वे का काम शुरू हो गया है, जो ट्रेनिंग करनी है हमारे सब अधिकारियों की और कर्मचारियों की वह काम जापान में भी और भारत में भी शुरू हो गया है, 25 में से मेरा अनुमान है 8 कॉन्ट्रैक्ट दे दिए गए हैं। और आपको लग रहा है deadlines miss हुई हैं, मैं समझता हूँ सिर्फ एकाद जगह पर कुछ कोर्ट में कुछ केस हुआ है उसको भी हम बातचीत के माध्यम से ख़त्म करके कोई भी डेडलाइन मिस नहीं होने देंगे, समय पर प्रोजेक्ट लगेगा और पूरी pert chart के बेसिस पर। और आप तो जानते हैं जापानीज इसमें बहुत ही स्ट्रिक्ट टास्क मास्टर्स होते हैं उससे हम भी सीख रहे हैं कैसे इसी प्रकार से हमने आगे चलकर और प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग को और अच्छा बनाना है और समय सीमा पर ख़त्म करना है।

आपने देखा होगा यह विशेषता रही है इस सरकार की वर्षों से विलंभित प्रोजेक्ट्स डिलेड प्रोजेक्ट्स हम ख़त्म करने में लगे हैं। बोगीबील प्रोजेक्ट, 1996 से चलता हुआ आ रहा था, पर काम बहुत कम हुआ था। हमने चार साल में तेज़ गति देकर उसको, I think Asia का longest road-cum-rail overbridge है, और उससे असम, अरुणाचल प्रदेश, पूर्वी उत्तर भारत के लिए बहुत राहत मिलेगी।

इसी प्रकार से मैं अनगिनत प्रोजेक्ट सुना सकता हूँ जो वर्षों से पड़े थे, डिलेड थे जिसको हमने गति दी है। गडकरी जी ने जिस प्रकार से हाईवे और रोडवे का जाल देश भर में फैलाया, जिस प्रकार से विद्युतीकरण देश भर में फैली है, मैं समझता हूँ अलग-अलग क्षेत्रों में और मैं अनगिनत सुना सकता हूँ आपको जो डिलेड प्रोजेक्ट्स को हमने समय पर ख़त्म करने का बीड़ा उठाकर समय पर किया है।

प्रश्न: आपने अपने ….. में कहा कि काल धन पर कार्रवाई हुई है, क्या देश जान सकता है कि कितने करोड़ रुपये आये काले धन में। और दूसरा सवाल आपने कहा कि अब तक रेल के बारे में बहुत काम नहीं हुआ, क्या आपको लगता है कि महाराष्ट्र के रेल मंत्री थे इस वजह से मुंबई का regionalism बहुत हावी हो गया रेल मंत्रालय पर?

उत्तर: जहाँ तक पहली बात है, मैं समझता हूँ इस देश में जिस प्रकार से पिछले सालों में इस सरकार आने के पहले लोग लोन लिया करते थे, लोन लेकर पैसा बाहर भेजा करते थे, उस सबको रोका गया और इस सरकार में एक जो कड़ी निगरानी से पूरा देश की अर्थव्यवस्था को चलाया गया उससे देश को बहुत लाभ हुआ है। जो-जो लोग गलत काम करते थे, काला धन का काम करते थे वह सब मजबूर हुए हैं कि इस प्रकार की गतिविधियां बंद करे। The heat is on them. बेनामी संपत्तियों को ज़ब्त किया जा रहा है, बेनामी संपत्ति का कानून आप जानते हैं कब 28 साल पहले बना था लेकिन उसको कार्यान्वित नहीं किया था, हमने कार्यान्वित करके हज़ारों करोड़ की बेनामी संपत्ति को ज़ब्त किया है, विदेश से पैसा आया है। वह सब डिटेल्स पब्लिक डोमेन में दे रखी हैं वह आप सबको मल जाएँगी। और जहाँ तक महाराष्ट्र का मंत्री या बाहर का मंत्री मुझे पुराने ज़माने का तो मालूम नहीं पर हमारी सरकार ने कभी प्रांतिकता नहीं की कि किस प्रदेश से मंत्री है उस प्रदेश का लाभ-नुकसान नहीं देखा है। मैं समझता हूँ यह मुंबई का अधिकार था कि यहाँ से इतने यात्री मुंबई सबअर्बन में ट्रेवल करते हैं उनका अधिकार था कि रेलवे यहाँ निवेश करे, उनको यह अधिकार कई वर्षों से नहीं मिला था। भाजपा की सरकार ने, मोदी जी की सरकार ने, देवेंद्र जी की सरकार ने मिलकर वह अधिकार मुंबई को दिया है।

प्रश्न: सर आपने अभी कहा कि 51% लोगों के मुद्दे लेकर आप चुनाव में आने वाले हैं तो जो यह 49% बचेंगे जिसका आप इशारा कर रहे थे, उनका विषय क्या रहेगा?

उत्तर: 51% वोट से अधिक हमको मिलें उसकी लड़ाई में हम लगे हैं अब कोई लोग हमें नहीं वोट देना चाहें तो आप मतलब you are hoping कि अभी 100%, हो सकता है अगले चुनाव में अमित शाह जी तय करें कि अभी हमें देश के हर नागरिक के वोट की कोशिश करनी है। मैंने वही कहा था 51% की लड़ाई यानी कि जब अगर वह कोई भी महागठबंधन बना लें हमें कोई चिंता नहीं हम 51% से अधिक वोट लेकर दो-तिहाई बहुमत एनडीए का लेकर आएंगे।

  1. Q. Sir, you claimed that this government has set new benchmark for development, and despite those five years of development as you claim, what was the need for this government to come out with a 10% quota…. after you lost assembly elections in six states?
  2. Well, in the first place, you will appreciate that governments don’t work overnight. This was obviously work in process, which culminated at a particular point of time. As we have said on many occasions, this government does not work based on elections or the timing of elections. We take decisions based on what is good for the country, what is needed by the country, when we think it should be taken. It’s not whether the election – like that you can tell us that we could have taken this decision earlier also. So, I think we don’t look at elections and time our decisions, this was under discussion for a long time. We realized that while social backwardness, educational backwardness was addressed, there is a large section of people even in the left out sections and they could be of different religions, different communities who were left out of the reservation, but on an economic basis were not able to get a better deal for education, for job opportunities. And, therefore, we thought that it is prudent that a constitutional amendment be made and the economically backward persons also be covered and given some benefit.
  3. This is Devesh Singh from AajTak India Today. Sir, I would like to know Bhaiyaji Joshi recently made a statement that Ram Mandir will be constructed by 2025, so we are … to 2019 elections, it was there in your manifesto last time also. I think it will be …..?

उत्तर: माननीय भैयाजी जोशी हमारे बहुत वरिष्ठ मार्गदर्शक हैं। मैं समझता हूँ हम तो तीनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से शाखा से अपना हमने सामाजिक जीवन शुरू किया और वहीँ से हमको हमारी एक प्रकार से moral bearings मिली हैं। और जैसा उन्होंने कहा वह इस देश के अधिकांश लोगों की इच्छा है, तीव्र इच्छा है कि अयोध्या में भगवान राम के जन्म स्थान पर एक भव्य मंदिर बने और भगवान राम को पूरा देश गौरव से देखता है और वास्तव में तो देश के बाहर भी कई ऐसे देश हैं जो कहते हैं कि भगवान राम उनकी धरोहर है, उनकी हेरिटेज है। मैं तो कम्बोडिया, इंडोनेशिया वगैरा में देखकर आश्चर्यचकित हो गया कि वह आज भी मानते हैं कि भगवान राम उनकी आस्था से जुड़ा हुआ है, उनकी हेरिटेज में है। और दुर्भाग्य की बात है कि जब सुप्रीम कोर्ट में विषय चल रहा है और भगवान राम का मंदिर का विषय बड़ा इम्पोर्टेन्ट विषय है तो कांग्रेस अपने वरिष्ठ नेताओं को भेजकर उसमें बाधाएं डालती है कि कैसे राम मंदिर न बन सके। और मुझे लगता है कि आप सब को कांग्रेस से पूछना पड़ेगा कि ऐसी क्या वजह है कि हरीश रावत, उनके एक वरिष्ठ नेता, पूर्व मुख्यमंत्री आज सुबह आपके ही चैनल पर बयान दे रहे थे कि भगवान राम का मंदिर कांग्रेस की सरकार में बनेगा और उन्ही के वरिष्ठ नेता कपिल सिबल कोर्ट में जाकर दलील पेश करते हैं कि इस सुनवाई को और टालो और भगवान राम का मंदिर मत बनने दो।

प्रश्न: सर यह मुंबईकरों के लिए रेल को लेकर कोई योजना आने वाली है, और दूसरा सवाल…… ?

उत्तर: यह तो बहुत अच्छी तरीके से विस्तार से समझाई है, अच्छा यह तो एमयूटीपी की डिटेल 3ए की जो है जिसमें 55,000 करोड़ और हम लगा रहे हैं वह डिटेल्स मेरे अधिकारी आपको पहुंचा देंगे।

उत्तर: सवर्णों के लिए 10% आरक्षण जो हाल ही में लागू कर दिया गया है उसमें एक क्लॉज़ है कि 8 लाख तक अगर आपका एनुअल इनकम है तो आपको यह लागू है, साथ ही में ढाई लाख तक आपकी इनकम होगी तो उसको ऊपर आपको इनकम टैक्स देना पड़ेगा?

उत्तर: इसको कई बार स्पष्टीकरण कर दिया गया है, ओबीसी में भी जो क्रीमी लेयर है उसकी भी जो सीमा है वह 8 लाख रुपये परिवार की आय है, व्यक्ति की आय नहीं है। और परिवार की आय 8 लाख तक होती है तो क्रीमी लेयर ओबीसी में भी गिनी जाती है हमने वही फिगर यहाँ पर भी ली है।

  1. Sir, considering Arun Jaitley’s ill health, who will be giving…?
  2. No, I think you are mistaken. You are making some assumptions, you saw yesterday, he has given a long interview on CNN Network18.

Thank you.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Speaking at Outlook Business Leading Edge 2019, in Mumbai

Finally provided by Mr. Vajpayee when he was Prime Minister, some 15-18 years ago, but very little work had happened on the ground when we came into office in 2014. But an aggressive push helped us complete that project and it has a game-changing dimension for the people of Assam, for the people of Arunachal Pradesh, for the North-East and for the armed forces who need to reach the border very quickly in the times of emergency, in the times of distress.

Fortunately, we have Mr. Prabhu here who was handling the railway portfolio in a very outstanding fashion, who really gave a thrust to this Bogibeel project and provided the funds, provided the leadership required to complete a project in time and we were able to actually implement it.

Similarly, the Train-18 project which he initiated when he was Railway Minister, we were able to complete in a time bound manner, and for the first time in 50 years the Indian Railways has developed a train set which is completely indigenous, designed in India, made in India and made in record time of 18 months, and truly will be the defining feature of the changing way Indian Railways will serve the passengers.

And we have a pretty big share of passengers travelling in the rail through the year. We have about eight billion passengers going through the rail network every year. And I can keep reading out a number of steps, whether it is in the finance world, the Benami Properties Act, for example, passed some 18 odd years ago or 28 years ago, but we had to only notify the rules which were not done. And we notified them and implemented it and we are seeing people with Benami properties being actually prosecuted, being actually brought to book.

I remember the western expressway, which is on the periphery of Delhi, which had been pending for about 15 years which Mr. Nitin Gadkari completed, will completely change the travel dynamics of New Delhi, the national capital, but took us 15 years. And that, ladies and gentlemen, has been an effort of this government to change the way projects are conceptualized, finalized, planned and then implemented.

In some sense, learning from the Japanese example, where I think they take more time in the planning and structuring of the design of the project, possibly than in actual implementation on the ground. And this, I think, you would observe in any of the projects that this government took up. If I can highlight a few initiatives you just mentioned about the LED bulb programme. Now the LED bulb on the face of it looks like a simple bulb emitting lumination for the room or for the country, but when I put in the right perspective, we launched this project on 5th of January 2015. We set before us a target to distribute seven 770 million LED bulbs in the country in four years and we had estimated that will by and large replace all the incandescent bulbs which we have been using for donkey’s years and, therefore, save electricity, reduce the energy bills of the people and reduce the pollution, reduce the impact on environment because of higher consumption of electricity.

