उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में प्रबुद्ध नागरिकों के साथ संवाद

माननीय अध्यक्ष नरेश जी, माननीय सांसद, मेरे मित्र छोटे भाई अनिल बड़ोले जी, सोहन लाल जी, विनय जी, सभी महानुभाव मंच पर, मंच के नीचे, बुद्धिजीवियों की मीटिंग है तो सभी महानुभाव यही है तो। और अगर विनय जी का बस चलता तो 5 बजे तक तो सबका नाम हो ही जाता यहाँ पर। सॉरी, अनिल जी का बस चलता तो सभी का नाम हो ही जाता है यहां पर। पर वास्तव में आप सबका तहे दिल से धन्यवाद करता हूँ कि मुझे मिलने के लिए आप आए। मुझे मौका मिला आप सबसे बातचीत करने का और हम थोड़ा सा मैं प्रस्तावना रखने के बाद हम बातचीत भी करेंग। थोड़ा मैं भी आपसे सुनना चाहूंगा किस प्रकार से आप अगले 5 वर्ष, और फिर उसके बियोंड भी किस प्रकार का उत्तराखंड, किस प्रकार के देश के भविष्य के लिए आप चाहते हैं, हम सब भी काम करें, हम सब मिलकर कैसे विकास करें। कैसे दिल्ली में नरेंद्र और उत्तराखंड में त्रिवेंद्र दोनों मिलकर आप सबके, हमारे युवा युवतियों के भविष्य को और अच्छा सुगम बनाने के लिए उज्जवल बनाने के लिए कैसे मार्ग बनाए आगे विकास का।

वास्तव में देहरादून तो अपने आप में बहुत प्रसिद्ध इतिहास के साथ खड़ा हुआ है। यहाँ पर शैक्षिक संस्थाएं भी काफी सारी है काफी प्रसिद्ध है। कहते हैं कि गुरु द्रोणाचार्य ने यहीं पर अपना गुरुकुल बनाया था। और वास्तव में उत्तराखंड के लोगों ने जो योगदान हमारे आर्म्ड फोर्सेस को दिया है, जितने बड़े पैमाने पर उत्तराखंड के लोगों ने अपने जीवन का भी बलिदान दिया या जीवन का को दांव पर लगाया है देश की सुरक्षा और रक्षा के लिए, यह पूरा देश उत्तराखंड का सदैव ही कृतज्ञ रहेगा।

बहुत सारी चुनौतियां देश के समक्ष आती है। बहुत सारे विषयों के ऊपर काम चलता है। हम सब मानते हैं विकास जरूरी है। हम सब मानते हैं कि देश की उन्नति और प्रगति तेज गति से हो। पर मैं समझता हूँ हम सब यहाँ उपस्थित बंधू बघिनी सब समझते हैं कि सबसे सर्वोत्तम अगर कोई देश के लिए गंभीर विषय है, जो राष्ट्र को सुरक्षित रखना, राष्ट्र की सीमाओं को सुरक्षित रखना। जिस प्रकार से आतंकवाद, उग्रवाद, माओवादी शक्तियां देश में कई वर्षों से पनप रही थी, कई वर्षों से अलग-अलग इलाकों में अपना गलत कामों से देश के लोगों को भी नुकसान हो रहा था, देश की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही थी, उसका मुकाबला करना  है।

और एक प्रकार से मुझे तो लगता है कि देश के हर नागरिक की आज अगर सबसे बड़ी कोई चिंता है, तो वह चिंता सुरक्षा को लेकर है, वह चिंता राष्ट्र को एक रखने की है और ऐसी परिस्थिति में एक बहुत ही निर्णायक नेतृत्व, बहुत ही कठोर निर्णय ले सके और मजबूत सरकार चला सके ऐसी सरकार की आवश्यकता सबसे ज्यादा सामने आती है। और मैं समझता हूँ आज इस देश के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सामने कोई मुकाबले में नहीं खड़ा हुआ हैं जब हम निर्णायक और मजबूत नेतृत्व की बात करें।

वैसे मैं यहाँ पर क्रिकेट स्टेडियम में आया था पिछली बार जब देहरादून आया। नजदीक में हमारा वह इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस हुई थी। तो क्रिकेट के स्पोर्ट्स स्टेडियम जो है क्रिकेट की परिभाषा में देखें तो लगभग ऐसा मैच है जहाँ पर एक टीम में एक कैप्टन है और 10 खिलाड़ी, ऐसे 11 खिलाड़ी एक टीम में खेल रहे हैं। दूसरी टीम में 11 कैप्टन है, पर कोई खिलाड़ी बनने को तैयार नहीं है। और ऐसी परिस्थिति में देश सुरक्षित नहीं महसूस कर सकता, आम आदमी को पूरे समय एक भय से वातावरण सा रहेगा कि क्या अगर आतंकवादी इस देश पर हमला करें, क्या अगर किसी प्रकार की सीमाओं के ऊपर तकलीफ हो तो देश को कैसे एक रखना कि देश की समस्याओं का हल कैसे हो।

और विकास भी तेज़ गति से तभी हो पाता है जब देश में अमन शांति बनी रहे। और मैं समझता हूँ कि ऊरी में तो सर्जिकल स्ट्राइक पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर में हुई थी, लेकिन पुलवामा के बाद जिस प्रकार से हमारे सेना बलों ने, आर्म्ड फोर्सेस ने, जिस प्रकार से लाइन ऑफ कंट्रोल क्रॉस करके पाकिस्तान में जाकर जो आतंकवाद का जड़ है, उसके ऊपर हमला किया उससे आतंकवादियों को सही मायने में एक सबक सिखाने का अवसर बनाकर भारत के साथ अब किसी टेढ़ी नजर से नहीं देख सकते। भारत और भारतीय लोग सक्षम है अपने देश को सुरक्षित रखने में, सीमाओं को सुरक्षित रखने में और मुंहतोड़ जवाब मिलेगा अगर कोई भारत के ऊपर गलत नजरिए से देखता है।

इस सरकार का पिछले 5 वर्षों में मूलमंत्र विकास रहा है और विकास चारों दिशाओं में, अलग-अलग क्षेत्रों में, और देश के कोने-कोने में कैसे हो सकता है और कैसे तेज गति से हो सकता है उसका एक मिसाल पिछले 5 वर्षों का देश ने देखा। आपको ध्यान होगा किस प्रकार की अर्थव्यवस्था 2014 में हमें विरासत में मिली थी। विश्व की जो 5 सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाएं है, फ्रेजाइल फाइव बोला करते थे उसमें से भारत एक था। हमको तो कोई इम्पोर्टेंस ही नहीं मिलता था कोई अंतर्राष्ट्रीय मंच के ऊपर, कोई अंतर्राष्ट्रीय चर्चा में भारत का कोई स्थान नहीं नज़र आता था।

महंगाई लगभग डबल डिजिट में लगातार चल रही थी, बैठी हुई महिलाएं बहनों को ध्यान होगा, दाल जैसी चीज़ भी उस समय 260 रुपये में बिका करती थी। चीनी के दाम आसमान छूते थे। रोजमर्रा की चीजों में लगातार महंगाई तो हमने समझो एक एक्सेप्ट ही कर लिया था महंगाई तो, हमें जीना है महंगाई के साथ। और कोई भी अर्थशास्त्री से आप बात कर ले महंगाई सबसे अधिक अगर किसी को चोट पहुंचाती है तो गरीब को पहुंचाती है, मध्यमवर्ग को पहुंचाती है। अमीर आदमी को कोई महंगाई नहीं परेशान करती है।

आज कोई व्यक्ति 20,000-25,000 रुपये, 10,000 रुपये महीना कमाए तो साधारणतः उसका अधिकांश पैसा तो खर्च हो जाता है रोजमर्रा की जरूरतों में। और उसमें जब महंगाई होती है तो टंचाई ही होती है। पैसा कम पड़ने लगता है। अमीर आदमी जो बहुत बड़े-बड़े कमाई करते हैं उनको महंगाई की चोट नहीं उतनी पड़ती जितनी मध्यमवर्ग और गरीबों को पड़ती है। बड़ा अनइक्वल सा खेल है महंगाई का और कुछ अर्थशास्त्री तो यहां तक कहते हैं की महंगाई से अमीर आदमी को तो शायद लाभ होता है क्योंकि उसके पास बड़ी संपत्ति होती है बड़े-बड़े एसेट्स होते हैं जिसकी वैल्यू बढ़ जाती है।

और आप इतिहास देख लीजिए 1947 से आज तक जब-जब कांग्रेस की सरकार आई है महंगाई बढ़ी है, महंगाई ने आसमान छुआ है। हमें दो मौके मिले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने 6 वर्ष शासन किया और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में 5 वर्ष एनडीए की सरकार रही। दोनों यह कार्यकाल ऐसे रहे जब महंगाई नियंत्रण में रही और लगातार घटती रही। आज तो शायद 2.5% के करीब है महंगाई की दर। और औसतन 5 वर्ष का देखें तो आज़ादी के बाद कोई 5 वर्ष ऐसे नहीं गए हैं जिसमें महंगाई इतनी कम रही हो, जितनी प्रधानमंत्री मोदी जी के कार्यकाल में रही है।

अर्थव्यवस्था के और जो प्रमुख अंश होते हैं, विकास की दर, आजादी के बाद 5 वर्ष के जो औसतन विकास की दर है वह सबसे ज़्यादा अगर किसी 5 वर्ष में रही है तो यह यह 2014 से 2019 के बीच रही है। इसी प्रकार से वित्तीय घाटा हो या करंट अकाउंट डिफिसिट हो, यानी विदेशी मुद्रा में जो कमी रहती है इन दोनों मापदंड में भी हमने लगातार सुधारी है अर्थव्यवस्था को। फॉरेन एक्सचेंज रिज़र्वज़ बड़े पैमाने पर बढे हैं और एक प्रकार से विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था आज भारत है। और यह हम सबके लिए बड़ी गौरव की बात है हम सबके लिए बड़ी प्रसन्नता की बात है। और स्वाभाविक है जब तेज़ गति से विकास होता है जब तेज़ गति से अलग-अलग आधारभूत सुविधाएं इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश होता है, जब बड़े रूप में देश में गरीबों के लिए अलग-अलग योजनाओं के तहत विकास पहुँचता है, तो जीवन का स्तर भी सुधरता है और देश का भी आगे का भविष्य उज्जवल होने का मार्ग खुलता जाता है।

आप देखें तो माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 5 वर्षों में एक-एक कार्यक्रम ऐसा शुरू किया जिससे सीधा सामान्य व्यक्ति के जीवन में प्रभाव हो, प्रभाव पड़े और जीवन का स्तर सुधरे। आखिर इस कल्पना को साकार करना और उसके लिए दिन और रात मेहनत करना कि आजादी के 75 वर्ष जो 2022 में पूरे होंगे तब देश में कोई व्यक्ति ऐसा ना रहे जिसका पक्का मकान ना हो, जिसमें 24 घंटे बिजली ना हो, शौचालय ना हो, पीने का पानी ना हो, अच्छे स्वास्थ्य और शिक्षा की सेवाएं नजदीक में हो, सड़क हो, हर प्रकार से हर व्यक्ति के जीवन में जो रोजमर्रा की जरूरतें है इसको ध्यान में रखते हुए विकास के अन्य-अन्य कार्यक्रम को पिछले 5 वर्षों में तेज़ गति दी गई, आंकड़ों में मैं जा सकता हूँ और मैं समझता हूँ यहाँ पर सभी प्रबुद्ध नागरिकों को ध्यान होगा कि हर विषय की जो स्केल रही है, जिस स्पीड के साथ काम हुआ है वह दुगना-तिगना नहीं, कई गुना – अब घर बनाने का एक कार्यक्रम प्रधानमंत्री आवास योजना है। कहां पहले 25 लाख घर 5 वर्ष में बने। इन 5 वर्षों में डेढ़ करोड़ घर बने। कहां आज़ादी से 2014 तक देश में 13 करोड़ घरों तक एलपीजी गैस कनेक्शन पहुंचा था। मात्र 5 वर्षों में 12 – साढ़े 12 करोड़ गैस कनेक्शन सिर्फ 5 वर्षों में, 65 वर्षों के सामने 5 वर्षों में 12 साढ़े 12 करोड़ घरों में गैस कनेक्शन पहुंचा।

उसमें से 7 करोड़ तो मुफ्त में हमारी गरीब महिलाओं के जीवन को सुधारने के लिए, उज्जवला योजना के तहत दिए गए। हमारे लिए सबके लिए शर्मिंदगी की बात थी और उसमें मैं अपने आप को और मेरे सहित हम सबको एक प्रकार से एहसास दिलाना चाहूंगा कि आजादी के 65-66 साल बाद भी इस देश में करोड़ों मकान-घर थे, करोड़ों लोग थे, करोड़ों बच्चे थे जिनको बिजली क्या है वह नहीं पता थी बिजली कभी उनके घर में नहीं पहुंचे थी। करोड़ों घर ऐसे थे।

