Views

January 16, 2026

अपने भविष्य को आकार देता भारत, दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना

पीयूष गोयल। वर्ष 2026 भारत के वाणिज्य और उद्योग परिदृश्य में नया विश्वास और आशावाद लेकर आया है। 2025 में उठाए गए निर्णायक कदम व्यापार और निवेश को तेजी से आगे बढ़ाने, छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स के लिए वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ाने, रोजगार सृजन करने और प्रत्येक नागरिक के लिए ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देने के प्रधानमंत्री मोदी जी के मिशन को और मजबूत करने वाले रहे। मोदी सरकार की एक प्रमुख पहल स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना रही है। आज भारत में दो लाख से अधिक सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स हैं।

स्टार्टअप्स को समर्थन देने का उद्देश्य आर्थिक विकास को तेज करना, रोजगार के अवसर पैदा करना और प्रत्येक नागरिक, विशेष रूप से गरीबों के जीवन स्तर में सुधार करना है। आज भारत वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद और विश्वसनीय व्यापार साझेदार के रूप में पहचाना जा रहा है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल निर्यात छह प्रतिशत बढ़कर रिकार्ड 825.25 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। निर्यातकों को और समर्थन देने के लिए सरकार ने 25,060 करोड़ रुपये का निर्यात प्रोत्साहन मिशन घोषित किया है।

रिपीलिंग एंड एमेंडमेंट एक्ट, 2025 के तहत 71 पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया गया है, जिनमें से कुछ वर्ष 1886 के थे। जन विश्वास पहल के अंतर्गत मोदी सरकार ने छोटे उल्लंघनों से जुड़े कई आपराधिक प्रविधानों को हटाया है। ये सुधार शासन को बेहतर बनाते हैं, कारोबार में आसानी बढ़ाते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि भारत की कानूनी व्यवस्था आधुनिक अर्थव्यवस्था के अनुरूप हो।

पिछले वर्ष संसद के मानसून सत्र में शिपिंग और पोर्ट्स से जुड़े पांच ऐतिहासिक विधेयक पारित किए गए। इन कानूनों से दस्तावेजीकरण सरल हुआ है, विवाद निपटान आसान हुआ है और लाजिस्टिक्स लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। वाणिज्य के मोर्चे पर विदेश व्यापार महानिदेशालय ने पारदर्शी और सहायक नीतियों के जरिये निर्यातकों का सक्रिय रूप से समर्थन किया है। इन पहलों से व्यापारियों, स्टार्टअप्स और छोटे उद्यमियों की उद्यमशीलता को नई उड़ान मिली है।

भारत की व्यापार और निवेश रणनीति का मूल मंत्र स्थानीय उद्यमियों विशेषकर छोटे व्यवसायों, स्टार्टअप्स, किसानों और कारीगरों को सशक्त बनाकर उन्हें वैश्विक सफलता दिलाना है। इसी के अंतर्गत भारत ने पिछले वर्ष तीन मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए, जिनसे भारतीय उत्पादों को यूके, न्यूजीलैंड और ओमान जैसे विकसित बाजारों में ड्यूटी-फ्री पहुंच मिली। ये एफटीए भी सुधार प्रक्रिया का हिस्सा हैं। यूपीए सरकार के विपरीत मोदी सरकार ने विकसित देशों के साथ संतुलित और लाभकारी समझौतों को प्राथमिकता दी है।

इन एफटीए से रोजगार सृजन तेज होगा, निवेश बढ़ेगा और छोटे व्यवसायों, छात्रों, महिलाओं, किसानों और युवाओं के लिए परिवर्तनकारी अवसर खुलेंगे। मुक्त व्यापार समझौतों के अतिरिक्त स्विट्जरलैंड, नार्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन वाले यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (एफ्टा) के साथ 2024 में किया गया एफटीए भी अब लागू हो चुका है। सभी एफटीए में भारत के कृषि और डेरी क्षेत्रों को सुरक्षित रखा गया है। न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े वैश्विक डेरी निर्यातकों के साथ समझौतों में भी यह शामिल है।

इन समझौतों से भारतीय निर्यात को त्वरित या शीघ्र टैरिफ समाप्ति का लाभ मिलता है, जबकि भारत में बाजार खोलना संतुलित और चरणबद्ध रखा गया है। न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जो भारत द्वारा एफ्टा देशों के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौते में अपनाए गए नवोन्मेषी निवेश-संबद्ध प्रविधानों को प्रतिबिंबित करता है। यह निवेश कृषि, डेरी, एमएसएमई, शिक्षा, खेल और युवा विकास में सहायक होगा, जिससे समावेशी और व्यापक विकास सुनिश्चित होगा।

2024-25 तक के पिछले 11 वित्तीय वर्षों में भारत ने 748 अरब अमेरिकी डालर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित किया, जो उससे पहले के 11 वर्षों में आए 308 अरब अमेरिकी डालर से लगभग ढाई गुना है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मोदी सरकार को एक समय फ्रेजाइल फाइव कही जाने वाली अर्थव्यवस्था विरासत में मिली थी। भ्रष्टाचार-मुक्त शासन, साहसिक सुधारों और वित्तीय अनुशासन के जरिये उन्होंने भारत को व्यापार और निवेश के लिए पसंदीदा गंतव्य बनाया। भारत ने 2025 का समापन एक बड़ी उपलब्धि के साथ किया, जापान को पीछे छोड़ते हुए विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना और अब जर्मनी को पीछे छोड़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना।

श्रमिकों के लाभ बढ़ाने के लिए मोदी सरकार ने ऐतिहासिक श्रम सुधार किए हैं, जिनके तहत 29 खंडित कानूनों को चार आधुनिक श्रम संहिताओं में समाहित किया गया है। इनका उद्देश्य उचित वेतन, समय पर भुगतान, सामाजिक सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करना है, साथ ही महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी बढ़ाना है। जीएसटी सुधारों से हर भारतीय नागरिक को लाभ हुआ है, जिससे एक स्वच्छ दो-स्लैब संरचना बनी है। इससे घरों, एमएसएमई, किसानों और श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर बोझ कम होगा। 2025 एक सेतु-निर्माण का वर्ष रहा। आगे और भी उत्साहजनक कदम आने वाले हैं। नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा के नेतृत्व में एक पैनल व्यापक सुधारों का अध्ययन कर रहा है, जो प्रधानमंत्री की ‘रिफार्म एक्सप्रेस’ को और तेज करेगा।

भारत का लक्ष्य स्पष्ट है, प्रतिस्पर्धी व्यापार, नवोन्मेषी उद्योग और एक मजबूत, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के माध्यम से ‘विकसित भारत’ का निर्माण। भारत के निर्यातकों, निर्माताओं, किसानों और सेवा प्रदाताओं की सफलता ही राष्ट्र की सफलता है। भारत सिर्फ भविष्य की तैयारी नहीं कर रहा, वह उसे आकार दे रहा है। निर्णायक नेतृत्व, साहसिक सुधारों और स्पष्ट वैश्विक रणनीति के साथ भारत अपनी शर्तों पर एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विश्वसनीय राष्ट्र के रूप में दुनिया से जुड़ रहा है।

Delhi

Vanijya Bhawan, 16, Akbar Rd, New Delhi - 110001

Mumbai

Lok Kalyan Karyalay - 56, Balasinor Society, SV Road, Opp Fire Brigade, Kandivali West, Mumbai, Maharashtra, 400067