Most people either ridiculed it or were in a state of disbelief that this is at all possible. I am happy to report to you, ladies and gentlemen, we gave out the first bulb on 1st May 2015. We have not even completed four years of that project and the country today has already seen the sale or distribution of 1.3 billion LED bulbs in less than four years, almost twice the original number we started off with. And I think by the time we complete the four years, it will be twice what we had originally envisaged, thereby saving nearly 40,000 crores that is about six billion US dollars of electricity bills every year, which the consumers of India are paying, reducing carbon emissions by about 80 million tonnes every year because of reduced requirement for electricity. and has saved the nation about 20 billion dollars of additional investment which would otherwise be required to provide that kind of energy every year.

Of course, I can go into much more detail about the peak loads being reduced, and since Mr. Prabhu and I both also share the power portfolio. He was the original reformer in the power sector in the Vajpayee government, who really brought in the first wave of reform in the power sector. It was truly a privilege for me that I could learn from his experiences and bring in these kind of projects into the country.

But the scale, ladies and gentlemen, helped us to bring down the cost of LED lighting by about 87%. So a bulb which used to cost to the government of India when we bought it about 310 Indian rupees the government would finally purchase it at about 40-45 rupees. And this reduction in pricing not only helped the people of India to use LED bulbs in a big way but has now become a project which the world is embracing.

So everywhere in the world that I go, if I am engaging with the Power Ministers in my earlier role, one comment was for sure that India led the world in making  LEDs a household feature. India led the world to bring down the prices of LEDs, India led the world in making the world a better place to live in, thereby reducing carbon emissions, reducing the energy needs of almost every country in the world. And this price reduction was possible only because we implemented to scale, implemented fast in a time-bound manner and, of course, implemented honestly.

Another project that may not have much resonance with many of you here who would not have faced the ignominy of living without electricity, living without a toilet, not having clean cooking facilities at home. It’s something which many of us in this room may never have experienced. Madam Mahalaxmi asked me to step on to the hills over there, outside the room and make a wish. Many people are superstitious of sharing a wish, but I have no hesitation in telling you that I only wish that as we dream of a new India, as we aspire for a better India for every citizen of this country, as we wish that every citizen has a roof, has shelter over his head, has electricity 24/7, has a toilet in his home, clean drinking water, good healthcare facilities, quality education, digital connectivity, I think if we can all collectively work to meet that goal and we have set an aggressive timeline of 15th August 2022 when India turns 75.

If we can achieve that in this defined time frame I think there can no better aspiration, there can be no better future to look forward to, no better dream to have as I did over there than to see that developed India, an India where every citizen has at least the basic amenities taken care of and that is the India we have been trying work out, that is the India where every rupee of the tax that all you are paying is being spent for, that is the India which funds Soubhagya programme under which we have ensured that every willing consumer in this country is guaranteed and has been given an electricity connection.

We have the last couple of million or so left where also we are actually reaching out to people. We are not sitting in the office and asking people come and take an electricity connection. Our teams are fanning out into the villages to make sure that every willing consumer at least fills in just a short half a page as an application and we can guarantee him an electricity connection and give it to him. That is the effort that has been put in over the last four years under the Swachh Bharat Abhiyan to ensure that sanitation standards in India go up and I am happy to report to you that as against one out of three woman having the facility of a toilet in India we had only 34% sanitation coverage in India in 2014. Today it is 95%. We have built nearly 9.5 crore – 95 million toilets have been built in the last four years to give our sisters, our mothers a life of dignity. It is a matter of shame for all of us collectively as Indians that it took us 70 years to achieve that.

Most women in this country particularly in rural India and also in many of our slum areas in the cities used to cook using coal, using wood, fig leaves. Some reports suggest that nearly 400 cigarettes worth of smoke were being pumped into a woman’s body and the family’s body living in their home after all this smoke would be in the atmosphere. The country had only about 130 million families who had LPG connections in 2014.

I am happy to share with you, we have added another 120 million homes who have today got cooking gas LPG connection. We added more LPG connections in four and a half years than were probably given out in the last 40 or 50 years. And I think in the next 6 to 8 months there will be no home in this country which will be deprived of clean cooking facility using an LPG cylinder, and our next step is to make sure that we can provide that through piped gas, so that ultimately all our homes can be connected through piped gas, like it would be in any part of the developed world. And I can go on and on about it.

We built about twelve and a half million homes in the last four years, four and a half years as against the typical two and half million homes built in the five years before that for the poor of India. In addition to that, we have come up with a programme where for the common man, the middle class, six and a half percent interest subvention, a subsidy amounting to six and a half percent on a loan up to six lakh rupees is provided. And a typical small home for a common middle class person may not be in Mumbai but most parts of India would not cost more than nine lakhs, ten lakhs rupees.

We are trying to empower our middle class to become home owners and ensure that in the next 3 to 4 years we will have everybody having a shelter over his head and this is what we believe is the aspiration of India. This is what we believe is essential for businesses to prosper, because a happy population, a population whose basic needs are met will provide us that happy workforce, will provide us skilled manpower, will provide us people who are educated, will provide us people who are healthy.

The healthcare program is going to cover 500 million people with free healthcare and many of us here may be aware that many families would go into distress for lack of ability to pay for healthcare. Many middle-class families would get into penury, because they could not afford healthcare. And I think that is the challenge that is the commitment with which we have set out very often making very ambitious programs, very ambitious goals. Many times it seems impossible whether we will be able to achieve that.

But I think it is important and that is the leading edge that I think we all desire to see in business, in politics, in government, in every walk of life. The desire to dream big, the desire to aspire for big goals, the desire to have very audacious ambitions, very large targets – because unless we dream and unless we dare to dream big, we certainly are not going to be able to see a new India, we are certainly not going be able to meet the aspirations of a youthful India, an India which is connected to the global world, an India which is integrating with the world, particularly through the advent of digital technologies.

And I am sure, with the collective effort of all sections of society, with the effort of business, with the effort of government, with the effort of media, with the collective effort of all of us in this room, there is no dream that we cannot fulfil, there is no promise that needs to remain unkept.

Let us go for an India where every citizen gets the basic needs of life where every Indian knows that he has an equal opportunity, where every Indian knows that the country and the people of the country care for a united, for a strong India whose boundaries are secured, whose people live with the highest degree of social security, physical security, whose entire life should be focused on a better future for those who possibly could not board the train.

I think most of us in this room also may have sometime or the other had a humble background, may have come from some village, may have come from some smaller past. My own father, for instance, studied under streetlights to secure his engineering degree. I often used to joke that may be Mr. Modi made me the Power Minister knowing that background since they were colleagues, and gave me the job to ensure that every citizen of this country gets electricity, no child has to  study under a streetlight ever again, no woman has to be embarrassed and cannot use the toilet between sunrise and sunset in this country, to make India one of the greatest countries in the world, to bring not that 5 trillion dollar economy to India, but to aspire to be the world’s largest economy to overtake all the other economies in the world.

And I think we as Indians should collectively be aspiring to once again make India that Sone Ki Chidya, that golden bird that we at once upon a time are proud to have inherited. I think we are lucky, we are very fortunate to have a rich legacy, a rich heritage behind us. Let us bring back that glory to India. Let us collectively work to make India a superpower, as they say in the Onida ad “Neighbour’s envy but owner’s pride”.

Thank you

कैबिनेट द्वारा लिए गए कुछ महत्वपूर्ण निर्णयों के बारे में संवाददाताओं को संबोधित किया

रेलवे सुरक्षा पर आयोजित ऑल इंडिया कॉंफ्रेंस के उद्घाटन समारोह में गृह मंत्री राजनाथ सिंह जी तथा रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के साथ रेलवे सुरक्षा बलों के कार्यों में तकनीक के उपयोग, ट्रेनिंग व उनके दायित्वों पर अपने विचार रखे

Speaking at Inaugural Function of All India Conference on Railway Security, in New Delhi

.. के नेतृत्व से प्रोत्साहन मिलता है, जिनके नेतृत्व से और तमन्ना बढ़ती है कि अच्छा काम करे ऐसे सन्मान्य श्री राजनाथ सिंह जी; मेरे बड़े भाई,  मित्र और हमारे वरिष्ठ नेता कम्युनिकेशन मिनिस्टर, रेल मिनिस्टर श्री मनोज सिन्हा जी; रेलवे बोर्ड के नए चेयरमैन श्री विनोद कुमार यादव जी, डीजी आरपीएफ श्री अरुण कुमार जी; सभी मेंबर्स, अधिकारीगण रेलवेज के, आरपीएफ के, अलग-अलग राज्यों से आये हुए अधिकारीगण और प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के मेरे बंधु मित्र, भाईयों और बहनों।

वास्तव में बड़ा अच्छा सुनहरा अवसर है आप सबसे मिलने का, समझने का कि ज़मीनी हकीकत क्या है, किस प्रकार से हम और अच्छा काम कर सकते हैं। मैं अभी-अभी अरुण जी को कह रहा था देखता हूँ मैं बीच में किसी और समय आकर आपसे इंटरैक्ट करना चाहूंगा तो इसलिए मैं अपनी बात को कुछ ही शब्दों में करूँगा, माननीय गृह मंत्री जी के अलग कार्यक्रम है। आज कैबिनेट थोड़ी लम्बी चली इसलिए हमें आने में विलंभ हो गया उसके लिए हम माफ़ी चाहते हैं।

लेकिन एक-दो बातें ज़रूर रखना चाहूंगा, एक तो अनुभव मैंने अभी कैबिनेट में भी शेयर किया। कल रात को मैं 11 बजे के शो में Uri – A Surgical Strike देखने गया था। कल मंगलवार था, आज वर्किंग डे है, 11 बजे के शो में multiplexes में मैंने लगभग 5-7 सालों में even on a weekend कभी भरा हुआ हॉल नहीं देखा। कल पांचवा दिन था पिक्चर का, पांचवे दिन रात के 11 बजे के शो में पूरा मल्टीप्लेक – और मेरे ख्याल से यह पीवीआर का चाणक्यपुरी में अगर आपने देखा है तो कफी बड़ा है, must be having at least 4-500 seats. चकाचक भरा हुआ हॉल, और एक-एक सीन के ऊपर जिस प्रकार से तालियां बज रही थी वहां पर, जो उत्साह था जनता में, जब जय हिन्द का नारा बोला जाता था जिस प्रकार से लोगों में एक ऊर्जा आती थी और जब फिल्म ख़त्म हुई जिस प्रकार से खड़े होकर सबने ताली बजाई मैं समझता हूँ अपने आपमें आप सबके लिए, हमारे नौजवानों के लिए और आप सब भी देश के लिए अपना बलिदान करने के लिए तट पर रहते हैं आप सबके लिए और हम सब देशवासियों के लिए इससे बड़ा सम्मान नहीं हो सकता है कि हमारे जवान, हमारे पैरामिलिटरी फोर्सेज, इनके प्रति यह भाव देश में रहे, देश में बढ़े, देश सम्मान करे। और यह वास्तव में आपके बलिदान, आपके काम का प्रतीक है कि 11 बजे के शो में फुल पैक्ड हाउस खड़े होकर ताली बजाये यह मैं समझता हूँ आप सबकी शौर्य काम का, आप सबकी वीरता का एक प्रकार से सम्मान है।

And I compliment all of you for having taken up this job in the first place. सरल काम नहीं है, आलोचना भी बहुत होती है, अलग-अलग प्रकार की आलोचना होती है कि कई जगह काम ठीक से नहीं होता है, कम होता है, ज़्यादा होता है। आलोचक अपना काम करते रहेंगे, मैं समझता हूँ हमने खासतौर पर जो उच्च स्तरीय अधिकारी हैं जिनको नेतृत्व करना है पूरी आर्गेनाइजेशन का। हमें आलोचना से डरना भी नहीं चाहिए और डिस्ट्रैक्ट भी नहीं होना चाहिए, आलोचना से कुछ न कुछ सीखने को मिले उतना सीखना चाहिए लेकिन अपना जो काम है, अपने काम के प्रति जो जैसे मनोज जी ने कहा संवेदनशीलता रहनी चाहिए जनता के प्रति, यात्रियों के प्रति।

और किस प्रकार से जीआरपी हो, स्टेट पुलिस हो, आरपीएफ हो मिल जुलकर काम करके और यात्रियों को एक सुरक्षित माहौल दें, सुरक्षित यात्रा करने के लिए एक sense of confidence create करें इसके ऊपर अगर आज आप लोग चर्चा करते हैं, आगे की दिशा निर्धारित करते हैं कानूनी बदलाव हो नहीं हो, स्टेट पुलिस करे, आरपीएफ करे यह तो technicalities हैं। एक बार आप सबने मन बना लिया कि हमको मिल जुलकर आउटकम अचीव करना है फिर मैं समझता हूँ कानून आड़े कभी नहीं आता है।

और वैसे तो आप सब अच्छी तरह जानते हैं कि आउटकम कैसे लाना और उस आउटकम लाने में कभी न कभी थोड़ा बहुत दिल में जब तक वह चेष्टा न हो, दिल में जब तड़प नहीं हो कि मुझे पकड़ना है, मुझे चोरी रोकनी है, मुझे महिलाओं के, बच्चों की सुरक्षा करनी है, उनके प्रति जो गलत काम हो रहे हैं उसको रोकना है। और मैं बधाई दूंगा अभी-अभी जैसे बताया रेखा मिश्रा का किस्सा, उन्होंने लगभग 900 मिसिंग बच्चों को बचाया है – 900 is not a small number for one team to do.