मुझे मेरी दादी बताया करती थी कि मेरे पिताजी ने अंबाला में स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ाई कर-कर के अपना स्कूल पास किया था। और फिर जाकर काशी विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग करने का उनको सौभाग्य मिला। लेकिन क्या आज 21 वीं सदी के भारत में करोड़ों बच्चों को बिजली ना मिले यह देश उसको सह सकता है क्या? यह हम सबके लिए शर्मिंदगी की बात है कि नहीं? प्रधानमंत्री मोदी जी ने जिन्होंने खुद ने स्वयं महसूस किया था बिना बिजली, बिना गैस कनेक्शन, बिना शौचालय गरीबी कैसे जी जाती है। जिन्होंने खुद झेला हो इस प्रकार का जीवन शायद वही समझ सकता है कितना जरूरी होता है यह रोजमर्रा की चीजें गरीब व्यक्ति के घर में।

और इसीलिए सौभाग्य योजना के तहत उन्होंने आदेश दिया – पहले मैं देख रहा था और फिर आर. के. सिंह साहब ने उसको आगे बढ़ाया, हर गांव तक हर मजला ढाणी टोले तक, हर घर तक बिजली पहुंचाने की जिम्मेदारी इस सरकार ने ली। और मुझे आनंद होता है आज बताते हुए शायद मात्र कुछ घर रह गए हो लेकिन आज देश में शत-प्रतिशत गांव शत-प्रतिशत मजला ढाणी टोले और लगभग शत-प्रतिशत घरों तक आज बिजली पहुंच चुकी है और जहां तक हो सके घरों में 24 घंटे बिजली देने के लिए, केंद्रीय सरकार और राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। मैं समझता हूँ उत्तराखंड में तो 24 घंटे बिजली साधारणतः आती होगी। अब अगले चरण में जो व्यवस्था है जो इंफ्रास्ट्रक्चर है बिजली का, कई जगहों पर तो शायद सैकड़ों वर्ष पुराना होगा – 20-25-40 साल पुराना इंफ्रास्ट्रक्चर चल रहा है।

मैंने अनुमान लगाया था देश को लगभग 25-30 लाख करोड़ रुपये लगेंगे इसको पूरी को अपग्रेड करने में। लेकिन हम वह भी करते रहेंगे हम कोई ऐसा जगह नहीं छोड़ेंगे जहाँ पुरानी झर-झर व्यवस्था चलती हो। स्वाभाविक है इन सब चीजों को समय लगता है। आज देश की अपनी समस्याओं की प्रिऑरिटीज़ है सामने। प्रायोरिटी के हिसाब से हमको काम करना पड़ेगा। लेकिन हमने प्रायोरिटी में शौचालय पहुंचाया, हर महिला के आत्मसम्मान को ध्यान में रखते हुए 10 करोड़ से अधिक शौचालय इस देश में हर घर तक बने। आज लगभग 98% घरों तक शौचालय पहुंचा है। और मैं समझता हूँ एक प्रकार से कैसा जीवन होगा उन महिलाओं के लिए, किस प्रकार का अपमान होगा जिनको सूर्योदय से सूर्यास्त तक, सनराइज से सनसेट शौच करने के लिए भी जाने के लिए परेशानी होती होगी।

मैं तो कई बार कहता हूँ हम सब सौभाग्यशाली है कि या तो हमारे परिवार में, हमारे पूर्वजों में कोई गाड़ी चढ़ गया और गांव से निकलकर एक अच्छे जीवन के लिए आगे बढ़ गया। पर जो लोग रह गए हैं जो गाड़ी नहीं चढ़ पाए, एक हैंना अंग्रेजी में कहावत – “Those who have boarded the train have a responsibilty to those who could not board the train”. हमारी भी जिम्मेदारी है कि जो लोग विकास में पीछे रह गए, कैसे उनतक विकास पहुंचे, कैसे उनके जीवन में एक नई उमंग, एक नई आशा, एक अच्छा भविष्य बने और मैं समझता हूँ इस सरकार ने 5 साल में एक तरफ एक मजबूत अर्थव्यवस्था की आधारशिला बनाई, दूसरी तरफ गांव गरीब किसान तक, उस वर्ग तक जो वंचित रहा, उस वर्ग तक जिसको सदियों से शोषण हुआ है, उस वर्ग तक विकास पहुंचे इस काम को प्राथमिकता देने का जो संकल्प लेकर हम 2014 में आए थे, उसमें अभूतपूर्व काम हुआ है। एकदम ट्रांसफॉरमेशनल जर्नी रही है इस 5 वर्षों की।

और मुझे विश्वास है कि इस करोड़ों की संख्या में देशभर में लगभग 22 करोड़ परिवारों को सरकार ने सीधा छुआ है उनके जीवन में सीधा परिवर्तन लाने का काम किया है। कुछ घरों में तो कई प्रकार से घर भी मिला, शौच भी मिला, बिजली पहुंची, पेयजल पहुंचा, स्कूल बना नजदीक में। आयुष्मान भारत से आज 50 करोड़ हमारे गरीब और निम्म मध्यमवर्ग परिवारों के लिए, लोगों के लिए 10-12 करोड़ परिवारों के लिए, एक आशा जगी है कि उनको घर में किसी को कभी कोई बीमारी हो, तकलीफ हो तो मुफ्त में इलाज किया जाएगा, सरकार द्वारा इलाज किया जाएगा।

और मुझे तो आनंद है कि हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी ने उत्तराखंड में आयुष्मान भारत-2 , यानी जो आयुष्मान भारत के लाभार्थी दिल्ली केंद्रीय सरकार से है वह तो है ही जो बाकी रहता है उन सबको भी आयुष्मान का लाभ मिला ऐसा निर्णय लिया। और मुझे याद है मैं उत्तराखंड चुनाव के पहले जब देहरादून आया था मैंने यही वादा किया था कि डबल इंजन की सरकार जब उत्तराखंड में देंगे, आप जब केंद्रीय सरकार में भाजपा एनडीए की सरकार है। जब आप उत्तराखंड में भाजपा की सरकार बनाएंगे तब यह डबल इंजन की तरह तेज गति से विकास करेगी। और मुझे आनंद है कि आप के सभी सांसद आप की सरकार लगातार हम सबके साथ मिलकर, केंद्रीय सरकार के साथ मिलकर कैसे उत्तराखंड का तेज गति से विकास हो, चाहे वह इंफ्रास्ट्रक्चर हो चाहे वह गरीब किसान मध्यमवर्ग के विकास की बात हो, चाहे वह व्यापारी वर्ग के लिए एक अच्छे भविष्य की बात हो, चाहे वह प्रोफेशनल्स को एक अच्छा आगे के लिए शिक्षा की संस्थाओं में, स्वास्थ्य की संस्थाओं में और आगे चलके मौके मिले, चाहे वह पर्यटन के क्षेत्र को और तेज़ गति देने की बात हो।

अलग-अलग विषयों पर कैसे यहाँ पर काम किया जाए, कैसे यहाँ पर तेज गति से विकास हो, इसके लिए आप की उत्तराखंड की सरकार आपके केंद्र की सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में, आपके सभी चुने हुए जनप्रतिनिधि संकल्पित है। पूरी तरीके से संवेदना के साथ, प्रतिबद्धता के साथ और पूरे विश्वास के साथ काम में जुटे हुए हैं। मैं तो अनिल से बहुत वैसे नाराज रहता हूँ। बहुत तंग करता है मुझे। और अगली बार आप ऐसे तंग करने वाले संसद मत भेजा करिए।

पर मैं भी उनको बहुत तंग करता हूँ। सुबह-सुबह छह-साढ़े छह बजे न्यूज़पेपर देखते हैं तो सबसे पहला फोन इन्ही को जाता है। वास्तव में जिस जिम्मेदारी के साथ आपके छोटे भाई अनिल बलूनी ने, और जब यह नए-नए आए थे तो मैं आपको एक सच्चाई बताऊँ तो हम जानते नहीं थे हमने कहा यह कौन उत्तराखंड से नरेंद्र मोदी जी उठाके ले आए है, और पूरा ऑल इंडिया मीडिया का इंचार्ज बना दिया। और आप समझ सकते हैं राजनीतिक पार्टी और राजनीतिक जीवन में और जिस पार्टी की केंद्र सरकार और देशभर में 15-16-17 सरकारें चल रही हो उस पार्टी का कितना महत्वपूर्ण अंश रहता है मीडिया का।

और मैं समझता हूँ हम सबके लिए हर्ष की बात है कि जिस खूबसूरत तरीके से, जितने प्रभावशाली ढंग से और जिम्मेदारी के साथ अनिल जी ने हमारा पूरा मीडिया का काम संभाला है वास्तव में उत्तराखंड का नाम आपने रोशन किया है। उत्तराखंड का एक-एक व्यक्ति गर्व से कह सकता है कि आपका बड़ा योगदान है भारतीय जनता पार्टी और केंद्र की सरकार की उपलब्धियों को जनता जनार्दन तक पहुंचाने में मीडिया के साथ संबंध बनाने में, सरकार, पार्टी  और मीडिया के बीच समन्वय बनाने में जिस प्रकार से अनिल जी ने अपने बहुत ही हंसमुख स्वभाव से, कभी नाराज़ ही नहीं होते है, मुझे तो हैरानी होती है।

हमको तो ज़रा सी कुछ चीज गलत होती है तो देखो मैं आपको अनिल जी आपको भी डांट दिया था और यह कभी नाराज ही नहीं होते हैं। कभी-कभी इनपर भी हमको गुस्सा आता है कि आप सीरियसली कुछ ले नहीं रहे हो, आप और काम करो। वो कहते हैं मैंने सब कर दिया आप तो अभी बोल रहे हैं। मैं करके फिर आपको फोन करा। इसी प्रकार से माला बहन भी इतनी सरल हंसमुख स्वभाव की बड़ी बहन है हमारी। बड़े राजघराने से आती है लेकिन एक बार एक बार भी कभी उन्होंने अपना कोई इतिहास या अपने नाम का प्रभाव या वर्चस्व किसी के ऊपर डालने की कोशिश की।

पार्लियामेंट में बहुत ही सहज रूप से जिम्मेदारी के साथ एक सांसद की भूमिका निभाती है। हमारे पास जब-जब उत्तराखंड का विषय लेकर आती है, संवेदना रहती है उनके दिल में चिंता करती है। और मैं समझता हूँ यह पांचों जो हमारे उत्तराखंड के उम्मीदवार चयनित हुए हैं, जो मुझे पूरा विश्वास है आप सबको रिप्रेजेंट करेंगे अगली लोकसभा में। आप सबका समर्थन, आप सबका आशीर्वाद उनको जरूर प्राप्त होगा।

इनके वर्षों-वर्षों का किया हुआ समाज सेवा का काम, इनके वर्षों की राजनीतिक तपस्या वास्तव में उत्तराखंड के लिए और तेज गति से विकास की दौड़ में आगे बढ़ाएगी उत्तराखंड के कामों को। मुझे पूरा विश्वास है कि 11 तारीख को और आप सब तो सौभाग्यशाली है कि भारत का चुनाव आप से शुरू होने जा रहा है। आप दिशा दिखाएंगे पूरे देश को। और जब एग्जाम में 100 में से 100 अंक आते हैं तो उसका स्वाद कुछ और ही होता है। तो यह आपका फाइनल एग्जाम 11 तारीख को होने जा रहा है और मुझे पूरा विश्वास है 5 में से 5 सीटें देके आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के प्रयत्नों को, प्रयासों को और बल देंगे, उनकी शक्ति बढ़ाएंगे। और यह पांचों आपके सांसद, आपके चुने हुए प्रतिनिधि उत्तराखंड के लिए पूरी तरीके से पूरी जिम्मेदारी से काम करेंगे।

थोड़ी गर्मी होती जा रही है मौसम में पर मैं मैं राजनीतिक गर्मी की बात नहीं कर रहा हूँ। उत्तराखंड में तो वैसे लगभग एक तरफा सा चुनाव,  मैंने जो जितने यहाँ की खबरें समाचारें सुनी, जो हम लगातार देखते रहते हैं अलग-अलग देश में क्या-क्या माहौल बन रहा है। पर उसमें कभी-कभी डर भी लगता है एक तरफ ओवरकॉन्फिडेंस का दूसरी तरफ मौसम का। मैं चाहूंगा हमारे आज सभी जो भाई बहन उपस्थित है बड़ी जिम्मेदारी के साथ 11 तारीख को गांठ बादके यह तय कर लें कि हम सुबह ही 11 बजे के पहले ही हम स्वयं, हमारे परिवार के लोग, हमारे मित्र-बंधु, रिश्तेदार, पड़ोसी, हमारे साथ काम करने वाले लोग हम सब 11 तारीख को 11 बजे के पहले समय पर अपना खुदका वोट, हमारे सब चाहने वालों का वोट डलवाएंगे।

