Speeches

June 27, 2017

Speaking at ‘ABP GST Summit’ in New Delhi

वास्तव में जीएसटी के ऊपर इतनी चर्चा हो चुकी है कि उसके technicalities के अंदर ना जाते हुए मैं कोशिश करूंगा कि उसके पीछे परिप्रेक्ष्य क्या है, भावना क्या है, उद्देश्य क्या है,  उस पर अपने आप को सीमित रखूं, 2002-03 में जब वाजपेयी जी की एनडीए-1 की सरकार थी, तब ये कल्पना सामने रखी गयी, उसके बाद सरकार बदल गयी 2007 में पुनः एक बार, 07 या 08 में बजट में इसका जिक्र हुआ, 2011 में proposed  कानून देश के समक्ष आया, उसपे विचार विमर्श चलता रहा, कई concern थे इंडस्ट्री के, कई concern थे स्टेट गवर्नमेंट्स के, उन सबको सम्मिलित करते करते आज 2017 में, पहली जुलाई 2017 को, मैं समझता हूं इतिहास,  भारत के आर्थिक जगत का इतिहास फिर एक बार लिखा जाने वाला है, जीएसटी के आगमन से, जीएसटी लागू होने से। बड़ा विशाल देश है, अलग अलग जगहों पे अलग अलग टैक्स लगते हैं, टैक्स रेट्स हैं, अलग अलग काम के पीछे एक ही व्यक्ति को, एक ही व्यापारी को, एक ही उद्योगपति को बहुत सारे taxes  का रिकार्ड रखना पड़ता है, taxes pay करने पड़ते हैं, अलग अलग व्यक्ति आ कर उसका assessment करते हैं, और इन सबको अगर देखें, और मैने स्वयं अपना जीवन एक छोटे उद्यमी के नाते स्माल स्केल इंडस्ट्री चालू कर के शुरु किया था।

मुझे अभी भी याद है कि एक्साइज के अलग रिकार्ड बनते थे, उन दिनों में सर्विस टैक्स नही था बाद में सर्विस टैक्स भी introduce हो गया, उन दिनों सेल्स टैक्स होता था जो बाद में जा के वैट बना वैल्यू एडेड टैक्स, लेकिन कभी भी वैल्यू ऐडेड टैक्स में एक पूर्ण रूप से पूरा इनपुट क्रेडिट कभी मिलता नही था, क्योंकि जो सेल्स टैक्स या वैट पे होता था उसका ही क्रेडिट मिलता था, MODVAT  मिलता था तो एक सीमित रूप में वैल्यू चैन को capture किया गया वैट के माध्यम से लेकिन पूर्णतः सभी taxes को सम्मिलित करने की ये कदम जो जीएसटी के माध्यम से की गयी है जिसमें सर्विस टैक्स, सेल टैक्स अथवा वैट, एक्साइज ड्यूटी, एंट्री टैक्स, मैं नवी मुंबई में भी फैक्टरी चलाता था वहां एंट्री टैक्स होता था या ऑक्ट्राय मुंबई में ऑक्ट्राय और कई शहरों मे ऑक्ट्राय लगता है, ऐसे मिला के करीब 11-12 अलग अलग, जो व्यापारी या उद्योगपतियों के सामने, या जो भी बिजनेस करता है उस सबके ऊपर cascading effect,  मल्टिफेरियस taxes का होता था कि अलग अलग स्टेप पर टैक्स लगता है लेकिन उसका पूरी तरह से compensation  नही होता है मैने एक्सपोर्ट भी काफी किया और एक्सपोर्ट में ये बहुत ही तकलीफ रहती थी, अब एक्सपोर्ट कर रहे हैं तो हो सकता है कि एक्साइज ड्यूटी तो रिफंड मिल जाये, वैट ना लगे, लेकिन जो हम ऑक्ट्राय pay करते थे या एंट्री टैक्स pay  करते थे उसका तो हमें कोई सेट ऑफ नही मिलता था कोई रिफंड नही मिलता था, अगर किसी कंसल्टेंट को engage किया, सर्विस टैक्स pay किया, कोई टैक्निकल एक्सपर्ट को engage  किया, उसका रिफंड नही मिलता था,  एक प्रकार से जो एक हरएक देश की कल्पना रहती है कि you should export goods and services, you should never export the local taxes, domestic taxes, ये एक तरीके से फेल हो रही थी भारत में जब उस test को चैक करते थे अपने इम्पोर्ट एंड एक्सपोर्ट को, साथ ही साथ डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरर को अलग अलग टैक्स लगते थे पर जब कोई व्यक्ति कोई विषय को कोई चीज को इम्पोर्ट करता था तो सीवीडी के माध्यम से वैट और एक्साइज जरूर एक प्रकार से इम्पोर्टेड गुड्स पर भी लग जाता था काउंटर विलिंग ड्यूटी के माध्यम से, लेकिन बाकि जो hidden taxes हम डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरर पे करते थे वो हमारे ऊपर बोझ रहता था इम्पोर्ट के ऊपर बोझ नही रहता था, इन सब anomalies को इन सब जो एक प्रकार से 70 वर्षों में जाने अन्जाने में जो चीजे भारत की अर्थवयवस्था में , भारत के उद्यमी को, भारत के उद्योग को , मेक इन इंडिया को, सर्व इन इंडिया को अफैक्ट करती थी, इन सबको address करने के लिये और सामान्य जनता के पास जो गुड्स या सर्विसेस जायें , जो सेवा होती है जनता की जो वस्तु खरीदते हैं, वो सही दाम पर जायें, उसमें मल्टिपल taxes का बोझ कन्ज्यूमर के ऊपर ना पड़े, कन्ज्यूमर को ध्यान में आये कि मैं जो वस्तु खरीद रहा हूं, या जो सर्विस सेवा ले रहा हूं उसका मूल दाम ये है, और केंद्र सरकार, राज्य सरकार, लोकल बॉडी, सभी के मिला कर सम्मिलित taxes, combined taxes का बर्डन मेरे ऊपर फलाना है, इस प्रकार से जीएसटी की कल्पना की गयी।