आरपीएफ कांस्टेबल राज कमल यादव ने पीछे एक जान बचाई महिला की मुंबई में कांजुरमार्ग स्टेशन में जो लगभग ट्रेन के नीचे गिर रही थी वह गैप के अंदर और उसने presence of mind दिखाकर उनको निकाला। इसी प्रकार से हमारी अलग-अलग महिलाओं की स्क्वॉड्स भैरवी, वीरांगना, शक्ति, अलग-अलग ज़ोन्स में बेमिसाल काम कर रहे हैं। और मैं समझता हूँ यह जो पिछले वर्ष 2018 में जिस प्रकार से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए आप सबने जो काम किया, जो मेहनत की वह वास्तव में बधाई का पात्र है। And I would believe कि यह continuous process रहना चाहिए, एक हमने उसको एक फोकस दिया पिछले साल पर इस फोकस को ज़रा भी हटाना नहीं चाहिए।

और जैसे मनोज जी ने कहा पहले 6000 स्टेशन हर स्टेशन पर लगेंगे सीसीटीवी कैमरा, अगले तौर पर जब हम, और वाई-फाई तो हम लगभग 3-4 महीने में हर स्टेशन पर लगा देंगे जिससे कम्युनिकेशन निंबल हो जाये, फ़ास्ट हो जाये। अगले चरण में हम सभी 12,000 ट्रेन्स में सीसीटीवी का जाल बिछाना चाहते हैं। तो हर ट्रेन में भी सीसीटीवी कैमरा पूरा रिकॉर्डिंग करें, हर घटना, हर व्यक्ति जो आता है और फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ जोड़कर कैसे हम फेस रिकग्निशन, एब्नॉर्मल मूवमेंट इन सबको साइबर क्राइम का भी आपने ज़िक्र किया सेल शुरू किया है।

मैं अभी-अभी ट्रेनिंग मैनुअल्स देख रहा था काफी कुछ बल दिया गया है आधुनिकीकरण को, आधुनिक टेक्नोलॉजीज को और मुझे ख़ुशी हुई यह देखकर कि आपने इसपर फोकस किया है। और जो भी हमारे यहाँ पर अधिकारी हैं ट्रेनिंग के मैं आपसे दरख्वास्त करूँगा ट्रेनिंग कोई डेडएन्ड जॉब नहीं है, अगर मेरा बस चले तो जो बेस्ट ऑफिसर्स हैं हमारे रेलवे के या सरकार के उनको मैं ट्रेनिंग में डालना चाहूंगा क्योंकि आप अकेले व्यक्ति हो जो सबसे ज़्यादा इम्पैक्ट कर सकते हैं रेलवे के काम में या अलग-अलग संस्थाओं के काम में। As they say, you train the trainer और फिर वह ट्रेनर जितने लोगों को ट्रेन करेगा उतना ज़्यादा हम सबके काम में और अच्छा काम मिलेगा और अच्छा आउटकम मिलेंगे।

तो मैं समझता हूँ ट्रेनिंग पर और बल दिया जाये, एक निर्णय लिया था, I hope you are implementing it कि हर साल दो हफ्ते कम से कम हर हमारे जितने 75,000 के करीब लोग हैं आरपीएफ में सबका कंटीन्यूअस लर्निंग, कंटीन्यूअस ट्रेनिंग प्रोग्राम minimum two weeks हर वर्ष होना चाहिए, एक चरण में हो दो चरण में हो वह सब आप मोडलिटीज़ करें। लेकिन मुझे लगता है हम ट्रेनिंग पर बल दें, आधुनिक टेक्नोलॉजीज लाएं अपने काम में और इसमें कोई हमें सब कुछ ध्यान में आएगा ऐसा नहीं है, मैं समझता हूँ आप सब हमसे ज़्यादा जानते हैं कि कैसे हम क्राइम को प्रिवेंट भी कर सकते हैं और फिर लोग कुछ गलत काम करें तो पकड़ भी सकते हैं।

और मैं चाहूंगा आप सब आज की भी कांफ्रेंस है लेकिन आगे भी इसमें सबकी सहभागिता हो, और सब मिलकर आगे की दिशा निर्धारित करें कैसे हम भारतीय रेल को – of course, one can argue कि crime-free या zero तो कभी होता नहीं है, पर एक aspirational goal ज़रूर zero tolerance का होना चाहिए। अभी-अभी बताया गया body cameras वगैरा के बारे में, actually body cameras हम भ्रष्टाचार के विरुद्ध भी बहुत अच्छा उपयोग कर सकते हैं। इसका आप प्रचार करिए कि हम body cameras के माध्यम से अगर कोई रिश्वत देने की कोशिश करे हमें तो हम उसको पकड़वाएंगे और हमारे पास सबूत होगा। और हम रेलवेज में कुछ लोग भेजें जो रिश्वत देने की कोशिश करे और अगर आरपीएफ ने, कांस्टेबल ने कंप्लेंट नहीं की तो दूसरी तरफ से पकड़ा जायेगा।

तो दोनों तरफ से हम भ्रष्टाचार को रोकने के लिए नए-नए तरीके भी ढूंढ सकते हैं। तो मेरा मानना है कि अगर हम सब मिलकर एक परिवर्तन लाने की कोशिश करें एक नयी भावना से इस पूरे हमारे काम को सुनिश्चित करें, काम का तरीका बदलें तो आगे आने वाले दिनों में रेल यात्रा को सबसे सुरक्षित यात्रा बनाने का हमारा जो लक्ष्य है, और aspiration has zero tolerance to crime, उसमें हम सफल होंगे ऐसी मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

आप सबने देश की सेवा में अपना, लगभग हम सब यहाँ पर शायद 30 वर्ष से अधिक सर्विस वाले व्यक्ति इकट्ठे हुए हैं, आपने अपना जीवन का अमूल्य समय देश की सुरक्षा के लिए, यात्रियों की सुरक्षा के लिए और देश की सेवा में दिया इसके लिए आपका और आपके सभी के परिवारों का भी मैं बहुत-बहुत धन्यवाद करना चाहूंगा। मकर संक्रांति अभी-अभी कल हमने मनाई है मकर संक्रांति, पोंगल, लोहड़ी, जिस देश में नया वर्ष अलग-अलग प्रकार से मनाया जाता है और कुंभ भी कल ही प्रारंभ हुआ है।

कुंभ में भी आपने बहुत बढ़िया व्यवस्थाएं बनाई हैं जो मैंने रिव्यू किया था उसके हिसाब से कुंभ की भी व्यवस्थाएं शायद अत्याधुनिक हैं, पहली बार इतनी अच्छी व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की गयी है। और जैसा कहते हैं कुंभ तो वास्तव में, और इसमें ज़्यादा आध्यात्मिक तो माननीय गृह मंत्री जी हैं, लेकिन कुंभ की शुरुआत हुई थी जब मंथन हुआ और उस मंथन से अमृत चार जगह पहुंचा उससे कुंभ का आरंभ हुआ था। तो आज आपका भी यह मंथन दिन भर की कांफ्रेंस कुछ अच्छे pearls of wisdom हमें दे इस अपेक्षा के साथ मैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूँ।

 

 

Briefing media on Cabinet Decisions, in New Delhi

… भारतीय जनता पार्टी और एनडीए की सरकार की तरफ से मैं आप सभी को मकर संक्रांति की, पोंगल की, लोहड़ी की और एक प्रकार से देश में विशेषता है कि पूरे देश में नया वर्ष अलग-अलग राज्य में अलग रूप से मनाया जाता है, आप सबको आपके परिवारों को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। साथ ही साथ कल कुंभ का भी आरंभ हुआ है और लगभग सवा दो करोड़ लोगों ने कल कुंभ में स्नान किया, कुंभ स्नान किया और मैं समझता हूँ सभी ने मिल जुलकर जो प्रयास किये कि अच्छी सुविधाएं मिलें सभी कुंभ के यात्रियों के लिए यह वास्तव में बधाई के पात्र हैं।

और राज्य सरकार को, उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार और सभी उन लोगों को मैं धन्यवाद करना चाहूंगा जिन्होंने इसके लिए इतनी अच्छी अरेंजमेंट किये कि सभी को बहुत सरलता से, बहुत सुविधाजनक तरीके से मौका मिले कुंभ में स्नान करने का।

आज कैबिनेट कमिटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की अध्यक्षता में एक बहुत ही अहम निर्णय लिया, जो नुमालीगढ़ रिफाइनरी है असम में, उसकी जो क्षमता है, उसकी जो कैपेसिटी है उसको सीधा तीन गुना करने का निर्णय, 3 मिलियन मैट्रिक टन पर एनम से बढ़ाकर 9 मिलियन मैट्रिक टन पर एनम, तीन गुना वृद्धि नुमालीगढ़ रिफाइनरी असम की क्षमता में लगभग 22,594 करोड़ की लागत से यह प्रोजेक्ट अगले चार वर्षों में पूरा किया जायेगा। यह इसलिए भी अहम है कि पूरे उत्तर पूर्वी इलाके में जो क्रूड ऑइल की रिक्वायरमेंट है, वहां की जो रिफाइनिंग कैपेसिटीज़ की रिक्वायरमेंट है, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की रिक्वायरमेंट है, उसको यह आगे चलकर बड़े पैमाने पर उसकी पूर्ति करेगा।

और साथ ही साथ इसमें क्रूड ऑइल की पाइपलाइन पारादीप से नुमालीगढ़ भी लगेगी और जो फिनिश्ड प्रोडक्ट है उसकी पाइपलाइन नुमालीगढ़ से सिलीगुड़ी तक लगाने का भी निर्णय कैपेसिटी एक्सपेंशन के साथ-साथ लिया गया। इन्वेस्टमेंट इस 3 मिलियन मेट्रिक टन पर एनम की रिफाइनरी को 3 गुना कैपेसिटी यानी 9 मिलियन मेट्रिक टन पर एनम करने में 22,594 करोड़ की लागत से अगले चार वर्षों में इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जायेगा। कैपेसिटी एक्सपेंशन के साथ-साथ पाइपलाइन भी नयी बिछाई जाएगी पारादीप से नुमालीगढ़ तक और जो फाइनल प्रोडक्ट निकलेगा उसकी पाइपलाइन नुमालीगढ़ से सिलीगुड़ी तक।

तो एक उत्तर पूर्वी भारत में विकास की लहर तेज़ गति से चलती रही, अन्य-अन्य क्षेत्रों में उत्तर पूर्व में निवेश हो, फिर चाहे आज का जैसे फैसला है ऑइल रिफाइनरी का, इसके पहले पेट्रोलियम मिनिस्ट्री में कई अहम फैसले लिए गए गैस फ़ील्ड्स को लेकर, ऑइल एक्सप्लोरेशन को लेकर नॉर्थ ईस्ट में। अन्य-अन्य विभाग चाहे वह हाईवे विभाग हो, सड़क का विभाग हो, रूरल डेवलपमेंट मिनिस्ट्री हो, रेलवेज हो, सभी ने अटक प्रयास किये हैं गत चार वर्षों में उत्तर पूर्वी भारत को तेज़ गति से विकास पहुंचे, तेज़ गति से विकास का लाभ हमारे भाइयों बहनों को, बच्चों को वहां पर मिले।

और एक खास बात इस एक्सपेंशन प्रोजेक्ट की ऐसी है कि इसमें लगभग 15,102 करोड़ रुपये का तो ऋण लिया जायेगा, लोन, बाकी जो इक्विटी है, इक्विटी सपोर्ट भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, ऑइल इंडिया लिमिटेड और असम की सरकार यह तीनों देंगे और केंद्र सरकार की तरफ से 1020 करोड़ रुपये का viability gap funding भी इस प्रोजेक्ट को दिया जा रहा है।