यह तो बोलने की आवश्यकता नहीं है कि कमल पर बटन दबाएंगे। इतने तो ज़िम्मेदार उत्तराखंड और देहरादून के सभी लोग है। लेकिन भूल चूक से भी अगर हम कभी आलस पर आ जाए तो यह भी याद रखें राजस्थान के कांग्रेस के मुख्यमंत्री के प्रत्याशी का उदाहरण है जो सोचते थे कि मैं तो जीता पड़ा हूँ, मैं तो पक्का जीतूंगा और 1 वोट से हार गए थे। और मुख्यमंत्री नहीं बन पाए थे। एक वोट से।

तो कहीं ऐसा ना हो जाए कि कोई भविष्य का आपका कोई बनने वाला मंत्री कहीं आप लोग के किसी छोटी चूक के कारण, कोई छोटी गलती के कारण और उस ओशन में तो बोलते हैं ना – “Every drop makes an ocean”. अगर बहुत सारे लोग ऐसे छोटी-छोटी गलतियां करने लग जाए तो बहुत बड़ी गलती हो जाती हैं। तो मुझे लगता है आप सब ने ज़िम्मेदारी के साथ 11 तारीख को सुबह ही अपने मित्र-बंधु सबको लेकर कमल का बटन दबाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कार्यक्रमों को, उनकी योजनाओं को और बोल देना है, और शक्ति देनी है। और इस देश के आगे आने वाले कल में जो एक संकल्प लेकर प्रधानमंत्री मोदी जी चले हैं, एक सुशासन का संकल्प, एक अच्छी ईमानदार सरकार जो केंद्र में चली है वैसी पूरी देश में चले। हर वर्ग नीचे तक महसूस करे कि विकास हर व्यक्ति, हर परिवार को छू रहा है। एक ऐसे संवेदनशील सरकार जो गांव गरीब किसान की भी सोचे, मध्यमवर्ग की भी चिंता करे, शोषित वंचित पीड़ितों की जीवन में नया उमंग लाए और देश के हर इलाके का विकास चारों दिशाओं में विकास हर वर्ग को पहुंचे, हर जिले, हर घर तक पहुंचे। ऐसे विकास के लिए आप सबसे प्रार्थना है कि आप भारतीय जनता पार्टी के हमारे सांसदों को चुने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को आपका आशीर्वाद दे और उनके माध्यम से उनका हाथ मजबूत करें। इस विनम्र प्रार्थना के साथ मैं अपनी बात को विराम देता हूं ।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

Govt. under the able leadership of PM Narendra Modi ji is committed to ensuring all-round development of every section of society and every region of India

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Union minister Piyush Goyal speaks to Shishir Gupta about a range of issues including the BJP’s election manifesto, agriculture, economic growth and his party’s prospects in the Lok Sabha elections.

What’s your big takeout from the manifesto?

I think it’s a manifesto which has reiterated the priorities of a continuum government. The fact that we are committed to national security, the fact that we are committed to ensuring all-round development of every section of society and every region of India has been given a big thrust through specific programmes that will help an emerging India. We have committed ourselves to fiscal prudence and to continue this path of strengthening Indian economic growth story. The Rs 100 lakh crore investment on infrastructure to my mind is a game-changer. What we are looking at is an empowered India, not an India that depends on doles and weak governments.

This farm focus that you have, one of the key things is expanding the PM-Kisan programme to all farmers. Do you think there will be enough money to do all this?

One thing about Prime Minister Mr Narendra Modi, which I observed both in 2014 and now, he ensures that we don’t make any commitment which is fiscally imprudent. So, every commitment made in the manifesto goes through a rigorous budgeting process to ensure that adequate funding will be available and no programme is just a promise which we cannot fulfil or which will cause the economy go to into despair in some other way.

The Congress has said your manifesto has nothing about jobs.

I think an elementary reading of this ‘Sankalp Patra’ will show you that everything that we have written in this is going to create opportunities for people to work, jobs, increase livelihoods. After all, this ?100 lakh crore is money that is going to go into ecosystems, it is going to be invested, it is going to be spent. And none of it is possible without people working for it.

 

There are two or three of the slightly controversial elements in the manifesto – one is of course the Citizenship Amendment Bill, which created so much furore in the north-east, which you were unable to get through Parliament. And then the continued emphasis on Article 370 and 35A, which is bound to create some ripples in some parts of the country. What are your views on this?

As far as the Citizenship Amendment Bill, we are committed to it. And we will pass it through both Houses of Parliament. Protecting the interests of N-E and the states or any state which has its own ethnic identity, which has its own local issues, I think we can create a balance between the two. But we are committed to the Citizenship Bill and we believe it’s important to save the country from infiltrators who have no right to be in this country.

I am surprised to see it in the manifesto, given how controversial it has been.

Well, this government has not decided its priorities based on the controversies of what others think we should do. We have looked at what is good for the nation and what is good for the people of India. Similarly, in Kashmir, this isolationist policy that we have on Kashmir for so many years, because of which we have created a ghetto-like mentality, we have almost pushed them into one corner and they are hardly integrating with the rest of the country. We believe we have to remove Article 370, sort out these issues, get Kashmir to merge into the national mainstream, be a part of this growth story, be a part of this development, enjoy the fruits of the nation going forward, becoming a world superpower, and rid itself of terrorism.

One of the other aspects in your manifesto was the 33% reservation for women. But despite that, when you look at the candidates in this election, across all parties, there aren’t enough.

We are committed to the 33% women’s reservation and believe that national consensus will have to be built around that. We have seen women getting empowered through the panchayat system, wherever we have been able to get more and more women to participate. I would like to appeal to women in this country also to look at a greater degree of engagement so that women can emerge as leaders and candidates who can win elections and naturally become candidates in elections. I think our party encourages women at all levels across the country, it’s probably the first time we have so many women in the cabinet. No other government in the past had the foreign minister and the defence minister that were women and part of the CCS. This government’s intentions are reflected by its deeds.

 

You have been a party treasurer for long and in the context of the raids that were conducted in MP yesterday, how much does black money play a role in politics?

For the BJP, we have never encouraged bad money to come into politics. We have always looked at collections from across the country from our support system, from our cadres and over the years ours is one party which has always believed in the highest standards of transparency, quality accounting, quality audit of all our expenses, of all our collections. We believe that it’s important that good people come forward and participate in democratic process of politics so that good money drives Indian politics. Which is why we brought in the concept of electoral bonds. In fact, the Congress had brought in electoral trusts, which were very similar to the electoral bonds. I don’t know why they are making a fuss and crying over it.

What’s your overall sense of this election, compared to 2014?

I think this is an election where people are going to vote for a government that can provide security, a strong leadership, a government that stands committed to a clean and honest good governance agenda, a government that can protect the lives and security of every citizen, that can fight terrorism, a government that is truly wedded to the all-round development of every citizen and every part of the country, including the N-E, eastern parts, some parts of north India that have been deprived of development for decades.

 

Source:https://www.hindustantimes.com/lok-sabha-elections/lok-sabha-elections-2019-pm-ensures-we-don-t-make-any-fiscally-imprudent-commitment-says-union-minister-piyush-goyal/story-gztwFEHjL2DSSaojqXIa5M.html

 

PM Narendra Modi ji believes in empowering a person rather than making him dependent on doles. The whole Sankalp Patra is an agenda for empowerment where every promise is properly budgeted

Piyush Goyal, minister for railways and coal, who presented NDA’s last budget, spoke to Sidhartha on BJP’s manifesto. He details specific promises and the source of funding to fulfil them:

What will be the extent of increase in coverage of the PM-Kisan scheme if it is to cover all farmers and what was the rationale for expanding its scope?

We have kept it at two hectares and we plan to cover 12 crore farmer families, and work is going on at a breakneck speed. One instalment has already gone and we are constantly asking states to share the list of beneficiaries. One genuine issue that came to our attention was that in many areas farmers have larger holdings but (they) are rain-fed or suffer from drought or flooding. There are areas like Bundelkhand which are very dry. Farmers, small and large, have collectively helped India become self-sufficient in foodgrains and other crops. So, we thought every farmer should get the benefit. This will add probably three crore or so (to total).

How do you cover share croppers and tenant farmers?

We are looking at more and more ways to empower them. We will have to work on creating the database of tenant farmers to give more benefits. Tenancy records are not available. The difference between BJP’s manifesto and anybody else’s manifesto is that we look at doability. For us the credibility of what we say is very important.

What will be the scale of the pension scheme for small and marginal farmers?

We will work it out once we come back. Now that we have the database of farmers because of PM-Kisan, it will help us with the pension scheme. It is unfortunate that many states are not allowing benefits to citizens, especially the poor and farmers. Why are they politicising welfare measures?

What is the rationale of interest-free loans of up to Rs 1 lakh for farmers who pay on time?

Small farmers face challenges on profitability. Very often there is stress around the ability to service interest. Therefore, the loan duration will be one to five years and they won’t have the pressure to repay loans after every cropping season. Very often, that also creates pressure on the farmers as they have to borrow to repay this loan. All that is an unnecessary burden. With the interest subvention (subsidy), over 10 years, whole loan will become free.

How much will all this cost and where are you going to get the money from?

Every one of our promises is budgeted. We have looked at the growth in revenues and our ability to service all these promises. The country is becoming more honest and without increasing the tax rates the base is expanding. Several of our schemes such as Ujjwala, Saubhagya and building toilets are getting over and will not need budgetary support. So, thousands of crores will now be available to service new areas, particularly for the poor and the farmers.

For the middle class you have promised lower taxes. What are the details of the plan?

Prime Minister Narendra Modi and finance minister Arun Jaitley have given relief to the middle class in one form or another. The PM spoke about respect for honesty and respect for honest taxpayers. We believe that our taxpayers and businessmen are basically honest people and create jobs, wealth and infrastructure. We want the middle class to have more money in their pockets so that the family can spend for the welfare of their children and parents.

You have a very ambitious investment target of Rs 100 lakh crore. Where is the money going to come from and will the economy have the capacity to absorb this much investment?

Resources are not a constraint. People want to invest in an economy that has the kind of potential that we offer. The funding plan includes budgetary support, viability gap funding, investment by PSUs, etc. As we expand highways, ports, railways, we will create investment and job opportunities. Investing Rs 100 lakh crore in infrastructure itself will have a nearly Rs 25-30 lakh crore labour and employment component. We have drawn up sector-wise plans. In railways for instance, we have a Rs 25 lakh crore plan but we have included around Rs 8 lakh crore or so. We have looked at the five-year component.

The opposition has been attacking you on your jobs record. Does the manifesto really address the issue?

It’s elementary. There are two ways – you empower a person or you make him dependent on a dole. You teach him to fish or you give a temporary fish and then you run out of fish. But when you teach him to fish, there is a huge ocean out there and a man will never run out of fish. That’s what PM Modi believes in and that’s what BJP believes in. That’s economically prudent, that’s good for the nation. The whole Sankalp Patra (manifesto) is an agenda for empowerment.

Source: https://timesofindia.indiatimes.com/blogs/toi-edit-page/sankalp-patra-is-an-agenda-for-empowerment-for-bjp-credibility-of-what-we-say-is-very-important/

Speaking at ABP News program Shikhar Sammelan

एंकर: बहुत-बहुत धन्यवाद पीयूष गोयल जी। भारत सरकार के रेल मंत्री और कोयला मंत्री, दो-दो मंत्रालयों का प्रभार संभाल रहे हैं, पीयूष गोयल जी हम सबके बीच में हैं, भारतीय जनता पार्टी के बहुत वरिष्ठ नेता हैं। तहे दिल से एबीपी न्यूज़ के इस मंच शिखर सम्मेलन 2019 में आपका स्वागत है।

उत्तर: बहुत-बहुत धन्यवाद सुमित जी और मैं समझता हूँ आप तो अब प्रधानमंत्री का इंटरव्यू करते हैं तो अब हम छोटे लोगों की क्या अवकात है आपके सामने जवाब देने की।

एंकर: बहुत-बहुत धन्यवाद इस मौके के लिए भी और उस मौके के लिए भी। हम तो सवाल पूछते हैं, प्रधानमंत्री से पूछने की कोशिश की कुछ रह गए हैं जो आपसे पूछने की कोशिश आज कर लेते हैं। शुरुआत करता हूँ आपके संकल्प पत्र से जो आज मैनिफेस्टो आया। कांग्रेस कह रही है कि यह जुमला पत्र है, भारतीय जुमला पत्र। कांग्रेस का सीधा-सीधा एलिगेशन है जो जनता के एलिगेशन से या जनता को समझ में भी आ जाये, आपका पहला पन्ना राष्ट्र प्रेम है, उनका पहला पन्ना रोज़गार है, क्या रोज़गार आपके घोषणा पत्र में है ही नहीं, संकल्प पत्र में, ऐसा क्यों है?