मुझे बडा आनंद है कि देश का हर हिस्सा, हर कोना, जम्मू कश्मीर में थोड़ा विलंब हो रहा है, और उसके अलावा पूरे देश में सर्वसम्मति से ये पारित किया गया, आज देश के हर राज्य सरकार ने, जम्मू काश्मीर भी जल्द आ जायेगी, सबने इसमे अपनी आहुति दी है इसको सफल बनाने में, अपना काम किया है, मैं कल ही अपने फाइनेंस सैक्रेटरी हंसमुख आडिया जी को बधाई दे रहा था कि जैसे जैसे मै जीएसटीएन नेटवर्क, जो आपने पूरा फ्रेमवर्क बनाया है इतना बढिया बनाया है कि मेरी भी कल्पना के बाहर है, तो तुरंत उनका जवाब आया कि नही साहब ये मेरा या हमारा कोई इसमे अकेले का कोई क्रेडिट नही है, इसका क्रेडिट जायेगा पिछली 11 साल 12 साल से जो लोग इसपर काम कर रहे हैं चाहे वो राजनीतिज्ञ हों, चाहे वो अधिकारी हों, चाहे इंडस्ट्री बॉडीज हों, चाहे उद्योग जगत के लोग हों,  या सर्विस सैक्टर के लोग हों, सबने मिल के जिस प्रकार से इसमे  अलग अलग पहलू पे विचार विमर्श किया, जिस प्रकार से इसको बनाने में सबका योगदान रहा this is the collective and collaborative and cooperative vision of the entire nation, that will come on into effect on 1st of July , its a true example of a democracy , which is a federal polity एक प्रकार से संघीय ढांचा जो भारत का है वो कैसे मिल जुल के जनता की सेवा करे , जनता के लाभदायक पॉलिसी बनाये नीतिया बनाये, उसका अगर कोई उदाहरण है तो ये जीएसटी है, मैं सभी राज्य सरकारों को और वास्तव में तो सभी राजनैतिक दलों को शायद राज्य सरकारों में कोई दल ना भी हो लेकिन लोकसभा या राज्य सभा या कोई लेजिस्लेचर में उनका कोई प्रतिनिधि हो तो भी सबका योगदान है क्योंकि सर्वसम्मति से ये देश में लागू होने जा रहा है तो एक प्रकार से जो पहली जुलाई 2017, चार दिन बाद होगा उसका इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टेड एकाउंटेंट, जिसका मैं भी मेंबर हूं as a chartered accountant , उन्होंने एक कार्यक्रम की कल्पना की है felicitation of all the chief minister of the state and hon’ble prime minister and all the people behind the making of GST the success of GST, मैं समझता हूं its a fitting tribute to the collective wisdom of the entire country which has made GST possible, जीएसटी नेट्वर्क बहुत अच्छे तरीके से तैयार किया गया है , कुछ गलतफहमियां, मिस इन्फॉर्मेशन अभी भी देश के समक्ष हैं जिसको मैं आपको बधाई दूंगा कि एबीपी ने एक प्रकार का सम्मेलन रख के , एक प्रकार से संगोष्ठि रख के मौका दिया जनता को अपने सवाल पूछ्ने का और समझने का कि वास्तव में जैसे बात की जाती है कि 37 रिटर्न्स हैं, ये एकदम कुछ बेवकूफ लोगों की मिसइनफॉर्मेशन , मिस इंटरप्रिटेशन है , और मैं बड़ी जिम्मेदारी से ये शब्द यूज कर रहा हूं कि शायद उन्होने कोशिश ही नही की है समझने की कि कितना अच्छा सिस्टम बनाया है ।