इस 1020 करोड़ रुपये के viability gap funding से यह प्रोजेक्ट की viability सुनिश्चित हो जाती है और उसको सभी ऋण लेने में, लोन लेने में और सभी सुविधाओं के लिए भी आसानी हो जाएगी। यह सीधे रूप में कई लोगों को रोज़गार के अवसर देगा और indirect employment के भी बहुत सारे साधन इस प्रोजेक्ट के माध्यम से प्रोजेक्ट जब लगेगा और प्रोजेक्ट जब चल जायेगा, दोनों अवधि में direct और indirect employment का बहुत बड़ा साधन बनेगा उत्तर पूर्वी भारत में और साथ ही साथ इससे जो सरकार की जो हाइड्रोकार्बन विज़न है 2030 तक का खासतौर पर उत्तर पूर्वी भारत के लिए उसका एक बहुत अहम भूमिका यह प्रोजेक्ट निभाएगी ऐसा सरकार का मानना है।

मैं माननीय प्रधानमंत्री जी का धन्यवाद करना चाहूंगा कि इस अहम फैसले के साथ असम और पूरे उत्तर पूर्वी भारत को एक बहुत बड़े रूप में निवेश मिलेगा, बड़े रूप में वहां की आर्थिक और व्यवस्था की उपलब्धियों में वृद्धि होगी और मुझे लगता है कि direct-indirect employment हमारे असम के और उत्तर पूर्वी भारत के भाइयों बहनों को भी मिलने का बहुत अच्छा यह साधन होगा।

चार अहम फैसले कैबिनेट ने भी आज लिए हैं जिसकी जानकारी मैं आपके साथ रखना चाहूंगा। एक तो Export Import Bank of India – EXIM Bank of India, इसमें केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है 6000 करोड़ रुपये का नया capital infusion, in the form of recapitalisation bonds – यह जिस प्रकार से पब्लिक सेक्टर बैंक्स में recapitalisation bonds दिए गए हैं उसी प्रकार से 6000 करोड़ के बॉन्ड्स, 4500 करोड़ तो इसी वर्ष मार्च के पहले और 1500 करोड़ अगले वर्ष में, ऐसे 6000 करोड़ EXIM बैंक की इक्विटी कैपिटल में recapitalisation bonds के माध्यम से दिया जायेगा।

और इसी के साथ-साथ जो authorised share capital है EXIM bank का इसको 10000 करोड़ से बढ़ाकर अब 20000 करोड़ रुपये अप्रूव कर दिया गया है, आप सभी जानते हैं कि यह आयात-निर्यात के लिए एक बहुत अहम भूमिका EXIM Bank की रहती है, एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट को प्रमोट करना इसका कार्य है। और यह जो नया कैपिटल EXIM Bank में दिया जा रहा है इससे उनकी capital adequacy तो सुधरेगी साथ ही साथ उनकी क्षमता, खासतौर पर भारत के एक्सपोर्ट को credit needs को meet करने के लिए जो उनकी ऋण की ज़रूरतें होती हैं उसको पूरा करने के लिए इस 6000 करोड़ रुपये के निवेश से, इन्वेस्टमेंट से काफी गति मिलेगी एक्सपोर्ट फाइनेंसिंग को।

इसमें खासतौर पर कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जैसे कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री है, कपड़े का व्यापार है उसमें एक्सपोर्ट की बहुत अभूत संभावनाएं हैं, huge opportunities in the Indian textile export industry. और हमारा मानना है कि इस निवेश के साथ EXIM bank टेक्सटाइल इंडस्ट्री को भी बड़े रूप में सपोर्ट करने की क्षमता ले पायेगी। इससे लाइन ऑफ़ क्रेडिट्स भी आगे भारत के जो export of services या कॉन्ट्रैक्ट के एक्सपोर्ट होते हैं उसके लिए भी लाइन ऑफ़ क्रेडिट्स मिलने में एक्सपोर्टर्स को सुविधा होगी जिससे भारत की जो विदेश नीति है, जो हमारे स्ट्रेटेजिक इंट्रेस्ट्स हैं विदेश में उसको भी मीट करने के लिए यह लाइन ऑफ़ क्रेडिट लाभ देगी।

दूसरा डिसिशन जो बहुत ही अहम लिया गया है वह है एक इनकम टैक्स का जो ई-फाइलिंग का पोर्टल है और जो centralised processing centre है इन दोनों को integrate करके, दोनों को जोड़कर एक Integrated e-Filing and Centralised Processing Centre – 2.0 के प्रोजेक्ट को आज मंज़ूरी दी गयी है। यह प्रोजेक्ट अपने आपमें एक सफल प्रयोग रहा है इनकम टैक्स विभाग का, मैं कुछ आंकड़े आपके समक्ष रखना चाहूंगा।

इस प्रोजेक्ट के माध्यम से अभी तक लगभग 23 करोड़ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल हो चुके हैं और रिफंड देकर तो अभी तक 2,61,808 करोड़ के रिफंड इस ऑटोमैटिक कंप्यूटराइज्ड फैसिलिटी के माध्यम से सितम्बर 30, 2019 तक दिए जा चुके हैं। अगर इसी वर्ष का देखें तो पहले 6 महीने में अप्रैल से सितम्बर, एक करोड़ 83 लाख रिफंड सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग यूनिट के माध्यम से सीधे जो इनकम टैक्स पेयर हैं उनको पहुंचाए गया।

और मैं समझता हूँ हम सबने उसका स्वाद लिया कि बिना किसी को पूछे, बिना किधर दफ्तर जाये, बिना कोई अफसरशाही के, बिना जूते घिसे इस वर्ष बड़े पैमाने पे इनकम टैक्स के रिफंड हम सबको अपने-अपने घर पर, अपने काम की जगह पर सीधा पहुँच गए हैं। और इस पोर्टल इस आगे के 8 वर्षों के लिए इसको एक इंटिग्रेट करके एक ही पोर्टल बनाया जाये उसके लिए एक पारदर्शी बिडिंग की गयी थी और बिडिंग करने से जो लोवेस्ट बिडर आया उनको यह काम दिया गया है। और इस प्रकार की बिडिंग से भी इस काम के खर्चे में सरकार काफी पैसा बचा पायी है। इस प्रोजेक्ट में लगभग 4241 करोड़ का इन्वेस्टमेंट इस प्रोजेक्ट में किया जायेगा।

इस प्रोजेक्ट से और अधिक तेज़ गति से इनकम टैक्स की असेसमेंट हो पायेगी, रिफंड दिए जा सकेंगे और जो टैक्सपेयर्स का एक्सपीरियंस है उसको और सरल करना टैक्स फाइलिंग की सुविधा को और सरल करने का भी इसमें प्रावधान रखा गया है। और कुछ इसके भी जो मापदंड तय किये गए हैं वह बहुत ही इंटरेस्टिंग हैं। आप अगर देखें तो इसमें क्या आउटकम हम सोचते हैं, उदाहरण के लिए आज के दिन जब कोई इनकम टैक्स रिटर्न प्रोसेस होता है तो उसकी प्रोसेसिंग टाइम लगभग 63 दिन हैं।

यह नयी सुविधा जब एक बार लागू हो जाएगी जिसको लगभग 18 महीने लगेंगे इसको बनाने में और उसके बाद 3 महीने और के बाद चालू हो जायेगा टेस्टिंग के बाद, वह 63 दिन के बदले प्रोसेसिंग एक दिन में हो पायेगा। The turnaround time to process an income tax return will reduce from 63 days to only one day.

इसी प्रकार से अगर कोई rectification requests होती है किसी की तो वह भी और कम हो जाएँगी क्योंकि एक्यूरेसी इसमें मेन्टेन करने के प्रावधान बनाये जा रहे हैं, और हमारा मानना है कि जो आजके दिन 2% रिटर्न्स को rectify करने के लिए लोग आते हैं वह घटकर मात्र 0.1% हो जायेगा। यानी जो आजके दिन रेक्टिफिकेशन होते हैं उसका सिर्फ 5% रह जायेगा, 95% को रेक्टिफिकेशन की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी।

इसी के साथ-साथ जो आउटस्टैंडिंग डिमांड्स हैं इनकम टैक्स की उसको भी फास्टर कलेक्ट करने के लिए सुविधा इसके माध्यम से रहेगी और साथ ही साथ डिजिटल मीडिया को इस्तेमाल करके हम और ज़्यादा बड़े रूप में कर देने वालों को, टैक्सपेयर्स को सुविधा दे पाएं चाहे वह फिर रियल टाइम प्रोसेसिंग ऑफ़ इनकम टैक्स रिटर्न्स हों, एक्यूरेट रिटर्न भरने में सुविधा हो, चाहे उनकी grievances को resolve करने में गति लाने का काम हो, चाहे वह लोगों को और अवेयरनेस पहुंचाना डिजिटल माध्यम से, ईमेल, एसएमएस के द्वारा, अलग-अलग प्रकार से एक पॉजिटिव सेंटीमेंट इनकम टैक्स विभाग के साथ जोड़ने की यह एक कल्पना की गयी है।

मैं समझता हूँ एक कड़ी में जिसमें कई सारे इनकम टैक्स के सुधार और इनकम टैक्स के सुधार के लिए कई सारे बड़े निर्णय अभी तक जो किये गए हैं उसमें यह एक बहुत अहम निर्णय आज के दिन सरकार ने किया है। और मुझे पूरा विश्वास है कि इससे आगे चलकर और ज़्यादा टैक्सपेयर्स को सुविधा मिलेगी और इससे टैक्स के कलेक्शन में भी डिपार्टमेंट को और सरकार को मदद मिलेगी।

एक तीसरा निर्णय जो 13 नयी सेंट्रल यूनिवर्सिटीज अलग-अलग राज्यों में बनने का निर्णय कई वर्ष पहले हुआ था उसके संदर्भ में है। आज ऐसा निर्णय लिया गया है कि यह जो 13 सेंट्रल यूनिवर्सिटीज हैं इनको जल्द से जल्द पूरा किया जाये और उसके लिए जो पूरी लागत लगेगी उसका अनुमान निकालकर लगभग आजके दिन 8,113 करोड़ की लागत से यह सब 13 यूनिवर्सिटीज ख़त्म करना है, ख़त्म करने का निर्णय लिया गया है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि इसका जो ओरिजिनल एस्टीमेट था वह सिर्फ 3,120 करोड़ का पिछली सरकार ने बनाया था लेकिन इसके कामकाज को तेज़ गति न देने के कारण इसमें विलंभ हुआ और उस विलंभ के कारण 3,120 करोड़ बढ़कर आज 8,113 करोड़ रुपये हो गया है जिसमें से लगभग 4500 करोड़ तो ऑलरेडी खर्च चुके हैं। तो आज के निर्णय में लगभग 1400 करोड़ रुपये जो ऑलरेडी खर्च हो चुका है इन यूनिवर्सिटीज पर उसके लिए ex post facto approval भी दिया गया है और जो आगे 3,640 करोड़ रुपये और लगेंगे उसका भी निर्णय लेकर लगभग 5000 करोड़ रुपये सेंट्रल यूनिवर्सिटीज, यह 13  यूनिवर्सिटीज को कम्पलीट करने के लिए।

और यह यूनिवर्सिटीज का मैं एक ज़िक्र कर दूँ। एक है दक्षिण बिहार में, गया में; एक है हरियाणा में महेंद्रगढ़ में, एक जम्मू में जम्मू कश्मीर में, एक रांची में झारखंड राज्य में, एक श्रीनगर में, फिर एक बार जम्मू कश्मीर में; एक गुलबर्गा में कर्नाटक, एक कासरगोड केरल, कोरापुट ओडिशा, बठिंडा पंजाब, अजमेर राजस्थान, तिरुवरुर तमिल नाडु,  एक गुजरात की यूनिवर्सिटी और एक हिमाचल प्रदेश की, ऐसे 13 यूनिवर्सिटीज का अनुमानित खर्चा, पूरे 8113 करोड़ को आज कैबिनेट ने मंज़ूरी दी।