उत्तर:  सबसे पहले तो स्वाभाविक है कि विपक्षी दल हैं तो आलोचना करेगा और हम आलोचना से कभी न डरते हैं हम स्वागत करते हैं। आपको कुछ उम्मीद थी कि वह तारीफ करेंगे और टीवी पर बोलेंगे वाह क्या मोदी जी ने बढ़िया संकल्प लिए हैं। तो स्वाभाविक है आलोचना करेंगे लेकिन आज ही से दो दिन पहले मैंने स्वयं पत्रकार वार्ता में खुलासा किया था कांग्रेस ने कैसे 1951 से शुरू करें तो आज तक लोगों को धोके में रखा, झूठे वादे किये और किस प्रकार से इस देश के साथ  छल किया है। वास्तव में उनके 1951 के घोषणा पत्र तक में लिखा है कि गरीबी हटाएंगे। मैं सात वर्ष का था, 1971 में जब उन्होंने गरीबी हटाओ का नारा दिया था। मैं 20 वर्ष का था 1984 में जब कहा गया एक पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा जो आज के अध्यक्ष, कांग्रेस के अध्यक्ष के पिताजी थे जिन्होंने कहा कि मैं 100 रुपये खर्चता हूँ तो 55 रुपये तो मेरे चेले-चपाटे भ्रष्टाचार और दलाली में निकाल देते हैं। वह सब कौन थे, वह कांग्रेसी थे।

आज ही से 15 वर्ष पहले, जब में 40 वर्ष का था 2004 में वर्तमान में कांग्रेस अध्यक्ष की माता जी ने जब वह अध्यक्षा थी कहा कांग्रेस के हाथ गरीबों के साथ। अब कब तक गरीब इस प्रकार के झूठे वादे और झूठे घोषणाओं को स्वीकार करेंगे और विश्वास करेंगे। आज एक देश के सामने नेता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिसपर देश की 130 करोड़ जनता की आस्था है जिसके ऊपर विश्वास करती है भारत की जनता।

और वह कितना भी कुछ शब्दावली करें स्लोगन करें इस संकल्प पत्र की एक-एक चीज़ सोच समझकर गहराई से उसके ऊपर विचार विमर्श करके और हर बिंदु में कितना खर्चा होगा, कब होगा, कैसे होगा, सफलता कैसे करी जाएगी, किस चीज़ में लगा सफलता में मुश्किल होगी उसको छोड़ दिया। बहुत गहराई से सोच समझकर यह घोषणा पत्र यह संकल्प पत्र बना है क्योंकि हम कंटीन्यूइंग गवर्नमेंट हैं हम वर्तमान में सरकार में हैं, हम ज़िम्मेदारियों के अहसास से इस संकल्प पत्र को बना रहे हैं, हमें अहसास है कि हमें इसको पूर्णतः 24 मई से ही इसको लागू करना शुरू करना है।

तो उस ज़िम्मेदारी के साथ और जनता के विश्वास के अनुकूल यह बनाया गया संकल्प पत्र है, रही बात राष्ट्र प्रेम की तो मैं इस खुले मंच से आप सब से पूछना चाहता हूँ कि क्या राष्ट्र प्रेम के ऊपर कोई कोम्प्रोमाईज़  हो सकता है? क्या राष्ट्र प्रेम इम्पोर्टेन्ट, सबसे ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट इशू नहीं है देश के सामने? कभी भी, आप दुनिया में कोई देश में चले जाइये राष्ट्र प्रेम के आधार पर आदमी को जो आत्मविश्वास बनता है, जो एक प्रकार से खुदके अंदर हौसला बनता है वह राष्ट्र प्रेम पर बनता है। आज अमेरिका में कोई एयरपोर्ट पर बैठे हों और कोई उनके सेना बल के लोग गुज़रते भी हैना बाजू में से तो सब लोग खड़े होकर ताली बजाते हैं यह होता है राष्ट्र प्रेम जो आज पूरी दुनिया जिसका आदर सम्मान करती है। भारतीय जनता पार्टी और मोदी जी इस प्रकार का राष्ट्र प्रेम का सम्मान करते हैं, हमारे फौजी सिपाहियों का सम्मान करते हैं और मैं समझता हूँ यह सभी 130 करोड़ देश राष्ट्र प्रेम के ऊपर कोई आस्था के साथ हमारा समर्थन करेगा।

एंकर: मेरे ख्याल से कोई भी इस हॉल में मौजूद आपकी बात को डिनाई नहीं करेगा। भारतीय सेना को राष्ट्र प्रेम को हम सब करते हैं, हम सब अपने आपको देशभक्त मानते हैं, राष्ट्र प्रेमी मानते हैं और भारतीय सेना को सलाम करते हैं।

उत्तर: कांग्रेस वालों को शायद इसके बारे में कुछ अलग राय है।

एंकर: वह आपकी राजनीतिक लड़ाई है।

उत्तर: नहीं, राजनीतिक लड़ाई नहीं है, जो व्यक्ति इस प्रकार की आलोचना कर सकता है तो आप भाइयों बहनों तय करिए कि कैसी सोच होगी जो राष्ट्र प्रेम के ऊपर सवाल उठाती है।

एंकर: आपने कांग्रेस पर बहुत बोला, आपने राष्ट्र पर भी बहुत बोला, यह आपका संकल्प पत्र है पूरे 42-43 पेजेस का इसमें मैं फिर वही आ रहा हूँ, आपने बहुत सोच समझकर बनाया, गंभीरता से बनाया, अभी-अभी आपने कहा तो क्या सोच समझकर यह रोज़गार शब्द को छोड़ दिया गया?

उत्तर: पहली बात तो सुमित जी आप भी बहुत वरिष्ठ पत्रकार हैं, यहाँ बैठे हुए सभी लोग बड़े समझदार हैं और आपके सभी चैनल देखने वाले मैं समझता हूँ बहुत ही ज़िम्मेदार देशवासियों को मैं बताना चाहूंगा कि यह एक ऐसा संकल्प पत्र है जो पहले पन्ने से आखिरी पन्ने तक लोगों को अवसर ही अवसर देता है। आखिर जब 100 लाख करोड़ रुपये देश में खर्चा होंगे आधारभूत सुविधाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में तो यह कोई ऊपर से तो भगवान पेश नहीं कर देगा, आप और हम मेहनत करेंगे, आप और हम काम करेंगे। जब कोई वस्तु बनेगा तो कोई मेसन काम करेगा, कोई कारपेंटर काम करेगा कोई रंग लगाने वाला काम करेगा कोई इलेक्ट्रीशियन काम करेगा, जब सड़कें बनेंगी तो ड्राइवर ट्रेलर्स चलाएंगे, ड्राइवर उसके ऊपर गाड़ियां चलाएंगे। सड़क बनाते हुए लोग मज़दूर उसमें काम करेंगे, इंजीनियर डिज़ाइन करेंगे, कुछ स्टोर्स का काम देखेंगे, कुछ अकाउंटेंट एकाउंट्स रखेंगे। यह पूरा संकल्प पत्र जब 25 लाख करोड़ रुपये ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और आधारभूत सुविधाओं के ऊपर खर्चने की बात करता है तो स्वाभाविक है करोड़ों लोगों को उसमें काम मिलेगा। जब यह संकल्प पत्र मेक इन इंडिया की बात करता है तो करोड़ों लोगों को उसमें काम करने का अवसर मिलेगा, जब पर्यटन को प्रोत्साहन देता है तो करोड़ों लोगों को उसमें काम मिलेगा।

तो मैं समझता हूँ समझता हूँ समझदार लोग इस संकल्प पत्र को देखते ही समझेंगे कि यह पूरा संकल्प पत्र – जैसे अंग्रेजी में एक कहावत है – Either you teach a person to fish or you provide him fish. भारतीय जनता पार्टी एक ऐसी ज़िम्मेदार पार्टी है जो लोगों को आत्मनिर्भर देखना चाहती है, आत्मविश्वास से भरे युवा को और मज़बूत बनाना चाहते हैं और हम लोगों को काम देना चाहते हैं बजाए कि डोल और उस प्रकार से यह संकल्प पत्र बनाया गया है।

एंकर: आपके संकल्प पत्र के जवाब में कांग्रेस पार्टी ने एक बीजेपी का मैनिफेस्टो जारी किया है – एक भारत बेरोज़गार भारत – सब कुछ उल्टा पुल्टा है, कमल का फूल उल्टा मोदी जी की फोटो की मिमिकरी बनाने की कोशिश की गयी। मैं आपसे पूछना चाहता हूँ क्या बेरोज़गारी पर जिसपर इतना कांग्रेस हावी है आपको लगता है यह आपने जो बातें कही कि सड़कें बनेंगी, मॉल बनेंगे, अस्पताल बनेंगे वह काम निकलेगा, इससे संतुष्ट कर पाएंगे हिंदुस्तान की अवाम को?

उत्तर: और यह 100 लाख करोड़ तो सिर्फ सरकारी या सरकारी सहायता से बनाने का इंफ्रास्ट्रक्चर का प्लान है और पूरा वेल डिफाइंड प्लान के साथ हमने लिखा  है,प्राइवेट सेक्टर इन्वेस्टमेंट अलग है और ग्रॉस कैपिटल फार्मेशन बढ़ते जा रही है वह भी आंकड़े देश के समक्ष हैं। रही बात इनके इस प्रकार के ओछे  व्यवहार की मुझे लगता है इस देश की जनता उनसे इससे ज़्यादा अपेक्षा ही नहीं करती है। भारतीय जनता पार्टी देश को शिखर तक पहुंचाने में लगी है जैसा आपका शिखर सम्मेलन। और कांग्रेस पार्टी एक बार शिखर तक पहुंचा दी थी जनता ने 1984 में अब वह अपने आप गड्ढे ढूंढ रही है कहाँ पर रहना है। और इस प्रकार के ओछे व्यवहार से मैं समझता हूँ प्रधानमंत्री मोदी जी की लोकप्रियता भी बढ़ती है और विश्वसनीयता भी बढ़ती है। हमने हर चुनाव में देखा है जब कांग्रेस बौखला जाती है तो इस प्रकार के शब्द और इस प्रकार की हरकतों पर उतर आती है। जितनी बार उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपमान किया है उतना ही ज़्यादा लोकप्रियता प्रधानमंत्री की बढ़ी है।

आप बताइये भाइयों बहनों, जब उन्होंने मौत का सौदागर बताया तब और ज़्यादा लोगों ने उनको वोट दिया कि नहीं? जब चाय वाला करके अपमानित करने की कोशिश की तो भारत की जनता ने कहा यह चाय वाला नहीं यह उपाय वाला है। जब उन्होंने हमको नाकामियाब कहने की कोशिश की तो जनता ने कहा यह सरकार ने तो नामुमकिन को भी मुमकिन करके दिखाया है। और मैं समझता हूँ कांग्रेस पार्टी को अपनी सही जगह की दिशा का आंकलन हो गया है और इसलिए यह बहुत बुरी तरीके से बौखला गयी है।

एंकर: तो फिर राहुल गाँधी से डिबेट में परहेज़ क्यों? राहुल गाँधी हर चौथे दिन चुनौती देते हैं प्रधानमंत्री के उसी इंटरव्यू का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि डिबेट कर लीजिये आकर?

उत्तर: देखिये सुमित जी डिबेट उससे की जाती है जो कोई अपने स्तर का हो, जो व्यक्ति भाइयों और बहनों आप सबने शायद टीवी पर देखा होगा, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष गए थे सिंगापुर, आपको याद होगा एक सिंगापुर का उनका बड़ी डिबेट हुई थी। किसी व्यक्ति ने ऑडियंस में से पूछा कि राहुल जी आप देश की स्वास्थ्य सेवाओं का सुधार कैसे करेंगे, स्वास्थ्य की जो समस्या है – करोड़ों लोगों को – हमने आयुष्मान भारत लाया उसके पहले की बात है। जनता में से किसी ने पूछा कि स्वास्थ्य सेवाओं को आप कैसे जन-जन तक पहुंचाओगे सुधार करोगे तो आप में से कुछ लोगों को याद होगा और आपको ज़रूर सुमित जी याद होगा उनका जवाब। उनका जवाब था कि भारत की स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए विश्व भर की जितनी एमआरआई मशीनें हैं उनको इंटरकनेक्ट कर दिया जाये तो भारत की स्वास्थ्य सेवाएं सुधर जाएँगी।

और आप बताओ भारत के प्रधानमंत्री एक समझदार व्यक्ति हैं बहुत सूझबूझ से काम कर रहे हैं, पांच साल में उनके काम को आप सबने देखा उसके पहले गुजरात की जनता ने उनके मुख्यमंत्री के कार्यकाल को देखा। अब वह ऐसे व्यक्ति के साथ डिबेट में पहुंचेंगे तो मुझे लगता है मेरे युवा मोर्चा के अध्यक्ष ही बहुत हैं, अध्यक्षा अकेले ही उनके साथ डिबेट कर लेंगी तो राहुल गाँधी जी डिबेट में खड़े नहीं हो पाएंगे।

एंकर: यह चुनाव का दौर है, आरोप प्रत्यारोप का दौर है, दिलचस्प …….