हम पहले भी व्यापार करते थे, बिजनेस करते थे, सेल्स रजिस्टर तो हम सबको बनाना पड़ता था, ऐसा कोई बिजनेस नही है जिसको अपना सेल्स रजिस्टर या सेल्स invoice एंटर कर के एक डेटा बनाना पड़े कि सेल्स मेरी क्या क्या हुई, ये तो हम सबको करना पड़ता है चाहे इन्डॉयरेक्ट टैक्स के लिये चाहे अपने इंकम टैक्स रिटर्न के लिये , वास्तव में पहले तो ऐसा था कि एक सेल्स रजिस्टर सेल्स टैक्स के लिये बनता था वैट के लिये, एक एक्साइज के लिये बनता था, अलग एंट्री टैक्स के लिये बनता था, इंकम टैक्स के लिये अलग फॉर्मेट में चीजे बनती थी, ये सब अब इतिहास हो जायेगा, हर व्यापारी को, हर उद्यमी को, हर उद्योगपति को सिर्फ एक, सेल्स रजिस्टर बनाना है उसके अलावा बाकि सब नैचुरली ऑटोमेटिकली कम्प्यूटर सिस्टम के द्वारा तैयार होगा तो इतनी सरलता से हम ये जीएसटी को लागू कर पायेंगे, और ये सो कॉल्ड रिटर्न्स कोई रिटर्न्स नही है, एक बार आपने अपनी सेल्स रजिस्टर डाल बना दी,  वो आपका एक रिटर्न हो गया , उस बाकि सबने जब अपनी अपनी सेल्स रजिस्टर बनाई तो ऑटोमेटिकली परचेस रजिस्टर लोगों की auto-populate होगी , वो दूसरा रिटर्न ऑटोमेटिक बनने वाला है किसी को मेहनत नही करनी है।