एक प्रकार से इसकी जब हम डिटेल्स में जा रहे थे तो ध्यान में आया कि कैसे बिना पूरी तरीके से इसका एस्टिमेशन ठीक करके इसको कैसे जल्दबाज़ी में पारित किया गया था 2008 में, और 2008 में पारित करने के बाद कैबिनेट द्वारा इसका जो बजट अप्रूवल है वह लगभग दो वर्ष के बाद 2010 में किया गया, 5 अक्टूबर 2010 को। तो दो वर्ष लगे कैबिनेट अप्रूवल के बाद कैबिनेट के पास इसके बजट को लेकर जाने के लिए और फिर भी वह बजट सिर्फ मात्र 3100 करोड़ का अप्रूव किया जबकि खर्चा उसका लगभग 8000 करोड़ से अधिक है।

तो इस सरका ने उस पूरे 8000 करोड़ के बजट को आज मंज़ूरी दी है और यह जल्द से जल्द यह सब सेंट्रल यूनिवर्सिटीज लगें इसके लिए एचआरडी मिनिस्ट्री और केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ लगातार संपर्क में है।

एक चौथा निर्णय संवेदनशील निर्णय है कई वर्षों से बिजली विभाग में, विद्युत विभाग में जो हाइड्रोपॉवर कम्पनीज हैं – NHPC, NEEPCO – North Eastern Electric Power Corporation, Tehri Hydro Development Corporation (THDC), और SJVN (Satluj Jal Vidyut Nigam), इन चारों में 1997 से 20 वर्षों से एक जटिल समस्या चल रही थी जो थी approval for regularisation of pay scales. जो भी लोग कर्मचारी वहां काम करते हैं, बोर्ड को छोड़कर नीचे जितने कर्मचारी काम करते हैं – below board level executives – इन चारों संस्थाओं में लगभग जनवरी 1997 से यह जटिल समस्या चल रही थी।

लगभग 5254 ऐसे अफसर थे जिनको इस revision of pay scale का लाभ मिल नहीं पा रहा था। और उन सभी को इस निर्णय से लाभ होगा, उन सभी के जो पुरानी समस्या थी उसको 323 करोड़ रुपये देकर, salary arrears के रूप में देकर इनकी regularisation of pay scales का निर्णय आज सरकार ने लिया है। इससे तीनों एक जनवरी 1997 से लेकर एक समस्या को हल करने का जो प्रयास भारत सरकार ने माननीय प्रधानमंत्री जी के अध्यक्षता में आज कैबिनेट ने लिया, मुझे पूरा विश्वास है यह सभी कर्मचारी इसका स्वागत करेंगे और इसका लाभ सभी को मिलेगा।

इसके अलावा ज़रूर एक Memorandum of Understanding sign किया गया है ऑस्ट्रेलिया के साथ जिसमें mines और mine safety को लेकर हम किस प्रकार से ऑस्ट्रेलिया की Queensland Government जो है उसका जो Department of Natural Resource, Mines and Energy है उससे हम नयी टेक्नोलॉजीज जिससे माइनिंग में सेफ्टी, टेस्टिंग, रिसर्च इन चीज़ों में किस प्रकार से हम अत्याधुनिक और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की टेक्नोलॉजीज का इस्तेमाल करके भारत में माइनिंग को अपग्रेड कर सकें इसके लिए एक DGMS – Director General Mine Safety और Ministry of Labour ने Queensland Government, Australia के साथ यह MoU sign किया है।

इसी के साथ-साथ एक MoU हमने Republic of Maldives के साथ visa facilitation का किया है, वह भी एक बहुत बड़ी उपलब्धि रही है मोदी सरकार की कि वीसा के क्षेत्र में बहुत सरलीकरण हुआ है और लगभग आज पूरे विश्व में हम जहाँ भी जाना चाहें या जहाँ से लोग भारत आना चाहें उसके वीसा को सरलीकरण को और सुविधा देने का बहुत बढ़िया काम विदेश मंत्रालय ने गत चार वर्ष में किया है। उसी कड़ी में आज Government of Republic of Maldives के साथ जो एग्रीमेंट हुआ था उसका ex post facto approval central cabinet ने आज दिया है।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

प्रश्नउत्तर

प्रश्न: सर इनकम टैक्स का जो नया पोर्टल बनाया गया है, पोर्टल के ज़रिये क्या यह माना जाये कि अभी इनकम टैक्स की स्क्रूटिनी जो है वह मुश्किल से 5 या 7%……… स्क्रूटिनी करना काफी ज़्यादा आसान होगा उसकी संख्या को बढ़ाई जाएगी और टैक्स इवेजन रोकने में मदद मिलेगा इससे?

उत्तर: पहली बात तो यह पोर्टल अब बनने वाला है, अभी जो पोर्टल है उसको इंटिग्रेट करके उसको और अच्छा बनाएंगे, और उसमें फैसिलिटीज और सुविधाएं जोड़ेंगे तो उसको आगे 18 महीने लगेंगे। लेकिन इसमें किसी प्रकार का स्क्रूटिनी का प्रावधान या स्क्रूटिनी बढ़ाने का प्रावधान नहीं है। और आपकी जानकारी को भी ज़रा मैं ठीक कर दूँ, आज कोई 5 से 7% इनकम टैक्स रिटर्न्स की स्क्रूटिनी नहीं हो रही है। हम ऑटोमैटिक प्रोसेसिंग इस पोर्टल के द्वारा आज भी कर रहे हैं और इसको और बढ़ाने वाले हैं, पर यह ऑटोमैटिक प्रोसेसिंग है तो आपकी तनख्वाह आयी आपने इनकम टैक्स रिटर्न भरना है, एक सरल पोर्टल रहेगा रिटर्न भरने के लिए। या आप बिज़नेस करते हैं, व्यापारी हैं आपने अपना रिटर्न फाइल करने का प्रोसेस भी सिंपल किया जायेगा इसके माध्यम से और आपकी डिक्लेरेशन को हम एक दिन के अंदर प्रोसेस करके एक्सेप्ट करके अगर रिफंड है तो रिफंड पहुँच जायेगा अगर कुछ डिमांड है तो डिमांड मिल जाएगी।

लेकिन इससे कोई स्क्रूटिनी बढ़ेगी ऐसा ज़रा भी कोई कल्पना भी नहीं है और आज के दिन अगर हम देखें तो देश में मात्र जो मुझे लास्ट जानकारी मिली थी .3% रिटर्न्स की स्क्रूटिनी हो रही है। ऑरिजिनल प्लान था कि शायद 1% रिटर्न्स की स्क्रूटिनी होगी लेकिन क्योंकि यह कंप्यूटर जनरेटेड स्क्रूटिनी के लिए लिस्ट बनती है वह मात्र .3% रिटर्न्स की स्क्रूटिनी ली गयी है।

और मैं समझता हूँ अपने आप में यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री मोदी जी और वित्त मंत्री अरुण जेटली जी हमारे करदाताओं को हमारे टैक्सपेयर्स के ऊपर पूरा विश्वास करते हैं, पूर्णतः विश्वास के कारण ही आखिर सबको इनकम टैक्स रिफंड आपके रिटर्न के अनुसार सीधा आपके पास पहुँच गया है। और इसके कारण जो पहले ब्याज देना पड़ता था रिफंड के साथ या कई लोगों को तकलीफ होती थी रिफंड मिलने में या जूते घिसने पड़ते थे यह सब समस्याओं का अब पूरी तरीके से आपको निजात मिल गयी है।

प्रश्न: सर आपने कहा कि अगर प्रोसेसिंग एक दिन में कम्पलीट हो जायेगा लेकिन रिफंड में कई बार दो-दो महीने का समय लग जाता है?

उत्तर: मैंने अभी बताया कि इस बार का रिफंड तो कल्पना के बाहर हुआ है लेकिन प्रोसेसिंग अभी जो सॉफ्टवेयर है उसमें 63 दिन लगते हैं, आज जो हमने मंज़ूरी दी है यह जब इम्प्लीमेंट हो जायेगा तो यह 63 दिन से एक दिन में हो जायेगा प्रोसेसिंग। तो आप समय पर अपना रिटर्न फाइल करिये फ़ास्ट प्रोसेसिंग भी होगा तो इससे ऑटोमेटिकली आपको रिफंड भी और तेज़ गति से मिलेंगे।

प्रश्न: एक-दो दिन में वह भी हो जायेगा सर?

उत्तर: वह तो अब आज के दिन में प्रेडिक्ट नहीं कर सकता हूँ कि 18 महीने बाद…

प्रश्न: और सर वेंडर कौनसा है जिसका आपने कहा कि बिडिंग हो गयी है?

उत्तर: हमने टोटली ट्रांसपेरेंट बिडिंग की थी और उस बिडिंग के माध्यम से इंफोसिस का ऑफर सबसे कम आया और इंफोसिस को यह काम दिया गया है, being a L1 bidder, the lowest bidder. और मेरे ख्याल से बिडिंग से भी काफी बड़ी मात्रा में खर्चा कम हुआ है क्योंकि इसको हमने नॉमिनेट करने के बदले बिडिंग के माध्यम से किया। नहीं तो पहले  क्या रहता था अगर कोई एक कंपनी ने पहले सॉफ्टवेयर बनाया है तो नॉर्मली यह स्वभाव रहता था कि उसी बढ़ा दो। तो उसके बदले हमने सबको मौका दिया, पारदर्शी बिडिंग कराई, और उसके कारण exact figure भी है मेरे पास, काफी खर्चे में भी कमी हुई है।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

 

 

 

 

 

 

 

Briefing media on Cabinet Decisions, in New Delhi

… भारतीय जनता पार्टी और एनडीए की सरकार की तरफ से मैं आप सभी को मकर संक्रांति की, पोंगल की, लोहड़ी की और एक प्रकार से देश में विशेषता है कि पूरे देश में नया वर्ष अलग-अलग राज्य में अलग रूप से मनाया जाता है, आप सबको आपके परिवारों को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। साथ ही साथ कल कुंभ का भी आरंभ हुआ है और लगभग सवा दो करोड़ लोगों ने कल कुंभ में स्नान किया, कुंभ स्नान किया और मैं समझता हूँ सभी ने मिल जुलकर जो प्रयास किये कि अच्छी सुविधाएं मिलें सभी कुंभ के यात्रियों के लिए यह वास्तव में बधाई के पात्र हैं।

और राज्य सरकार को, उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार और सभी उन लोगों को मैं धन्यवाद करना चाहूंगा जिन्होंने इसके लिए इतनी अच्छी अरेंजमेंट किये कि सभी को बहुत सरलता से, बहुत सुविधाजनक तरीके से मौका मिले कुंभ में स्नान करने का।

आज कैबिनेट कमिटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की अध्यक्षता में एक बहुत ही अहम निर्णय लिया, जो नुमालीगढ़ रिफाइनरी है असम में, उसकी जो क्षमता है, उसकी जो कैपेसिटी है उसको सीधा तीन गुना करने का निर्णय, 3 मिलियन मैट्रिक टन पर एनम से बढ़ाकर 9 मिलियन मैट्रिक टन पर एनम, तीन गुना वृद्धि नुमालीगढ़ रिफाइनरी असम की क्षमता में लगभग 22,594 करोड़ की लागत से यह प्रोजेक्ट अगले चार वर्षों में पूरा किया जायेगा। यह इसलिए भी अहम है कि पूरे उत्तर पूर्वी इलाके में जो क्रूड ऑइल की रिक्वायरमेंट है, वहां की जो रिफाइनिंग कैपेसिटीज़ की रिक्वायरमेंट है, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की रिक्वायरमेंट है, उसको यह आगे चलकर बड़े पैमाने पर उसकी पूर्ति करेगा।

और साथ ही साथ इसमें क्रूड ऑइल की पाइपलाइन पारादीप से नुमालीगढ़ भी लगेगी और जो फिनिश्ड प्रोडक्ट है उसकी पाइपलाइन नुमालीगढ़ से सिलीगुड़ी तक लगाने का भी निर्णय कैपेसिटी एक्सपेंशन के साथ-साथ लिया गया। इन्वेस्टमेंट इस 3 मिलियन मेट्रिक टन पर एनम की रिफाइनरी को 3 गुना कैपेसिटी यानी 9 मिलियन मेट्रिक टन पर एनम करने में 22,594 करोड़ की लागत से अगले चार वर्षों में इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जायेगा। कैपेसिटी एक्सपेंशन के साथ-साथ पाइपलाइन भी नयी बिछाई जाएगी पारादीप से नुमालीगढ़ तक और जो फाइनल प्रोडक्ट निकलेगा उसकी पाइपलाइन नुमालीगढ़ से सिलीगुड़ी तक।