उत्तर: यह कोई आरोप नहीं है। मैंने जो सिंगापुर की बात कही कुछ गलत कही है? आपमें से देखी है कि नहीं? देखी हैना? और इस प्रकार के तो बहुत, एक इंटरव्यू हुआ था 2014 के चुनाव के पहले आप में से कुछ लोगों ने देखी होगी उस इंटरव्यू में जो सवाल पूछा उसका जवाब वूमेंस एम्पावरमेंट का था, सवाल सड़कों का होता था जवाब वूमेंस एम्पावरमेंट का होता था, सवाल होता था कि देश में सामाजिक न्याय कैसे होगा, सवाल का जवाब वूमेंस एम्पावरमेंट था, सवाल होता था कि चुनाव में आपकी रणनीति क्या होगी जवाब होता था वूमेंस एम्पावरमेंट। तो ऐसे व्यक्ति के साथ क्या डिबेट। आपके एबीपी में क्यों नहीं बुलाते, ज़रा आप ही डिबेट कराओ उनके साथ उसके बाद हम कर लेंगे।

एंकर: मैं तो मॉडरेटर बनने को तैयार हूँ एबीपी का मंच देने को तैयार हूँ एक तरफ प्रधानमंत्री एक तरफ राहुल गाँधी, किसने मना किया?

 

उत्तर: नहीं, मैंने कहा ना equals, डिबेट कभी भी equals के बीच होती है, unequals के बीच नहीं होती है।

एंकर: तो एक तरफ पूनम महाजन?

उत्तर: मुझे लगता है बहुत है, वही निपट लेंगी।

एंकर: पीयूष भाई, एक चीज़ बहुत संजीदगी से पूछना चाहता हूँ, काफी देर से हमारा स्टेशन चल रहा है, बहुत से लोग यहाँ आये हैं जो मेरे ख्याल से आपके प्रधानमंत्री से और बीजेपी की विचारधारा से सहमत रखते थे। उनके कुछ सवाल हैं क्योंकि मैं सवालों को सेलेक्ट कर रहा था। एक सवाल जो मुझे लगा कि पूछा जाना चाहिए बीजेपी के नेता से कि आपने पांच साल में 370 को लेकर कुछ नहीं कहा, 35A को लेकर कुछ नहीं किया, आज आप फिर उन बातों को इस संकल्प पत्र में दोहरा रहे हैं। क्यों भरोसा करें कि अगले पांच साल में आप कुछ कर देंगे?

उत्तर: एक आप लोगों को याद होगा, हम बचपन में स्कूल कॉलेज में पढ़ा करते थे कहानी जिसमें एक वाक्य बड़ा प्रसिद्ध था – ‘Elementary my dear Watson’, आपको याद है वह? तो एक प्रकार से इसका जवाब बड़ा एलीमेंट्री है सुमित जी। राज्य सभा में हमारी पूर्ण बहुमत नहीं है, 2020 में हमारी पूर्ण बहुमत आएगी, संवैधानिक विषय है संविधान के तहत ही किया जा सकता है।

एंकर: आज फ़ारूक़ अब्दुल्ला साहब ने दुबारा कहा है कि अगर यह 370 और 35A को हटाने की बात करेंगे तो वाकई में हमें आज़ादी लेनी पड़ेगी, हमको अलग होना पड़ेगा। बहुत ही passionately गुस्से में उन्होंने इस तरह की बातें कहीं?

उत्तर: वह तो पूरे टाइम जब भी भारत में रहते हैं तो गुस्से में ही रहते हैं। लंदन में गोल्फ खेलते हुए शायद गुस्सा नहीं आता है उनको। लेकिन बहुत दुर्भाग्य की बात है कि इस प्रकार की सोच आज भी राजनीति में है भारत की और यही सोच है जो कांग्रेस के 70 साल के इतिहास में रही है तुष्टिकरण की सोच, तुष्टिकरण का व्यवहार जिसने कश्मीर में आज इतनी गंभीर समस्या खड़ी कर रखी है। अगर कश्मीर को भारत के साथ एक बनाना है, अगर कश्मीर के लोगों को भारत की विकास यात्रा के साथ पूरी तरह से जोड़ना है, अगर भारत और कश्मीर को हम इस रूप से देखेंगे जिस रूप से कांग्रेस देखती है, जिस रूप से अब्दुल्ला परिवार देखता है तो मैं समझता हूँ कश्मीर में कभी अमन शांति नहीं आ पाएगी। आज ज़रूरी है कि कश्मीर को देश के साथ एक होकर देखा जाए, कश्मीर के लिए अलग कानून की आवश्यकता नहीं है। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हम सब भारतवासी यही चाहते हैं।

एंकर: लेकिन पीयूष भाई बीजेपी और आरएसएस बोलती है कि जम्मू कश्मीर में केवल दो-ढाई डिस्ट्रिक्ट ऐसी है जहाँ पर तनाव है, जहाँ पर शांति नहीं है और वहां पर क्यों उनको बाकी जम्मू और लद्दाख के साथ मिलाकर न देखा जाए। मेरा सवाल यह है कि आपकी 370 की बात और 35A की बात इन्ही कश्मीरियों को आपसे दूर कर रही है, सिर्फ फ़ारूक़ अब्दुल्ला की बात नहीं है कश्मीर के लोग भी ऐसा कहते हैं?

उत्तर: ऐसा आपको लगता है। कुछ आतंकवादी … ऐसा कहते होंगे पर मैं समझता हूँ हर कश्मीरी के दिल में भारत के लिए प्यार है, हर कश्मीरी अपने आपको भारतवासी मानता है और वह भारत के साथ जुड़ना चाहता है। यह कुछ आतंकवादी लोग इस प्रकार का गलत प्रचार करते हैं, दुर्भाग्य से कुछ लोग उस बहकावे में आते होंगे और बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि कुछ राजनीतिक नेता भी इस प्रकार के गलत प्रचार से भारत का और भारतवासियों का जो संतुलन है वह ख़राब कर रहे हैं। मैं समझता हूँ उनके मित्र पक्ष कांग्रेस ने बह जिस प्रकार से सेडीशन लॉ को निकालने की बात की, जिस प्रकार से मीडिया के ऊपर अंकुश लगाने की कोशिश की। आपको ध्यान है कि नहीं कांग्रेस आ जाएगी तो एबीपी न्यूज़ बंद करना पड़ेगा आपको और या अख़बार बंद करना पड़ेगा, तय करना पड़ेगा क्या चलेगा या डिजिटल बंद करना पड़ेगा। तो इस प्रकार की सोच रखने वाली पार्टी क्या इस देश का भला करेगी।

एंकर: पर पीयूष भाई मैं कश्मीर पर वापस लौट रहा हूँ। अगर कश्मीर की अवाम बीजेपी की सोच के साथ है तो कश्मीर की श्रीनगर की सीट बीजेपी क्यों नहीं जीतती है, बीजेपी सिर्फ जम्मू की पार्टी बनकर क्यों रह गयी है?

उत्तर: ज़रूर समय आएगा जब हम श्रीनगर की भी सीट जीतेंगे और श्रीनगर के सभी लोग अगर आतंकवाद से मुक्त हो जायेंगे, आतंकवाद के प्रभाव से मुक्त होंगे तो ज़रूर वह चाहेंगे कि भारतीय जनता पार्टी वहां जीते और मोदी जी के लोग कश्मीर में अच्छा सुशासन जो देश को मिल रहा है वह कश्मीर में भी मिल पाए।

एंकर: एक चीज़ और कश्मीर से जुडी हुई है, कांग्रेस के मैनिफेस्टो में है कि अफ्स्पा को रिव्यू करने की बात है आप लोग उसको बरकरार रखने के लिए हैं कश्मीर में साफ़ तौर पर आपने कांग्रेस के मैनिफेस्टो की आलोचना भी की है औपचारिक बीजेपी के मंच से। पर आज नॉर्थ ईस्ट में अफस्पा को हटाते जा रहे हैं डिस्ट्रिक्ट वाइज मेघालय में, मिजोरम में हमने देखा, अभी-अभी मिजोरम की खबर आई। तो आपका यह कांग्रेस का कहना है कि डबल स्टैंड है कश्मीर में लगाकर रखना चाहते हैं नॉर्थ ईस्ट में हटाते जा रहे हैं?

उत्तर: सुमित जी, मैं समझता हूँ देश की जनता तो ज़्यादा समझदार है आप उनसे भी ज़्यादा समझदार हो। अफस्पा कब लगता है जब तनाव होता है, हमने तो उपलब्धियों में यह गिना है कि भारतीय जनता पार्टी और हमारे मित्र पक्ष जहाँ-जहाँ सरकार में आए हमने उग्रवाद को ख़त्म किया है, हमने आतंकवाद को ख़त्म किया है। और जहाँ-जहाँ उग्रवाद ख़त्म होता है स्वाभाविक रूप से वहां अफस्पा की ज़रूरत नहीं पड़ती है। तो अगर मिजोरम में जैसे हमारी सरकार ने शांति, अमन बनाने में सफलता पाई तो स्वाभाविक रूप से उसकी अब ज़रूरत नहीं है। लेकिन यह एक सभी जगह से हटा दिया जाये बिना वहां के मौके की पूरी तरीके से स्टडी करके, बिना राज्य सरकार की सहमति के यह तो एक प्रकार से आतंकवाद और उग्रवाद को और बल देने वाला काम होगा। तो मुझे लगता है भारतीय जनता पार्टी अमन शांति बनाकर और उग्रवाद को ख़त्म करके जो यह हटा रही है एएफएसपीए यही सही मायने में रास्ता है। यह कोई मैनिफेस्टो का विषय नहीं हो सकता कि हम सब जगह से हटा देंगे। और आज के दिन जो आर्म्ड फोर्सेज टेररिज्म के सामने लड़ रही है क्या आप उनको कमज़ोर करना चाहते हैं? कल को लाकर अगर 15-20,000 केसेस फ़र्ज़ी केसेस फाइल हो जाएं हमारे आर्मी और पर्सनेल के ऊपर जो वहां सेवा कर रहे हैं, जो पैरामिलिटरी फोर्सेज सेवा कर रही है उसके ऊपर फ़र्ज़ी केसेस आ जाए और उनको यह प्रोटेक्शन भी नहीं होगा तो किस प्रकार से उस इलाके को शांत रखेंगे किस प्रकार से आतंकवाद का मुकाबला करेंगे, ज़रा कांग्रेस वाले इसका जवाब दें आप लोग सोचिये, पत्रकार बंधु सोचिये कितना घातक है उनका यह इस प्रकार की सोच।

एंकर: प्रधानमंत्री के साथ जो इंटरव्यू था जिसका आपने रिफरेन्स किया जो एबीपी न्यूज़ को उन्होंने लास्ट वीक दिया उसमें उन्होंने माना कि मिलावट था, हमारा जो गठबंधन था पीडीपी के साथ वह मिलावट थी, हमने कोशिश की हम साथ-साथ चलें लेकिन हम नहीं चल पाए। क्या आज भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के नाते आप देश को यह भरोसा दे सकते हैं आने वाले वक्त में जम्मू कश्मीर में जब भी विधान सभा चुनाव हुए तो आप एनसी और पीडीपी के साथ समझौता नहीं करेंगे, ऐसे एक्सपेरिमेंट अब नहीं होंगे?

उत्तर: आपने यह सवाल जब प्रधानमंत्री से ही पूछ लिया उसके बाद मैं कहाँ से इसके ऊपर और कुछ जवाब दूंगा।

एंकर: क्योंकि वह गलती थी बीजेपी ने माना, मिलावट थी?

उत्तर: देखिए यही बड़प्पन होता है। आखिर आप सब बताएं जो यहाँ युवा युवती हैं बताएं मुझे गलती किसी से भी हो सकती है, आपसे भी हुई होगी कभी न कभी। जो बुज़ुर्ग यहाँ बैठे हैं बताएं आपके बच्चों ने कभी गलती की हो तो आपने क्या किया उनको समझाया, उनको सही रास्ता बताया? तो भारतीय जनता पार्टी अगर कोई गलत, कुछ गलती हो जाती है तो देखिए कितना बड़प्पन है हमारे प्रधानमंत्री का, वैसे मुझे exact शब्द नहीं मालूम क्या बोला आपसे। तो मैं, I am going by what you are saying. तो देखिए कितना बड़प्पन है भारत के प्रधानमंत्री का कि उन्होंने कोई इसको स्कर्ट नहीं किया विषय को और इसलिए हमने प्रधानमंत्री जी से आग्रह करके एग्जाम वारियर्स किताब लिखवाई थी। और मुझे उम्मीद है हमारे जो युवा-युवती यहाँ बैठे हैं और अगर आपमें से कोई स्टूडेंट्स हैं तो ज़रूर वह एग्जाम वारियर्स पढ़िए, क्योंकि उसमें प्रधानमंत्री जी की सोच दिखती है और आपको बहुत प्रोत्साहित करेगी उनकी सोच, बताएगी कैसे एग्जाम के पहले तैयारी करनी पड़ती है। और अब हम तैयारी कर रहे हैं हमारे एग्जाम के लिए, 11 तारीख से हमारे फाइनल पेपर शुरू होने वाले हैं।

एंकर: पीयूष भाई कुछ मिनट बचें हैं, अपने कन्वर्सेशन में एक इम्पोर्टेन्ट टॉपिक को ज़रूर छूना चाहूंगा। नमो टीवी की क्या ज़रूरत पड़ी, प्रधानमंत्री का तो प्रचार प्रसार चल ही रहा है, यह नमो टीवी को चुपचाप लॉन्च करके डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यह क्या साबित करने की कोशिश है?