स्वाभाविक है, इतना बड़ा ट्रांसफॉर्मेशन , गेम चेंजिंग रिफॉर्म हो रहा है, तो थोड़े दिन तक ये समस्यायें आयेंगी सीखने समझने में थोड़ा समय लग सकता है, शुरु में मैचिंग करना पड़ेगा कि भई हमने 10 जगह से परचेस किया, हमारे परजेस रजिस्टर में ऑटोमेटिकली auto-populate हो कर साथ ही आये तो भई  तीन लोगों को फोन करना पड़ेगा कि शायद आपने भूल कर दी सेल्स रजिस्टर बनाने में मेरा invoice नही डाला, शायद आपने मेरा जीएसटीएन नंबर ठीक से नही डाला, जिसकी वजह से मुझे, मेरे उसमें पॉपुलेट नही हुआ है, तो सामने वाला व्यक्ति ठीक कर देगा सेल्स रजिस्टर, कोई ढीट हो, या चोरी करना चाहता हो, या अपना सेल्स रजिस्टर ठीक से ना दिखाना चाहता हो, तो अगर मैने गुड्स खरीदे हैं, मैं अपने आप परचेस रजिस्टर में डाल के उसको अपने परचेस रजिस्टर को कंपलीट कर सकता हूं, उससे सामने वाले के सिस्टम में वो एक सेल्स की तरह खड़ा हो जायेगा, एक प्रकार से भारत में जितने लाखों करोड़ों transaction हो रही हैं, वो सब एक डेटाबेस में आने से चोरी करना , नंबर दो का धंधा करना या एक अलग बही खाता रखना जिसमे हम इंकम टैक्स ना भरें, एक्साइज ना भरें, वैट ना भरें, ये लगभग असंभव सा होता जाता दिख रहा है मुझे, और शायद यही चोट है जिसके कारण कुछ लोग आंदोलन की बात करते हैं, कुछ लोग इसको oppose करते हैं, और कुछ लोग अनाप शनाप इसकी समस्याएं create करने की कोशिश करते है, स्वाभाविक है कि कुछ समस्याएं genuine भी आयेंगी, जीएसटी काउंसिल authorized body आज केंद्र सरकार या वित्त मंत्री अपने आप में कुछ नही कर सकते, जो होना है जीएसटी काउंसिल, हमने अपनी पूरी ऑथोरिटी जीएसटी काउंसिल के समक्ष रख दी है, अब आम सहमति से सभी राज्य सरकारें, उनके वित्त मंत्री, केंद्र सरकार की सहमति से आगे के निर्णय लिये जाते हैं, ऐसी परिस्थिति में जब कोई समस्या आयेगी तो हम बड़ी गंभीरता से, बड़ी संवेदना से उसको जीएसटी काउंसिल के समक्ष रख सकते हैं, सुधार हो सकता है जहां जहां जरूरी हो, अल्टीमेटली इतनी बड़ी चीज जब होने जा रही है तो स्वाभाविक है कि कुछ ना कुछ कम ज्यादा, अच्छा बुरा ध्यान में आयेगा ही चल के, हम अपने अपने व्यापार में देखें, आपके शो में देख लीजिये, at the end of the show, and i am sure कि debrief होता होगा, कि शो में ये कमी रह गयी , इस प्रकार से करते ज्यादा अच्छा होता, ये सवाल पूछते तो पीयूष गोयल कॉर्नर हो जाता, शायद कभी रह जाता होगा, हो सकता है ध्यान में आता होगा कि बड़ा लंबा हो गया, अभी अभी मैने वहां कोई एक नोट पढा, बिग बोर, हो सकता है कभी कभी कोई शो बोरिंग हो जाता है, उसको कैसे सुधारना, ये भी आप लोगों की debriefing में निकलता होगा, और उससे आप आगे का सुधार करते होंगे, वो कहते हैं ना कि change is the only constant in life, सुधार अगर करने की आवश्यकता नही हो, फिर तो आगे मंत्रियों की भी आवश्यकता नही रहेगी, अधिकारियों की भी नही रहेगी, अगर अपने आप से सब कुछ ही बढिया चल जाये, तो मैं इसको एक प्रकार से स्विमिंग की तरह देखता हूं, हम कितना भी तट पर खड़े रहें, कितनी बटर फ्लाई, स्ट्रोक  फलाना ढिमका फ्री जो भी होता है, मै बहुत स्विमिंग जानता नही हूं, इसलिये मुझे नही मालूम, लेकिन हम खड़े हुए कितनी भी  ट्रेनिंग प्रैक्टिस कर लें, तट पर खड़े हुए, हम स्विमिंग नही सीख सकते, पानी में एक बार तो कूदना ही पड़ेगा, और जब एक बार कूदेंगे, तो एक आध बार नाक में पानी भी जरूर जायेगा, लेकिन स्विमिंग का आनंद  जो लेते हैं लोग, और जो स्विमिंग में आनंद आता है बाद में, उसके लिये जो थोड़ी बहुत कठिनाई , शायद एक बार डर निकालने की जरूरत पड़ती है, एक बार पानी में कूदने की जरूरत पड़ती है, दो तीन दिन कोई सिखा दे तो मैं समझता हूं दो तीन दिन में ही आदमी एटलीस्ट बेसिक्स ऑफ स्विमिंग सीख लेता है, जिसके लिये हैंड होल्डिंग की व्यवस्था की गई है।