तो एक उत्तर पूर्वी भारत में विकास की लहर तेज़ गति से चलती रही, अन्य-अन्य क्षेत्रों में उत्तर पूर्व में निवेश हो, फिर चाहे आज का जैसे फैसला है ऑइल रिफाइनरी का, इसके पहले पेट्रोलियम मिनिस्ट्री में कई अहम फैसले लिए गए गैस फ़ील्ड्स को लेकर, ऑइल एक्सप्लोरेशन को लेकर नॉर्थ ईस्ट में। अन्य-अन्य विभाग चाहे वह हाईवे विभाग हो, सड़क का विभाग हो, रूरल डेवलपमेंट मिनिस्ट्री हो, रेलवेज हो, सभी ने अटक प्रयास किये हैं गत चार वर्षों में उत्तर पूर्वी भारत को तेज़ गति से विकास पहुंचे, तेज़ गति से विकास का लाभ हमारे भाइयों बहनों को, बच्चों को वहां पर मिले।

और एक खास बात इस एक्सपेंशन प्रोजेक्ट की ऐसी है कि इसमें लगभग 15,102 करोड़ रुपये का तो ऋण लिया जायेगा, लोन, बाकी जो इक्विटी है, इक्विटी सपोर्ट भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, ऑइल इंडिया लिमिटेड और असम की सरकार यह तीनों देंगे और केंद्र सरकार की तरफ से 1020 करोड़ रुपये का viability gap funding भी इस प्रोजेक्ट को दिया जा रहा है।

इस 1020 करोड़ रुपये के viability gap funding से यह प्रोजेक्ट की viability सुनिश्चित हो जाती है और उसको सभी ऋण लेने में, लोन लेने में और सभी सुविधाओं के लिए भी आसानी हो जाएगी। यह सीधे रूप में कई लोगों को रोज़गार के अवसर देगा और indirect employment के भी बहुत सारे साधन इस प्रोजेक्ट के माध्यम से प्रोजेक्ट जब लगेगा और प्रोजेक्ट जब चल जायेगा, दोनों अवधि में direct और indirect employment का बहुत बड़ा साधन बनेगा उत्तर पूर्वी भारत में और साथ ही साथ इससे जो सरकार की जो हाइड्रोकार्बन विज़न है 2030 तक का खासतौर पर उत्तर पूर्वी भारत के लिए उसका एक बहुत अहम भूमिका यह प्रोजेक्ट निभाएगी ऐसा सरकार का मानना है।

मैं माननीय प्रधानमंत्री जी का धन्यवाद करना चाहूंगा कि इस अहम फैसले के साथ असम और पूरे उत्तर पूर्वी भारत को एक बहुत बड़े रूप में निवेश मिलेगा, बड़े रूप में वहां की आर्थिक और व्यवस्था की उपलब्धियों में वृद्धि होगी और मुझे लगता है कि direct-indirect employment हमारे असम के और उत्तर पूर्वी भारत के भाइयों बहनों को भी मिलने का बहुत अच्छा यह साधन होगा।

चार अहम फैसले कैबिनेट ने भी आज लिए हैं जिसकी जानकारी मैं आपके साथ रखना चाहूंगा। एक तो Export Import Bank of India – EXIM Bank of India, इसमें केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है 6000 करोड़ रुपये का नया capital infusion, in the form of recapitalisation bonds – यह जिस प्रकार से पब्लिक सेक्टर बैंक्स में recapitalisation bonds दिए गए हैं उसी प्रकार से 6000 करोड़ के बॉन्ड्स, 4500 करोड़ तो इसी वर्ष मार्च के पहले और 1500 करोड़ अगले वर्ष में, ऐसे 6000 करोड़ EXIM बैंक की इक्विटी कैपिटल में recapitalisation bonds के माध्यम से दिया जायेगा।

और इसी के साथ-साथ जो authorised share capital है EXIM bank का इसको 10000 करोड़ से बढ़ाकर अब 20000 करोड़ रुपये अप्रूव कर दिया गया है, आप सभी जानते हैं कि यह आयात-निर्यात के लिए एक बहुत अहम भूमिका EXIM Bank की रहती है, एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट को प्रमोट करना इसका कार्य है। और यह जो नया कैपिटल EXIM Bank में दिया जा रहा है इससे उनकी capital adequacy तो सुधरेगी साथ ही साथ उनकी क्षमता, खासतौर पर भारत के एक्सपोर्ट को credit needs को meet करने के लिए जो उनकी ऋण की ज़रूरतें होती हैं उसको पूरा करने के लिए इस 6000 करोड़ रुपये के निवेश से, इन्वेस्टमेंट से काफी गति मिलेगी एक्सपोर्ट फाइनेंसिंग को।

इसमें खासतौर पर कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जैसे कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री है, कपड़े का व्यापार है उसमें एक्सपोर्ट की बहुत अभूत संभावनाएं हैं, huge opportunities in the Indian textile export industry. और हमारा मानना है कि इस निवेश के साथ EXIM bank टेक्सटाइल इंडस्ट्री को भी बड़े रूप में सपोर्ट करने की क्षमता ले पायेगी। इससे लाइन ऑफ़ क्रेडिट्स भी आगे भारत के जो export of services या कॉन्ट्रैक्ट के एक्सपोर्ट होते हैं उसके लिए भी लाइन ऑफ़ क्रेडिट्स मिलने में एक्सपोर्टर्स को सुविधा होगी जिससे भारत की जो विदेश नीति है, जो हमारे स्ट्रेटेजिक इंट्रेस्ट्स हैं विदेश में उसको भी मीट करने के लिए यह लाइन ऑफ़ क्रेडिट लाभ देगी।

दूसरा डिसिशन जो बहुत ही अहम लिया गया है वह है एक इनकम टैक्स का जो ई-फाइलिंग का पोर्टल है और जो centralised processing centre है इन दोनों को integrate करके, दोनों को जोड़कर एक Integrated e-Filing and Centralised Processing Centre – 2.0 के प्रोजेक्ट को आज मंज़ूरी दी गयी है। यह प्रोजेक्ट अपने आपमें एक सफल प्रयोग रहा है इनकम टैक्स विभाग का, मैं कुछ आंकड़े आपके समक्ष रखना चाहूंगा।

इस प्रोजेक्ट के माध्यम से अभी तक लगभग 23 करोड़ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल हो चुके हैं और रिफंड देकर तो अभी तक 2,61,808 करोड़ के रिफंड इस ऑटोमैटिक कंप्यूटराइज्ड फैसिलिटी के माध्यम से सितम्बर 30, 2019 तक दिए जा चुके हैं। अगर इसी वर्ष का देखें तो पहले 6 महीने में अप्रैल से सितम्बर, एक करोड़ 83 लाख रिफंड सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग यूनिट के माध्यम से सीधे जो इनकम टैक्स पेयर हैं उनको पहुंचाए गया।

और मैं समझता हूँ हम सबने उसका स्वाद लिया कि बिना किसी को पूछे, बिना किधर दफ्तर जाये, बिना कोई अफसरशाही के, बिना जूते घिसे इस वर्ष बड़े पैमाने पे इनकम टैक्स के रिफंड हम सबको अपने-अपने घर पर, अपने काम की जगह पर सीधा पहुँच गए हैं। और इस पोर्टल इस आगे के 8 वर्षों के लिए इसको एक इंटिग्रेट करके एक ही पोर्टल बनाया जाये उसके लिए एक पारदर्शी बिडिंग की गयी थी और बिडिंग करने से जो लोवेस्ट बिडर आया उनको यह काम दिया गया है। और इस प्रकार की बिडिंग से भी इस काम के खर्चे में सरकार काफी पैसा बचा पायी है। इस प्रोजेक्ट में लगभग 4241 करोड़ का इन्वेस्टमेंट इस प्रोजेक्ट में किया जायेगा।

इस प्रोजेक्ट से और अधिक तेज़ गति से इनकम टैक्स की असेसमेंट हो पायेगी, रिफंड दिए जा सकेंगे और जो टैक्सपेयर्स का एक्सपीरियंस है उसको और सरल करना टैक्स फाइलिंग की सुविधा को और सरल करने का भी इसमें प्रावधान रखा गया है। और कुछ इसके भी जो मापदंड तय किये गए हैं वह बहुत ही इंटरेस्टिंग हैं। आप अगर देखें तो इसमें क्या आउटकम हम सोचते हैं, उदाहरण के लिए आज के दिन जब कोई इनकम टैक्स रिटर्न प्रोसेस होता है तो उसकी प्रोसेसिंग टाइम लगभग 63 दिन हैं।

यह नयी सुविधा जब एक बार लागू हो जाएगी जिसको लगभग 18 महीने लगेंगे इसको बनाने में और उसके बाद 3 महीने और के बाद चालू हो जायेगा टेस्टिंग के बाद, वह 63 दिन के बदले प्रोसेसिंग एक दिन में हो पायेगा। The turnaround time to process an income tax return will reduce from 63 days to only one day.

इसी प्रकार से अगर कोई rectification requests होती है किसी की तो वह भी और कम हो जाएँगी क्योंकि एक्यूरेसी इसमें मेन्टेन करने के प्रावधान बनाये जा रहे हैं, और हमारा मानना है कि जो आजके दिन 2% रिटर्न्स को rectify करने के लिए लोग आते हैं वह घटकर मात्र 0.1% हो जायेगा। यानी जो आजके दिन रेक्टिफिकेशन होते हैं उसका सिर्फ 5% रह जायेगा, 95% को रेक्टिफिकेशन की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी।

इसी के साथ-साथ जो आउटस्टैंडिंग डिमांड्स हैं इनकम टैक्स की उसको भी फास्टर कलेक्ट करने के लिए सुविधा इसके माध्यम से रहेगी और साथ ही साथ डिजिटल मीडिया को इस्तेमाल करके हम और ज़्यादा बड़े रूप में कर देने वालों को, टैक्सपेयर्स को सुविधा दे पाएं चाहे वह फिर रियल टाइम प्रोसेसिंग ऑफ़ इनकम टैक्स रिटर्न्स हों, एक्यूरेट रिटर्न भरने में सुविधा हो, चाहे उनकी grievances को resolve करने में गति लाने का काम हो, चाहे वह लोगों को और अवेयरनेस पहुंचाना डिजिटल माध्यम से, ईमेल, एसएमएस के द्वारा, अलग-अलग प्रकार से एक पॉजिटिव सेंटीमेंट इनकम टैक्स विभाग के साथ जोड़ने की यह एक कल्पना की गयी है।

मैं समझता हूँ एक कड़ी में जिसमें कई सारे इनकम टैक्स के सुधार और इनकम टैक्स के सुधार के लिए कई सारे बड़े निर्णय अभी तक जो किये गए हैं उसमें यह एक बहुत अहम निर्णय आज के दिन सरकार ने किया है। और मुझे पूरा विश्वास है कि इससे आगे चलकर और ज़्यादा टैक्सपेयर्स को सुविधा मिलेगी और इससे टैक्स के कलेक्शन में भी डिपार्टमेंट को और सरकार को मदद मिलेगी।

एक तीसरा निर्णय जो 13 नयी सेंट्रल यूनिवर्सिटीज अलग-अलग राज्यों में बनने का निर्णय कई वर्ष पहले हुआ था उसके संदर्भ में है। आज ऐसा निर्णय लिया गया है कि यह जो 13 सेंट्रल यूनिवर्सिटीज हैं इनको जल्द से जल्द पूरा किया जाये और उसके लिए जो पूरी लागत लगेगी उसका अनुमान निकालकर लगभग आजके दिन 8,113 करोड़ की लागत से यह सब 13 यूनिवर्सिटीज ख़त्म करना है, ख़त्म करने का निर्णय लिया गया है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि इसका जो ओरिजिनल एस्टीमेट था वह सिर्फ 3,120 करोड़ का पिछली सरकार ने बनाया था लेकिन इसके कामकाज को तेज़ गति न देने के कारण इसमें विलंभ हुआ और उस विलंभ के कारण 3,120 करोड़ बढ़कर आज 8,113 करोड़ रुपये हो गया है जिसमें से लगभग 4500 करोड़ तो ऑलरेडी खर्च चुके हैं। तो आज के निर्णय में लगभग 1400 करोड़ रुपये जो ऑलरेडी खर्च हो चुका है इन यूनिवर्सिटीज पर उसके लिए ex post facto approval भी दिया गया है और जो आगे 3,640 करोड़ रुपये और लगेंगे उसका भी निर्णय लेकर लगभग 5000 करोड़ रुपये सेंट्रल यूनिवर्सिटीज, यह 13  यूनिवर्सिटीज को कम्पलीट करने के लिए।