उत्तर: देखो नरेंद्र मोदी की पॉपुलैरिटी से आज एबीपी भी डर रहा है।

एंकर: यह मैं उल्टा भी बोल सकता हूँ।

उत्तर: हाँ, एबीपी कई बार एकदम गलत प्रचार करता है, एजेंडा के हिसाब से काम करता है उसके लिए कभी हमको हमारा पक्ष रखने के लिए भी जगह चाहिए।

एंकर: हमारा काम है सवाल पूछना, हमारे सवाल ज़ाहिर तौर पर जब चुभते होंगे तो आप हमको पेंट कर देंगे, लेकिन मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया आपने?

उत्तर: चुभता तो कोई नहीं है मैं तो हर सवाल का जवाब दे रहा हूँ।

एंकर: नमो टीवी का नहीं दिया?

उत्तर: नहीं नमो टीवी का बता रहा हूँ ना, क्या इस देश में कोई सेंसरशिप है क्या, क्या हम अपनी बात नहीं रख सकते? आखिर एबीपी या आपका जो कोलकाता में वह निकलता है टेलीग्राफ अगर वह एकदम एजेंडा के हिसाब से एक तरफ़ा न्यूज़ छापता है तो मैं आपको यह बह सवाल पूछ सकता हूँ कि क्या ममता जी इतनी डर गयी है कि अभी से टेलीग्राफ को डरा धमका के सब न्यूज़ पर वहां सेंसरशिप लग गयी है?

एंकर: नमो टीवी क्यों आया? नमो टीवी क्यों लिया गया, किसने लाइसेंस दिया, कौन ओन करता है? इसपर क्यों क्लैरिटी नहीं है?

उत्तर: मेरे ख्याल से यह तो कोई it’s a website जो इंटरनेट के ऊपर है और हमारे पास पूरी स्वाधीनता है हम क्या निकाल नहीं सकते क्या? किसी ने रोक लगा रखी है? सुमित जी आप चाहो तो सूहा, स्वाहा, सुमित अवस्थी भी खोल सकते हो डिजिटल वेबसाइट, कोई दिक्कत नहीं है हम उसका भी स्वागत करेंगे।

एंकर: एक आखिरी सवाल पीयूष भाई क्योंकि वक्त की कमी है कितने का फिगर देकर जाएंगे जाते-जाते इस चुनाव में पहले चरण का मतदान तीन दिन के बाद है, नंबर दीजियेगा।

उत्तर: भारत की जनता ने तय कर लिया है भारत की जनता का विश्वास आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है। भारत की जनता पूर्ण बहुमत की पिछले बार से अधिक सीटें देकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने जा रही है और हमारी मित्र पक्ष दलों के साथ। और आप जानते हैं भली भांति हमारा अब एनडीए अलायन्स और बड़ा हो गया है, तमिलनाडु में भी एक सबसे बड़ा अलायन्स उभरकर आया है, बिहार में नितीश कुमार जी के साथ हमारा अलायन्स है, नार्थ ईस्ट के अन्य-अन्य राज्यों में हमारे अलायन्स मज़बूत हुए हैं। तो दो-तिहाई बहुमत लेकर एक स्पष्ट नंबर दे रहा हूँ, दो-तिहाई से अधिक बहुमत एनडीए का आने जा रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार 23 तारीख को विजयी होकर इस देश की सेवा पुनः एक बार फिर एक बार पांच साल मोदी सरकार आपकी सेवा करेगी।

एंकर: बहुत-बहुत शुक्रिया

देश के करोड़ों लोगों से इनपुट लेकर हमने अपना #BJPSankalpPatra2019 निकाला, और भविष्य के भारत के प्रति अपने संकल्प और विजन को बताया है, इसी विषय पर ABP न्यूज़ हिंदी पर आयोजित कार्यक्रम ‘शिखर सम्मेलन’ में भाग लिया

Making safety its foremost priority, Indian Railways has registered the safest year ever with number of fatalities reducing by more than 75% in 2018-19, as compared to 2013-14

railways
The financial year 2018-19 has been declared as the safest year for Indian Railways.

Indian Railways sets new record in FY 2018-19 for being the safest year in the history of the national transporter! With significant reduction in the number of consequential accidents, in number of fatalities and injury figures, Piyush Goyal-led Indian Railways has made big achievement on the safety front. In the past five years, several measures were implemented to improve safety in train operations, says Indian Railways. The financial year 2018-19 has been declared as the safest year for Indian Railways. As per the data provided by the national transporter, the number of consequential accidents, including collisions, level crossing accidents, fire in trains, derailment and miscellaneous, have reduced from 1130 in 1980-81 to 59 in 2018-19, resulting in 94.8% reduction. The number is the lowest ever figure in the history of the national transporter, making 2018-19 the safest year.

According to Indian Railways, during the same period, the number of fatalities has reduced to 37 in 2018-19 from 658 in 1981-82, with a total of 94.4% reduction. Also, the injury figures decreased to 108 in 2018-19 from 1144 from 1981-82, with recording 90.6% reduction. During the same period, the globally recognized safety measure namely Accidents Per Million Train Kilometres has also displayed significant improvement. The total number of Accidents Per Million Train Kilometres reduced to an all time low figure of 0.06 in 2018-19 from a high figure of 2.20 in 1981-82.

According to Indian Railways’ data, as compared to 2013-14, the number of accidents has been reduced from 118 to 59 in 2018-19, number of fatalities reduced from 152 to 37, number of injuries reduced from 234 to 108 and number of Accidents Per Million Train Kilometres reduced from 0.10 to 0.06.

Interestingly, last financial year, i.e 2017-18 was also recorded to be the safest year for Indian Railways, but this year with continued safety measures, it has been bettered further. As compared to 2017-18, the number of accidents has been reduced from 73 to 59 in 2018-19, number of fatalities reduced from 57 to 37, number of injuries reduced from 197 to 108 and number of Accidents Per Million Train Kilometres reduced from 0.09 to 0.06.

Source: https://www.financialexpress.com/infrastructure/railways/safest-year-this-new-record-by-indian-railways-in-fy19-will-cheer-every-passenger/1538744/

Spoke on the contribution of Rail Vikas Nigam Limited to Indian Railways on its Annual Day Programme, in New Delhi

Addressing a press conference at BJP HQ, in New Delhi

कुछ समय तक फाइनेंस भी देखा। तो अलग-अलग विभागों में हम देखते रहते थे कि हमारे मैनिफेस्टो में हमने जो लिखा उसके हिसाब से हम काम करें। तो उसी समय, हमारे लिए तो मैनिफेस्टो एक बहुत इम्पोर्टेन्ट डॉक्यूमेंट है। कांग्रेस किस प्रकार से मैनिफेस्टो को लेती है और कैसे झूठे वादे कर करके देश को गुमराह करती है इसके बारे में भी कुछ परिचय मुझे लगा आप सबको दिया जाये और आपके माध्यम से देश को दिया जाये। कैसे कांग्रेस ने अपने अन्य-अन्य मैनिफेस्टोस में बड़े-बड़े वादे किये। 2004, 2009, दोनों में, दोनों मैनिफेस्टोस में वादा किया कि हम सीधा किसानों को डायरेक्ट बेनिफिट से कुछ फायदा पहुंचाएंगे, डायरेक्ट इनकम देंगे। प्रत्यक्ष आय सहायता की एक कमिटमेंट की देशवासियों को, किसानों को 2004 में भी है, 2009 में भी है, और दस वर्ष सरकार चलाने के बाद, उसके बारे में कुछ नहीं किया।

प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार आई और यह तो लगभग हमने देखा कि बहुत सारी चीज़ें वह छोड़कर गए है हमारे लिए करने के लिए। हमने 6000 रुपये छोटे और सीमान्त किसानों को, 12 करोड़ से अधिक किसानों को देने का निर्णय लिया। उसको कार्यान्वित किया, मात्र 24 दिनों के अंदर शुरुवात कर दी।और आज देश में किसानों को हर वर्ष 6000 रुपये के हिसाब से आर्थिक सहायता मिलनी शुरू हो गई है। कांग्रेस ने बार-बार कहा कि हर घर बिजली पहुंचाएंगे। 2004 के मैनिफेस्टो में कहा, 2009 के मैनिफेस्टो में कहा कि हर घर तक बिजली पहुंचाएंगे। उलटा  उस समय के कांग्रेस अध्यक्षा का तो बयान था कि 3 वर्ष के अंदर, और ज़्यादा से ज़्यादा 5 वर्ष के अंदर, 2004 में कहा था, हम हर घर तक बिजली पहुंचाएंगे। जब हमारी सरकार आई तो 18452 गाँव तक बिजली नहीं गई थी। लाखों मजला ढाणी टोला तक बिजली नहीं गई थी। और करोड़ो घर तक बिजली नहीं पहुंची थी। हमने मात्र 5 वर्षों में उसको भी पूरा किया, हर गाँव तक, हर मजला ढाणी टोला तक, हर घर तक बिजली पहुंचाने का काम भारतीय जनता पार्टी ने किया।

इसी प्रकार से आर्थिक रूप से जो कमज़ोर वर्ग है, एकनॉमिकाली वीकर सेक्शन, उसको आरक्षण देने का वादा कांग्रेस की सरकार ने, कांग्रेस के मैनिफेस्टो में, कांग्रेस की पार्टी ने, 2004 में भी किया था, 2009 में भी किया था। लेकिन ना तो उन्होंने उसको लागू किया, ना उन्होंने कभी इसके बारे में कोई चिंता की और एक ही वादा बार-बार रटते रह गए। भारतीय जनता पार्टी एन.डी.ए. की सरकार ने 10 प्रतिशत आरक्षण, जो आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग है उनको देने का भी काम पूरा किया।

इसी प्रकार से एक और वादा जो वन-रैंक वन-पेंशन का कांग्रेस हर मैनिफेस्टो में लिखती थी। 2004 में भी लिखा कि हम सब को वन-रैंक वन-पेंशन देंगे। 2009 में वादा किया। लेकिन आखिरी इंटरिम बजट में कहा कि हम उस वादे को पूरा करेंगे, जब सरकार जाने का समय आ गया था 10 साल बाद। 10 साल तक कुछ नहीं किया। और मात्र 500 करोड़ रुपये उसके लिए आवंटन किये ओ.आर.ओ.पी. के लिए। प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार ने इसपर ज़िम्मेदारी के साथ और सम्मान के साथ हमारे सेनाबलों का इज़्ज़त करते हुए वन-रैंक वन-पेंशन को लागू किया और शायद 38000 से अधिक रुपये अभी तक हमारे रिटायर्ड पेंशनर्स आर्म्ड फोर्सेस के उनको दे चुके है ओ.आर.ओ.पी. के तहत।

कांग्रेस हर मैनिफेस्टो में लिखती है कि हम काले धन पर प्रहार करेंगे और उसके जड़ तक जाके प्रहार करेंगे। 2004 में लिखा था कि, “We will root out corruption and generation of black money”. Of course, बड़ी हंसी की बात थी जिस प्रकार से धनाधन उसके बाद उन्होंने टूजी स्कैम, कोलगेट स्कैम, ऑगस्टा वेस्टलैंड स्कैम, कॉमनवेल्थ स्कैम, इतने सारे एंट्रिक्स दिवास स्कैम, एयरसेल मैक्सिस स्कैम, वह तो स्कैम सरकार ही चलाई। लेकिन वादा ज़रूर करते रहे कि हम पूरी तरीके से भ्रष्टाचार मिटायेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी जी की, एन.डी.ए. की बेदाग़ सरकार 5 वर्ष तक जनता की सेवा की और जड़ से हमने भ्रष्टाचार को और काले धन को उखाड़ा। हमने उसके ऊपर प्रहार किया। अलग-अलग प्रकार से क़ानून लाये। कानून के माध्यम से बड़े-बड़े लोगों को लोन वापस देने के लिए मजबूर किया और काले धन रखने वाले या काले धन पर व्यापार करने वालों को आज पूरी तरीके से समझ है कि मोदी जी की सरकार इसपर ज़रा भी कभी कोई बर्दाश्त नहीं करेगी।