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट अकेले ने 200 सेंटर्स में मुफ्त में, निशुल्क लोगों को हेल्प करने में , हैंड होल्ड करने में, रजिस्टर कैसे करना, रिटर्न्स के लिये कैसे अपनी तैयारी करना, सेल्स रजिस्टर कैसे बनाना, और वास्तव में पहले के 10-10 12 रिटर्न्स के बदले एक सेल्स रजिस्टर हर महिने आपको बना के सब्मिट करनी है, दैट्स इट, everything else will gradually you will get used to the concept कि कैसे ऑटोपॉपुलेट हो के, एक आध दो गलतियां हों, वो ठीक कर के , ऑटोमेटिक आपके रिटर्न्स भरने की व्यवस्था शुरु हो जायेगी, एक्सपोर्टर को 7 दिन के अंदर 90% अपने टैक्सस का क्रेडिट मिल जायेगा, बाकि वेरिफिकेशन के बाद बाकि 10% मिल जायेगा। नंबर 2 का धंधा, इन्फॉर्मल इकॉनॉमी, जो अपने टैक्सस ईमानदारी से pay नही करते हैं, उनको जरूर समस्या आयेगी, मेरे पास उसका समाधान नही है, मैं समझता हूं एबीपी जैसा एक रिस्पांसिबल चैनल , इस रूम मे बैठे सभी रिस्पांसिबल लोग जरूर चाहेंगे कि आगे की व्यवस्था इस देश की ईमानदार हो , जिसके लिये प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और उनकी सरकार प्रतिबद्ध है, मैं समझता हूं देश की हर सरकार जिसको आप लोगों ने चुन के भेजा है , उन सबने अगर मिलके इसको सर्वसम्मति से पारित किया है तो जरूर इसमे देश हित होगा जरूर इसमे जनता का हित होगा, इसको हम एक नकारात्मक सोच के बदले पॉजिटिव सोच , एक पॉजिटिविटी के साथ ऑप्टिमिज्म के साथ, जब अपनायेंगे, तो समस्याओं का भी हल निकलेगा Afterall a problem is a problem, only until a solution is found, and there is no problem for which we cannot find a solution , तो मैं समझता हूं कि आपने जरूर जिक्र किया कि कई लोग चिंतित हैं, कई लोग इसको ओपोज कर रहे हैं, वास्तव में मैने कल भी एसेस किया कल परसों मैने कई मीटिंग्स की, व्यापारी मंडलों के साथ मुंबई में, जो देश का आर्थिक कैपिटल भी है , मुझे ऐसा किधर कोई ऑपोजिशन नही दिखा, कुछ लोगों को समझने में कठिनाई आई है, उसमे हम मदद कर रहे हैं, कुछ लोगों को शायद कुछ विषयों में हमें और गंभीरता से जीएसटी काउंसिल के साथ चर्चा करनी पड़ सकती है, एसोशियेसंस को, गवर्मेंट्स को, तो ये सिलसिला निरंतर  चलता रहेगा, लेकिन इसमे, अब मेरे को कल मुझको किसी ने एक वॉट्सऐप मैसेज दिया, और वॉट्सऐप पर तो बहुत सारी भ्रांतियां फैल रही हैं, उसपे हर एक पर आप विश्वास ना करें, कोई एक एडवोकेट मुंबई में, 10-11 मिनट का भाषण मैने फ्लाइट में पढा, सुना उनका,  I tell you ridiculous thing, मतलब एक आदमी जो एक्सपर्ट के नाते वहां जा रहा है , इतना ridiculous भाषण देना, इतनी गलत चीजें बताना, मैं तो हैरान हो गया, तो ऐसी परिस्थिति में आप प्लीज, ऑफिशियल सोर्सेज और अभी एडवर्टाइजमेंट में हम बहुत सारी इंफॉर्मेशन सबके समक्ष रख रहे हैं, तो मेहरबानी करके ऑफिशियल सोर्सेज और ऑफिशियल वेबसाइट पर FAQs हैं, प्रश्न उत्तर हैं, सब कुछ एवलेबल है, उसके ऊपर विश्वास करके आप आगे की अपनी जीएसटी की तैयारी करें,

 

बहुत बहुत धन्यवाद

 

Subscribe to Newsletter

Podcasts