और यह यूनिवर्सिटीज का मैं एक ज़िक्र कर दूँ। एक है दक्षिण बिहार में, गया में; एक है हरियाणा में महेंद्रगढ़ में, एक जम्मू में जम्मू कश्मीर में, एक रांची में झारखंड राज्य में, एक श्रीनगर में, फिर एक बार जम्मू कश्मीर में; एक गुलबर्गा में कर्नाटक, एक कासरगोड केरल, कोरापुट ओडिशा, बठिंडा पंजाब, अजमेर राजस्थान, तिरुवरुर तमिल नाडु,  एक गुजरात की यूनिवर्सिटी और एक हिमाचल प्रदेश की, ऐसे 13 यूनिवर्सिटीज का अनुमानित खर्चा, पूरे 8113 करोड़ को आज कैबिनेट ने मंज़ूरी दी।

एक प्रकार से इसकी जब हम डिटेल्स में जा रहे थे तो ध्यान में आया कि कैसे बिना पूरी तरीके से इसका एस्टिमेशन ठीक करके इसको कैसे जल्दबाज़ी में पारित किया गया था 2008 में, और 2008 में पारित करने के बाद कैबिनेट द्वारा इसका जो बजट अप्रूवल है वह लगभग दो वर्ष के बाद 2010 में किया गया, 5 अक्टूबर 2010 को। तो दो वर्ष लगे कैबिनेट अप्रूवल के बाद कैबिनेट के पास इसके बजट को लेकर जाने के लिए और फिर भी वह बजट सिर्फ मात्र 3100 करोड़ का अप्रूव किया जबकि खर्चा उसका लगभग 8000 करोड़ से अधिक है।

तो इस सरका ने उस पूरे 8000 करोड़ के बजट को आज मंज़ूरी दी है और यह जल्द से जल्द यह सब सेंट्रल यूनिवर्सिटीज लगें इसके लिए एचआरडी मिनिस्ट्री और केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ लगातार संपर्क में है।

एक चौथा निर्णय संवेदनशील निर्णय है कई वर्षों से बिजली विभाग में, विद्युत विभाग में जो हाइड्रोपॉवर कम्पनीज हैं – NHPC, NEEPCO – North Eastern Electric Power Corporation, Tehri Hydro Development Corporation (THDC), और SJVN (Satluj Jal Vidyut Nigam), इन चारों में 1997 से 20 वर्षों से एक जटिल समस्या चल रही थी जो थी approval for regularisation of pay scales. जो भी लोग कर्मचारी वहां काम करते हैं, बोर्ड को छोड़कर नीचे जितने कर्मचारी काम करते हैं – below board level executives – इन चारों संस्थाओं में लगभग जनवरी 1997 से यह जटिल समस्या चल रही थी।

लगभग 5254 ऐसे अफसर थे जिनको इस revision of pay scale का लाभ मिल नहीं पा रहा था। और उन सभी को इस निर्णय से लाभ होगा, उन सभी के जो पुरानी समस्या थी उसको 323 करोड़ रुपये देकर, salary arrears के रूप में देकर इनकी regularisation of pay scales का निर्णय आज सरकार ने लिया है। इससे तीनों एक जनवरी 1997 से लेकर एक समस्या को हल करने का जो प्रयास भारत सरकार ने माननीय प्रधानमंत्री जी के अध्यक्षता में आज कैबिनेट ने लिया, मुझे पूरा विश्वास है यह सभी कर्मचारी इसका स्वागत करेंगे और इसका लाभ सभी को मिलेगा।

इसके अलावा ज़रूर एक Memorandum of Understanding sign किया गया है ऑस्ट्रेलिया के साथ जिसमें mines और mine safety को लेकर हम किस प्रकार से ऑस्ट्रेलिया की Queensland Government जो है उसका जो Department of Natural Resource, Mines and Energy है उससे हम नयी टेक्नोलॉजीज जिससे माइनिंग में सेफ्टी, टेस्टिंग, रिसर्च इन चीज़ों में किस प्रकार से हम अत्याधुनिक और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की टेक्नोलॉजीज का इस्तेमाल करके भारत में माइनिंग को अपग्रेड कर सकें इसके लिए एक DGMS – Director General Mine Safety और Ministry of Labour ने Queensland Government, Australia के साथ यह MoU sign किया है।

इसी के साथ-साथ एक MoU हमने Republic of Maldives के साथ visa facilitation का किया है, वह भी एक बहुत बड़ी उपलब्धि रही है मोदी सरकार की कि वीसा के क्षेत्र में बहुत सरलीकरण हुआ है और लगभग आज पूरे विश्व में हम जहाँ भी जाना चाहें या जहाँ से लोग भारत आना चाहें उसके वीसा को सरलीकरण को और सुविधा देने का बहुत बढ़िया काम विदेश मंत्रालय ने गत चार वर्ष में किया है। उसी कड़ी में आज Government of Republic of Maldives के साथ जो एग्रीमेंट हुआ था उसका ex post facto approval central cabinet ने आज दिया है।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

प्रश्नउत्तर

प्रश्न: सर इनकम टैक्स का जो नया पोर्टल बनाया गया है, पोर्टल के ज़रिये क्या यह माना जाये कि अभी इनकम टैक्स की स्क्रूटिनी जो है वह मुश्किल से 5 या 7%……… स्क्रूटिनी करना काफी ज़्यादा आसान होगा उसकी संख्या को बढ़ाई जाएगी और टैक्स इवेजन रोकने में मदद मिलेगा इससे?

उत्तर: पहली बात तो यह पोर्टल अब बनने वाला है, अभी जो पोर्टल है उसको इंटिग्रेट करके उसको और अच्छा बनाएंगे, और उसमें फैसिलिटीज और सुविधाएं जोड़ेंगे तो उसको आगे 18 महीने लगेंगे। लेकिन इसमें किसी प्रकार का स्क्रूटिनी का प्रावधान या स्क्रूटिनी बढ़ाने का प्रावधान नहीं है। और आपकी जानकारी को भी ज़रा मैं ठीक कर दूँ, आज कोई 5 से 7% इनकम टैक्स रिटर्न्स की स्क्रूटिनी नहीं हो रही है। हम ऑटोमैटिक प्रोसेसिंग इस पोर्टल के द्वारा आज भी कर रहे हैं और इसको और बढ़ाने वाले हैं, पर यह ऑटोमैटिक प्रोसेसिंग है तो आपकी तनख्वाह आयी आपने इनकम टैक्स रिटर्न भरना है, एक सरल पोर्टल रहेगा रिटर्न भरने के लिए। या आप बिज़नेस करते हैं, व्यापारी हैं आपने अपना रिटर्न फाइल करने का प्रोसेस भी सिंपल किया जायेगा इसके माध्यम से और आपकी डिक्लेरेशन को हम एक दिन के अंदर प्रोसेस करके एक्सेप्ट करके अगर रिफंड है तो रिफंड पहुँच जायेगा अगर कुछ डिमांड है तो डिमांड मिल जाएगी।

लेकिन इससे कोई स्क्रूटिनी बढ़ेगी ऐसा ज़रा भी कोई कल्पना भी नहीं है और आज के दिन अगर हम देखें तो देश में मात्र जो मुझे लास्ट जानकारी मिली थी .3% रिटर्न्स की स्क्रूटिनी हो रही है। ऑरिजिनल प्लान था कि शायद 1% रिटर्न्स की स्क्रूटिनी होगी लेकिन क्योंकि यह कंप्यूटर जनरेटेड स्क्रूटिनी के लिए लिस्ट बनती है वह मात्र .3% रिटर्न्स की स्क्रूटिनी ली गयी है।

और मैं समझता हूँ अपने आप में यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री मोदी जी और वित्त मंत्री अरुण जेटली जी हमारे करदाताओं को हमारे टैक्सपेयर्स के ऊपर पूरा विश्वास करते हैं, पूर्णतः विश्वास के कारण ही आखिर सबको इनकम टैक्स रिफंड आपके रिटर्न के अनुसार सीधा आपके पास पहुँच गया है। और इसके कारण जो पहले ब्याज देना पड़ता था रिफंड के साथ या कई लोगों को तकलीफ होती थी रिफंड मिलने में या जूते घिसने पड़ते थे यह सब समस्याओं का अब पूरी तरीके से आपको निजात मिल गयी है।

प्रश्न: सर आपने कहा कि अगर प्रोसेसिंग एक दिन में कम्पलीट हो जायेगा लेकिन रिफंड में कई बार दो-दो महीने का समय लग जाता है?

उत्तर: मैंने अभी बताया कि इस बार का रिफंड तो कल्पना के बाहर हुआ है लेकिन प्रोसेसिंग अभी जो सॉफ्टवेयर है उसमें 63 दिन लगते हैं, आज जो हमने मंज़ूरी दी है यह जब इम्प्लीमेंट हो जायेगा तो यह 63 दिन से एक दिन में हो जायेगा प्रोसेसिंग। तो आप समय पर अपना रिटर्न फाइल करिये फ़ास्ट प्रोसेसिंग भी होगा तो इससे ऑटोमेटिकली आपको रिफंड भी और तेज़ गति से मिलेंगे।

प्रश्न: एक-दो दिन में वह भी हो जायेगा सर?

उत्तर: वह तो अब आज के दिन में प्रेडिक्ट नहीं कर सकता हूँ कि 18 महीने बाद…

प्रश्न: और सर वेंडर कौनसा है जिसका आपने कहा कि बिडिंग हो गयी है?

उत्तर: हमने टोटली ट्रांसपेरेंट बिडिंग की थी और उस बिडिंग के माध्यम से इंफोसिस का ऑफर सबसे कम आया और इंफोसिस को यह काम दिया गया है, being a L1 bidder, the lowest bidder. और मेरे ख्याल से बिडिंग से भी काफी बड़ी मात्रा में खर्चा कम हुआ है क्योंकि इसको हमने नॉमिनेट करने के बदले बिडिंग के माध्यम से किया। नहीं तो पहले  क्या रहता था अगर कोई एक कंपनी ने पहले सॉफ्टवेयर बनाया है तो नॉर्मली यह स्वभाव रहता था कि उसी बढ़ा दो। तो उसके बदले हमने सबको मौका दिया, पारदर्शी बिडिंग कराई, और उसके कारण exact figure भी है मेरे पास, काफी खर्चे में भी कमी हुई है।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

Speaking at CII – Workshop on Jobs & Livelihoods, in New Delhi

 

..has been one area where we have been trying to bring about a change in the way we prepare the youth of tomorrow. Soumya Kanti Ghosh, the Chief Economist of State Bank of India, I think he set the context extremely beautifully for this morning’s deliberations. My good friend Chandrajit Banerjee was able to put together this very-very exciting group of business leaders, government leaders, think tanks, economists, also union leaders I see in the room. So I think we have a very good eclectic mix this morning, a very-very warm welcome to all of you and my season’s greetings to each one of you. Whichever part of the country you come from, we are celebrating Makar Sankranti, for example, in Mumbai or Maharashtra, Pongal in Tamil Nadu, Onam in Kerala. Is Onam now, or is it later, it’s happened already? Or Maghi in Punjab, Poush Parbon I am told in West Bengal where you come from.

So it’s really a time of celebration that we have all got together, and yesterday I was seeing my party president flying kites, celebrating Uttarayan in Gujarat. So I think it’s really a time for celebration. We are ushering in a new year. The New Year brings with it a lot of happy tidings, and I wish all of you and your families a great year ahead. Of course, it’s also Army Day today, and we salute all the people in uniform. They always put the nation first. They stood up for the country and really sacrifice their lives serving the nation. The great personal commitment and I think it’s really the defence forces who give us that feeling of security, the feeling of oneness in the country and ensure peace and harmony. My salutations to all the army personnel on Army Day.

And, of course, there is another good day today, the Kumbh Mela is commencing at Prayagraj, and it will go on till the 4th March. Anyway, if you look at where the Kumbh originated from, I don’t know how many of us in this room are aware. Kumbh basically signifies the amrit, the nectar, which dropped on earth at four different locations where Kumbh is celebrated at different times. And that was the ocean churning, the Manthan, and out of that Manthan the nectar came, amrit came onto earth at four different locations.

So, I just similarly hope your breakout sessions today will give us that amrit, will give us that nectar of knowledge and help us take this dialogue forward in the months and years to come. So my best wishes to all of you and your families on all these three happy occasions.