इसी प्रकार से कांग्रेस की सरकार ने 2009 में कहा था कि हम पूरी अर्थव्यवस्था को सुधारेंगे, कहा था कि हम 1 अप्रैल 2010 से जी.एस.टी. को लागू कर देंगे। लेकिन ना तो अर्थव्यवस्था सुधारी, विकास का दर गिरता रहा, महंगाई बढ़ती रही, ब्याज के दर बढ़ते रहे, आर्थिक घाटे में बड़ी समस्या रही। फिस्कल डेफिसिट एक ज़माने में तो साढ़े छह प्रतिशत तक पहुंच गया था कांग्रेस की सरकार में। भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली एन.डी.ए. सरकार ने पूरी अर्थव्यवस्था को संभाला। फ्रैजाईल फाइव से, देश की छटी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाई। ब्याज के दर कम है। महंगाई पिछले 40-50 वर्षों में सबसे कम महंगाई अगर किसी 5 वर्ष में रही है तो यह 2014 से 2019 के बीच मात्र चार-साढ़े चार प्रतिशत के करीब औसतन, आज के दिन में तो ढ़ाई परसेंट महंगाई है। जब हम आये थे विरासत में, तब डबल डिजिट इन्फ्लेशन थी। और 2009 से 2014 जब उन्होंने कहा था कि अर्थव्यवस्था मज़बूत करेंगे, तब तो 10 परसेंट एवरेज महंगाई रही। जी.एस.टी. का वादा पूरा नहीं कर पाये। भारतीय जनता पार्टी एन.डी.ए. सरकार ने सभी संघीय ढाँचे के मान रखते हुए, सभी राज्य सरकारों को साथ जोड़ते हुए, 1 जुलाई 2017 से जी.एस.टी. का भी वादा पूरा किया।

ब्रॉडबैंड सर्विसेस के लिए 2009 में कहा था कि 3 साल में हम सभी गांव को ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ देंगे। लेकिन 2014 तक 5 वर्षों में मात्र 59 गांव तक पंचायत तक ही वह ब्रॉडबैंड लेकर जा पाए। एन.डी.ए. सरकार उसको बढ़ाकर 1,20,000 से अधिक गांव तक हमने ब्रॉडबैंड सर्विसेस को पहुंचाया। और आज के दिन ऐसे ग्राम पंचायत लगभग 1,20,000 है जहां पर ब्रॉडबैंड सर्विस पहुंच चुका है।

कांग्रेस ने यह भी वादा किया था कि हम जीरो टॉलरेंस रखेंगे आतंकवाद के ऊपर। आज पूरे देश ने देखा कैसे आतंकवाद के साथ खड़ा है कांग्रेस का हाथ। और आतंकवादियों को जब कड़े रूप से हम प्रहार करते हैं, तो कैसे कांग्रेस के मित्र, कांग्रेस के अध्यक्ष, कांग्रेस के बड़े-बड़े कद्दावर नेता सवाल उठाते हैं और एक प्रकार से आतंकवादियों को बल देते हैं और हमारे जो देश आतंकवाद को पनाह देते है उनके टीवी में इनके बयान दिखाए जाते हैं भारत और भारत की सेना को कमजोर करने के लिए।

साथ ही साथ उन्होंने किस प्रकार से आतंकवाद पर नरम रवैया रखा उसका एक उदाहरण तो पोटा का कानून जो उन्होंने वापस लिया वह भी हम सबके समक्ष है। 2014 तक के मेनिफेस्टो में उन्होंने लिखा था बेल की प्रोविजन और सेडिशन इन दोनों के बारे में और अब जो मैनिफेस्टो 2019 का है उसमें भी जिस प्रकार के उन्होंने शब्द इस्तेमाल किए हैं सेडिशन लॉ के बारे में मैं समझता हूँ, वह चाहते हैं कि आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई ना हो और उनको आसानी से बेल मिल जाए और उनको पसंद नहीं है कि कसब को हमने जेल में रखकर फांसी पर पहुंचाया।

वह शायद चाहते हैं ऐसे कसब जैसे आतंकवादियों को भी बेल मिल जाए और सॉफ्ट प्रोविशंस हो जाए सब आतंकवादियों के लिए। इस वर्ष का 2019 का मेनिफेस्टो दिखे तो जुडिशरी के ऊपर जिस प्रकार से प्रहार किया गया है मैं समझता हूँ देशवासी हैरान हो जाएंगे जिस प्रकार से जुडिशरी के ऊपर प्रहार किया है कांग्रेस ने। जिस प्रकार से मीडिया के ऊपर प्रहार किया है। और मीडिया के ऊपर अंकुश लाने की बात की है। मैं समझता हूँ कि यह जो इनटोलरेंट एटीट्यूड कांग्रेस का आज पूरी तरीके से स्पष्ट हो चुका है, झूठे वादे और झूठी बातें करके यह देश की जनता को अब गुमराह नहीं किया जा सकता है। देश की जनता समझदार है और देश की जनता पूरी तरीके से कांग्रेस के झूठे वादों को नकारती है। बहुत-बहुत धन्यवाद।

बहुत स्पष्ट है कि कांग्रेस जो कहती है वह करती नहीं है। झूठे वादे और झूठे आश्वासन के ऊपर उन्होंने कई दशकों तक देश की जनता को गुमराह किया। और यह जो पूरा मेनिफेस्टो है उसमें एक पैराग्राफ की नहीं पूरे मेनिफेस्टो को नकारता हूँ और पूरे मेनिफेस्टो को इस देश की जनता विश्वास नहीं करती है।

बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि एक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अपने आप को पोज़िशन करने की कोशिश करते हैं कि शायद कभी मौका लग जाए तो मैं प्रधानमंत्री भी बन जाऊं, इस प्रकार के शब्द इस्तेमाल करते हैं, ऐसी अश्लील भाषा इस्तेमाल करते हैं, पर मैं समझता हूँ यह कांग्रेस के सभी नेता आजकल बौखलाए हुए हैं और इसलिए उनके ध्यान में नहीं आता है कि इस प्रकार के अपशब्द वह इस्तेमाल करते हैं। जैसे आपने  सही कहा कि आप नहीं इस्तेमाल कर सकते है, मैं भी नहीं कर सकता हूँ।

हमारे देश की एक सभ्यता है हमारे देश के हर नौजवान को बचपन से सिखाया जाता है कि कैसे व्यवहार करना चाहिए, कैसे बोलचाल, बातचीत करनी चाहिए। दुर्भाग्य है कि उनकी वाणी कांग्रेस के नेताओं की वाणी में इस प्रकार का कोई सभ्यता नहीं है। और यह, यह भी दर्शाता है कि जो नाटक कभी कबार पार्लमेंट में किया जाता है गले लगाने का, और फिर कुर्सी पर बैठकर आंख मारी जाती है अपने कॉलीग्स को यह दर्शाता है कि यही उनका सही चेहरा, कांग्रेस का वही है। उनके दोगले चेहरे को यह देश पूरी तरीके से समझ चुका है और वह नकाब हो चुके हैं।

और रही बात शत्रुघन सिन्हा जी की, उन्होंने पार्टी में अपने स्थान ग्रहण करने के लिए जिस प्रकार के एक परिवार की चापलूसी करने की कोशिश की है वह, he is welcome to whatever he may want to say. पर हमारे सिद्धांतों के बल पर चलने वाली पार्टी है और अगर किसी व्यक्ति को कोई पद ना मिलने के कारण नाराजगी और उसके कारण इस प्रकार के बयान करे तो मैं समझता हूँ दुर्भाग्य की बात है। और वैसे तो मैं हैरानी देख रहा था कि अभी तक तो रिसेंटली जितनी पार्लियामेंट में डिबेट हुए जितनी बार विप इशू हुआ, जितनी बार वोटिंग हुई उसमें तो उन्होंने कभी ऐसा कुछ पार्टी के खिलाफ वोट डाला नहीं।  तो क्या ऐसे यह सिद्धांत है कि दिल में कुछ और और जबान पर कुछ और । और यह डर के मारे कि उनकी सीट ना चली जाए क्या वह विप का पालन कर रहे थे। तब उनके सिद्धांत कहां थे जब वह विप के हिसाब से, भारतीय जनता पार्टी का समर्थन और एन.डी.ए गवर्नमेंट का समर्थन कर रहे थे। तो उनकी वाणी और उनकी बातचीत के बारे में तो अब जनता सवाल पूछेगी कि  अगर यह दिल में था तो आप क्यों पार्टी के साथ खड़े दिखे थे पार्लमेंट  में।

Well, it’s extremely sad that a person who hopes someday to become Prime Minister of this country and lead a hotch-potch मिलावटी or coalition of the corrupt, makes such unfortunate statements against senior leaders. I think the whole Congress party and their leadership, bereft of ideas, and completely lost in wilderness after they can see that the people of India are rejecting them, has gone down to extremely low level of discourse, political discourse in the country.

The words that Mr. Rahul Gandhi, other senior leaders of the Congress, other alliance partners like what Mr. Omar Abdullah and Mr. Farooq Abdullah say, all of these are reflective of a very-very poor culture. We all know how Rahul Gandhi had insulted his own Prime Minister in office, Dr. Manmohan Singh, in a press conference in front of the whole world by tearing up an ordinance passed by the entire congress and UPA cabinet. I think that is the kind of deplorable behavior that this nation cannot tolerate.

We, in fact, fully endorse and appreciate that our leaders have taught us good value systems, good culture, good heritage. And we are extremely grateful for the guidance and the blessings that senior leaders like Shri Lal Krishna Advani, Dr. Murli Manohar Joshi, all our senior leaders have been giving us literally from childhood. And I know that we have had very senior leaders like Nanaji Deshmukh who retired at an age and decided to go into public service. We have very senior leaders who have given us guidance and direction and Advani ji will always continue to be a tall leader of the party and Dr. Joshi and Advani ji will continue to guide and help us in taking the party to the next level for years and years to come and we all wish them good health and good service of the country for years and years to come.

As regards to the comments of Mr. Shatrugan Sinha, I think he is just trying to curry favor with the first family by his comments. But somebody, and the nation, will certainly ask him what was in his mind when he would vote along with the BJP and NDA, every time there was a vote in parliament. Did he have something else in his mind and something else in his heart? I think if we had a complaint if he was unhappy, he should have taken a call many years ago. But just for full five years, he continues in the parliament to support the government. Every occasion there was a voting, and then now decides that he doesnt want to continue with the BJP and raises questions about its leadership, it shows a complete bankruptcy of ideas.

हमने अपने मेनिफेस्टो के एक-एक अंश के ऊपर एक-एक मंत्री ने 5 वर्ष तक लगातार काम किया है। और हमारी पहली सरकार रही है जिसने हर वर्ष 26 मई को चारों वर्ष – 2015, 2016, 2017, 2018 अपना रिपोर्ट कार्ड रखा देश के समक्ष। जो-जो हमारे मेनिफेस्टो में लिखा है और कुछ मात्रा में मैं भी डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी जी की सहायता कर रहा था मेनिफेस्टो लिखने में। हमने उसको भली-भांति अच्छी तरीके से निभाया है। अधिकांश जो बड़े विषय थे उन सबपर कड़ी कार्रवाई और काम हुआ है ठोस परिणाम निकले हैं, जिसका हम समय-समय पर आपके समक्ष रखते हैं। और मैंने अपने उदाहरण के लिए पावर, रेलवे, कॉल इन सबके अंश बाय अंश क्या-क्या लिखा है, उसको रिव्यू करके एक-एक विषय पर ऐतिहासिक काम किया मैं यह दावे के साथ कह सकता हूँ जो पहले कभी नहीं हुआ इतने वर्षों में।

साथ ही साथ भ्रष्टाचार पर जो काम इस सरकार ने किया है, उसपर जो वार किया है, जिस प्रकार से काले धन पर वार किया है, आज पूरे देश का माइंडसेट पूरे देश की सोच बदली है। पूरे देश में आज ईमानदार का सम्मान है, ईमानदार व्यापार की तरफ पूरा देश जा रहा है। जो लोग गलत काम करते थे उनको उनकी संपत्ति जब्द की जा रही है, उनको बैंक को लोन वापस देना पड़ रहा है। कई लोग भागकर गए उनको वापस लाया जा रहा है और कड़ी कार्रवाई हो रही है। तो मैं समझता हूँ मेनिफेस्टो पर जितना काम हमारी सरकार ने किया है, शायद ही किसी सरकार ने 5 वर्षों के भीतर किया हो।

कभी भी लाइफ में पूरा काम नहीं होता है। अगर उस प्रकार से देखें तो शायद आप की भी काम की सीमा खत्म हो जाएगी मीडिया अगर हमने भी सब काम कर लिया और आपका भी सब काम पूरा हो गया तो कल से आपका चैनल वाइंड अप हो जाएगा दोस्त। तो मेरे ख्याल से एक एस्पिरेशनल देश है। देश में हमें लम्बी छलांग मारनी है, विश्व शक्ति बननी है, आर्थिक सुधार और करने है, गांव गरीब किसान तक हमने कई सारी योजनाएं, कई सारे विकास के काम पहुंचाए हैं। लेकिन कभी भी  काम से संतुष्टि ऐसी नहीं होनी चाहिए कि आदमी कमज़ोर बैठ जाए। यह काम के बलबूते पर हमें और उत्साह है कि हम और ज़्यादा काम करें और ज़्यादा सेवा करें जनता की। और उसी के लिए हम जनता के बीच अपने काम के बारे में, अपने विकास के काम के बारे में, भ्रष्टाचार पर वार के बारे में हमारी एक जो डिसाइसिव निर्णायक नेतृत्व है जिसने इस देश की सीमाओं को सुरक्षित रखा उनके हाथ मजबूत करने के लिए, उनको समर्थन और आशीर्वाद  देने के लिए फिर एक बार जनता के बीच गए हैं।

I would not like to comment, it could even be a mistake, I don’t know. But I do believe that its time that we some more serious politicians in public life rather than occasional persons looking at politics as an off and on venture. We need some real serious persons willing to serve the people of India consistently.