Of course, Soumya Kantiji put the context very well for today’s deliberations. Very often it’s a situation where we are not able to fully appreciate what’s happening both in India and around the world. With technological changes, with artificial intelligence coming in, 3D manufacturing, the big data analytics, all of these are changing the work profiles of people, not only in India, across the world.

In fact, in Niti Aayog we had some sessions with leaders or thinkers from around the world. And one of the issues that came out when Michael Porter came here or when Bill Gates came here was clearly the changing nature of work that the world is witnessing. We in India are no different. And very clearly, there are going to be more and more new opportunities to work which will probably take some time to define, probably take some time to capture data, but which really can be given an impetus, both by government policy and with the collective effort of industry and business to see how those changing profiles can be both captured in terms of opportunities for the people of India, and then captured in terms of data.

I, for example, see huge opportunities as we evolve around the world with renewable energy, an area which is very dear to Prime Minister Modi where I had an opportunity to play some role in the initial years of this government. And I often use this example of my own assessment of how the changing nature of generating electricity or energy is going to impact the job market.

In the good old days, if we set up a large power plant, maybe a thermal power plant or a coal-based power plant, you could very safely assess and validate and probably come out with a very specific figure of how many jobs are created per unit of electricity, per kilowatt hour of electricity that is generated from a coal-based thermal plant, for example. So you would know how many people are working in the coal mine where coal is taken out, or in the transport system as the coal is transported in the electricity generating station where the thermal coal based plant. And possibly a little bit of indirect employment around that plant where you have dhabas coming up, you have some transporters, some small hotels and the ecosystem developing around the power plant.

When we moved to renewable energy and we tried to do an assessment of the nature of job, the number of people who would get gainful employment – may not necessarily be in the formal sector but in the entire ecosystem around generation of renewable energy, around the maintenance of those setups and large setups they are. I mean, every unit of electricity generated through renewable energy involves much larger setups compared to a coal-based thermal plant.

And looked at the entire ecosystem, my own assessment came to a figure of almost 8 or 10x of the number of people who would be gainfully working around renewable energy and protecting the earth, protecting the planet from the very-very dangerous impact that we are all aware of – the problems of the ozone layer depleting, the problems of carbon emissions.

So, it’s a win-win situation. It’s not something which is detrimental to India’s interest when we talk of increasingly going towards renewable and clean energy. But it’s extremely detrimental to data, when we are trying to put together the data of the number of people who would be employed or would get work around this, you will not get a large power plant where you will have 3000-4000 people working. You may not get a formal data of a coal mine which has maybe a thousand people working. Because all of this would be largely distributed workplaces. It would be largely distributed working environment, many times not even been captured in the EPFO data, which Soumya Kanti talked about.

I mean EPFO data very clearly brings out that in the last year alone, probably 7 million new EPFO accounts were added. In the last 14 or 15 months I was assessing, it’s about 7.9 million. Now this data cannot be entirely ignored. It’s a harsh reality. And by the way, EPFO you only register once you have 10 or 20 people, once you have a 20-people organisation or business unit. Under that you are not even recognizing or including it in the EPFO data.

So very often, we have people who try to wish away this EPFO data’s reality by saying no, it’s just the GST impact because of which there has been a move towards the formal economy, and therefore, the EPFO number has gone up. Initially, we also were a little confused about the reality between these two schools of thought. But then when we assess the large player, the large formal employers were in any case not out of the tax net, in any case, anybody beyond 20 people were registering all their employees in the EPFO data.

So, if at all there has been an impact on EPFO data it has to clearly be either smaller units becoming larger, where you could say that okay, if there was a unit employing 10 people and it became 20, so probably the data of their employment will reduce a little bit. But clearly, it cannot be the entire ecosystem which turned formal or which is now gradually moving more and more towards the formal economy that will represent such a large increase in EPFO numbers.

And when you juxtapose it to the base, and a base created over 60-70 years that’s when you realise that it’s a pretty significant growth, probably never seen before in so many years. Similarly, there are many other data points which I think don’t get captured when we look at employment data.

For example, the other day we were discussing with a large organisation which helps people get gainful employment. And they said that they could clearly see that at least a million people have been engaged in the last year or so in the new age businesses that have emerged. So you have the Oyos and the Olas and the new age businesses which have of late been pretty much shining like a bright star, which don’t formally take you onto a payroll, but give you a good living, working, earning opportunity through a distributed model.

So each one of those 500,000, I think, Ola or Uber drivers is a self-employed individual, and may never get captured into…Ola is not going to give out a data that these many people are employed with us. Probably, they will never even come into the EPFO data, and for which we would be happy to hear some suggestions, some ideas emerging out of this brainstorming on what we can do to really get a fix on the reality, and then, of course, also the problems wherever they still exist.

And in that reality I think ways of capturing data would be very-very important. Whether there is anything we can do on the unorganised employment sector or unorganised sector to also see that how we can bring them into the social security net, is there a way we can go beyond this minimum 20 employment without causing distress to very small employers and their employees, and see whether we can expand this coverage either through ESIC or through EPFO, and yet in a way ensure flexibility in employment, ensure that we do not cause a distress to the very small companies.

And the purpose of today’s engagement, actually I had told Chandrajit don’t even keep any speeches, let’s only have a free and flowing interaction. But I think in his wisdom, he rightly thought that some sort of context setting may help us deliberate better, and in the afternoon session – and I am trying to keep my own time completely free in the afternoon that even if we overflow. But I am very-very keen that these engagements that you are going to have through your different groups are presented and are deliberated and discussed at length amongst all of us.

I have requested Prakashji also, he has agreed to join us for about 45 minutes between 2 to 2.45. So, that way we want to really get some outcome oriented discussions today, help us understand, for example, better ways to look at data, without a prejudiced coloured eye. Of late, I am seeing one or two persons literally like a campaign working to try and drive down all the data points that are available, and with some juxtaposition or some analysis of one or two data points trying to drive down the mood of the nation, the mood of business.

And to my mind that’s not really something we should attempt to do with a prejudiced vision. Wherever there is a problem, we must come out with that and address that problem. For example, if I may submit what I feel is one issue where I would love to hear from you is about something which I had learnt when I was in school. It is not something that has emerged in the last year or two years or three years.

In school, when I was being taught economics or when I was learning about employment, one of the greatest thing that was at that time articulated quite a lot – I don’t know how the school books today talk about it – is underemployment, is about millions of people who would look for an alternate engagement if they were able to get out of the current place where they are or the current work that they are doing.

Now this is no better place where this is reflected than, for example, a government recruitment drive. So, very often, a lot of comments are written and talked about that oh, but when the government asked applications for, let’s take the railways, for example. A 132,000 jobs, right? We got over 15 million people at Bangalore, a 132,000 jobs and about 15 million people applying. Now this is very often touted as one of the data points which shows there is a lot of unemployment. While not denying the fact that a lot of people are looking for engagement with the formal sector, I would like to submit and I would like you to deliberate on this that there are a lot of people who would be probably working in the private sector, there are a lot of people who would probably be doing, who maybe self-employed, or who maybe in agriculture or in different professions or vocations currently also. But the attraction and the lure of a government job in the traditional Indian context is extremely huge.

So you have people who would think that ok, if I can get a government job I am sorted for the rest of my life. If I can get a government job nobody can touch me after that, I am permanent and how. Even if I had misbehaved, even if I am not found to be good in my work, it doesn’t matter. The unions can take care of me, I am sorry, I don’t mean to be….

But that’s the reality that in a very formal setup and more so in the government that kind of a job security that irrespective of performance, irrespective of how you work or behave, you are sorted for life. That’s a lure which will get a lot of people, so I often hear people who would probably have a very good degree and would still apply for a lowly or a very-very bottom of the pyramid job in the government system. And that is being often touted that there are no opportunities for that person. I beg to differ on that. Wherever there are opportunities, we find it very difficult to the people.

For example, when we are looking for good finance professionals, even in the PSUs, we find it very difficult to get very good chartered accountants, management guys from the IIMs or who had studied aboard to even think of applying for a government job. I started that effort as Coal Minister very early on in the day when I advertised that in Coal India Ltd we will open the field and let’s get the best talent from the country to come in and head Coal India as CMD. While I did not get too many applications from the private sector, I certainly got an article in the newspapers criticizing me, and a paper which is one of the votaries of free business and votaries of opening up everything and a big critic of this government, which criticized me for spending money on advertising and opening up the job for the private sector.

Doctors – I am looking for doctors in the railways and how, but not enough people because there are alternate, equally or if not very substantially higher paying jobs or opportunities for self-employment as a doctor. So I think it needs to be deliberated that if at all a person still insists or wants to come into the government sector, is it always for lack of opportunity or is it because there is a certain section which looks at this as a very-very safe, secure and permanent employment irrespective of how good or bad one would perform, irrespective of, even in many cases where misdemeanours come to our notice and we are unable to still take action given the very difficult system that is being created around.

In fact, without any offence to anybody, particularly, since it’s something beyond the control of this government, I don’t know how many of you are aware that if I was to have the opportunity to write Soumya Kanti Ghosh’s appraisal form, the appraisal profile or his CR at the end of the year. I am actually writing his CR and handing it over back to him. Now you imagine, if I have to work with my personal secretary, my private secretary all through the year or if I have to work with all the members of the railway board, with all the general managers of the railways and I am writing their profile and I am handing it back to them. And this goes down the line, right to the bottom of the pyramid.

What can I write in that? I have to get work from the same person for the rest of the years or next year and I am expected to give an honest appraisal and hand it back to him and still continue to work with him and get the best out of him. Now this is something which is beyond the ambit of the government of the day, but probably something on which everybody will have to deliberate and find how we can change. Ultimately, we are all equally interested that the workings of government and the government departments should also improve, should also be upgraded.

So, I think this is the kind of challenges that one faces. I am sure you will also deliberate on which are the new openings given the way things are changing. What we can do, for example, on tourism. Tourism in my view is one area, virgin area, huge opportunities. I had the privilege to Hampi last month, thanks to a daughter who likes to be engaged with history. I am not so much of a person excited about archaeology, but even I was excited going there. It was just phenomenal, and then I read a week ago that even the UN has said it’s probably the second most preferred site or one of the top destinations that the world should look up to.

Now, we need to work together, the government, the private sector, all of us, to see what we can do and which are the areas which need focus. We started the Ayushman Bharat. We can clearly see a hundred thousand new hospitals or dispensaries and clinics being required in this country as a billion plus people start getting healthcare, many of whom never got healthcare for lack of ability to pay. But a free healthcare of 5 lakh rupees a family is going to open up a huge opportunity in the healthcare sector.

In the same way, I think technology upgradation in different sectors of the country are called for. We are going to look at more and more people getting opportunities through reskilling in different areas. I remember about a month and a half ago I interacted with 70 young entrepreneurs in Mumbai. We had a couple of hours of engagements, young and I would say in the age group 22-23 to about 40-45. We have a huge set of people who are working in this age group as entrepreneurs.

And when I spoke about unemployment amongst various issues we discussed that day, believe me, unanimously they all said that we are facing a challenge getting people. One lady said I need 40 people in my team, I am making do with 17. I am not getting the profile of the people that I want. So, I think what we need to work together, government, industry, think tanks, economists, union leaders, all of us, is on what the future holds for the country, where we need to engage more to provide better and more paying and quality opportunities for the youth of tomorrow. How we can capture the data of today more accurately, because ultimately when we go to a doctor unless we know the problem properly, unless we describe the problem properly to the doctor, he will never be able to treat you.

So we should not even get demoralised or not even get carried away by some false data points, or inaccurate or incomplete data points because then we will plan wrongly. We will not be able to really fix the problem unless we recognize the problem correctly. And that’s what I hope during the course of the day all of my friends here will be able to discuss, would be able to come up with some very good suggestions. And I am very-very eagerly looking forward to engaging with you in the post-lunch session.

Once again my best wishes for today’s programme. A big thank you to Chandrajit and the CII for organising this at such short notice, possibly we can do some more engagements in other parts of the country. And at the end of it, maybe by the end of January or something, we can come up with a real actionable agenda on finding the problem, finding what’s reality on the ground and then trying to assess what we need to do to fix the problem and how we need to go forward.

My best wishes to the day’s celebrations. Thank you.

Delhi

Vanijya Bhawan, 16, Akbar Rd, New Delhi - 110001

Mumbai

Lok Kalyan Karyalay - 56, Balasinor Society, SV Road, Opp Fire Brigade, Kandivali West, Mumbai, Maharashtra, 400067

022-35415953