मुझे लगता नहीं है समय-समय पर हम अपने जो-जो विषय हमने मेनिफेस्टो में लिखे हैं, उसका पूरा रिव्यू भी करते हैं।  उसके ऊपर क्या-क्या काम हुआ है उसको देखते हैं।  मैं समझता हूँ कि जैसा मैंने पहले कहा 5 साल में जितना काम इस सरकार ने किया है, वह ऐतिहासिक है और मैं किसी को भी चैलेंज करता हूँ कोई भी फोरम पर डिबेट के लिए कि जितना काम इस सरकार ने 5 साल में किया है, कोई दिखा दे कोई और 5 साल का समय कि इतना काम विकास का हुआ हो इतना काम, देशव्यापी काम गांव गरीब किसान तक वंचित शोषित परिवारों तक पहुंचा हो ऐसा 5 साल पहले कभी नहीं गया। पर आगे बहुत काम करने बाकी है और उसके लिए हम जनता का आशीर्वाद लेने निकले हैं।

We will welcome that because that will once and for all sort out that Bharatiya Janata party is the main pole around which Indian politics revolves. All other parties have given up their case. They have surrendered to the Bharatiya Janata party and I am sure the people of India will give us a 51% vote to ensure the defeat of such coalitions of the corrupt and opportunistic coalitions, bereft of any ideology, bereft of any common programme. Parties which until yesterday were cursing each other, parties which until yesterday were attacking each other and the best part is parties which come together and then still continue to attack each other like we see in Karnataka, like we seen in many parts of the country, like we saw in Wayanad when the prince landed up there and the comments that were made against him by a party which is otherwise on stage with him everywhere.

And then his own comments that he will not speak against them. So what is the electoral contest that he is fighting? Is it only minority appeasement, is it the fear that Smriti Irani ji is going to defeat him in Amethi that has taken him to a seat which was otherwise being fought by a potential ally of the Congres? We are completely lost and confused, as I believe many of you may be. And as I am certain the people of India are. Whether there is a coalition or not, whether there is an ideology or not, whether there is a programme or not, whether they will do anything for the country or they will only be focussed on once again running a government with compulsions of coalition politics, which Manmohan Singh ji ran for 10 years. The most corrupt government headed by the Congress that we have seen and the nation has ever seen.

स्मृति ईरानी जी के डर से वह भागे हैं उत्तर प्रदेश से। मुझे लगता है अब तो उत्तर प्रदेश में शायद एक भी सीट ना जीते ऐसी स्थिति कांग्रेस की आ गई है। और इससे जो हमारा संकल्प है, पहले तो हमने 74 सीटों का संकल्प लिया था अब थोड़ा-थोड़ा लालच आ रहा है की 80 के 80 सीटें ना जीत जाएँ उत्तर प्रदेश में.  और मैं यह कोई एरोगेंस से नहीं कह रहा हूँ, यह देश की समझदार जनता देख रही है किस प्रकार से और मैंने इसीलिए आपके समक्ष यह विषय रखे कैसे देश की जनता को इन्होंने गुमराह किया। कैसे झूठे वादे देते रहे और कैसे गरीब के लिए कांग्रेस ने कभी कुछ किया नहीं। सिर्फ वादे और नारों के भरोसे कांग्रेस का और अल्पसंख्यकों का वोट बटोरते रहे। आज मैं समझता हूँ इस देश के हर गरीब इस देश के हर नागरिक को ध्यान में आया है कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार ने पूरे 130 करोड़ लोगों को न्याय दिया है। पूरे 130 करोड़ लोगों के जीवन में सुधार लाया है।

क्योंकि फारूक अब्दुल्लाह साहब की प्राइमरी लॉयल्टी पता नहीं भारत के अर्थ सेना बलों के साथ है, या जो आर्म फोर्सेज है उनके साथ है, या उनके लिए कुछ एक पत्रक में कोई आर्टिकल आया है, अंजान पत्रक अंजान आर्टिकल। और फॉरेन एक जर्नल के आर्टिकल के ऊपर हमारी खुद की सेना के ऊपर प्रश्न चिन्ह उठाना। मैं समझता हूँ शायद इसीलिए वह कानूनी फेरबदल करना चाह रहे हैं जो मेनिफेस्टो  में कांग्रेस ने लिखा है जिससे आगे के लिए भी रास्ता खुला रहे कांग्रेस और उनके सहयोगी दलों को कि वो किसी के ऊपर भी अनाप-शनाप आरोप लगा सके, बिना कोई सोचे बिना समझे, बिना उसके लंबे अरसे के प्रभाव को समझें। बहुत दुर्भाग्य की बात है फारुख साहब बहुत सीनियर लीडर है। हम सब उनकी आदर करते हैं लेकिन मुझे दुःख होता है कि इतने सीनियर लीडर्स एक राजनीतिक कमज़ोरी के कारण और राजनीति में अपने स्थान को कारपेट को स्लिप होते देखने के कारण इस हद तक पहुंच सकते हैं कि भारत की सेना के ऊपर प्रश्न उठाएं।

Well, he has made too many comments which are demeaning. First of all, I hope all of you are aware that your taxes are going to increase if anybody by mistake votes for the Congress, because Mr. Sam Pitroda has also said that the middle class should pay more taxes. Here Prime Minister Modi is trying to reduce taxes. And has continuosly in all 5 budgets, we have given some consession or the other. Every one of our 5 budgets. We have given concessions for the middle class, so that you tax liabilty falls. And Mr. Sam Pitroda and Rahul Gandhi, all are saying that they want to increase the taxes of the middle class. And I hope the middle class of India takes note of the lurking danger of increasing taxes on all the middle class and lower middle class people of this country.

Also Mr. Sam Pitroda has raised questions about the armed forces earlier, which were extremely objectionable and I think he owes an apology to this nation, to the people of India, to the armed forces for standing with terrorists and standing with the countries that support terrorism or protect terrorism, rather than standing up for the Indian armed forces. And in any case now, we have seen this comment where he has insulted Indians and called them monkeys, who don’t know how to use mobile phones.

By the way, Mr Rahul Gandhi spoke about gurus. गुरु की आदर करना, वह हम उनको अच्छा सिखा सकते है। जिस प्रकार से हम आदर करते हैं गुरुओं का आप किधर भी देख सकते हैं वैसे आपके ही टेलीविज़न कैमरास मैं क्लिपिंग्स होगी जब भी मैं लास्ट मिला हूँ लालकृष्ण आडवाणी जी को शायद हमारी नेशन एग्जीक्यूटिव में पांव छूकर मिला हूं। पार्लियामेंट में मैंने इंटरिम बजट पेश किया, उसके बाद आप देख सकते हैं जो भी गैलरी में थे मैंने मान्य दादा, हम उनको आदर से, सम्मान से और प्यार से दादा बोलते हैं। मैंने उनके वहां पर भी पांव छुए पार्लियामेंट में बजट के तुरंत बाद। तो मैं समझता हूँ कि कैसे गुरु का सम्मान करना वह हम सिखा सकते हैं। और राहुल गांधी जी के गुरु किस प्रकार के बयान देते हैं, तो स्वाभाविक है कि जब गुरु ऐसे बयान देगा तो शिष्य भी वैसे ही सीखेगा, बहुत-बहुत धन्यवाद।

हमने धारा 370 के ऊपर हमारी प्रतिबद्धता है, हमने इसके ऊपर पूरी तरीके से आज भी हम कायम है हमारी बात पर कि धारा 370 जो कांग्रेस की देन है, इस देश के लिए उससे नुकसान हुआ है देश का। एक प्रकार से पूरे कश्मीर की घाटी में जो आज समस्याएं खड़ी हुई है, उसका जड़ अगर कुछ है तो वह धारा 370 और कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति है। लेकिन इसके लिए हम यह भी समझते हैं कि आम सहमति बनाकर और एक कानूनी प्रक्रिया से इसके ऊपर आगे सब को साथ में जोड़कर और देश में आम सहमति बनाकर इसको आगे बढ़ाना पड़ेगा। पर हमारी प्रतिबद्धता उसके बारे में पूरी तरह से कायम है।

वैसे आप पहले ट्रिपल तलाक के लिए तो अनुमति करवा दो। कांग्रेस के मित्र पहले स्पष्ट करें कि हमारी मुस्लिम बहनों के लिए, मुस्लिम माताओं के लिए उनके दिल में कुछ संवेदना है कि नहीं? क्या उनकी तुष्टीकरण की राजनीति सिर्फ एक समुदाय के पुरुषों के लिए है? और वैसे तो मैं समझता हूँ जो पढ़े-लिखे पुरुष भी है वह भी कोई इस बात से सहमति नहीं देंगे खासतौर पर जब अधिकांश देश जो उस समुदाय के साथ जुड़े हैं। अधिकांश देशों तक में इसको निकाल दिया गया है। ट्रिपल तलाक अधिकांश देश में भी अलाउड नहीं है। मैं समझता हूँ बांग्लादेश में भी अलाउड नहीं, पाकिस्तान में भी शायद रोक है और भारत एक देश है जहां पर कांग्रेस पार्टी चाहती है कि मुस्लिम बहनों के साथ, माताओं के साथ यह दुर्व्यवहार हो।  घोर निंदा करती है भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस और कांग्रेस के नेतृत्व की।

Yeah, because when you have people like Mr. Sam Patroda and Farooq Abdullah and other congress leaders, distrusting your own governement and your own armed forces, obviously, you are going to strengthen the hands of the people in the parties and countries who are harbouring terrorism. Here, Prime Minister Modi sends the Air force to cross the line of control, get into Pakistan, attack terrorism at its roots at Balatkote. And on the other hand, the opposition is trying to stregthen the arguements of the neighbouring countries. It’s a shame and completely deplorable attitude of the opposition party.

मैं समझता हूँ जितना ज्यादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने बनारस का विकास का काम किया है, बनारस की जनता के साथ जुड़े हैं, उनका लगाव है, शायद ही आज तक अटल बिहारी वाजपेयी जी को छोड़ दे तो कोई और प्रधानमंत्री ने इतना अपने क्षेत्र में विकास का काम किया होगा। आप में से कुछ मित्र बनारस होकर भी आए होंगे। मैं समझता हूँ बनारस एक रोल मॉडल बना है कैसे विश्व के सबसे प्राचीन शहर का विकास इतने कम समय में तेजी से हो सकता है। विकास के कई सारे वहां पर पहलुओं में जमीन आसमान का फर्क आपको 5 साल में दिखेगा। और आगे आने वाले 5-10-25 साल में बनारस, वाराणसी एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का सुविधाओं के साथ युक्त पूरी तरीके से, मैं समझता हूँ रोल मॉडल फॉर द वर्ल्ड बनेगा।

आज भी अगर कोई आप में से जाए, बनारस के पुराने चित्र देखें और आज का वहां का मौहोल देखें तो ऐतिहासिक काम बनारस में हुआ है। और अब तो काशी मंदिर के प्रांगण का भी जो काम हो रहा है, मैं आप सबको इनवाइट करूंगा जाकर देखिए कैसे महादेव को हम सीधा गंगा के साथ जोड़ रहे हैं। बहुत-बहुत धन्यवाद, आप सबको गुडी-पाडवा की बहुत-बहुत शुभकामनाएं और भारतीय जनता पार्टी का भी आज स्थापना दिवस है। आप सब के माध्यम से मैं भारतीय जनता पार्टी के माननीय अध्यक्ष श्री अमित शाह जी के बिहाफ़ पर और माननीय प्रधानमंत्री जी के बिहाफ़ पर पूरे देश में सभी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को अपनी बधाई और शुभकामनाएं देना चाहता हूँ । और भारत की जनता को भी भारतीय जनता पार्टी का हर कार्यकर्ता, विकास और सुशासन के लिए समर्पित रहेगा यह अश्वस्त करना चाहता हूँ।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

आज तक कांग्रेस के मेनिफेस्टो में क्या क्या झूठे वादे किये गये, कैसे उनको बार बार दोहराया गया लेकिन कभी पूरा नही किया गया, इस विषय को जनता तक पहुंचाने के लिये आज भाजपा कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर पत्रकारों को संबोधित किया

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